fa
Feedback

فریب کلاهبرداران را نخورید! تل‌متریو این کانال‌ها را شناسایی و برچسب‌گذاری می‌کند 👉 برای مشاهده برچسب، اشتراک تهیه کنید

MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS

MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS

رفتن به کانال در Telegram

👉BEST MPPSC FREE PDF NOTES H+E👌 👉 ONLY #MPPSC NOTES @MP_PSC_Notes 🎯 👉MP current Affairs Static GK JOIN US NOW @MP_PSC_Notes Quiz group @MP_PSC_QUIZ suggestions/feedbacks यदि हमारे किसी कंटेंट से समस्या है तो आप हमें 📞contact करें👉 @MPEXAMGURUJIbot

نمایش بیشتر

📈 تحلیل کانال تلگرام MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS

کانال MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS (@mp_psc_notes) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 13 635 مشترک است و جایگاه 14 962 را در دسته آموزش و رتبه 28 693 را در منطقه الهند دارد.

📊 شاخص‌های مخاطب و پویایی

از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 13 635 مشترک جذب کرده است.

بر اساس آخرین داده‌ها در تاریخ 06 نوامبر, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر -42 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر -10 بوده و همچنان دسترسی گسترده‌ای حفظ شده است.

  • وضعیت تأیید: تأیید نشده
  • نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 15.63% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 4.08% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب می‌کند.
  • دسترسی پست‌ها: هر پست به طور میانگین 2 132 بازدید دریافت می‌کند. در اولین روز معمولاً 557 بازدید جمع‌آوری می‌شود.
  • واکنش‌ها و تعامل: مخاطبان به‌طور فعال حمایت می‌کنند؛ میانگین واکنش به هر پست 1 است.
  • علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند 2025, ऑफर, परीक्षा, स्टेशनरी, अमेजॉन تمرکز دارد.

📝 توضیح و سیاست محتوایی

نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاه‌های شخصی توصیف می‌کند:
“👉BEST MPPSC FREE PDF NOTES H+E👌 👉 ONLY #MPPSC NOTES @MP_PSC_Notes 🎯 👉MP current Affairs Static GK JOIN US NOW @MP_PSC_Notes Quiz group @MP_PSC_QUIZ suggestions/feedbacks यदि हमारे किसी कंटेंट से समस्या है तो आप हमें 📞contact करें👉 @MPEXAMGURU...”

به لطف به‌روزرسانی‌های پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 07 نوامبر, 2026)، کانال همواره به‌روز و دارای دسترسی بالاست. تحلیل‌ها نشان می‌دهد مخاطبان به‌طور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کرده‌اند.

13 635
مشترکین
-1024 ساعت
-277 روز
-4230 روز
آرشیو پست ها
मध्य प्रदेश के प्रमुख खनिज (Minerals of Madhya Pradesh) तथा उनके उत्पादक जिले निम्न प्रकार हैं: खनिज उत्पादक जिले बेरिल बालाघाट छिंदवाड़ा राजगढ़ सोना सिंधी कटनी शहडोल टंगस्टन होशंगाबाद (आगर गांव) फ्लोराइड जबलपुर यूरेनियम शहडोल बैराइट धार सिंधी शिवपुरी देवास झाबुआ कोयला शहडोल सिंगरौली. छिंदवाड़ा. होशंगाबाद .बेतूल हीरा पन्ना सतना छतरपुर मैगनीज बालाघाट .छिंदवाड़ा .जिला खरगोन चूना पत्थर .जबलपुर. मंदसौर ,सतना .कटनी स्लेट मंदसौर पाइराइट टीकमगढ़, देवास. धार. झाबुआ. शिवपुरी ,सिधी .रीवा डोलोमाइट बालाघाट .नरसिंहपुर ,सिवनी, छिंदवाड़ा ,जबलपुर, मलाजखंड, बालाघाट. होसंगाबाद .सागर .झाबुआ अभ्रक बालाघाट, छिंदवाड़ा. होशंगाबाद. मंदसौर ग्रेफाइट बेतूल सिलीमाइट रीवा .सिंधी ,एस्बेस्टस. झाबुआ घीया पत्थर भेड़ाघाट. झाबुआ, नरसिंहपुर सुरमा ऐन्टी मनी जबलपुर शीशा होशंगाबाद, दतिया ,शिवपुरी झाबुआ, जबलपुर चीनी मिट्टी खतौली रीवा ,आंतरी .ग्वालियर, जबलपुर .शहडोल रंगीन ग्रेनाइट बेतूल छिंदवाड़ा. सिवनी ग्रेनाइट पन्ना ,छतरपुर. सागर ,दतिया रॉक फॉस्फेट झाबुआ, छतरपुर ,सागर शवेत ग्रेनाइट जबलपुर ,ग्वालियर गेरू(फेरिक ऑक्साइड) सतना. पन्ना, ग्वालियर ,जबलपुर फेल्सपार छिंदवाड़ा, जबलपुर ,शहडोल संगमरवर जबलपुर. बेतूल ,सिवनी ,छिंदवाड़ा, ग्वालियर , झाबुआ कोरनडम पीपरा परकोटा ,सिंगरौली ऐनडेलुसाइट चांद नगर डायस्पोर छतरपुर , टीकमगढ़ .शिवपुरी ,जबलपुर लोहा ,अयस्क जबलपुर. विदिशा ,मंडला ,बालाघाट टिन बैतुल तांबा बालाघाट. कटनी ,सागर ,होशंगाबाद बाकसाईड अनूपपुर. मंडला .जबलपुर .रीवा .सतना जिप्सम रीवा .शहडोल Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

