Astrologer Deep Ramgarhia
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जन्म कुंडली में शनि राहू योग के फायदे
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जन्म कुंडली में शनि राहू युति या त्रिकोण संबंध बने तो इसको शनि राहू योग कहा जाता है।
इस योग से प्रभावित जातक को ज्योतिष, रेलवे, शेयर बाज़ार, लाटरी या कैमिकल संबंधी कार्य में लाभ का योग बनता है।
खास कर वृषभ और तुला लगन में शनि के योगकारक होने से इस योग के शुभ फल होते हैं।
इस योग से प्रभावित जातक का भाग्य उदय जन्म स्थान से दूर जाकर होता है, कम आमदनी से शुरुआत होकर 34 वर्ष के बाद अच्छी तरक्की मिलती है।
ऐसे जातक को पढ़ाई में रूचि नहीं होती, इस नाते पढ़ाई कम होती है लेकिन तकनीकी कार्य जिसमे बुद्धि और हाथो की कला के इस्तेमाल हो ऐसे कार्य में भी सफलता मिलती है।
जबकि इस योग की अशुभता की वजह से चचेरे भाई बहन या करीबी मित्र पैसे और कामकाज के मामले में धोखा देते हैं।
स्वास्थ्य के रूप में ऐसे जातक को पेट गैस, गुप्त रोग या ठंड की वजह से सर्दी जुकाम के रोग परेशान करते हैं।
इस योग की शुभता प्राप्ति के लिए जातक को शनिवार के दिन भगवान शिव के दर्शन पूजन, और हमेशा अपने साथ चांदी का चोकोर सिक्का रखें।
जन्म कुंडली में रुचक योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब मंगल केंद्र भाव में अपनी या उच्च राशि में होता है तो रुचक योग बनता है जो कि पंच महापुरुष योग में से एक है।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए मंगल का योगकारक ग्रहों से संबंध, केंद्र या त्रिकोण भाव का स्वामी होना जरूरी है।
यदि रुचक योग में मंगल शत्रु ग्रह जैसे कि शनि राहू से पीड़ित हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए मंगल की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
रुचक योग के शुभ प्रभाव से जातक को मंगल से संबंधित शुभ फल जैसे मेहनत करने के गुण, शारीरिक सुख, जमीन जायदाद के सुख, कई तरह के वाहन के सुख, सरकार द्वारा सम्मान मिलता है।
Horoscope example: Shahrukh Khan, Salman Khan and Akshay Kumar
आपके पास आमदनी का साधन तो है लेकिन सिर्फ घर के राशन तक का खर्च चल रहा है। आमदनी में तरक्की और बरकत का अभाव है क्योंकि
आपकी जन्म कुंडली में यह तीन भाव कमज़ोर या अशुभ ग्रहों से प्रभावित हैं
नंबर एक जन्म कुंडली का एकादश भाव,
नंबर दो जन्म कुंडली का दसम भाव,
नंबर तीन जन्म कुंडली का पंचम भाव,
इन तीनो भाव की विस्तृत जानकारी के लिए हमारे बलोगेर पर यह पोस्ट देखे और यदि आप उपाय जानना चाहते हैं तो बलोगेर की पोस्ट पर कमेंट करें जिस से हम आपकी सहायता कर सकें
https://astrodeep3.blogspot.com/2024/10/naukri-vyapar-barkat-upay-totke-dhan-labh.html
जन्म कुंडली में गुरु राहू योग के फायदे
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जन्म कुंडली में गुरु राहू युति या त्रिकोण संबंध हो तो इसको गुरु राहू चंडाल योग कहा जाता है।
ऐसे जातक को गुरु अशुभ लेकिन राहू शुभ फल देता है जिसकी वजह से तन्त्र मंत्र के कार्यो में सफलता और धन प्राप्ति का योग बनता है।
क्युकि राहू शेयर बाज़ार का कारक और गुरु सलाहकार है इस नाते ऐसे जातक को शेयर बाज़ार निवेश संबंधी सलाह देने के कार्य भी लाभ देते हैं।
ऐसे जातक का भाग्य उदय जन्म स्थान से दूर जाकर होता है, साथ ही पैतृक धन संपति प्राप्ति में कुछ बाधा आती है।
जातक खुद को या जीवनसाथी को पेट संबंधी रोग का योग बनता है, गुरु की अंतरदशा में सोना गुम या चोरी होने का भी योग बनता है।
ऐसे जातक इंजीनियरिंग खास कर कंप्यूटर संबंधी या ठेकेदारी के कार्य या राजनीति से जुड़े कार्यो में भी सफल होते हैं।
