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दोस्तों नमस्कार🙏
मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आप सब का पुनः स्वागत है☺️ आज हम चर्चा करेंगे राजवाड़ा के बारे में-
राजवाड़ा:-
इंदौर नगर के मध्य में स्थित राजवाड़ा मालवा में मराठों के चरम उत्कर्ष काल की भव्य इमारत है। सन 1747 के आस पास होल्कर वंश के संस्थापक मल्हारराव होल्कर ने परिवार के निवास हेतु खान नदी के पश्चिमी किनारे के निकट इस महल का प्रारंभिक निर्माण करवाया।
यशवन्त राव होल्कर प्रथम जब होल्कर वंश के राजगद्दी पर आसीन हुए तो उन्होंने सिंधिया की राजधानी उज्जैन को लूट लिया प्रतिकार स्वरूप सिंधिया के सेनापति सरजेराव घाटगे ने इंदौर नगर पर आक्रमण कर इंदौर को लूटा एवं राजवाड़ा को जला दिया। जलाने के बाद इस लालच में कि मल्हारराव होल्कर का खजाना इसके अंदर होगा, राजवाड़े का अधिकांश भाग खुदवा दिया।
वर्ष 1984 में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सुरक्षा कर्मियों ( सतवंत सिंह एवं बियंत सिंह ) ने कर दी जिसके परिणामस्वरूप उभरे जुलूस में इस महल में आग लगी और महल के पीछे का रहवासी भाग पूरी तरह जलकर राख हो गया। प्रदेश का यह बसेरा ऊँचा एवं सुंदर दर्शनीय मराठा स्मारक है, जो युग पुरुष की भाँति 270 वर्षों से मालवा के इतिहास की यादों को अपने हृदय में संजोए है।
दोस्तों आशा करता हूं कि आपको राजवाड़ा पर प्रस्तुत की गई रोचक जानकारी पसंद आयी होगी👍😊
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आप सब का पुनः स्वागत है☺️ आज हम चर्चा करेंगे राजवाड़ा के बारे में-
राजवाड़ा:-
इंदौर नगर के मध्य में स्थित राजवाड़ा मालवा में मराठों के चरम उत्कर्ष काल की भव्य इमारत है। सन 1747 के आस पास होल्कर वंश के संस्थापक मल्हारराव होल्कर ने परिवार के निवास हेतु खान नदी के पश्चिमी किनारे के निकट इस महल का प्रारंभिक निर्माण करवाया।
यशवन्त राव होल्कर प्रथम जब होल्कर वंश के राजगद्दी पर आसीन हुए तो उन्होंने सिंधिया की राजधानी उज्जैन को लूट लिया प्रतिकार स्वरूप सिंधिया के सेनापति सरजेराव घाटगे ने इंदौर नगर पर आक्रमण कर इंदौर को लूटा एवं राजवाड़ा को जला दिया। जलाने के बाद इस लालच में कि मल्हारराव होल्कर का खजाना इसके अंदर होगा, राजवाड़े का अधिकांश भाग खुदवा दिया।
वर्ष 1984 में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सुरक्षा कर्मियों ( सतवंत सिंह एवं बियंत सिंह ) ने कर दी जिसके परिणामस्वरूप उभरे जुलूस में इस महल में आग लगी और महल के पीछे का रहवासी भाग पूरी तरह जलकर राख हो गया। प्रदेश का यह बसेरा ऊँचा एवं सुंदर दर्शनीय मराठा स्मारक है, जो युग पुरुष की भाँति 270 वर्षों से मालवा के इतिहास की यादों को अपने हृदय में संजोए है।
दोस्तों आशा करता हूं कि आपको राजवाड़ा पर प्रस्तुत की गई रोचक जानकारी पसंद आयी होगी👍😊
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आपका पुनः स्वागत है☺️ आज हम जानेंगे मालवा के सौंदर्य माण्डू के बारे में-
माण्डू:-
1. मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित माण्डू को माण्डवगढ़, मंडपदुर्ग, शादियाबाद एवं हर्ष नगर के नाम से जाना जाता है। विंध्य श्रृंखला में स्थित माण्डू का नाम संभवतः मांडवी नामक ऋषि के नाम पर पड़ा।
