UPSC Exam tips & motivational dose
Only for serious aspirant "आपके सपनों को हकीकत में बदलने का समय आ गया है। Buy ads 👉https://telega.io/c/UPSCEXAMTIPS #UPSC_strategy #UPSC_MOTIVATION #UPSC_study_plan 📚❤️👩💻 ✆ Contact & Promotions @Aspirant_bot
Больше📈 Аналитический обзор Telegram-канала UPSC Exam tips & motivational dose
Канал UPSC Exam tips & motivational dose (@upscexamtips) языкового сегмента Хинди является активным участником. Сейчас сообщество объединяет 24 744 подписчиков, занимая 8 022 место в категории Образование и 17 095 место в регионе Индия.
📊 Показатели аудитории и динамика
С момента создания невідомо проект демонстрирует стремительный рост, собрав аудиторию из 24 744 подписчиков.
Согласно последним данным от 30 июля, 2026, канал показывает стабильную активность. За последние 30 дней изменение числа участников составило -648, а за последние 24 часа — -16, при этом общий охват остаётся высоким.
- Статус верификации: Не верифицирован
- Уровень вовлечённости (ER): Средний показатель вовлечённости аудитории составляет 12.38%. В первые 24 часа после публикации контент обычно набирает 3.25% реакций от общего числа подписчиков.
- Охват публикаций: В среднем каждый пост получает 3 064 просмотров. В течение первых суток публикация набирает 804 просмотров.
- Реакции и взаимодействия: Аудитория активно поддерживает контент: среднее количество реакций на один пост — 48.
- Тематические интересы: Контент сосредоточен на ключевых темах, таких как जीवन, मेहनत, दुनिया, सफलता, समय.
📝 Описание и контентная политика
Автор описывает ресурс как площадку для выражения субъективного мнения:
“Only for serious aspirant
"आपके सपनों को हकीकत में बदलने का समय आ गया है।
Buy ads 👉https://telega.io/c/UPSCEXAMTIPS
#UPSC_strategy
#UPSC_MOTIVATION
#UPSC_study_plan
📚❤️👩💻
✆ Contact & Promotions
@Aspirant_bot”
Благодаря высокой частоте обновлений (последние данные получены 31 июля, 2026) канал поддерживает актуальность и высокий уровень охвата публикаций. Аналитика показывает, что аудитория активно взаимодействует с контентом, что делает его важной точкой влияния в категории Образование.
Загрузка данных...
| Дата | Привлечение подписчиков | Упоминания | Каналы | |
| 31 июля | 0 | |||
| 30 июля | 0 | |||
| 29 июля | 0 | |||
| 28 июля | 0 | |||
| 27 июля | 0 | |||
| 26 июля | 0 | |||
| 25 июля | 0 | |||
| 24 июля | 0 | |||
| 23 июля | 0 | |||
| 22 июля | 0 | |||
| 21 июля | 0 | |||
| 20 июля | 0 | |||
| 19 июля | 0 | |||
| 18 июля | 0 | |||
| 17 июля | 0 | |||
| 16 июля | 0 | |||
| 15 июля | 0 | |||
| 14 июля | 0 | |||
| 13 июля | 0 | |||
| 12 июля | 0 | |||
| 11 июля | 0 | |||
| 10 июля | 0 | |||
| 09 июля | 0 | |||
| 08 июля | 0 | |||
| 07 июля | 0 | |||
| 06 июля | 0 | |||
| 05 июля | 0 | |||
| 04 июля | 0 | |||
| 03 июля | 0 | |||
| 02 июля | 0 | |||
| 01 июля | +1 |
| 2 | "क्षमा करने से बीता हुआ कल तो नहीं बदलता, लेकिन आने वाला कल सुरक्षित और सुंदर हो जाता है।"
"गलती करना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन उस गलती को क्षमा कर देना ईश्वरीय गुण है।" | 1 111 |
| 3 | हर दिन सुबह उठकर, कहीं जाना हो या ना जाना हो, पर सुबह-सुबह अच्छे से तैयार हो जाने के के पीछे भी एक सकारात्मक मानसिकता काम करती है, जो आपको ये सोचने पर मजबूर करती है की आज क्या-क्या काम हैं जो किए जा सकते हैं। ये आदत ना सिर्फ़ आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है बल्कि आपके भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती है। तो अगर जीवन में बड़े बदलाव नहीं हो रहे हैं, तो ज़रा ये छोटे-छोटे बदलाव करके देखिए। 🥰 | 1 229 |
| 4 | 💸 Get paid to talk.