ऐसे जातक को संतान के करियर की सफलता और विवाह संबंधी चिंता भी होती है, संतान को वाहन दुर्घटना का योग बनता है।
इस योग की शुभता के लिए जातक को लगन अनुसार यदि बुध शुभ हो तो पन्ना रतन या फिर अगर लगन अनुसार मंगल शुभ है तो मूंगा रतन धारण करना चाहिए।
जन्म कुंडली में गुरु राहू योग के फायदे
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जन्म कुंडली में गुरु राहू युति या त्रिकोण संबंध हो तो इसको गुरु राहू चंडाल योग कहा जाता है।
ऐसे जातक को गुरु अशुभ लेकिन राहू शुभ फल देता है जिसकी वजह से तन्त्र मंत्र के कार्यो में सफलता और धन प्राप्ति का योग बनता है।
क्युकि राहू शेयर बाज़ार का कारक और गुरु सलाहकार है इस नाते ऐसे जातक को शेयर बाज़ार निवेश संबंधी सलाह देने के कार्य भी लाभ देते हैं।
ऐसे जातक का भाग्य उदय जन्म स्थान से दूर जाकर होता है, साथ ही पैतृक धन संपति प्राप्ति में कुछ बाधा आती है।
जातक खुद को या जीवनसाथी को पेट संबंधी रोग का योग बनता है, गुरु की अंतरदशा में सोना गुम या चोरी होने का भी योग बनता है।
ऐसे जातक इंजीनियरिंग खास कर कंप्यूटर संबंधी या ठेकेदारी के कार्य या राजनीति से जुड़े कार्यो में भी सफल होते हैं।
ऐसे जातक को संतान के करियर की सफलता और विवाह संबंधी चिंता भी होती है, संतान को वाहन दुर्घटना का योग बनता है।
इस योग की शुभता के लिए जातक को लगन अनुसार यदि बुध शुभ हो तो पन्ना रतन या फिर अगर लगन अनुसार मंगल शुभ है तो मूंगा रतन धारण करना चाहिए।
जन्म कुंडली में गजकेसरी योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब गुरु चंद्रमा से केंद्र या त्रिकोण भाव में होता है तो गजकेसरी योग बनता है जो कि पंच महापुरुष योग में से एक है।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए दोनों ग्रहों का योगकारक ग्रहों से संबंध, बली और मित्र राशि में होना जरूरी है।
यदि दोनों में से कोई शत्रु ग्रह जैसे कि शनि राहू से पीड़ित हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए चंद्रमा या गुरु की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
गजकेसरी योग के शुभ प्रभाव से जातक को उच्च शिक्षा प्राप्ति के अवसर, लंबी आयु, शुभ वैवाहिक जीवन, मजबूत आर्थिक स्थिति, देश के बाहर तक प्रसिद्धि, सरकार द्वारा सम्मान मिलता है।
Horoscope example: Mahatma Gandhi, Amitabh Bachchan and Akshay Kumar
जन्म कुंडली में गजकेसरी योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब गुरु चंद्रमा से केंद्र या त्रिकोण भाव में होता है तो गजकेसरी योग बनता है जो कि पंच महापुरुष योग में से एक है।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए दोनों ग्रहों का योगकारक ग्रहों से संबंध, बली और मित्र राशि में होना जरूरी है।
यदि दोनों में से कोई शत्रु ग्रह जैसे कि शनि राहू से पीड़ित हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए चंद्रमा या गुरु की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
गजकेसरी योग के शुभ प्रभाव से जातक को उच्च शिक्षा प्राप्ति के अवसर, लंबी आयु, शुभ वैवाहिक जीवन, मजबूत आर्थिक स्थिति, देश के बाहर तक प्रसिद्धि, सरकार द्वारा सम्मान मिलता है।
Horoscope example: Mahatma Gandhi, Amitabh Bachchan and Akshay Kumar
जन्म कुंडली में धर्म कर्म योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब गुरु शनि युति केंद्र या त्रिकोण भाव में बनती है तो इसको धर्म कर्म योग कहा जाता है जो कि शुभ योग में से एक है।
इस योग से प्रभावित जातक को उसके जाति और धर्म के आधार पर लोग जो कार्य करते हो उन कार्यो में सफलता मिलती है या फिर पिता द्वारा सुझाये गये कार्य सही साबित होते हैं।