2. माण्डू को सिटी ऑफ ज्वॉय, आनन्दित शहर, महलों का शहर, प्रेम नगरी एवं मछली शहर के नाम से भी पहचान प्राप्त है।
3. यह स्थान बाजबहादुर एवं रानी रूपमती की प्रेम कथा के लिए विख्यात है। कहा जाता है कि भारत के संगीत सम्राट तानसेन को मालवा संगीत प्रतियोगिता में रानी रूपमती ने पराजित किया था।
पर्यटन:-
◆ जहाज महल
◆ हिंडोला महल
◆ रानी रूपमती का महल
◆ बाजबहादुर का महल
◆ अशर्फी महल
◆ दाई का महल
◆ नीलकंठ महल
◆ हाथी महल
◆ आलमगीर दरवाजा
◆ जहाँगीर दरवाजा
◆ दिल्ली दरवाजा
◆ रामपोल दरवाजा
◆ तारापुर दरवाजा
◆ रेवा कुण्ड
◆ होशंगशाह का मकबरा
◆ चम्पा बावड़ी
विशेष तथ्य:-
★ होशंगशाह का मकबरा भारत में संगमरमर द्वारा निर्मित प्रथम मकबरा है।
★ दिलावर खां गौरी के पुत्र होशंगशाह ने माण्डू को अपनी राजधानी बनाया था।
दोस्तों आशा करता हूं आपको माण्डू का सफर अच्छा लगा होगा😊👍
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आप सभी का पुनः स्वागत है। आज हम वार्तालाप करते हैं निमाड़ के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल महेश्वर के विषय में-
महेश्वर:-
1. महेश्वर मध्य प्रदेश के खरगौन जिले (पश्चिमी निमाड़) में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है।
2. प्राचीन काल में महेश्वर देवी अहिल्या एवं हैहय वंश की राजधानी था।
3. महेश्वर का पुरातन नाम महिष्मति था। जिसे हैहय वंश के राजा महिष्मत ने बसाया था।
4. मध्य प्रदेश सरकार ने इस खूबसूरत नगरी को पवित्र नगर घोषित किया है।
5. महेश्वर अपनी साड़ियों के लिये विश्व भर में प्रसिद्ध है।
पर्यटन:-
◆ सहस्त्रधारा जलप्रपात
◆ कालेश्वर मंदिर
◆ जालेश्वर मंदिर
◆ पढरीनाथ मंदिर
◆ अहिल्या संग्रहालय
◆ राजराजेश्वर मंदिर
◆ पेशवा घाट
◆ महेश्वर बांध
◆ भवानी माता का मंदिर
विशेष तथ्य:-
★ महेश्वर का उल्लेख रामायण एवं महाभारत में भी किया गया है। महेश्वर में ही सहस्त्रार्जुन ने रावण को पराजित किया था।
★ महेश्वर में नर्मदा नदी का आयतन (चौड़ाई) मध्य प्रदेश में सर्वाधिक है।
★ महेश्वर के समीप ही रावरखेड़ी नामक स्थान पर पेशवा बाजीराव की समाधि है।
★ अहिल्या घाट से सहस्त्रधारा तक की नौका यात्रा बेहद आकर्षक होती है। कहा जाता है कि राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने हाँथ से नर्मदा की जलधारा में अवरोध उत्पन्न करनें का प्रयास किया था, परंतु जल उंगलियों के मध्य से प्रवाहित होता रहा जिसके फलस्वरूप इस जलप्रपात का निर्माण हुआ।
★ यह स्थान देवी अहिल्या बाई होल्कर की कुशल शासन कला, धार्मिकता एवं बुद्धिमता का जीवंत गवाह है।
दोस्तों उम्मीद करता हूं आपको यह सफर मनमोहक लगा होगा, मुस्कुराते रहिये और घूमते रहिये।🥰
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
स्वागत है आप सभी का मध्य प्रदेश दर्शन की विशेष शृंखला में☺️ आज हम बात करते हैं ओंमकारेश्वर के बारे में-
ओंमकारेश्वर:-
1. नर्मदा नदी के तट पर स्थित यह स्थान खण्डवा जिले के मान्धाता या शिवपुरी द्वीप पर स्थित है।
2. मध्य प्रदेश सरकार ने ओंमकारेश्वर को पवित्र नगर घोषित किया है।
3. ओंमकारेश्वर में नर्मदा नदी दो शाखा में विभाजित होती है नर्मदा एवं कावेरी। इन्हीं धाराओं के मध्य 'ॐ' की आकृति विकसित हुई है।
4. भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ज्योतिर्लिंग ओंमकारेश्वर में ही स्थित है।
पर्यटन:-
◆ ओंमकारेश्वर मंदिर
◆ सिद्धनाथ मंदिर
◆ ममलेश्वर मंदिर
◆ हनुवंतिया टापू
◆ सैलानी टापू
◆ चौबीस अवतार मंदिर
◆ ओंमकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान
◆ शंकराचार्य की गुफाएं
◆ काजलरानी की गुफाएं
◆ गौरी सोमनाथ मंदिर
विशेष तथ्य:-
★ यह भारत का एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां एक ही स्थान पर 2 शिवलिंग है। एक का नाम है मलेश्वर एवं दूसरे का नाम है अमलेश्वर।
★ मान्धाता की स्थापना अयोध्या के राजा मान्धाता के पुत्र मुचकुंद ने की थी।
★ राजा मान्धाता के एक अन्य पुत्र पुरुकुत्स का विवाह रेवा(नर्मदा) के साथ हुआ था।
जाने का मार्ग:- भोपाल से खण्डवा के लिये कई रेल एवं बस सेवा उपलब्ध है।
दोस्तों आशा करता हूं आपकी यह यात्रा सुखदायी रही होगी🙂👍
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
आज चर्चा का विषय है इस्लाम धर्म-
इस्लाम का उत्कर्ष:-
इस्लाम शब्द का अर्थ है ' अल्लाह को समर्पण'। इस्लाम धर्म की शुरुआत छठी शताब्दी में अरब देश से हुई, इस्लाम के विचारों एवं सिद्धान्तों को आम जन तक पहुचाने का कार्य पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने किया इसी कारण उन्हें इस्लाम का वास्तविक प्रवर्तक कहा जाता है। हालांकि उनसे पहले 123999 पैगम्बर हुए थे। इस्लाम धर्म को मान्यता देने वाला सऊदी अरब विश्व का पहला देश बना।
हजरत मुहम्मद साहब का जीवन परिचयः-
जन्म- 570 ईस्वी (मक्का में)
बचपन का नाम- अल अमीन
पिता का नाम- अब्दुल्ला
माता का नाम - अमीना
चाचा का नाम- अबू तालिब
बचपन में माता पिता की मृत्यु के पश्चात मुहम्मद साहब का पालन पोषण इनके चाचा अबू तालिब ने किया। अबू तालिब पेशे से व्यापारी थे, मुहम्मद साहब के व्यक्तित्व पर इनके चाचा का ही प्रभाव था।
विवाह:-
25 वर्ष की अवस्था में 595 ईस्वी में मुहम्मद साहब का विवाह खादिजा नामक विधवा स्त्री से हुआ था जो 40 वर्ष की थीं, खादिजा पेशे से एक व्यापारी थी। इनकी पुत्री का नाम फातिमा एवं दामाद अली थे जो आगे चलकर इस्लाम धर्म के चौथे खलीफा बने।
ज्ञान प्राप्ति:-
40 वर्ष की अवस्था में 610 ईस्वी में मुहम्मद साहब को मक्का में स्थित हीरा नामक गुफा में ज्ञान प्राप्त हुआ था। मुहम्मद साहब इस्लाम के आखिरी संदेशवाहक माने जाते है जिन्हें अल्लाह ने अपने दूत जिब्रईल द्वारा कुरान का संदेश दिया था इस घटना को इतिहास में 'शक्ति की रात' कहा जाता है।
मुहम्मद साहब की मदीना यात्रा:-
ज्ञान प्राप्ति के पश्चात मुहम्मद साहब ने अपने उपदेशों से इस्लामी समाज में व्याप्त मूर्तिपूजा एवं बहुदेश्वरवाद का विरोध किया। उस समय अरब में अल्लाह के साथ उनकी 3 पुत्रियों की भी पूजा की जाती थी जिनके नाम थे- अल-लात,मनात एवं अल-उज्जा। मुहम्मद साहब ने एकेश्वरवाद पर बल दिया जिसे अरबी भाषा में 'तौहीद' कहते हैं।
मुहम्मद साहब के विचारों का समाज के कुछ समुदाय ने विरोध किया जिनमें कुरैश प्रमुख थे। मुहम्मद साहब का इनके साथ युद्ध भी हुआ।
