637
مشترکین
-124 ساعت
-37 روز
-1530 روز
آرشیو پست ها
कुछ बातें किताबों में नहीं मिलतीं, कुछ एहसास वक्त के साथ जुड़ते जाते हैं। मैं अक्सर सफर पर निकलता हूं, नई जगहें देखता हूं, सोचता हूं, महसूस करता हूं, और कभी-कभी ये सब शब्दों में बदल जाते हैं।
कभी कोई मंज़र ठहर जाता है, तो कभी कोई ख़्याल अधूरा रह जाता है। कुछ लम्हे तस्वीरों में कैद हो जाते हैं, तो कुछ बस यादों में रह जाते हैं। सफर सिर्फ जगहों का नहीं होता, कुछ सफर ख्यालों का भी होता है, जो ज़हन में चलते रहते हैं, कभी सवाल बनकर, तो कभी जवाब बनकर।
Being busy is nice you might be tired at the end of the day but atleast you were not sad all day.
बचपन साथ रखियेगा ज़िंदगी के शाम में ,
उम्र महसूस ही नहीं होगी सफ़र के थकान में ।।
When I Feel Lost…
Whenever life feels disappointing, I find comfort in revisiting my past. I look at my old pictures, reliving the moments that once brought me joy, my travels, my good memories, and the experiences that shaped me. Sometimes, I scroll through my social media archives, reading my old posts, seeing how far I’ve come.
At times, I dive into research, exploring new topics that spark my curiosity. Other times, I contribute to my educational channels, sharing knowledge with those who need it. I keep myself engaged, finding purpose in learning and creating.
And when loneliness creeps in, I turn to words and melodies. I read, I listen to music, I immerse myself in thoughts, because in these little things, I find pieces of myself again.
मेरी कोई बहन नहीं है, और शायद अपने जीवन में इससे ज़्यादा किसी चीज़ की कमी मैंने कभी महसूस नहीं की।
जब माँ बीमार होती है, तो घर की हर ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर आ जाती है। वो सारे छोटे-बड़े काम, जो कभी माँ की ममता से सहज लगते थे, खाना बनाना, झाड़ू देना, कपड़े धोना, घर को संभालना, सबकुछ अकेले करना पड़ता है। हर बार यही लगता है कि काश, कोई होता जो साथ खड़ा रहता, जो कहता, "तू थक गया है, आज मैं संभाल लूँगी।
बहन सिर्फ एक रिश्ता नहीं होती, वो घर का वो हिस्सा होती है जो कभी टूटने नहीं देती। जब कोई नहीं होता, तब भी वो होती है, आपका हाल पूछने, आपकी थकान बाँटने, कभी हँसाने, तो कभी डाँटकर संभालने के लिए। लेकिन जब वो नहीं होती, तब ये एहसास और गहरा हो जाता है कि जिंदगी में कोई ऐसी कमी है, जिसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है।
माँ की परछाईं होती है बहन, और जब वो नहीं होती, तो कई बार आप खुद को दुनिया की भीड़ में बिल्कुल अकेला पाते हैं।
मुझे नहीं पता कि किसी के लिए उसकी बहन का होना कैसा एहसास देता होगा, लेकिन मैं इतना ज़रूर जानता हूँ कि मेरे लिए उसका न होना एक ऐसा अधूरापन है, जिसे मैंने अपने जीवन में शायद ही किसी और चीज़ से ज्यादा महसूस किया है।
These comments makes my day! ❤️
Read post: https://t.me/Magadh_University_Bodhgaya/4581
Repost from ...
जब एक बेटी जन्म लेती है, तो उसके सपनों में भी क़ैद की लकीरें खींच दी जाती हैं। समाज उसे सिखाता है कि उसकी उड़ान की एक सीमा होगी, उसके कदमों पर पहरे होंगे, और उसकी आवाज़ को अक्सर खामोशी में बदल दिया जाएगा। सबसे दुखद बात यह है कि कई बार यह सीमाएँ किसी और ने नहीं, बल्कि उसी की अपनी जैसी किसी और महिला ने खींची होती हैं, जो कभी खुद भी इन बेड़ियों में बंधी थी।
लेकिन अब वक़्त आ गया है कि इस सिलसिले को तोड़ा जाए। आप, जो आज संघर्ष कर रही हैं, कल किसी की माँ, बहन, या मार्गदर्शक बनेंगी। जब आपकी बारी आएगी, जब आपको किसी और की ज़िंदगी को आकार देने का मौका मिलेगा, तब आपको यह याद रखना होगा कि आप वही अन्याय न दोहराएँ जो आपके साथ हुआ था।
आप खुद से एक वादा करें, आपकी बेटी के सपने सिर्फ उसके होंगे, उसकी आज़ादी उसकी अपनी होगी, और उसकी काबिलियत पर कोई परछाईं नहीं पड़ेगी। आप उसकी राह की रोशनी बनेंगी, अंधेरा नहीं। आप उसकी ताक़त बनेंगी, बंधन नहीं। आप उसे उड़ना सिखाएँगी, पर उसकी उड़ान नहीं रोकेंगी।
क्योंकि अगर आप यह नहीं करेंगी, तो आपके संघर्ष का कोई मतलब नहीं रहेगा।
اکنون در دسترس! پژوهش تلگرام ۲۰۲۵ — مهمترین بینشهای سال 
