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॥ सर्वं भवतः समीपं समये आगमिष्यति, धैर्यं धारयतु ॥

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मानगढ़ हत्याकांड के दौरान बेली द्वारा फायरिंग रोकने का आदेश दिए जाने का प्रमुख कारण क्या था?
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आठ महीनों की लंबी प्रतीक्षा और भयानक ख़ून ख़राबे के बाद अलाउद्दीन ख़िलज़ी ने चितौड़ पर विजय प्राप्त की थी। चित्तौड़ विजय के बाद जब अलाउद्दीन ख़िलज़ी अपने सिपहसालारों के साथ पद्मिनी को प्राप्त करने की आशा में चित्तौड़ दुर्ग में दाख़िल हुआ तो सारे रास्ते लहूलुहान थे; दुर्ग के भीतर आग की लपटें उठ रही थीं, आसमान तक धुआँ छाया हुआ था, चारों तरफ़ राख उड़ रही थी और सन्नाटा सांय सांय कर रहा था। इस विकट रण में सारे रणबांकुरे वीरगति को प्राप्त हो चुके थे और अपने समय की अनिंद्य सुंदरी रानी पद्मिनी तीन हज़ार स्त्रियों के साथ दुर्ग में जलती हुई जौहर-ज्वाला में कूद चुकी थीं। अवधी-भाषा में पद्मावत जैसी क्लासिक-कृति रचने वाले मलिक मुहम्मद जायसी की पद्मावत के अनुसार अलाउद्दीन ख़िलज़ी ने नीचे झुककर एक मुट्ठी राख अपनी हथेलियों में भरकर (यह सोचते हुए कि यह दुनिया फ़ानी/झूठी है) हवा में उछाल/उड़ा दी। जायसी ने लिखा : छार उठाय लीन्हि एक मूठी दीन्हि उड़ाय पिरिथमी झूठी! भारतीय मनीषा के अमर ग्रंथ पद्मावत की ये अंतिम पंक्तियां हैं। यही पद्मावत की कथा का सार है। यही जीवन का निचोड़ है। यही जायसी का आख़िरी क़लाम है।
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वरिष्ठ अध्यापक में राजस्थान करेंट अफेयर्स के 10 प्रश्न पूछे जाते हैं, लेकिन अभ्यर्थी इन्हें कर नहीं पाते, क्योंकि RPSC अब करेंट अफेयर्स से बहुत गहराई से और तथ्यात्मक प्रश्न पूछने लगी है। अभ्यर्थी केवल कुछ पुस्तकों के भरोसे रह जाते हैं, जबकि RPSC सुजस, PIB, टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका जैसे स्रोतों से प्रश्न पूछती है। हर परीक्षा में नीतियों से संबंधित एक-दो प्रश्न आते हैं और RPSC इन प्रश्नों को सीधे वेब पर उपलब्ध नीति की मूल PDF से बनाती है। चूँकि ये PDF अंग्रेजी में होती हैं, इसलिए कोई भी प्रकाशन उन्हें विस्तार से लिखता नहीं है और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी पीछे रह जाते हैं। खेल, खिलाड़ी, पुरस्कार और व्यक्ति विशेष से संबंधित प्रश्न दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका से सीधे पूछे जाते हैं। पुस्तकों में इन्हें भी पूरी तरह शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि कौन रोज चार-चार समाचार-पत्र पढ़कर उनकी सामग्री को संकलित और टंकित करे। इस विषय पर बाजार पुस्तकों से भरा पड़ा है, लेकिन एक भी पुस्तक पूर्ण नहीं है। अधिकांश पुस्तकें सैद्धांतिक रूप से तैयार होने के बजाय नोट्स के रूप में होती हैं, जबकि आवश्यकता ऐसी सामग्री की है जिसमें सिद्धांत और विषय की पूरी समझ पर जोर दिया जाए। आज करेंट अफेयर्स केवल तथ्यों को याद करने का विषय नहीं है, बल्कि समझ और तर्क-वितर्क का विषय भी है। इसे पार करना है तो बाजार को इसका समाधान निकालना होगा। तभी RPSC में करेंट अफेयर्स के इन प्रश्नों में बेहतर अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। अन्यथा अभ्यर्थियों को इस कमी की भरपाई के लिए परीक्षा के दूसरे भागों पर अधिक जोर देना होगा। उपकार 🌺
