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कपिल सांख्ययोग अनुसन्धान केन्द्र

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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 4477 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs

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आजकल गरबा के नाम पर अंग प्रदर्शन हो रहा है एक साथ लड़के लड़कियां जहां नाच करेंगे वहां व्यभिचार तो होगा ही । गरबा आदि वैदिक परंपरा नहीं है । इसके स्थान पर वैदिक उपदेश प्रवचन भजन कराने से कल्याण होगा । पाखंड से बचें सत्य को धारण करें सत्यार्थ प्रकाश पढ़ें। ✍✍VEDIC Yug official
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 5677 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @Kapil_Saankhya_Anusandhan_kendra
आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @Kapil_Saankhya_Anusandhan_kendra
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आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @Kapil_Saankhya_Anusandhan_kendra
आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @Kapil_Saankhya_Anusandhan_kendra
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आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @kapil
आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें। @kapil
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 5811 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 7979 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 3528 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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​दो वर्ष पूर्व नवरात्रि के अवसर पर मैंने नित्यप्रति अग्निहोत्र करने का संकल्प लिया था। आज उस संकल्प को निभाते हुए निर्बाध रूप
​दो वर्ष पूर्व नवरात्रि के अवसर पर मैंने नित्यप्रति अग्निहोत्र करने का संकल्प लिया था। आज उस संकल्प को निभाते हुए निर्बाध रूप से पूरे दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं। जब हृदय में सच्ची श्रद्धा हो और परमपिता परमेश्वर की अहेतुकी कृपा साथ हो, तो हर असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है। इन दो वर्षों की निरंतरता ने मुझे प्रत्यक्ष अनुभव कराया कि अग्निहोत्र केवल अग्नि में कुछ आहुतियाँ देना मात्र नहीं है, वरन् अपने भीतर की अशुद्धियों, विकारों, अहंकार और नकारात्मकता को भी उस पावन अग्नि में समर्पित करने का एक आध्यात्मिक साधन है। इस साधना ने जीवन में गहरा अनुशासन, मानसिक शुद्धि, संतोष और एक असीम आत्मिक शान्ति का अमूल्य प्रसाद प्रदान किया है। इसके प्रभाव से न केवल आंतरिक शांति मिली है, बल्कि घर का पूरा वातावरण भी अधिक सकारात्मक और ऊर्जावान महसूस होता है। ​यह सब उस परमेश्वर की अनन्त करुणा और अनुग्रह का ही प्रत्यक्ष परिणाम है, जिनकी शक्ति से यह यात्रा अनवरत आगे बढ़ रही है। ​✍️ केशरीनन्दन
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 7563 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 8911 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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यज्ञों में मांसाहार एवं पशुबलि निषेध - भगवान मनु नाकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्पद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वर्यस्तस्म
यज्ञों में मांसाहार एवं पशुबलि निषेध - भगवान मनु नाकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्पद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वर्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत् ॥ विस्तार में जानने के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें 👇 https://youtu.be/QgU_7sj-_E8?si=07yK5qXPL8Epz3bG
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Netaji aur Veerangnaye
Netaji aur Veerangnaye
