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UPSC CSE Topper Hindi medium

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यह चैनल यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है कि विद्यार्थी, सामग्री की उपलब्धता के मामले में पीछे न रहें और अंग्रेजी माध्यम के जैसा ही कंटेंट छात्रों को उपलब्ध हो। Main channel @csetopper Email for queries csetopperhindi@gmail.com

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📈 تحلیل کانال تلگرام UPSC CSE Topper Hindi medium

کانال UPSC CSE Topper Hindi medium (@csetopperhindi) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 15 685 مشترک است و جایگاه 12 718 را در دسته آموزش و رتبه 26 339 را در منطقه الهند دارد.

📊 شاخص‌های مخاطب و پویایی

از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 15 685 مشترک جذب کرده است.

بر اساس آخرین داده‌ها در تاریخ 28 ژوئیه, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر 11 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر -3 بوده و همچنان دسترسی گسترده‌ای حفظ شده است.

  • وضعیت تأیید: تأیید نشده
  • نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 33.78% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 10.21% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب می‌کند.
  • دسترسی پست‌ها: هر پست به طور میانگین 5 298 بازدید دریافت می‌کند. در اولین روز معمولاً 1 601 بازدید جمع‌آوری می‌شود.
  • واکنش‌ها و تعامل: مخاطبان به‌طور فعال حمایت می‌کنند؛ میانگین واکنش به هر پست 11 است.
  • علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند प्रतिशत, कृषि, भारत, उत्तर, ethic تمرکز دارد.

📝 توضیح و سیاست محتوایی

نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاه‌های شخصی توصیف می‌کند:
यह चैनल यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है कि विद्यार्थी, सामग्री की उपलब्धता के मामले में पीछे न रहें और अंग्रेजी माध्यम के जैसा ही कंटेंट छात्रों को उपलब्ध हो। Main channel @csetopper Email for queries csetopperhindi@gmail.com

به لطف به‌روزرسانی‌های پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 29 ژوئیه, 2026)، کانال همواره به‌روز و دارای دسترسی بالاست. تحلیل‌ها نشان می‌دهد مخاطبان به‌طور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کرده‌اند.

15 685
مشترکین
-324 ساعت
+67 روز
+1130 روز
آرشیو پست ها
Photo from Umesh Bijarniya
Photo from Umesh Bijarniya

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GS 1 DAY 12 FLT Questions (1).pdf1.33 MB

Key words को ध्यान से पढ़ें .... प्रीलिम्स में question हमेशा key words से ही बनता है और मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखने key words का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए जिसमें कम शब्दों में अधिक कंटेंट लिखा जा सके।

प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (UPSC और PCS) दोनों के लिए अतिमहत्वपूर्ण है..पढ़ने में थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन लाभदायक रहेगा। 🙏🙏

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GS 1 DAY 11 Questions (1).pdf3.21 KB

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GS 1 DAY 10 Questions_ (1).pdf2.57 KB

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GS 1 DAY 9 Questions (1).pdf3.11 KB

राजस्थान PCS (RAS-2026) की तैयारी करने वाले aspirants मेंटरशिप के लिए iMPACT के टेलीग्राम चैनल 👇👇 को ज्वॉइन कर सकते हैं। ht
राजस्थान PCS (RAS-2026) की तैयारी करने वाले aspirants मेंटरशिप के लिए iMPACT के टेलीग्राम चैनल 👇👇 को ज्वॉइन कर सकते हैं। https://t.me/+2eji7kATC_5mMzJl

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सुजलाम भारत - जल आपूर्ति डेटा की जानकारी के लिए
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Important project 👍👍
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GS 1 DAY 8 Questions (1)_241218_003307.pdf6.46 KB

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GS 1 DAY 7 Questions (1)_241214_210156.pdf7.67 KB

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GS 1 DAY 6 Questions (1)_241211_235533.pdf6.91 KB