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रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ 🌺
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कई जिलों में विद्या संबल योजना स्थगन के आदेश जारी नहीं हुए है। फॉर्म चालू है। ☺️
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विद्या संबल योजना स्थगित कर दी गई है। विस्तृत विज्ञापन बाद में जारी होगा। एक‌ तरह की ठेका प्रथा....फिर उम्मीद की जाती है कि इन अस्थायी इंतज़ामों से राजस्थान का शिक्षा तंत्र स्थायी रूप से मजबूत हो जाएगा। सबसे सुंदर बात यह है कि अस्थायी नियुक्ति से सरकार का काम भी चल जाता है और स्थायी भर्ती का सवाल भी कुछ समय के लिए टल जाता है। ☺️
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इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। देर-सवेर सरकार स्वीकृत भी कर देगी ( 2027 ) फिलहाल तो 40% लाना ही सबकुछ है। ☺️
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40% का नियम स्वाध्याय की दृष्टि से सही है। कोचिंग की नजर में गलत...सरकार इसे सहर्ष स्वीकृति दे रही है क्योंकि उन पर कोचिंग माफियाओं का प्रेशर है। सामान्य ज्ञान पेपर का स्तर समान ही रहना है, तो विषय तैयार करें। ☺️
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हर परिणाम के बाद आयोग को कोसना आसान है। सरकार को दोष देना आसान है। पेपर बनाने वाले को दोष देना आसान है। कटऑफ को दोष देना आसान है। कोचिंग को दोष देना भी आसान है, लेकिन सबसे कठिन प्रश्न है— “अगर कल मेरे सामने मेरे पूरे पाठ्यक्रम की किसी किताब को खोलकर कोई भी पृष्ठ पढ़ने को कहा जाए, तो क्या मैं उसे समझकर समझा सकता हूँ?” यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो समस्या केवल परीक्षा में नहीं है। हमें अपनी अध्ययन-पद्धति बदलनी होगी। स्वाध्याय करना होगा। तर्क वितर्क, किताबें ही चयन का आधार है न कि गुरु और कोचिंग...यह सिर्फ मार्गदर्शन दे सकते है चयन नहीं। • उपकार ☺️
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पॉलिटिकल साइंस (स्कूल व्याख्याता) 2025 में 645 पदों पर मात्र 67 अभ्यर्थी पास , 578 पद खाली स्कूल व्याख्याता 2024 - 225 पदों पर 6 सहायक आचार्य 2025 - 83 पदों पर 40 स्कूल व्याख्याता 2025 - 645 पदों पर 67 GK का पेपर सबके लिए समान है। 40% आराम से होता है बर्शते आप एक साल लगातार पढ़ते हो...प्रथम पेपर के सभी विषय तैयार करते हो 👍
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थॉर्नडाइक के अनुसार सीखना केवल यह नहीं है कि आपने किसी चीज़ को पढ़ लिया और वह आपको याद हो गई। सीखना दरअसल प्रयत्न, भूल और अनुभव से गुजरने की प्रक्रिया है। इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब यह हुआ कि जब आप किसी काम को पहली बार करते हैं, तो जरूरी नहीं कि पहली कोशिश में ही सफल हो जाएँ। आप प्रयास करेंगे। गलती होगी। फिर दूसरा प्रयास करेंगे। कुछ सुधार होगा। फिर प्रयास करेंगे। और धीरे-धीरे गलत प्रतिक्रियाएँ कम होती जाएँगी तथा सही प्रतिक्रिया मजबूत होती जाएगी। थॉर्नडाइक ने इसे ‘प्रयत्न एवं भूल’ कहा। इसीलिए जिंदगी में अपनी गलतियों से घबराइए मत हर गलती आपकी असफलता नहीं होती; कई बार वही गलती आपको सही रास्ते तक पहुँचाने वाला