622 ईस्वी में मुहम्मद साहब को मक्का छोड़कर मदीना जाना पड़ा मुस्लिम इस घटना को हिजरत कहते हैं। यहीं से इस्लामी कैलेंडर प्रारम्भ होता है जिसे हिजरी संवत (622ईस्वी) कहा जाता है।
मृत्यु (वफात):-
मुहम्मद साहब की मृत्यु 632 ईस्वी में हुई। तब तक सम्पूर्ण अरब प्रायद्वीप इस्लाम के सूत्र में बध चुका था। मुहम्मद साहब की मृत्यु के पश्चात इस्लाम धर्म 2 भागों में बट गया शिया एवं सुन्नी। मुहम्मद साहब की मृत्यु के बाद उनके विचारों को खलीफा ने आगे बढ़ाया।
प्रमुख खलीफा:-
1. अबू बक्र(प्रथम खलीफा)
2.अली(चौथे खलीफा)
3.अब्दुल मजीद द्वीतीय (अंतिम खलीफा)
नोट:- खलीफा का पद अंतिम रूप से 1924 में समाप्त हुआ था।
इस्लाम धर्म के 5 मूल कर्तव्य:-
1.नमाज- दिन में 5 बार।
2.रोजा- रमजान के महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना जल ग्रहण किये अल्लाह की इबादत।
3.कलमा-अल्लाह में विश्वास।
4.जकात- आय का 2.5% गरीबों में दान।
5. हज- जीवन में कम से कम एक बार मक्का की यात्रा।
दोस्तों मैंने इस्लाम धर्म पर विस्तार से चर्चा की आशा करता हूं आपको यह लेख अवश्य पसंद आयेगा। 👍🙏
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
स्वागत है आपका मध्य प्रदेश दर्शन की विशेष चर्चा पर। दोस्तों मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आज हम बात करते हैं प्रदेश की धार्मिक नगरी, देवी-देवताओं के शहर एवं सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन की-
उज्जैन:-
1. उज्जैन शहर क्षिप्रा नदी के तट पर बसा हुआ है। भगवानों की इस नगरी को देश के शरीर का नाभि(मणिपुर चक्र) कहा जाता है।
2. उज्जैन प्राचीन काल में अवन्ती महाजनपद की राजधानी था। इसी को अवंतिका, अमरावती, कुशास्थली, पुतिकल्पा, कुमुदवती आदि नामों से भी जाना जाता था।
3. उज्जैन में प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर सिंहस्थ पर्व आयोजित किया जाता है।
पर्यटन:-
● महाकालेश्वर मंदिर
● गोपाल मंदिर
● श्री काल भैरव मंदिर
● गढ़कालिका देवी का मंदिर
● श्री मंगलनाथ मंदिर
● भर्तृहरि गुफा
● संदीपनी आश्रम
● कालियादेह महल
● बड़ा गणेश मंदिर
● चौबीस खंभा मंदिर
● हरसिद्धि मंदिर
विशेष तथ्य:-
◆ उज्जैन को पृथ्वी का केंद्र बिंदु कहा जाता है।
◆ भगवान श्री कृष्ण एवं उनके मित्र सुदामा ने संदीपनी गुरु से उज्जैन में शिक्षा प्राप्त की थी।
◆ उज्जैन में स्थित जंतर-मंतर वैधशाला का निर्माण राजा जयसिंह ने करवाया था।
◆ भारत का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर है।
◆ उज्जैन को मध्य प्रदेश सरकार ने पवित्र नगर घोषित किया है।
◆ उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर से भूगोल की उत्पत्ति मानी जाती है।
◆ उज्जैन में ही भगवान शंकर ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था।
जाने का मार्ग:- उज्जैन जाने के लिए भोपाल से बस सेवा एवं रेल सेवा दोनों ही उपलब्ध है।
दोस्तों आशा करता हूं उज्जैन के संबंध में दी गई जानकारी आपको पसंद आयी होगी👍
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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दोस्तों नमस्कार🙏
स्वागत है आप सभी का मध्य प्रदेश दर्शन के विशेष वार्तालाप पर। दोस्तों मध्य प्रदेश दर्शन की इस श्रृंखला में आज शुरुआत करेंगे सबसे मनमोहक एवं विश्वविख्यात पर्यटन स्थल खजुराहो से-