Yapple pays you real cash to your UPI for short conversations on your phone. Those recordings are used to train AI to understand Indian languages and dialects — and you get paid for every one. No skills, no investment.
✅ Earn from home, on your own time
✅ Talk about anything, in your own language
✅ Help build AI that actually understands your language
✅ Paid directly to UPI
🎁 Refer a friend → ₹300
Download now: https://tglink.io/cfb4f424122e95 | 1 235 |
| 5 | .
सुनो स्त्री...
तुम न आना किसी भी तरह के बहकावे में, ये दुनियां तुम्हें छल के सिवा कुछ भी नहीं देगी...! | 1 339 |
| 6 | Нет текста... | 1 432 |
| 7 | .. | 1 675 |
| 8 | अधिक IQ वाले लोग औसतन सामाजिक रूप से अधिक उदार (Social liberal) विचार रखते थे..
✨💯 | 1 993 |
| 9 | आधी जिंदगी तो लोग दूसरों की जिंदगी में झांकने में गुजार देते हैं,
और आधी अपनी जिंदगी और किस्मत को लेकर रोने में,
एक अच्छा विकल्प और है...
अपनी जिंदगी में ध्यान दो, खुद का विस्तार करो, जो है जितना है उतने का संतोष रखो और आगे उन्नत होने का प्रयास करो..! | 2 063 |
| 10 | Нет текста... | 2 392 |
| 11 | एक दिन... तुम्हारा selection हो जाएगा।
लोग तुम्हारा optional पूछेंगे, strategy पूछेंगे, booklist पूछेंगे।
लेकिन कोई ये नहीं पूछेगा - उस एक साल में, तुमने कितनी बार हार मानने का फैसला बदल दिया था।
और शायद... तुम्हारी असली strategy वही थी।"
✨ | 2 933 |
| 12 | ✅अतीत के पूर्वाग्रहों से परे: वर्तमान भारत की ज़मीनी हकीकत और जागरूक नागरिक का कर्तव्य
आज हमारे देश का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ निष्पक्ष वैचारिक मंथन की अत्यधिक आवश्यकता है। अक्सर समाज में यह प्रवृत्ति देखी जा रही है कि लोग वर्तमान सरकार की नीतियों और फैसलों का आँख बंद करके समर्थन कर रहे हैं। इस अंधसमर्थन के पीछे का सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि अतीत की सरकारें या कांग्रेस नीत शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल और भ्रष्ट थी। यह सच हो सकता है कि पुरानी व्यवस्थाओं में कमियां थीं और इसी जन-आक्रोश के कारण देश की जनता ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव को चुना। परंतु, लोकतंत्र का यह कतई नियम नहीं है कि हम अतीत की बुराइयों के डर से वर्तमान की गंभीर गलतियों और नाकामियों पर मौन धारण कर लें। एक जीवंत लोकतंत्र में किसी भी नागरिक को 'अतीत के बंधक' बनकर नहीं जीना चाहिए, बल्कि उसे वर्तमान की परिस्थितियों के आधार पर सरकार की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
यदि हम बिना किसी राजनीतिक चश्मे के आज के भारत का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करें, तो हमें सिक्के के दो पहलू स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। एक तरफ सरकार के विकासात्मक दावों की एक लंबी सूची है, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा (Infrastructure), हाईवे का जाल, डिजिटल क्रांति और वैश्विक मंच पर देश की मजबूत छवि शामिल है। इन प्रयासों की सराहना निश्चित रूप से होनी चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ, सिक्का पलटते ही एक बेहद चिंताजनक और डरावनी तस्वीर भी सामने आती है। आज देश के भीतर भ्रष्टाचार