उरांव इनका मुखिया ‘महतो’ कहलाता है, तथा पुरोहित ‘बैगा’। इनके युवागृह ‘धुमकोरिया’ कहलाते हैं। पर्व-त्यौहार: सरना पूजा, करना पूजा, कुल देव पूजा। नृत्य: सरहुल, करमा, घुड़िया डंडा। विवाह पद्धति: बुंदे विवाह, बंदवा, ढुंकू। बोली: कुरूख। खैरवार खैर वृक्ष से कत्था निकालने के कारण खैरवार कहलाने वाली इस जनजाति का वितरण उमरिया, सिद्दी, अनूपपुर तथा शहडोल में मुख्यतः है। कोरवा कोरवा जनजाति की पंचायत को ‘मैयारी’ कहते हैं। बंजारा भारत की यायावर जनजाति ‘बंजारा’ पर कबिलाई पद्यति का प्रभाव आज भी है । कबीले का एक मुखिया होता है जिसे नायक कहते हैं। बंजारा स्त्रियां संसार की सर्वाधिक श्रृंगार प्रिय जनजाति हैं। पहले यह जनजाति ‘बालद’ लादकर लाती थी अर्थात बैलों पर लादकर जीवनपयोगी सामग्री विक्रय करती थी। अब इनका प्रमुख व्यवसाय पशु चारण है। धानुक जनजाति इस जनजाति के लोग मुख्यतः भिंड, मुरैना, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, इंदौर, सतना जिले में निवास करते हैं। धानुक शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘धनुष्क’ से हुई है जिसका अर्थ है धनुष रखने वाला। इनमे विवाह सामान्यतः बाल्यावस्था में हो जाता था। सौर जनजाति यह सागर और दमोह जिले में निवास करती है। सौर लोगों में भवानी की पूजा की जाती है जिसका नाम दूल्हादेव भी है। बिंझवार जनजाति बिंझवार मध्य प्रदेश की अल्पसंख्यक जनजाति है। यह मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला में निवास करती है। ये मूलतः द्रविड़ियन परिवार के हैं। इनका उडगन विंध्यांचल पर्वत मन जाता है। पंचायत का मुखिया ‘पटल’ अथवा ‘गौटिया’ कहलाता है। Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Major tribes of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ ‘जनजाति’ एक सामाजिक समूह है जो प्रायः निश्चित भू-भाग पर निवास करता है जिसकी अपनी भाषा, सभ्यता तथा सामाजिक संगठन होता है। 2011 की जनगणना के अनुसार जनजातियों (tribes of Madhya Pradesh) का प्रतिशत मध्य प्रदेश में 21.1 प्रतिशत है। लगभग 24 जनजातियां यहां निवास करती हैं। अपनी उपजातियों समेत इनकी संख्या 90 के लगभग हो जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में 15316784 जनसँख्या इन जनजातियों की है जो अब भी भारत में सर्वाधिक है। tribes of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ निम्नलिखित है: गोण्ड मध्य प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी और भारत का सर्वप्रमुख सबसे बड़ा जनजाति समूह गोण्ड है। गोण्ड की उत्पत्ति तेलुगु के ‘कोंड’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ पर्वत है अर्थात यह जनजाति पर्वतों पर निवास करती है। इनमे अनेक प्रकार के विवाह होते हैं, दूध लौटाना, पठौनी, चढ़ विवाह, लमसेना विवाह इनके 7 प्रमुख पर्व, त्यौहार हैं, बिदरी, बकपंथी, हरडिली, नवाखानी, जवारा मडई और छेरता। गोंड दो प्रमुख वर्गों में विभक्त रहे हैं, राजगोंड और