गुप्त राजवंश की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्दावली और अधिकारियों के पदनाम प्रशासनिक इकाइयाँ (Administrative Divisions) 👉 राज्य/राष्ट्र/देश/मंडल/अवनी:- संपूर्ण साम्राज्य के लिए प्रयुक्त शब्द। 👉 भुक्ति (Bhukti) या देश: सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाई, जिसे प्रांत (Province) कहा जाता था। 👉 विषय (Vishaya) या प्रदेश: भुक्ति को ज़िलों (Districts) में विभाजित किया गया था, जिन्हें विषय या प्रदेश कहते थे। 👉 वीथी (Vithi): विषय के भीतर एक छोटी प्रशासनिक इकाई, जिसमें कई गाँव शामिल होते थे। 👉 ग्राम (Gram): प्रशासन की सबसे छोटी इकाई, यानी गाँव। 👉 पेठक (Pethaka) और सान्तक (Santaka): गाँवों के समूह के लिए प्रयुक्त अन्य शब्द। 🔥 प्रमुख अधिकारी (Key Officials) प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर निम्नलिखित अधिकारी नियुक्त किए जाते थे 👇👇 👉 महामंत्री :- राजा को प्रशासन में सलाह देने वाला मुख्य मंत्री। 👉 सेनापति/महाबलाधिकृत :- सेना का कमांडर-इन-चीफ(Commander-in-chief) 👉 उपरिक (Uparika) :- प्रांतों (भुक्ति) का राज्यपाल (Governor), जिसे राजा सीधे नियुक्त करता था। 👉 कुमारामात्य (Kumaramatyas):- प्रांतीय परिषदों के प्रमुख और राजा तथा प्रांतों के बीच संपर्क अधिकारी। 👉 विषयपति (Vishayapati) या आयुक्त:- ज़िले (विषय) का प्रमुख या जिला अधिकारी। 👉 नगरश्रेष्ठिन (Nagarashreshthin) :- नगर निगम (City Corporation) का अध्यक्ष। 👉 सार्थवाह (Sarthavaha) :- व्यापारी समुदायों का प्रतिनिधि। 👉प्रथमकुलिक (Prathamakulika) :-शिल्पकार समुदायों (कारीगरों) का प्रतिनिधि। 👉 प्रथमकायस्थ (Prathamakayastha) :- सरकारी अधिकारियों के समुदाय का प्रतिनिधि/मुख्य लेखक। 👉 पुस्तपाल (Pustapala):- ज़िला स्तर पर रिकॉर्ड/दस्तावेज रखने वाला अधिकारी। 👉 ग्रामिक/ग्रामअध्यक्ष/ग्रामपति :- गाँव का मुखिया या प्रधान। 👉 महात्तर (Mahattara):- ग्राम सभा के सदस्य या गाँव के बुजुर्ग। 👉 सन्धिविग्रहिक (Sandhivigrahika):- युद्ध और शांति (विदेश मामलों) का मंत्री। 👉 ध्रुवाधिकरणिक (Dhruvadhikaranika):- भू-राजस्व (Land Revenue) अधिकारी। 👉 शौल्किक (Saulkika) :- सीमा शुल्क और टोल (Customs and Tolls) एकत्र करने वाला। 👉 भंडागाराधिकृत (Bhandagaradhikrita):- कोषाध्यक्ष (Treasurer)। ##अन्य शब्दावली 🔥 अधिकरण (Adhikarana): एक विभाग या परिषद जो प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर सहायता करती थी। 🔥 उद्रंग (Udranga): संभवतः एक प्रकार का कर। 🔥 विष्टिका (Vishtika): संभवतः बेगार या जबरन श्रम (Forced Labour)। 🔥 अग्रहार (Agrahara): देवताओं या ब्राह्मणों को समर्पित बस्तियाँ/भूमि अनुदान।