यदि इस योग में शनि डिग्री वाइज गुरु से आगे हो तो जातक को नौकरी कारोबार के लिए परिवार से दूर की यात्रा भी करनी पडती है और 4 से 5 वर्ष तक लगातार मेहनत के बाद कारोबार में अच्छा लाभ बनता है।
इस योग से प्रभावित जातक की शिक्षा कम होती है, या फिर अगर पढ़ाई होगी भी तो उसका नौकरी कारोबार में कोई लाभ नहीं होता।
स्वास्थ्य के रूप में ऐसे जातक उम्र की शुरुआत में दुबले पतले हो सकते हैं, 35 वर्ष के बाद मोटापा आना शुरू होता है और फिर वजन बढने की वजह से घुटनों में दर्द के रोग भी परेशान करते हैं।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए इनको अपना चंद्रमा हमेशा शुभ रखना चाहिए, यानि धन से जुड़े फैसले में भावुकता नहीं दिखानी चाहिए, ना ही जरूरत से ज्यादा किसी की आर्थिक मदद करनी चाहिए क्युकि कई बार किसी की मदद करने से भी इनको अपमान ही मिलता है।
गुरु सटीक जानकारी और शनि कामकाज का कारक होता है, इस नाते इन लोगों को अपने कामकाज में परिवार के बाहर के लोगों की सलाह से बचना चाहिए, सिर्फ अपने परिवार और खुद की जानकारी पर भरोसा रख कर कारोबार करने चाहिए।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए गुरु या शनि का योगकारक ग्रहों से संबंध, बली और केंद्र या त्रिकोण राशि का स्वामी ग्रह होना जरूरी है।
यदि गुरु या शनि पर शत्रु ग्रह जैसे कि मारक ग्रह का प्रभाव हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए गुरु या शनि की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
धर्म कर्म योग के शुभ प्रभाव से जातक को शुभ फल जैसे कि उम्र के बढने के साथ कामकाज में लाभ और तरक्की बढ़ते हैं, इनके आधीन कार्य करने वाले लोग और इनके ग्राहक लोग इनका बहुत सम्मान करते हैं और दान पुन्य की वजह से शहर और इनके कुल में इनका बहुत नाम होता है।
Horoscope example: Bill Gates, Walt Disney, Nelson Mandela, and Elon Musk
जन्म कुंडली में धर्म कर्म योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब गुरु शनि युति केंद्र या त्रिकोण भाव में बनती है तो इसको धर्म कर्म योग कहा जाता है जो कि शुभ योग में से एक है।
इस योग से प्रभावित जातक को उसके जाति और धर्म के आधार पर लोग जो कार्य करते हो उन कार्यो में सफलता मिलती है या फिर पिता द्वारा सुझाये गये कार्य सही साबित होते हैं।
यदि इस योग में शनि डिग्री वाइज गुरु से आगे हो तो जातक को नौकरी कारोबार के लिए परिवार से दूर की यात्रा भी करनी पडती है और 4 से 5 वर्ष तक लगातार मेहनत के बाद कारोबार में अच्छा लाभ बनता है।
इस योग से प्रभावित जातक की शिक्षा कम होती है, या फिर अगर पढ़ाई होगी भी तो उसका नौकरी कारोबार में कोई लाभ नहीं होता।
स्वास्थ्य के रूप में ऐसे जातक उम्र की शुरुआत में दुबले पतले हो सकते हैं, 35 वर्ष के बाद मोटापा आना शुरू होता है और फिर वजन बढने की वजह से घुटनों में दर्द के रोग भी परेशान करते हैं।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए इनको अपना चंद्रमा हमेशा शुभ रखना चाहिए, यानि धन से जुड़े फैसले में भावुकता नहीं दिखानी चाहिए, ना ही जरूरत से ज्यादा किसी की आर्थिक मदद करनी चाहिए क्युकि कई बार किसी की मदद करने से भी इनको अपमान ही मिलता है।
गुरु सटीक जानकारी और शनि कामकाज का कारक होता है, इस नाते इन लोगों को अपने कामकाज में परिवार के बाहर के लोगों की सलाह से बचना चाहिए, सिर्फ अपने परिवार और खुद की जानकारी पर भरोसा रख कर कारोबार करने चाहिए।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए गुरु या शनि का योगकारक ग्रहों से संबंध, बली और केंद्र या त्रिकोण राशि का स्वामी ग्रह होना जरूरी है।