धुरगोंड। प्रमुख देवता: हिन्दू देवताओं के साथ ठाकुर देव, माता बाई, दूल्हादेव, बाधेश्वर, सूरजदेव, खैरमाता। प्रमुख नृत्य: करमा, सैला, भडौनी, सुआ, दीवानी, बिरहा, कहरवा आदि। भील जनजाति मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति भील है। भील का अर्थ है कमान। ये धनुष रखते हैं इसलिए भील कहलाते हैं। उपजातियां: भील, भीलाला, पतालिया, राठियास और बैगास। भील जहां रहते हैं उस जगह को ‘फाल्या’ कहते हैं। भीलों के पारम्परिक पर्व: गलछेड़ो, भगोरिया नबई, चलावणी, जातरा। पिथौरा भीलों का विश्व प्रसिद्द चित्र है और श्री पेमा फल्या उसके श्रेष्ठ कलाकार हैं। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में आयोजित भगोरिया हाट भीलों का प्रसिद्द प्रणय पर्व है जो होली के अवसर पर आयोजित होता है। बैगा मध्य प्रदेश के दक्षिण क्षेत्र में बैगा सर्वाधिक महत्वपूर्ण जनजाति है। यह गोंडों की ही उपजाति मानी जाती है। उपजातियां: भरोरिया, नरोतिया, रैनना, कथमैना। इस जनजाति पर लिखी गयी पुस्तक ‘बैगा’ के रचियता ‘बैरियर एल्विन’ हैं। इनमे बासी भोजन की परम्परा है। प्रमुख नृत्य: करमा, सैला, परधोन और फाग। ‘साल’ इनका प्रिय वृक्ष है जिसमे इनके देवता भूढ़ा देव निवास करते हैं। सहरिया जनजाति इनकी बसाहट को सहराना कहा जाता है, जिसका मुखिया ‘पटेल’ होता है। सहरिया जड़ी-बूटियों की पहचान में सिद्धहस्त होते हैं। यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है। इस जनजाति का मूल निवास शाहबाद जंगल (कोटा, राजस्थान) है। भारिया यह द्रविड़ियन या कोलेरियन समूह की जनजाति है। भारिया में चूड़ी प्रथा है। इनका मुख्य भोजन पेज है। इनकी बोली भरनोटी है। प्रमुख नृत्य: भरम, सैतम, करमा, सैलाना। प्रमुख देवता: बूढ़ादेव, दूल्हादेव, बरुआ, नागदेव। कोल यह मध्य प्रदेश की तीसरी बड़ी जनजाति है। इनके दो मुख्य उपवर्ग हैं – रौतिया और रौतल। इनका ‘दहका’ नृत्य अत्यंत प्रसिद्द है। कोल जनजातियों की पंचायत को ‘गोहिया’ कहा जाता है। कोरकु यह एक आदिम जनजाति है जो मध्य प्रदेश के दक्षिण जिलों में निवास करती है। इनमे कई विवाह प्रचलित हैं जैसे – इमझना , चिथोड़ा, राजनी-बाजी, विधवा-विवाह, हठ विवाह आदि। उपजातियां: पटरिया, रूमा, दुलायरा और बोवई। ‘खम्बस्वाँग’ इनका प्रसिद्द नृत्य प्रधान नाटक है। अगरिया गोंडों की एक शाखा ‘अगरिया’ जनजाति का व्यवसाय लोहे को गलाकर औजार बनाना है, अतः अगरिया कहलाते हैं। प्रमुख देवता: लोहासूर ये अपने देवता को काली मुर्गी की भेंट चढ़ाते हैं इनका प्रिय भोजन सूअर का मांस है। पारधी जिसका अर्थ है – आखेट। यह बहेलिया श्रेणी की जनजाति है, बंदरों का शिकार कर उनका मांस खाते हैं। इस जनजाति का मुख्य निवास भोपाल, रायसेन व सीहोर जिलों में है। पनिका पनिका मुख्यतः छत्तीसगढ़ के विंध्य प्रदेश की जनजाति हैं। यह मध्य प्रदेश के सीधी व शहडोल में पायी जाती हैं। इस जनजाति के लोग कबीर पंथी हैं, ये ‘कबीरहा’ भी कहलाता है। कबीरहा मांस मदिरा का सेवन नहीं करते है। सूर्य, इंद्र, हनुमान, दूल्हादेव, बुद्धीमाता, मरहीमाता, हल्की भाई आदि की पूजा। Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Forts in Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश के प्रमुख किले निम्नलिखित हैं: ग्वालियर का किला इसे किलों का रत्न, पूर्व का “जिब्राल्टर” कहा जाता है। इसका निर्माण कछवाहा वंशी राजा सूरजसेन ने सं 525 ई० में करवाया था। ग्वालियर किले के पांच द्वार हैं:आगलगीरी/आलमगीरी हिंडोला गूजरीमहल चतुर्भुज मंदिर दरवाजा हाथी बाड़ा दरवाजा ग्वालियर के किले में निम्न इमारतें महत्वपूर्ण हैं:मान मंदिर गूजरीमहल तेली का मंदिर हाथी की विशाल प्रतिमा (तोमर नरेश मानसिंह द्वारा) तेली का मंदिर उत्तर भारत में एकमात्र द्रविड़ शैली से निर्मित मंदिर है। सास बहु का मंदिर: 11वीं सदी में राजा महिपाल द्वारा निर्मित। इसमें भगवान् सहस्त्रबाहु (विष्णु) की मूर्ति है। इस किले की तलहटी में 15वीं शताब्दी के राजा डोंगर सिंह द्वारा बनवाये जैन मंदिर हैं। जिसमे सर्वाधिक ऊंची प्रतिमा जैन तीर्थकर आदिनाथ की है। इसी किले में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गुरुद्वारा “दाता बंदी छोड़” है। ग्वालियर का पुराण नाम गोपांचल है। ग्वालियर के किले का निर्माण गालब ऋषि के सम्मान में करवाया गया था। धार का किला इस किले का पुनर्निर्माण 1344 में मुहम्मद बिन तुगलक ने दक्षिण विजय के दौरान देवगिरि जाते समय करवाया था। इस किले के अंदर देवी कालका मंदिर का निर्माण परमार नरेश मुंज ने करवाया था। इस किले में पेशवा बाजीराव का जन्म हुआ था। 1732 में मराठाओं ने अपने अधिकार में ले लिया। इसी किले में खरबूजा/खारवाना महल स्थित है। अब्दुल शाह चंगश का कम्बरा है। असीरगढ़ का किला बुरहानपुर जिले में अवस्थित इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में अहीर राजा “आशा” ने करवाया था। इसको “दक्षिण का द्वार” बुरहानपुर दर्रा कहा जाता है। मुमताज महल की मृत्यु इसी महल में हुई थी। इसे अकबर ने सोने की चाबियों से विजित किया था। चंदेरी का किला मुगांवली (अशोक नगर) में अवस्थित चंदेरी के किले का निर्माण प्रतिहार वंश के राजा कीर्तिपाल (11वीं सदी) द्वारा करवाया गया था। यह बेतवा नदी के किनारे स्थित है। चंदेरी के किले में निम्न मशहूर इमारतें हैं:हवा महल जौहरा कुंड नौखण्डा महल खूनी दरवाजा जौहर कुंड (1528) में बाबर के आक्रमण के समय 300 राजपूत रानियों ने प्रज्वलित अग्नि में प्राण दिए थे। इस समय यहां का शासक मेदनीराय था। वर्तमान में चंदेरी हाथ से बानी सीड़ियों के लिए प्रसिद्द है। गिन्नौरगढ़ का दुर्ग जिला: रायसेन इस दुर्ग का निर्माण 13वीं शताब्दी में महाराजा उदय वर्मन ने अशर्फी पहाड़ी पर करवाया था। यह क्षेत्र “शुक क्षेत्र” कहा जाता है क्योकि इस क्षेत्र में तोते बहुतायत में पाए जाते हैं। इसे ‘तोते’ का किला भी कहा जाता है। रायसेन का दुर्ग इस दुर्ग का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा “राजबसंती” ने करवाया