अनुभव होती है। थॉर्नडाइक का ‘प्रभाव का नियम’ (Law of Effect) भी यही संकेत देता है कि जिस व्यवहार के बाद संतोषजनक परिणाम मिलता है, उसके दोबारा होने की संभावना बढ़ जाती है। यानी— जिस काम से सफलता मिली, हम उसे दोहराने लगते हैं। जिस काम से असफलता या असंतोष मिला, हम धीरे-धीरे उससे बचना सीखते हैं। इसलिए अगर आज आप किसी चीज़ में असफल हुए हैं, तो यह मत समझिए कि आप सीख नहीं सकते। हो सकता है आप बस उस सही प्रतिक्रिया तक पहुँचने के रास्ते में हों। याद रखिए— बार-बार प्रयास करने वाला व्यक्ति केवल प्रयास नहीं करता, वह हर प्रयास के साथ अपनी गलतियों को छाँटता जाता है। और एक दिन वही व्यक्ति सफल हो जाता है, क्योंकि उसने असफलताओं को अंत नहीं माना— उन्हें सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना। थॉर्नडाइक का सिद्धांत हमें यही सिखाता है— प्रयत्न करते रहिए, भूल से सीखते रहिए, सही प्रतिक्रिया को मजबूत करते रहिए। क्योंकि कई बार सफलता किसी एक महान प्रयास का परिणाम नहीं होती, बल्कि सैकड़ों छोटी-छोटी गलतियों से सीखकर सही प्रयास तक पहुँचने का परिणाम होती है। ☺️
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जिसकी भी तैयारी कर रहो हो,‌ ताकत से लग जाओं...तीनों Grade की परीक्षाएँ 2027 अंत तक हो जायेगी। तीनों में अच्छे पद है। Grade 2 Gk की बुक्स एक महीने बाद ही लाए...PCP पब्लिकेशन की...SST से है तो सब्जेक्ट कॉम्बो भी मिल जायेगा। ☺️
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रातों के भँवर में खोते जाते लोगों से भला किसने पूछा कि दुःख क्या है! कजलाई रहती आँखों के सूनेपन को किसने भर नज़र देखा और हृदय से लगाया। हँसते-हँसते जो अचानक मौन हो जाए, उसके कंधे पर कब किसी ने स्नेह से हाथ रखा! अपने दुःख स्वयं रोने होते हैं, अपने आँसू स्वयं पोंछने पड़ते हैं, और स्वयं ही स्वयं को संभालना होता है, मित्र! मुस्कुराते रहो, और जगत् की भीड़ से दूर किसी एकांत कोने में लिखते रहो अपनी कहानी, गढ़ते रहो अपना संघर्ष… देखना, एक दिन विजय तुम्हारी होगी, एक दिन समस्त दुःख मिट जाएँगे ❤️ कैसे हो सब 😅
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जुलाई PDF ❎ 😐
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व्याख्याता हिन्दी परिणाम जारी...40% वाले सभी चयनित हुए है। ☺️
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प्रक्रियाधीन भर्तियां ✍
प्रक्रियाधीन भर्तियां ✍
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Grade 1/2/3 Notification Dec/Jan/Feb Exam sep/oct/nov 2027 Cet ke bad all notification √ Ab mt puchna kush ✍🌺
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अब समय है सही मार्गदर्शन के साथ-साथ मूल पुस्तकों और भर्ती परीक्षा में उनकी वेटेज के अनुसार अध्ययन का। अब सजग अभ्यर्थी के सिवा rpsc परीक्षा को आसानी से पार करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। सचेत होकर, समझदारी के साथ और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन से ही सफलता की राह आसान होगी। आरपीएससी ने पेपर बनाने का तरीका जरूर बदला है, लेकिन इतना नहीं कि एक गंभीर, सजग और सचेत अभ्यर्थी उसमें अपना चयन सुनिश्चित नहीं कर पाए। राजस्थान लोक सेवा आयोग हमेशा से ही लगभग हर चार-पाँच वर्ष में प्रश्नपत्र निर्माण का