के नए और संस्थागत रूप देखने को मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्यों तक सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिसने देश के करोड़ों होनहार युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। इसके साथ ही, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराध, बलात्कार और समाज के कमजोर वर्गों पर हो रहे अन्याय व अत्याचार की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर खामियां हैं।
इस सामाजिक संकट के साथ-साथ देश की आर्थिक नीतियां भी आम जनता की कमर तोड़ रही हैं। आज भारत का युवा डिग्री हाथ में लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है, क्योंकि रोजगार के नए अवसर पैदा होने के बजाय लगातार कम हो रहे हैं। बेरोजगारी का आंकड़ा ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। इसके ऊपर से बेकाबू होती महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और राशन से लेकर बुनियादी आवश्यकताओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आम आदमी की जेब लगातार खाली होती जा रही है, जो सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को साफ दर्शाता है।
ऐसी स्थिति में, प्रत्येक नागरिक को खुद से यह सवाल पूछना होगा कि क्या केवल चमचमाती सड़कों और डिजिटल प्रगति से एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है, जहाँ देश का युवा और महिलाएं खुद को असुरक्षित, बेरोजगार और ठगा हुआ महसूस करें? कोई भी सरकार हो—चाहे वह भाजपा की हो या किसी अन्य दल की—सत्ता में आने के बाद यदि उसकी नीतियां आम जनता के लिए कष्टकारी साबित हो रही हैं, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना किसी भी प्रकार का देशद्रोह या विरोध नहीं, बल्कि परम नागरिक कर्तव्य है। लोकतंत्र की आत्मा सरकारों से सवाल पूछने में बसती है, उनका अंधानुकरण करने में नहीं। जब जनता अपनी चुनी हुई सरकार की कमियों पर पर्दा डालने लगती है, तो सत्ता निरंकुश होने लगती है।
अतः आज समय की मांग है कि हम राजनीतिक दलों के प्रति अपनी व्यक्तिगत निष्ठाओं से ऊपर उठें। विकास के आंकड़ों और विज्ञापनों की तुलना ज़मीनी स्तर पर हो रहे अपराध, पेपर लीक, रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार की कड़वी हकीकत से करें। सरकारें और राजनीतिक दल आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह देश, इसका सामाजिक ताना-बाना और हमारे युवाओं का भविष्य हमेशा रहेगा। यदि हम आज सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस नहीं जुटा पाए, तो हम आने वाली पीढ़ियों को एक कमजोर और दिशाहीन भारत सौंपेंगे। आइए, पूर्वाग्रहों को छोड़कर देशहित में जागरूक बनें और वर्तमान परिस्थितियों पर गहराई से विचार करें।
इस गंभीर विषय पर चर्चा की शुरुआत के लिए, हमें खुद से और अपने आसपास के लोगों से कुछ सीधे सवाल पूछने होंगे:
1. क्या पूर्ववर्ती सरकारों की नाकामियां आज की सरकार को हर मोर्चे पर क्लीन चिट देने का बहाना बन सकती हैं?
2. यदि पेपर लीक से युवाओं का भविष्य और अपराध से महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है, तो हम विकास की किस परिभाषा पर जश्न मना रहे हैं?
3. महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में क्या एक आम नागरिक के अधिकार और उसकी आवाज को दबाया नहीं जा रहा है?