यदि गुरु या शनि पर शत्रु ग्रह जैसे कि मारक ग्रह का प्रभाव हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए गुरु या शनि की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
धर्म कर्म योग के शुभ प्रभाव से जातक को शुभ फल जैसे कि उम्र के बढने के साथ कामकाज में लाभ और तरक्की बढ़ते हैं, इनके आधीन कार्य करने वाले लोग और इनके ग्राहक लोग इनका बहुत सम्मान करते हैं और दान पुन्य की वजह से शहर और इनके कुल में इनका बहुत नाम होता है।
Horoscope example: Bill Gates, Walt Disney, Nelson Mandela, and Elon Musk
जन्म कुंडली में बुध शनि योग के फायदे
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जन्म कुंडली में बुध शनि की युति या त्रिकोण संबंध को बुध शनि योग कहा जाता है।
इस योग का प्रभाव जातक को धन और कारोबार के मामले में बुद्धिमान बनाता है और जातक सफल कारोबारी बनता है।
बड़े बड़े उद्योगपति और सफल कारोबारी लोगों की कुंडली में यह योग देखा गया है।
शनि कर्म और बुध कामर्स के विषय हैं इस नाते बैंक और सी ए में करियर बनाते या फिर कूरियर सेवायों में भी ऐसे जातक देखे गये हैं।
खास कर वृषभ और तुला लगन की कुंडली जिस में शनि योगकारक होता है इस योग के शुभ फल मिलते हैं।
ऐसे जातक की पत्नी भी खुद नौकरी कोरबार करके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती है।
बुध अगर अशुभ प्रभाव में हो तो स्वास्थ्य के रूप में जातक को नाक, कान और गले संबंधी रोग परेशान करते हैं।
Horscope examples : Bill gates and Gautam Adani
जन्म कुंडली में बुध शनि योग के फायदे
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जन्म कुंडली में बुध शनि की युति या त्रिकोण संबंध को बुध शनि योग कहा जाता है।
इस योग का प्रभाव जातक को धन और कारोबार के मामले में बुद्धिमान बनाता है और जातक सफल कारोबारी बनता है।
बड़े बड़े उद्योगपति और सफल कारोबारी लोगों की कुंडली में यह योग देखा गया है।
शनि कर्म और बुध कामर्स के विषय हैं इस नाते बैंक और सी ए में करियर बनाते या फिर कूरियर सेवायों में भी ऐसे जातक देखे गये हैं।
खास कर वृषभ और तुला लगन की कुंडली जिस में शनि योगकारक होता है इस योग के शुभ फल मिलते हैं।
ऐसे जातक की पत्नी भी खुद नौकरी कोरबार करके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती है।
बुध अगर अशुभ प्रभाव में हो तो स्वास्थ्य के रूप में जातक को नाक, कान और गले संबंधी रोग परेशान करते हैं।
Horscope examples : Bill gates and Gautam Adani
जन्म कुंडली में बुध राहू योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब किसी भाव में बुध राहू युति या राहू की दृष्टि बुध पर होती है तो इसको बुध राहू योग कहा जाता है।
बुध शिक्षा का कारक है और राहू विज्ञान और खोज कार्य का। इस नाते ऐसे जातक इंजीनियरिंग की शिक्षा में जाते हुए देखे गये हैं। और फिर किसी कारण वश वो किसी अन्य नौकरी कारोबार में होते हैं यानि उनकी शिक्षा बेकार चली जाती है।
अन्य उदाहरन के रूप में राहू गैरकानूनी कार्य की तरफ आकर्षित करता है। जिसमे पैसे देकर डिग्री खरीदना या फिर दुसरो को ऐसे जरूरी कागज़ बनवा कर जातक धन कमाता है। या फिर गैरकानूनी तरीके से जातक विदेश चला जाता है।
लाल किताब में बुध राहू योग को गुरु के फल देने वाला कहा गया है। जिस में जातक नकली डिग्री लेकर किसी नौकरी या पद पर बैठा हो सकता है, या फिर जीवनसाथी के इलावा बाहर किसी से प्रेम संबंध हो सकते है।
गुरु घर का शुद्ध वातावरण है लेकिन अब राहू इस में मिलावट का कारण बन जाता है। जैसे कि घर का मुखिया हो वह अपनी कमाई बाहर शराब की आदत में खराब कर देता हो। या किसी भी कारण की वजह से पत्नी को गुज़ारे हेतु धन ना देता हो जिस से घरेलू कलह की स्थिति बनती है।