था। इस दुर्ग में निम्नलिखित इमारतें हैं:बादल महल गजारोहित महल इत्रदार महल इस किले में चार तालाब हैं जिसमे से ‘शेषग्राही तालाब’ अत्यधिक प्रसिद्द है। बांधवगढ़ का किला जिला: उमरिया 14वीं शताब्दी में बघेलखण्ड के राजा व्याघ्र देव द्वारा निर्मित है। यह दक्षिण पूर्व रेलमार्ग के कटनी बिलासपुर मार्ग पर स्थित है। यहां शेषाशाही तालाब व विष्णु का मंदिर अवस्थित है। बांधवगढ़ राष्ट्रीय पार्क में अवस्थित। यह किला विंध्यांचल पर्वतमाला पर 900 मी० की ऊंचाई पर स्थित है। 16वीं शताब्दी में बघेलखण्ड के राजा विक्रमादित्य ने अपनी राजधानी बांधवगढ़ से रीवा स्थानांतरित की। अजयगढ़ का किला जिला: पन्ना निर्माण: राजा अजयपाल द्वारा यह किला बारीक पत्त्थरों की नक्काशी के लिए प्रसिद्द है। इस किले में राजा अमन का महल स्थित है। ओरछा का किला जिला: टीकमगढ़ निर्माण: बुंदेलवंशी राजा ‘वीरसिंह बुंदेला’ द्वारा यह दुर्ग बेतवा नदी के किनारे स्थित है। इस दुर्ग में निम्न मंदिर हैं:चतुर्भुज मंदिर राम मंदिर लक्ष्मीनारायण मंदिर जहांगीर महल का निर्माण वीरसिंह बुंदेला ने करवाया था। मंडला का दुर्ग जिला: मंडला यह दुर्ग बंजर एवं नर्मदा नदी के संगम पर स्थित है। इसका निर्माण ‘गौंड नरेश नरेन्द्रशाह’ ने करवाया था मंडला जिले में राजराजेश्वरी भवन का निर्माण निजामशाह ने करवाया था। मदसौर का किला इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था। यहां पर 500 वर्ष पुराना तापेश्वर मंदिर स्थित है। नरवर का किला जिला: शिवपुरी निर्माण: राजा नल द्वारा यह किला राजा नल एवं दमयंती की प्रणय कथा के लिए प्रसिद्द है। यह क्षेत्र कछवाहा, तोमर और जयपुर के राजघराने के लिए प्रसिद्द है। Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Palace in Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश के प्रमुख महल निम्नलिखित हैं: गुजरीमहल/दानमहल स्थान: ग्वालियर निर्माण: मानसिंह द्वारा मोतीमहल स्थान: ग्वालियर जीवाजीराव सिंधिया का महल जयविलास पैलेस स्थान: ग्वालियर इटालियन शैली पर निर्मित सिंधिया का निवास स्थान वर्तमान में संग्रहालय बघेलीन महल स्थान: मंडला मोतीमहल के पूर्व में 8 किमी दूर नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित है मदन/मढन महल स्थान: जबलपुर निर्माण: गोड़राजा मदनशाह द्वारा खरबूजा महल स्थान: धार धार किले में स्थित है राजारोहित का महल स्थान: रायसेन के दुर्ग में निर्माण: राजबसंती द्वारा बादल महल, इत्रदार महल स्थान: रायसेन हवा महल स्थान: चंदेरी निर्माण: कीर्तिपाल द्वारा अशोकनगर किले में स्थित नौखण्डा महल स्थान: चंदेरी राजा अमन का महल स्थान:अजयगढ़, पन्ना निर्माण: अजयपाल द्वारा जहांगीर महल स्थान:ओरछा निर्माण: वीरसिंह द्वारा राजमंदिर महल स्थान: ओरछा निर्माण: बीर सिंह द्वारा अशर्फी महल स्थान: मांडू ‘धार’ यह अफगानी कला में निर्मित कटोरीनुमा है। दाई का महल स्थान: मांडू वर्तमान में महत्वपूर्ण कला कृतियों का संग्रहालय है। रानी रूपमती का