खजुराहो:-
1. खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है जो अपने विशाल मंदिर एवं मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
2. खजुराहो प्राचीन समय में चेदी महाजनपद की राजधानी था संभवत: इसका प्राचीन नाम सूक्तिमती था।खजुराहो को खजूरपुरा एवं खजूरवाहक भी कहा जाता है।
3. खजुराहो विशेष रूप से अपने मंदिरो के लिए प्रसिद्ध है जिसका निर्माण चंदेल वंश के राजाओं ने 950-1050 ईस्वी के मध्य करवाया था।
4.खजुराहो में पहले कुल 85 मंदिर थे परंतु अब 22 ही शेष बचे हैं।
5.खजुराहो के मंदिरों को 3 श्रेणी में विभाजित किया गया है जो इस प्रकार है-
◆ पश्चिमी समूह: कंदरिया महादेव मंदिर
चौसठ योगिनी मंदिर
मतंगेश्वर मंदिर
चित्रगुप्त मंदिर
विश्वनाथ मंदिर
लक्षमण मंदिर ◆ पूर्वी समूह- पार्श्वनाथ मंदिर
आदिनाथ मंदिर
शांतिनाथ मंदिर
घटाई मंदिर
◆ दक्षिणी समूह- दूल्हादेव मंदिर
चतुर्भुज मंदिर
वैद्यनाथ मंदिर
मंदिरों का निर्माण:-
1. कंदरिया महादेव का मंदिर खजुराहो का सबसे भव्य मंदिर है इसकी तुलना उड़ीसा के लिंगराज मंदिर से की जाती है। इसका निर्माण चंदेल शासक गंड के पुत्र विद्याधर ने करवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
2.चतुर्भुज मंदिर एवं लक्ष्मण मंदिर का निर्माण चंदेल शासक यशोवर्मन ने करवाया।
3.विश्वनाथ एवं पार्श्वनाथ मंदिर का निर्माण राजा धंग ने करवाया था।
4.चित्रगुप्त मंदिर एवं जगदम्बा मंदिर का निर्माण राजा धंग के पुत्र गंड ने करवाया था।
5.मतंगेश्वर मंदिर का निर्माण राजा हर्षवर्मन ने करवाया था।
विशेष तथ्य:-
★खजुराहो विश्व में अपने भव्य एवं विशाल मंदिरों के लिये प्रसिद्ध है इसी कारण यूनेस्को ने इसे 1986 में अपनी विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया।
★चित्रगुप्त मंदिर खजुराहो का एकमात्र सूर्य मंदिर है।
★खजुराहो के मंदिर शैव, जैन एवं वैष्णव धर्म से संबंधित है।
★खजुराहो को शिल्प कला का तीर्थ कहा जाता है।
जाने का मार्ग:- खजुराहो पहुचने के लिए आप भोपाल से बस या महामना एक्सप्रेस ट्रेन से जा सकते हैं। जब भी आप लोग खजुराहो जाए साथ में मेरा भी टिकट अवश्य लें।😁
दोस्तों उम्मीद करता हूं खजुराहो के संबंध में प्रस्तुत की गई जानकारी आपको पसंद आयेगी👍
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍
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महर्षि व्यास, जिन्हें हम वेदव्यास के रूप में जानते हैं वे ऋषि पराशर एवं सत्यवती निषाद के पुत्र थे। भारत की ऋषि परम्परा में उनका विशिष्ट स्थान है उन्होंने ही चारो वेदों का संकलन कर एक ऐसी अनोखी प्रणाली विकसित की जिसके कारण वेदों को केवल शब्द एवं मात्रा तक ही नहीं अपितु स्वर के साथ भी संरक्षित किया जा सका, इसी कारण उन्हें कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास कहा जाता है।
दुनिया के सबसे विस्तृत ग्रंथ (महाभारत) के अलावा उन्होंने कई पुराणों की भी रचना की। इस प्रकार भारतीय संस्कृति और लोक जीवन को अपने ग्रंथो के माध्यम से एक नई दिशा दी। महर्षि व्यास जी के जन्मदिवस को हम भारतवासी आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं।🙏🙏
Gaurav Mishra
(GS Faculty)