इस नाते इस योग में मंगल की स्थिति देखना जरूरी होता है। यानि यदि मंगल अगर बलवान होगा तो घर के मर्द यानि मुखिया को ऐसे नशे की आदत नहीं लगने देगा, यानि वहां राहू अपनी अशुभता नहीं दिखा पाता।
इसके इलावा बुध को बीज या अंडे का कारक और राहू को बदनामी का कारक कहा गया है। इस नाते ऐसी लडकी का आचरण खराब होने का योग बनता है, यानि लडकी का अनैतिक संबंध का योग और फिर यदि मंगल भी बद होकर बैठा हो तो कसाई बन कर पेट में ही संतान को मारने का योग बनता है।
बुध राहू योग यानि किसी की कोई इच्छा पूरी होने के झूठे वादे। जैसे आज के समय में बहुत लोग धन के निवेश और जल्दी ज्यादा लाभ पाने के झूठे वादों में फस जाते हैं। यह सब स्कीम चलाने वाले बुध राहू योग से प्रभावित होते हैं जो लोगों को मुर्ख बना कर पैसा बनाते हैं।
बुध राहू योग में कुछ समय के लिए तो जल्दी धन जातक के पास आता है। लेकिन जब जातक के आमदनी के साधन सामने आ जाते हैं तो जातक को क़ानूनी मुसीबत का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग राजनीति से भी जुड़े हो सकते हैं।
इस योग की अशुभता को दूर करने के लिए जातक को मंगल की मदद लेनी चाहिए। जैसे कि नीम की दातुन का इस्तेमाल करे जिस से बुध की खराबी यानि दांतों के रोग भी ना हो। और राहू की शांति के लिए सिरहाने लाल वस्त्र में सोंफ रख कर सोना चाहिए। अगर शिक्षा य धन से जुडी कोई समस्या हो तो बुधवार के दिन हरी मुंग को लाल वस्त्र में लेकर जमीन में दबा देना चाहिए।
जन्म कुंडली में बुध राहू योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब किसी भाव में बुध राहू युति या राहू की दृष्टि बुध पर होती है तो इसको बुध राहू योग कहा जाता है।
बुध शिक्षा का कारक है और राहू विज्ञान और खोज कार्य का। इस नाते ऐसे जातक इंजीनियरिंग की शिक्षा में जाते हुए देखे गये हैं। और फिर किसी कारण वश वो किसी अन्य नौकरी कारोबार में होते हैं यानि उनकी शिक्षा बेकार चली जाती है।
अन्य उदाहरन के रूप में राहू गैरकानूनी कार्य की तरफ आकर्षित करता है। जिसमे पैसे देकर डिग्री खरीदना या फिर दुसरो को ऐसे जरूरी कागज़ बनवा कर जातक धन कमाता है। या फिर गैरकानूनी तरीके से जातक विदेश चला जाता है।
लाल किताब में बुध राहू योग को गुरु के फल देने वाला कहा गया है। जिस में जातक नकली डिग्री लेकर किसी नौकरी या पद पर बैठा हो सकता है, या फिर जीवनसाथी के इलावा बाहर किसी से प्रेम संबंध हो सकते है।
गुरु घर का शुद्ध वातावरण है लेकिन अब राहू इस में मिलावट का कारण बन जाता है। जैसे कि घर का मुखिया हो वह अपनी कमाई बाहर शराब की आदत में खराब कर देता हो। या किसी भी कारण की वजह से पत्नी को गुज़ारे हेतु धन ना देता हो जिस से घरेलू कलह की स्थिति बनती है।
इस नाते इस योग में मंगल की स्थिति देखना जरूरी होता है। यानि यदि मंगल अगर बलवान होगा तो घर के मर्द यानि मुखिया को ऐसे नशे की आदत नहीं लगने देगा, यानि वहां राहू अपनी अशुभता नहीं दिखा पाता।
इसके इलावा बुध को बीज या अंडे का कारक और राहू को बदनामी का कारक कहा गया है। इस नाते ऐसी लडकी का आचरण खराब होने का योग बनता है, यानि लडकी का अनैतिक संबंध का योग और फिर यदि मंगल भी बद होकर बैठा हो तो कसाई बन कर पेट में ही संतान को मारने का योग बनता है।
बुध राहू योग यानि किसी की कोई इच्छा पूरी होने के झूठे वादे। जैसे आज के समय में बहुत लोग धन के निवेश और जल्दी ज्यादा लाभ पाने के झूठे वादों में फस जाते हैं। यह सब स्कीम चलाने वाले बुध राहू योग से प्रभावित होते हैं जो लोगों को मुर्ख बना कर पैसा बनाते हैं।
