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ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜

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मेरी मशरूफियत में शामिल है कहीं न कहीं तू , मेरी फुरसतों का आलम क्या होगा....🫠❤️

तेरी यादें पिरोए सहेज रही मैं, ये टूटता ही नहीं, कैसा धागा है जहां भर में भटके मन मेरा , समेटा तो तुझसे आके लागा है हर रात मैं सोती खुद में , हर सुबह तू पहला खयाल बन जागा है न तेरी हां है न ना , उलझे न सुलझे , ये कैसा धागा है ।। 🫠

करके बातें बेफिजूल सी , मैं उसे सताती रहती हूं कुछ नहीं हो तुम मेरे कहके हक मोहब्बत सा जताती रहती हूं तुम होते तो कहते ये , कहते वो , सोच सोच , मैं खुद को संवारती रहती हूं पढ़ती हूं उसकी गज़लें और मैं खुद को तलाशती रहती हूं ।।🫠❤️

जो रंग बिखेरूं मैं काग़ज़ पे , तो वो तेरा चेहरा हो , जो थाम लूं कलम मैं , हर अल्फाज़ पे तू ठहरा हो , हर नज़र पे तेरा पहरा हो , लफ़्ज़ सुनूं जो तू कह रहा हो , हज़ार तरीके , लाख कोशिशें.... लिखूं जो किस्मत तो तू मेरा हो सिर्फ़ मेरा हो ...❤️

जो उतारूं तुझे दिल से, दो पल में गिर जायेगा तेरा गुरुर , मेरे इश्क़ का मोहताज है ।।😌

मेरी सांसें है तेरा यूं नखरे कर सताना , मेरी ज़िंदगी है तेरा जान जान कहके मोहब्बत जताना , मैं खुशी खुशी तुम्हे उसके हवाले कर दूं.... कोई मुझसे बेहतर तुम्हे चाहे तो बताना !! 💕💕

हर रात रहूं मैं करीब तेरे, हर सवेरा तेरे साथ हो मैं ज़िंदगी इतनी बेहतरीन चाहती हूं , तेरी बाहों में रुके सांसें मेरी , मौत भी मैं इतनी हसीन चाहती हूं।।🥺❤️

मेरे आंखें बन्द करने पर , तुम्हारे होंठ इजाज़त लेने के लिए नहीं बने हैं ....👀

पुरुष को एक ऐसी प्रेमिका की चाह होती है! जिसे सिर्फ प्रेम न चाहिए हो! जो समझे उसकी पीड़ा, कष्ठ,औऱ अवसाद को! और किसी जादूगरनी की तरह उसकी सारी पीड़ाओं को बदलकर एक चुम्बन बना दे! और फेंक के मारे माथे पर! ओर दोनों सुकून में विलीन हो जाए! 🌀🌻❣ ~Abhiwrites💗

क्यों बात बढ़ा रखी है, दिल ही तो टूटा है! क्यों आग लगा रखी है,सनम ही तो रूठा है! ज़िद में नौकरी भी चली जायेगी, बेशक पेपर एक ही छूटा है! वो भी दौड़ कर आएगी,जब जानेगी लड़का अफसर बन कर लौटा है!         ~अभि🩵

कुछ ऐसे वो अपनी मोहब्बत का आगाज़ करते है, आंखों में शरारत लिए वो मुझसे दिल लगाने की बात करते है! कहते है आप यकीनन इंसान अच्छे हो, फिर ये कौन है जो आपसे दूर जाने की बात करते है! ~अभि🫰

मुझे बस इक काम आता है, ये लफ़्ज़ों को बनाने का! कभी कम बनाता हूँ कभी बहुत सारे बनाता हूँ। कभी मीठे बनाता हूँ, कभी खारे बनाता  हूँ! कभी चांद तो कभी तारे बनाता हूँ। टूटे हुए इंसानों के सहारे बनाता हूँ। जिसने जैसा देखा वैसा पाया मुझे। कभी समंदर तो कभी किनारे बनाता हूँ! कभी आग जलाता हूँ कभी अंगारे बनाता हूँ। मैं कितना भी बेरंग रहूं तेरे लिए। कभी तितली, कभी जुगुन कभी तारे बनाता हूँ। आपने कहा न मेरी आवाज़ से मैं नही मिलता। तो कभी पतझड़ तो कभी बहारें बनाता हूँ। आंखों को जिसका इंतज़ार रहे, वो खूबसूरत नजारे बनाता हूँ। ~Abhiwrites✅

ज़रा सी तबियत बिगड़ने पे उसकी , मैं , खयाल, सवाल, फिक्र, दुआ... सब करती हूं. उलझा उलझा सा रवैया है वरना, मैं लहज़े में लापरवाहियां लिए फिरती हूं।😌🎀

तेरी आज़ाद निगाहे, मेरी प्यासी खामोशी को कैसे पढेंगी! ~अभि🫰

समझदारियां छीन लेंगी चेहरे की सारी हंसी लुत्फ़ जो है..... नादानियों में ही है ।। Good morning everyone 🌸🌞

मेरी नफ़रत के हक़दार सिर्फ वो कहलाए, जिन्हें मयस्सर रहा तेरे आस पास रहना! ~अभि🫰

चाहती है वो कि मेरी बाहों में आके सारा दर्द रो ले। लेकिन मजबूर मैं, किसी के यादों के धागों से बंधा हूँ।     ~अभि🩵

थक गई मैं , इन चलती सांसो और खुली आंखों से , तू जो सहलाये माथा , तो ज़रा सो लूं मैं... ये झूठी मुस्कुराहटें धीमा जहर है, तू ज
थक गई मैं , इन चलती सांसो और खुली आंखों से , तू जो सहलाये माथा , तो ज़रा सो लूं मैं... ये झूठी मुस्कुराहटें धीमा जहर है, तू जो भरे बाहों में , तो ज़रा रो लूं मैं....🍂

उलझनों और जिम्मेदारियों ने थामे रखा हाथ मेरा , फुरसतें पुछती रही , हमे वक्त कब दोगे ....?🙂😌