4. एक सच्चे देशभक्त का कर्तव्य सरकार के हर फैसले पर ताली बजाना है या उसकी गलतियों पर सवाल उठाना? | 2 776 |
| 13 | किसी और से प्यार करने से पहले
भगवान से प्यार करो❤️ | 2 449 |
| 14 | ❇️देश और राजनीतिक सोच
जब हम किसी एक राजनीतिक दल से दिल से जुड़ जाते हैं, तो हमारी सोच निष्पक्ष नहीं रह पाती और हमारा दिमाग एक खास पैटर्न पर काम करने लगता है। दरअसल, इंसान का स्वभाव है कि वह जिस समूह या नेता को पसंद करता है, उसे अपनी पहचान का हिस्सा मान लेता है। इसके बाद हमारा दिमाग पुष्टिकरण पूर्वाग्रह (Confirmation Bias) का शिकार हो जाता है, जिसका मतलब है कि हम केवल वही खबरें और बातें देखना-सुनना पसंद करते हैं जो हमारी पसंदीदा पार्टी की तारीफ करती हों, भले ही वे सच न हों। वहीं दूसरी तरफ, विरोधी दल के अच्छे कामों को भी हमारा दिमाग तुरंत खारिज कर देता है क्योंकि उन्हें सही मानने से हमारी पुरानी धारणा को ठेस पहुंचती है। आज के दौर में सोशल मीडिया भी लगातार एक ही तरह के वीडियो दिखाकर हमारे विचारों के चारों तरफ एक अदृश्य दीवार बना देता है, जिससे व्यक्ति अपनी पार्टी की गलतियों का भी बचाव करने लगता है।
ऐसी कट्टर मानसिकता वाले लोगों की वजह से देश में सही-गलत का पैमाना बदल जाता है; समाज में आपसी भाईचारे की जगह नफरत और दूरियां बढ़ने लगती हैं। जब जनता काम और विकास के बजाय सिर्फ पार्टी देखकर वोट देने लगती है, तो सरकारें भी जनता के प्रति बेपरवाह हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि देश बुनियादी मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में पिछड़ जाता है और एक कमजोर तथा आपस में बंटा हुआ समाज बनता है। | 2 704 |
| 15 | 🍃 चन्द्रगुप्त ने पुछा 🍃
अगर किस्मत
पहेले ही लिखी जा चुकी है तो,
कोशिश कर के क्या मिलेगा?
🍃 चाणक्य ने कहा 🍃
क्या पता किस्मत में लिखा हो की,
कोशिश करने से ही मिलेगा! | 3 152 |
| 16 | रिसर्च से पता चला है पढ़ाई के बाद रिवीजन
ना करने की वजह से ज्यादातर लोगों
को पढ़ा हुआ केवल 60 % ही याद रहता है
📚📚🌺 | 3 719 |
| 17 | ☝️जीवन में सफ़लता पाने का एक राज है
जो कुछ करना है वक्त उसका आज है
‘आत्मविश्वास’ नही देखता कितने तूफ़ान है
तेज बारिश और तूफानों में उड़ने वाला बाज है ! 🧚♀✨
मोह माया तुम्हे अपनी तरफ बुलाएगी लेकिन ध्यान रखना तुम्हारी मेहनत ही मंजिल दिलाएगी। 🔥 | 4 467 |
| 18 | Do what brings you inner peace, not just applause.
.🌹 | 3 943 |
| 19 | शिव सब देख रहे हैं... संघर्ष भी, तकलीफ़ें भी, और मेरी खामोश कोशिशें भी। हर अंधेरी रात के बाद सवेरा ज़रूर होगा। 🕉️❤️☘️🔱📿
Telegram: @quotesdiariess | 4 182 |
| 20 | मुझे कोई मेरे जैसा मिला नहीं...
पता नहीं कोई मेरे जैसा था ही नहीं,
या फिर मैंने ही खुद को सबसे अलग कर लिया।
अब उम्मीद किसी से नहीं रखती, क्योंकि हर मुलाक़ात ने बस यही सिखाया कि हर कोई साथ चलने के लिए नहीं होता।
कुछ लोग भीड़ में भी अपने जैसे नहीं मिलते, और कुछ लोग अकेले रहकर भी खुद को संभालना सीख जाते हैं।
शायद मेरी कहानी भी उन्हीं में से एक है...! 🕊️🖤🥀
Telegram📩: @quotesdiariess | 60 |