बुध राहू योग में कुछ समय के लिए तो जल्दी धन जातक के पास आता है। लेकिन जब जातक के आमदनी के साधन सामने आ जाते हैं तो जातक को क़ानूनी मुसीबत का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग राजनीति से भी जुड़े हो सकते हैं।
इस योग की अशुभता को दूर करने के लिए जातक को मंगल की मदद लेनी चाहिए। जैसे कि नीम की दातुन का इस्तेमाल करे जिस से बुध की खराबी यानि दांतों के रोग भी ना हो। और राहू की शांति के लिए सिरहाने लाल वस्त्र में सोंफ रख कर सोना चाहिए। अगर शिक्षा य धन से जुडी कोई समस्या हो तो बुधवार के दिन हरी मुंग को लाल वस्त्र में लेकर जमीन में दबा देना चाहिए।
यह ग्रुप आपके साथ ज्योतिष जानकारी सांझी करने के लिए बनाया गया है। और ज्योतिष का महत्वपूर्ण अंग पंचांग है। क्योंकि इसी से ही तिथि, नक्षत्र और ग्रहों के गोचर की जानकारी मिलती है। तिथियों की गणना आपको जरूर करना आना चाहिए क्योंकि कई बार online data या फिर mobile app में जानकारी गलत हो सकती है। जैसे अभी धनतेरस और दीवाली को लेकर विद्वानों में मतभेद हो रहे हैं क्योंकि कुछ विद्वान 31 अक्तूबर को और कुछ विद्वान 1 नवंबर को दीवाली पूजन बता रहे हैं। आज आपको इसी से संबंधित जानकारी सांझी करने का प्रयास है। उम्मीद करते हैं आप भी इसको समझ सकते हो।
सब से पहले त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस 29 अक्तूबर दिन मंगलवार की सुबह 11 बजे से लेकर 30 अक्तूबर दिन बुधवार की दोपहर 1 बजे तक है। आपके शहर के अनुसार यह समय 15, 20 मिनट आगे या पीछे हो सकता है। इस तरह धनतेरस की खरीदारी मंगलवार की शाम और बुधवार की सुबह दोनों समय में की जा सकती है।
और अमावस्या तिथि यानी दिवाली 31 अक्टूबर दिन गुरुवार की शाम 4 बजे से लेकर 1 नवंबर दिन शुक्रवार की शाम 6 बजे तक है। क्योंकि लक्ष्मी पूजन रात को ही करते हैं तो 31 अक्तूबर की रात को 8 से 11 बजे के बीच लक्ष्मी पूजन का समय रहेगा। लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात यह है जो अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए दान पुण्य होते हैं या कुछ लोग अपने कुल देवता के दर्शन पूजन के लिए जाते हैं, वहां दान पुण्य करते हैं जिसके लिए सूर्य उदय वाली तिथि मान्य होती है क्योंकि सूर्य ही पितरों का कारक है। तो वह समय 1 नवंबर की सुबह या दिन का होगा। मतलब व्रत और पूजा वाली अमावस्या 31 अक्तूबर को है और स्नान दान की अमावस्या 1 नवंबर को है।
वैसे भी शास्त्रों अनुसार सभी तरह के दान पुण्य सूर्य उदय में ही करने का विधान बताया गया है। तो फिर जिन लोगों की दुकान या फैक्ट्री है और वह अपने कर्मचारियों को दीवाली के दान पुण्य के कार्य अगर 31 अक्तूबर की शाम को करेंगे तो यह शास्त्र अनुसार मान्य नहीं होगा। इसी लिए ऐसे सभी तरह के दान पुण्य के कार्य या कुल देवता या पितरों हेतु दान कार्य 1 नवंबर की सुबह या दिन में करना ही शास्त्र अनुसार मान्य होगा। यह जानकारी आप अपने जान पहचान वालों के साथ ज़रूर सांझी करें।
यह ग्रुप आपके साथ ज्योतिष जानकारी सांझी करने के लिए बनाया गया है। और ज्योतिष का महत्वपूर्ण अंग पंचांग है। क्योंकि इसी से ही तिथि, नक्षत्र और ग्रहों के गोचर की जानकारी मिलती है। तिथियों की गणना आपको जरूर करना आना चाहिए क्योंकि कई बार online data या फिर mobile app में जानकारी गलत हो सकती है। जैसे अभी धनतेरस और दीवाली को लेकर विद्वानों में मतभेद हो रहे हैं क्योंकि कुछ विद्वान 31 अक्तूबर को और कुछ विद्वान 1 नवंबर को दीवाली पूजन बता रहे हैं। आज आपको इसी से संबंधित जानकारी सांझी करने का प्रयास है। उम्मीद करते हैं आप भी इसको समझ सकते हो।
सब से पहले त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस 29 अक्तूबर दिन मंगलवार की सुबह 11 बजे से लेकर 30 अक्तूबर दिन बुधवार की दोपहर 1 बजे तक है। आपके शहर के अनुसार यह समय 15, 20 मिनट आगे या पीछे हो सकता है। इस तरह धनतेरस की खरीदारी मंगलवार की शाम और बुधवार की सुबह दोनों समय में की जा सकती है।