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 3049 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 5843 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 9356 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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📣 ज्ञान और दर्शन के प्रेमियों के लिए स्वर्णिम अवसर: विशेष प्री-बुकिंग प्रारंभ! 📣 प्रिय स्वाध्याय प्रेमियों एवं दर्शनशास्त्र
📣 ज्ञान और दर्शन के प्रेमियों के लिए स्वर्णिम अवसर: विशेष प्री-बुकिंग प्रारंभ! 📣 प्रिय स्वाध्याय प्रेमियों एवं दर्शनशास्त्र के जिज्ञासुओं, अत्यंत हर्ष के साथ हम आपको सूचित कर रहे हैं कि वर्षों की तपस्या, शोध और खोज के बाद ज्ञान-विज्ञान एवं वैदिक दर्शन के कुछ दुर्लभ और अनमोल ग्रंथ पुनः प्रकाशित होने जा रहे हैं। 🔖इन ऐतिहासिक ग्रंथों को पुनः पाठकों एवं शोधकर्ताओं तक पहुँचाने का यह एक विशेष प्रयास है। आइए, अपनी ज्ञान-यात्रा को इन अमूल्य ग्रंथों के साथ और भी समृद्ध बनाएं। 📚 १. पण्डित आर्यमुनि कृत — षड्दर्शनादर्श यह कोई साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि छहों दर्शनों के अद्भुत समवाय (समन्वय) को प्रस्तुत करने वाला एक दुर्लभ और बहुमूल्य ग्रंथ है। लगभग 4–5 वर्षों के गहन खोज एवं अथक परिश्रम के बाद पण्डित आर्यमुनि कृत ‘षड्दर्शनादर्श’ में निहित इस दुर्लभ ज्ञान को पुनः पुस्तक रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस संस्करण की केवल 112 प्रतियां ही मुद्रित की जा रही हैं। दर्शन के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं दर्शन-प्रेमियों के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति है। 📚 २. महर्षि दयानन्द कृत — पञ्चमहायज्ञविधिः (संध्या) इसके साथ ही महर्षि दयानन्द कृत "पञ्चमहायज्ञविधिः" के अत्यंत दुर्लभ ऐतिहासिक संस्करण भी पुनः प्रकाशित किए जा रहे हैं। 📌 प्रथम संस्करण — सन् 1873 लगभग डेढ़ शताब्दी के लंबे अंतराल के बाद सन् 1873 के प्रथम संस्करण को पुनः उपलब्ध कराया जा रहा है। इस दुर्लभ संस्करण की एक विशेषता यह है कि इसमें लक्ष्मी सूक्त की व्याख्या भी सम्मिलित है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है। 📌 द्वितीय संस्करण — सन् 1877 प्रथम संस्करण के पश्चात प्रकाशित सन् 1877 के द्वितीय संस्करण को भी पुनः उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार पाठकों एवं शोधकर्ताओं को संध्या के प्रथम एवं द्वितीय दोनों ऐतिहासिक संस्करणों का अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। ✨ दुर्लभ ग्रंथों का यह पुनर्प्रकाशन केवल पुस्तकों का प्रकाशन नहीं, बल्कि हमारी ज्ञान-परंपरा के दुर्लभ साहित्य को पुनः जनसुलभ बनाने का एक प्रयास है। 🤝 ज्ञान-प्रकाश के इस कार्य में आपका सहयोग इन दुर्लभ ग्रंथों के पुनर्प्रकाशन, मुद्रण एवं अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचाने के इस प्रयास में जो सज्जन स्वेच्छानुसार आर्थिक सहयोग (दान) करना चाहते हैं, वे भी इस ज्ञान-यज्ञ में अपना योगदान दे सकते हैं। आपका प्रत्येक सहयोग इस दुर्लभ साहित्य के संरक्षण, पुनर्प्रकाशन और प्रसार में सहायक होगा। दान की राशि छोटी या बड़ी नहीं—ज्ञान के इस कार्य के प्रति आपकी भावना और सहयोग ही महत्वपूर्ण है। 📚 सीमित प्रतियां • विशेष प्री-बुकिंग • दुर्लभ ऐतिहासिक संस्करण इन ग्रंथों की प्रतियां अत्यंत सीमित संख्या में उपलब्ध हैं और इनके लिए विशेष प्री-बुकिंग प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही, इच्छुक सहयोगी इस पुनर्प्रकाशन कार्य में दान द्वारा भी सहयोग कर सकते हैं। 📩 अपनी प्रति सुरक्षित करने अथवा सहयोग/दान के लिए संपर्क करें। ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को अपने व्यक्तिगत पुस्तक-संग्रह, अध्ययन एवं शोध का हिस्सा बनाएं। 📞संपर्क: ⚡️केशरीनन्दन — @victorvondoom19 (Telegram) ⚡️सत्यजीत — @Angira98 (Telegram) Whatsapp : +91 85729 17346
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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 6102 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs
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ved sidhhant nirany5.pdf
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