तरीका बदलता रहा है। इसलिए एक गंभीर अभ्यर्थी को यह समझना चाहिए कि इस बार किन मानक पुस्तकों को आधार बनाया जा रहा है और लगातार किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा रहे हैं। यही बदलते परीक्षा पैटर्न का सही संकेत देता है। इसके लिए विगत तीन-चार वर्षों के PYQ का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। आज बात करते हैं वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा 2025 (हिंदी) की, जिसका आयोजन 13 जुलाई 2026 को हुआ। इसमें प्रश्नों की संख्या क्या रहेगी, प्रश्न किस प्रकार के होंगे और पेपर का पैटर्न कैसा रहेगा—इसका अनुमान हमने स्कूल व्याख्याता भर्ती 2025 के प्रश्नपत्र का विश्लेषण करके पहले ही लगा लिया था। अब समझदार अभ्यर्थी को यह समझना होगा कि आयोग फिलहाल हिंदी साहित्य के इतिहास को सीमित कर रहा है, जबकि हिंदी व्याकरण तथा गद्य-पद्य विधाओं (रचनाओं) पर विशेष जोर दे रहा है। इस भर्ती परीक्षा में हिंदी साहित्य के इतिहास से मात्र 10 प्रश्न पूछे गए, वह भी अपेक्षाकृत सरल स्तर के। सर्वाधिक प्रश्न हिंदी व्याकरण से पूछे गए जिनकी संख्या 52 थी। जिसमें कुछ अवधारणात्मक और कुछ मॉडर्ड स्तर के जो काफी उलझन भरे थे। गद्य-पद्य विधाओं (रचनाओं) से 40 प्रश्न पूछे गए, जिनका स्तर काफी उच्च था। लगभग हर प्रकार की भर्ती परीक्षा में अब इस भाग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसलिए हिंदी साहित्य के अभ्यर्थियों को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भारतीय काव्यशास्त्र (जो ग्रेड सेकंड का हिस्सा है) से 23 प्रश्न पूछे गए, जिनका स्तर भी काफी अच्छा और स्तरीय रहा। हिंदी भाषा एवं देवनागरी लिपि से पूर्व की तरह 5 प्रश्न पूछे गए, जिन्हें आसानी से किया जा सकता था। वहीं शिक्षण विधियों से संबंधित 20 प्रश्न पूर्ववत निर्धारित संख्या में पूछे गए, जिनका स्तर भी काफी अच्छा रहा। संक्षेप में प्रश्नों का वितरण इस प्रकार रहा— " हिंदी व्याकरण — 52 प्रश्न" "गद्य-पद्य विधाएँ (रचनाएँ) — 40 प्रश्न" "भारतीय काव्यशास्त्र — 23 प्रश्न" "शिक्षण विधियाँ — 20 प्रश्न" "हिंदी साहित्य का इतिहास — 10 प्रश्न" "हिंदी भाषा एवं देवनागरी लिपि — 5 प्रश्न" इसी प्रकार प्रश्नपत्र का विश्लेषण करते हुए हिंदी साहित्य के गंभीर अभ्यर्थियों को निकट भविष्य में आरपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली भर्तियों की तैयारी को आगे बढ़ाना चाहिए। वरिष्ठ अध्यापक हिंदी और स्कूल व्याख्याता हिंदी में आरपीएससी किन-किन मानक पुस्तकों को आधार बनाकर प्रश्नपत्र तैयार कर रही है, इस विषय पर भी शीघ्र ही विस्तार से चर्चा करेंगे तथा प्रत्येक भाग के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकों का नामोल्लेख करेंगे। आशा है कि मेरे द्वारा साझा की गई यह जानकारी आपकी तैयारी को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेकानेक शुभकामनाएँ। — हनुमान विश्नोई
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वरिष्ठ अध्यापक करेंट में PDF का स्कोर औसत 6/7/8 💐
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इन 13 पेज में सुजस और PIB पूर्ण रुप से सम्मानित है। RPSC की किसी भी परीक्षा में शत् प्रतिशत करेंट के लिए सुजस, PIB और भास्कर को प्रतिदिन पढ़ें ☺️
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