और अमावस्या तिथि यानी दिवाली 31 अक्टूबर दिन गुरुवार की शाम 4 बजे से लेकर 1 नवंबर दिन शुक्रवार की शाम 6 बजे तक है। क्योंकि लक्ष्मी पूजन रात को ही करते हैं तो 31 अक्तूबर की रात को 8 से 11 बजे के बीच लक्ष्मी पूजन का समय रहेगा। लेकिन यहां महत्वपूर्ण बात यह है जो अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए दान पुण्य होते हैं या कुछ लोग अपने कुल देवता के दर्शन पूजन के लिए जाते हैं, वहां दान पुण्य करते हैं जिसके लिए सूर्य उदय वाली तिथि मान्य होती है क्योंकि सूर्य ही पितरों का कारक है। तो वह समय 1 नवंबर की सुबह या दिन का होगा। मतलब व्रत और पूजा वाली अमावस्या 31 अक्तूबर को है और स्नान दान की अमावस्या 1 नवंबर को है।
वैसे भी शास्त्रों अनुसार सभी तरह के दान पुण्य सूर्य उदय में ही करने का विधान बताया गया है। तो फिर जिन लोगों की दुकान या फैक्ट्री है और वह अपने कर्मचारियों को दीवाली के दान पुण्य के कार्य अगर 31 अक्तूबर की शाम को करेंगे तो यह शास्त्र अनुसार मान्य नहीं होगा। इसी लिए ऐसे सभी तरह के दान पुण्य के कार्य या कुल देवता या पितरों हेतु दान कार्य 1 नवंबर की सुबह या दिन में करना ही शास्त्र अनुसार मान्य होगा। यह जानकारी आप अपने जान पहचान वालों के साथ ज़रूर सांझी करें।
शतभिषा नक्षत्र में किए जाने वाले अनुकूल या शुभ कार्य इस प्रकार हैं: कारोबार को बढ़ाने से संबंधित किसी भी तरह की गतिविधियों को इस नक्षत्र के दिन किया जा सकता है, जैसे कि नई मशीनरी, जमीन या वाहन खरीदना, किसी भी नई साझेदारी की शुरुआत करना। किसी भी तरह की यात्रा या घूमना-फिरना, चाहे वह कामकाज के सिलसिले में हो या मनोरंजन के लिए। स्वास्थ्य संबंधी सलाह लेना, दवाएं लेना, सर्जरी करवाना, ध्यान और योग करना, किसी भी नई शिक्षा या कुछ भी नया सीखने की शुरुआत करना, रिसर्च और खोज कार्य करना, समुद्र किनारे मौज-मस्ती करना, और मीडिया से संबंधित कार्य इस नक्षत्र के दिन किए जा सकते हैं।
शतभिषा नक्षत्र के बारे में और अधिक जानकारी के लिए इस से संबंधित हमारा पूरा लेख पढ़ें
https://astrodeep3.blogspot.com/2024/10/shatabhisha-nakshatra-moon-characteristics.html
जन्म कुंडली में भद्र योग के फायदे
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जन्म कुंडली में जब बुध केंद्र भाव में अपनी या उच्च राशि में होता है तो भद्र योग बनता है जो कि पंच महापुरुष योग में से एक है।
इस योग के शुभ फल प्राप्ति के लिए बुध का योगकारक ग्रहों से संबंध, बली और केंद्र या त्रिकोण राशि का स्वामी ग्रह होना जरूरी है।
यदि बुध पर शत्रु ग्रह जैसे कि चन्द्र केतु का प्रभाव हो तो भी इस योग के शुभ फल प्राप्ति में बाधा आती है।
इस योग से शुभ फल के लिए बुध की महादशा भी उचित समय जैसे 20 से 40 वर्ष की आयु के दरमियान मिलनी चाहिए।
भद्र योग के शुभ प्रभाव से जातक को बुध के शुभ फल जैसे कि व्यापार कारोबार में लाभ, मजबूत आर्थिक स्थिति, संपति के लाभ, वाहन सुख और सरकार द्वारा सम्मान मिलता है।
Horoscope example: Manmohan Singh, Mother Teresa, Maneka Gandhi and Morari Bapu
अपने वर्ण के अनुसार करें कार्यक्षेत्र का चयन
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आपकी जन्म कुंडली की जानकारी में आपको वर्ण की जानकारी भी मिलती है , जैसे कि वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शुद्र इन में से कुछ भी हो सकता है |
