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Indore news इंदौर न्यूज़

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🍃🌾🌾 *12 JUNE 2026* 🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋 जब हमारी सोच, बोल और कर्म में समानता और सकारात्मकता आ जाती है तो खुशी हमें स्वतः ही प्राप्त होती है। *आज से हम* अपने सोच, बोल और कर्म में समानता और सकारात्मकता लायें... 💧 *TODAY'S INSPIRATION* 💧 Happiness is when, what you think, What you say, and what you do are in harmony and positive! *TODAY ONWARDS LET'S* make harmony and positivity among our thoughts, words and actions... 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃
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> “समय बदल सकता है, चैनल बदल सकते हैं, पर घर-परिवार की शिक्षा कभी पुरानी नहीं होती।” *👉शिक्षा* *दूरदर्शन का “घर-परिवार” सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं था, वह उस युग का संस्कार था — जिसने सिखाया कि परिवार का अर्थ साथ रहना नहीं, एक-दूसरे को समझना है।*
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*आज का प्रेरक प्रसंग* *🌹 घर-परिवार : एक नई सुबह 🌹* साल 1992 की बात है। शाम के सात बज रहे थे। सड़कों पर धीरे- धीरे सन्नाटा छाने लगा था।मोहल्ले के ज़्यादातर घरों में टीवी पर बस एक ही चैनल चलता था — *दूरदर्शन।* और हर रविवार को पड़ोसी एक-दूसरे से पहले ही पूछ लेते —“भाई, आज *घर- परिवार* देख रहे हो ना?” उसी मोहल्ले के एक छोटे से मकान में शारदा देवी अपने बेटे अमित और बहू रीमा के साथ रहती थीं। अमित शहर की एक छोटी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। सुबह से शाम तक काम में डूबा रहता, और घर लौटते ही मोबाइल तो नहीं, लेकिन अपने अख़बार में खो जाता। रीमा घर के सारे काम संभालती, पर दिल में कहीं न कहीं एक टीस रहती — घर में बातें कम, चुप्पियाँ ज़्यादा हैं। शारदा देवी को पुराने जमाने की आदतें थीं — सवेरे रेडियो, दोपहर में भजन,और शाम कोदूरदर्शन। वो हर रविवार शाम को पूरे परिवार को बुलाकर कहतीं, “चलो, सब बैठो, घर-परिवार शुरू होने वाला है। यह कोई नाटक नहीं, जीवन का आईना है।” अमित मुस्कुरा कर कह देता, “माँ, पुराना जमाना गया, अब कोई टीवी से संस्कार नहीं सीखता।” रीमा कुछ नहीं कहती, बस चुपचाप टीवी के पास बैठ जाती। उस दिन घर-परिवार में एक एपिसोड आया — “ *बूढ़े माँ-बाप का घर में स्थान*।” कहानी में दिखाया गया था कि कैसे एक बेटा अपनी माँ को वृद्धाश्रम भेज देता है और फिर खुद अकेलापन महसूस करता है। एपिसोड के अंत में सूत्रधार की आवाज़ गूँजी —“घर तभी घर होता है जब उसमें तीन पीढ़ियाँ एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील रहें। बड़ों की सीख, मंझलों का अनुभव और बच्चों का स्नेह — यही असली घर-परिवार है।” रीमा की आँखों में आँसू भर आए। उसे लगा जैसे ये कहानी उसकी ही सास-बहू की कहानी है। वो उठी और शारदा देवी के पास जाकर बोली,“माँ, आपने सही कहा था… घर-परिवार सच में जीवन का आईना है।” शारदा देवी मुस्कुराईं, “बेटा, इन कार्यक्रमों का यही तो मकसद है, हमें अपने रिश्तों की कीमत याद दिलाना।” उस दिन से रीमा ने ठान लिया कि घर में संवाद फिर से जीवित करेगी।अगले दिन उसने अमित से कहा,“आज रात हम सब साथ में खाना खाएँगे, टीवी नहीं चलेगा, बस बातें होंगी।” अमित ने हँसते हुए कहा, “इतनी बड़ी मीटिंग क्यों?” रीमा बोली, “क्योंकि घर मीटिंग से नहीं, साथ बैठने से बनता है।” धीरे-धीरे उस छोटे से घर में बदलाव आने लगा। रीमा ने पुरानी दूरदर्शन की कहानियों से प्रेरणा लेकर हर रविवार को “परिवार चर्चा” शुरू कर दी। वो एक कागज निकालती और पूछती —“आज सब बताओ, इस हफ्ते किस बात ने तुम्हें सबसे ज़्यादा खुश किया और किस बात ने दुखी?” शुरुआत में अमित झिझका, लेकिन माँ ने कहा,“मैं पहले बोलूँगी… मुझे खुशी है कि तुम दोनों अब एक-दूसरे से खुलकर बात करते हो।” धीरे-धीरे घर में हँसी लौट आई। रीमा ने पड़ोस के बच्चों को भी बुलाना शुरू किया। वो सब मिलकर पुराने घर-परिवार के एपिसोड देखते और उनसे सीख निकालते — *सहयोग, संवेदना, और परिवार का महत्व।