नव वर्ष 2026 की शुभकामनाएं 🎉🎉 नया साल - नई शुरुआत - नई सफलता 🎉🎉

पंचशील :- बौद्ध धर्म की मूल आचार संहिता है जिसको थेरवाद बौद्ध उपासक एवं उपासिकाओं के लिये पालन करना आवश्यक माना गया है। ⚡️ भगवान बुद्ध द्वारा अपने अनुयायिओं को दिया गया है यह पंचशील।👇👇 1. हिंसा न करना, 2. चोरी न करना, 3. व्यभिचार न करना, 4. झूठ न बोलना, 5. नशा न करना। बौद्ध धर्म में आम आदमी भी बुद्ध बन सकता है उसे बस दस पारमिताएं पूरी करनी पड़ती हैं बौद्ध धर्म की मान्यता है कि बुद्ध बनने की इच्छा रखने वाले को दस पारमिताएं पूरी करनी पड़ती हैं। ये पारमिताएं हैं – दान, शील, नैष्क्रम्य, प्रज्ञा, वीर्य, शांति, सत्य, अधिष्ठान, मैत्री और उपेक्षा. जब कोई व्यक्ति ‘दान’ पारमिता को आरंभ करता हुआ ‘उपेक्षा’ की पूर्ति तक पहुंचता है, तब तक वह बोधिसत्व रहता है। लेकिन इन सबको पूरा करने के बाद वह बुद्ध बन जाता है. 👉 पारमिताएं नैतिक मूल्य होती हैं, जिनका अनुशीलन बुद्धत्व की ओर ले जाता है. दान पारमिता – दान का अर्थ उदारतापूर्ण देना होता है। त्याग को भी दान माना जाता है। बौद्ध धर्म में भोजन दान, वस्त्र दान व नेत्र दान की प्रथा है। दान बुद्धत्व की पहली सीढ़ी है। इसके पीछे कर्तव्य की भावना होनी चाहिए। प्रशंसा व यश के लिए दिया गया दान, दान नहीं होता। शील पारमिता – सब प्रकार के शारीरिक, वाचिक, मानसिक और सब शुभ व नैतिक कर्म, शील के अंतर्गत आते हैं। मनुष्य को हत्या चोरी व व्यभिचार, झूठ व बकवास शराब तथा मादक द्रव्यों से दूर रहना चाहिए। बुद्ध ने इनमें भिक्खुओं के लिए तीन शील और जोड़ दिए हैं – कुसमय भोजन नहीं करना, गद्देदार आसन पर नहीं सोना और नाच-गाना तथा माला-सुगंध आदि के प्रयोग से बचना। नैष्क्रम्य पारमिता : इसका अर्थ महान त्याग होता है। बोधिसत्व राज्य व अन्य भौतिक भोगों को तिनके के समान त्याग देते हैं। चूलपुत्र सोन के प्रसंग में आया है कि उसने महाराज्य के प्राप्त होने पर भी थूक के समान उसे छोड़ दिया। प्रज्ञा पारमिता -प्रज्ञा का अर्थ होता है जानना, नीर-क्षीर विवेक की बुद्धि, सत्य का ज्ञान. जैसी वस्तु है, उसे उसी प्रकार की देखना प्रज्ञा होती है। आधुनिक भाषा में वैज्ञानिक दृष्टि व तर्क पर आधारित ज्ञान होता है। बौद्ध धर्म में प्रज्ञा, शील, समाधि ही बुद्धत्व की प्राप्ति के महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। वीर्य पारमिता : इसका अर्थ है कि आलस्यहीन होकर भीतरी शक्तियों को पूरी तरह जाग्रत करके लोक-कल्याण, अध्यात्म-साधना व धर्म के मार्ग में अधिक से अधिक उद्यम करना। ऐसे उद्यम के बिना मनुष्य किसी भी दिशा में उन्नति एवं विकास नहीं कर सकता। क्षांति पारमिता : क्षांति का अर्थ है सहनशीलता। बोधिसत्व सहनशीलता को धारण करते हुए, इसका मूक भाव से अभ्यास करता है। वह लाभ-अलाभ, यश-अपयश, निंदा-प्रशंसा, सुख-दुख सबको समान समझकर आगे बढ़ता है। सत्य पारमिता – सत्य की स्वीकृति व प्रतिपादन ही सत्य पारमिता है। इसे सम्यक दृष्टि भी कहते हैं। जैसी वस्तु है, उसे वैसा ही देखना, वैसा कहना व वैसा ही प्रतिपादन करना सत्य है। यह बड़ा कठिन कार्य है। सत्य में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प व सम्यक वाचा का समावेश होता है। अधिष्ठान पारमिता : अधिष्ठान पारमिता का अर्थ दृढ़ संकल्प होता है। शुभ व नैतिक कर्मों के संपादन में अधिष्ठान परम आवश्यक होता है। पारमिताओं के अभ्यास के लिए दृढ़-संकल्प की आवश्यकता पड़ती है।दृढ़-संकल्प होने पर ही बोधिसत्व गृहत्याग करते हैं। मैत्री पारमिता : इसका अर्थ है उदारता व करुणा। सभी प्राणियों, जीवों व पेड़ – पौधों के प्रति मैत्री भाव रखना. बोधिसत्व मन में क्रोध, वैर व द्वेष नहीं रखते। जैसे मां अपने प्राणों की चिंता किए बिना बेटे की रक्षा करती है, उसी प्रकार बोधिसत्व को मैत्री की रक्षा करनी चाहिए। उपेक्षा पारमिता : उपेक्षा पारमिता का अर्थ है पक्षपात-रहित भाव रखकर बुद्धत्व की ओर आगे बढ़ना। कोई भी बोधिसत्व इन दस पारमिताओं में पूर्णता प्राप्त करके स्वयं बुद्ध बन सकता है।

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GS 1 DAY 5 Questions_ (1)_241209_003838.pdf6.28 KB

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