यदि आपका वर्ण ब्राह्मण है तो मतलब आपकी आय का साधन शिक्षा से जुड़ा है , आप समाज में दुसरो को सही रास्ता सुझाते हो | जैसे कि आप किसी भी विषय में सलाहकार हो सकते हो, जैसे कि financial advisor, Human resource, career advisor, property advisor, teacher हो सकते हो या फिर शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी पर हो सकते हो | या फिर किसी भी विद्या के जानकार जैसे कि डाक्टर, ज्योतिष, वास्तु जो लोगों का जीवन बेहतर करने में सहायता करते हैं |
यदि आपका वर्ण क्षत्रिय है मतलब आपकी आय का साधन रक्षा के साधनों से जुड़ा है | जैसे कि Army, police, cyber security, किसी industry के security dept में होना, computer programmar, किसी भी तरह की विषय वस्तुयों के भंडार की देखभाल करने के कार्य आपको सूट करेगे |
यदि आपका वर्ण वैश्य है तो किसी भी तरह का retail business में आप सफल हो सकते हो, stock market trading, travel, transport, import export, hotel rstro, food, gym, any type of retail business, आप सिर्फ खुद का कारोबार ही करेगे , नौकरी में तरक्की नहीं होगी |
यदि आपका वर्ण शुद्र है तो आपकी सफलता के लिए जरूरी है कि आपको हाथों से कार्य करना आना चाहिए, जैसे कि खराब चीजों को ठीक करना, घर बनाना , लकड़ी का सामान बनाने के कार्य, लोहे और मशीनरी पर किये जाने वाले कार्य, भारी वाहन चलाने के कार्य, आप लोग मालिक कभी नही बन सकते, बल्कि अगर आपको ढाबा भी खोलना है तो भी आपको खुद से ही खाना बनाना पड़ेगा , क्युकि इस वर्ण के लोगों को नौकरी ही करनी पडती है |
आपका कोनसा वर्ण है उस पर अपने कामकाज से संबंधित अपने अनुभव जरुर शेयर करें , धन्यवाद
ज्योतिष अनुसार कुछ शुभ अशुभ योग
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जन्म कुंडली में दुसरे भाव का स्वामी एकादश में, या एकादश का स्वामी दुसरे में हो तो आर्थिक स्थिति के लिए शुभ योग बनता है।
जन्म कुंडली में दुसरे और एकादश भाव में राशि परिवर्तन योग बने तो भी आर्थिक स्थिति के लिए शुभ योग बनता है।
जन्म कुंडली में दुसरे और एकादश भाव के स्वामी ग्रह केंद्र या त्रिकोण भाव में युति करे तो भी आर्थिक स्थिति के लिए शुभ योग बनता है।
जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र त्रिकोण या लाभ भाव में शुभ ग्रहों से योग करे तो धन संपति और परिवार के सुख के लिए शुभ योग बनता है।
जन्म कुंडली में दसम भाव का स्वामी यदि छठे भाव में हो, या छठे भाव का स्वामी दसम भाव में हो तो सरकारी नौकरी या अच्छी फर्म में स्थाई नौकरी का योग बनता है।
जन्म कुंडली में पंचम और सप्तम भाव में राशि परिवर्तन या सप्तम का स्वामी पंचम भाव में हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है।
जन्म कुंडली में सप्तम और नवम भाव में राशि परिवर्तन या सप्तम का स्वामी नवम भाव में हो तो धार्मिक रीत रिवाज से विवाह का योग बनता है।
जन्म कुंडली में चंद्रमा पंचम, अष्टम या द्वादश भाव में शनि राहू से पीड़ित हो तो समाज में बदनामी का योग बनता है , ऐसे जातक को प्रेमी या जीवनसाथी की वजह से समस्या आती है।
जन्म कुंडली में दुसरे, तीसरे या अष्टम भाव पर अशुभ ग्रह मंगल शनि या राहू का प्रभाव हो तो जातक वाणी से कडवा बोलता है, जातक को वाहन सुख में कमी या इन अशुभ ग्रहों की अंतरदशा में वाहन दुर्घटना का योग बनता है।
जन्म कुंडली में पंचम, अष्टम, नवम और दसम भाव का संबंध बने तो जातक धर्म और अध्यात्म से जुड़े कार्य जैसे कि ज्योतिष, कर्म कांड, पूजा सामग्री और रत्नों के कारोबार में सफल होता है।
जन्म कुंडली में तीसरे, नवम और द्वादश भाव एक दुसरे से संबंधित हो तो परिवार से दूर विदेश जाने का योग बनता है।
जन्म कुंडली में शनि या गुरु वक्री हो तो जन्म स्थान, परिवार से दूर जा कर भाग्य उदय होता है।