* एक दिन अमित ने ऑफिस में मीटिंग के दौरान कहा,“हमारे घर में तो अब दूरदर्शन का ‘घर- परिवार’ ही असली टीचर बन गया है।” सहकर्मी हँसे, लेकिन अमित ने मुस्कुराकर कहा,“हँसो मत, उसी कार्यक्रम ने मुझे सिखाया कि घर केवल चार दीवारें नहीं, रिश्तों का जाल है, जिसे संभालना भी कला है।” कुछ महीनों बाद शारदा देवी बीमार पड़ गईं। रीमा रात-दिन उनकी सेवा में लगी रहती। डॉक्टर ने कहा, “इनका मनोबल बहुत मजबूत है, प्यार और साथ मिले तो जल्दी ठीक होंगी।” शारदा ने रीमा का हाथ पकड़ा, “बेटा, तूने मेरे जीवन के आखिरी पड़ाव में मुझे परिवार का असली अर्थ दिखाया।” रीमा की आँखों में आँसू आ गए। उसी रात उसने अमित से कहा, “हम नए जमाने में जी रहे हैं, लेकिन पुरानी परंपराओं की गरमाहट ही हमें जोड़ती है। दूरदर्शन का ‘घर-परिवार’ हमें वही गरमाहट याद दिलाता है।” कुछ महीनों बाद शारदा देवी नहीं रहीं।अंतिम संस्कार के बाद घर में गहरा सन्नाटा था।अमित ने धीरे से टीवी चालू किया। संयोग से उस दिन घर-परिवार का एपिसोड था — “ *माँ का आशीर्वाद*।” एपिसोड के अंत में वही सूत्रधार बोला — “माँ का जाना अंत नहीं होता, वो हर मुस्कान में, हर दुआ में जीवित रहती है। अगर परिवार में प्रेम है, तो माँ की आत्मा हमेशा साथ रहती है।” रीमा ने आँसू पोंछे और कहा, “देखो अमित, माँ हमें यह आखिरी संदेश देकर ही गई हैं — प्रेम सबसे बड़ा धर्म है।” अमित ने रीमा का हाथ थाम लिया। “हाँ रीमा, चलो हम भी हर रविवार माँ की याद में घर-परिवार ज़रूर देखेंगे। ताकि हमें हमेशा याद रहे कि परिवार का असली मतलब क्या है।” और सचमुच, उस घर में फिर वही पुराना माहौल लौट आया। हर रविवार को टी.वी. के सामने तीन कप चाय रखे जाते — दो अमित और रीमा के लिए, और तीसरा कप माँ की याद में। टी.वी. पर घर-परिवार चलता, और दोनों की आँखों में नम मुस्कान होती। कहते हैं ना —
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🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩 🌤️ *दिनांक - 12 जून 2026* 🌤️ *दिन - शुक्रवार* 🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)* 🌤️ *शक संवत -1948* 🌤️ *अयन - उत्तरायण* 🌤️ *ऋतु - ग्रीष्म ॠतु* 🌤️ *मास - अधिक ज्येष्ठ* 🌤️ *पक्ष - कृष्ण* 🌤️ *तिथि - द्वादशी शाम 7:36 तक तत्पश्चात त्रयोदशी* 🌤️ *नक्षत्र - अश्विनी सुबह 06:28 तक तत्पश्चात भरणी* 🌤️ *योग - अतिगण्ड रात्रि 09:26 तक तत्पश्चात सुकर्मा* 🌤️*राहुकाल - सुबह 10:58 से दोपहर 12:39 तक* 🌤️ *सूर्योदय - 05:57* 🌤️ *सूर्यास्त - 07:19* 👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण- प्रदोष व्रत* 💥*विशेष- द्वादशी को पूतिका (पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि* 🌷 👉🏻 *13 जून 2026 शनिवार को मासिक शिवरात्रि है।* 🙏🏻 *हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी* 🌷 *1).ॐ शिवाय नम:* 🌷 *2).ॐ सर्वात्मने नम:* 🌷 *3).ॐ त्रिनेत्राय नम:* 🌷 *4).ॐ हराय नम:* 🌷 *5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम:* 🌷 *6).ॐ श्रीकंठाय नम:* 🌷 *7).ॐ सद्योजाताय नम:* 🌷 *8).ॐ वामदेवाय नम:* 🌷 *9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम:* 🌷 *10).ॐ तत्पुरुषाय नम:* 🌷 *11).ॐ ईशानाय नम:* 🌷 *12).ॐ अनंतधर्माय नम:* 🌷 *13).ॐ ज्ञानभूताय नम:* 🌷 *14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:* 🌷 *15).ॐ प्रधानाय नम:* 🌷 *16).ॐ व्योमात्मने नम:* 🌷 *17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:* 🙏🏻 *आर्थिक परेशानी से बचने हेतु* 🙏🏻 👉🏻 *हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें ।* 👉🏻 *और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी।* 🙏🏻 *प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।*
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