महल स्थान: मांडू बाज बहादुर का प्रेयसी रानी रूपमती का महल Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Tourist Places of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं: पंचमढ़ी पंचमढ़ी यहां का प्रमुख हिल स्टेशन है। होशंगाबाद जिले में पिपरिया स्टेशन के निकट स्थित है। इसकी खोज फोरसिथ ने की थी। दर्शनीय स्थल: प्रियदर्शनी और हाड़ी खोह, अप्सरा-बिहार, रजत प्रपात, राजगिरि, लांजी गिरी, आइरीन सरोवर, जलावरण (डचेस फॉल), चौरागढ़, धूपगढ़, पांडव गुफाये, धुआँधार, भ्रांत नीर (डीरोथी डिप), अस्तांचल, बीनवादक की गुफा (हार्पर केव) तथा सरदार गुफा, राज्य की पुलिस प्रशिक्षण शाला आदि। अमरकंटक: प्रमुख हिल स्टेशन है जो पुष्पराजगढ़ तहसील (अनूपपुर जिले) में है। नर्मदा, सोन, जाहिला तीन नदियों का उद्गम स्थल। 2005 में पवित्र नगर घोषित। दर्शनीय स्थल: कपिलधारा व दुग्धधारा जल प्रपात, सोनमुडा, माइकी बगीया, कबीर चौराहा, भृगु कमण्डनल, पुष्कर बाँध। खुजराहो: छतरपुर जिले में स्थित चंदेल राजा धंग द्वारा निर्मित मंदिर (11वीं सदी) यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल दर्शनीय स्थल: कंदरिया महादेव, चौंसठ योगिनी, चित्रगुप्त, विश्वनाथ मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, मांतगेश्वर मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, घंटाई मंदिर, आदिनाथ मंदिर, दक्षिण समूह – दूल्हादेव मंदिर तथा चतुर्भुज मंदिर, बेनी सागर बाँध तथा स्नेह प्रपात। मांडू (City of Joy): मालवा का सौंदर्य स्थल मांडू को शादियाबाद अर्थान हर्ष नगर से जाना जाता था। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित मांडू का प्राचीन नाम मण्डपदुर्ग या मांडवगढ़ था। बाजबहादुर ने जहाज-महल, हिंडोला महल का निर्माण कराया। दर्शनीय स्थल: मांडू का परकोटा – जिसमे 12 दरवाजे हैं जो रामपोल, तारापुर दरवाजा, जहांगीर दरवाजा, दिल्ली दरवाजा, जहाज महल, हिंडोला महल, होशंगशाह का मकबरा, जमा मस्जिद, असर्फी महल, रेवा कुंड, रूपमती मंडप, नीलकंठ महल, हाथी महल तथा लोहानी गुफाएं। सांची: जिला: रायसेन यह भोपाल से 45 किमी दूर स्थित है। इसका प्राचीन कालीन नाम ‘काकणाय’ या ‘बौद्ध श्रीपर्वत’ था। निर्माण: मौर्य सम्राट अशोक द्वारा स्तूपों में सबसे बड़ा मोग्ल्यान और सारिपुत्र की अस्थियों चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के सेनापति आक्रमादेव का अभिलेख देखने को मिलता है। यह भी पढ़ें – – मध्य प्रदेश के प्रमुख महल – Palace in Madhya Pradesh विदिशा: इसका प्राचीन नाम भिलसा या बेसनगर था। दर्शनीय स्थल: लोहोंगी शीला, गुम्बज, बीजा मंडल, सम्राट अशोक सागर (हलाली सागर) ग्वालियर: इसकी स्थापना गालव ऋषि के नाम पर हुई। दर्शनीय स्थल: ग्वालियर दुर्ग (बलुए पत्थर), गूजरी महल, मान मंदिर, सूरजकुंड, तेली का मंदिर, सास बहु का मंदिर, जयविलास महल, रानी लक्ष्मीबाई की अश्वारोही मूर्ति, संग्रहालय, तानसेन की समाधि, गॉस मोहम्मद का मकबरा, रानी लक्ष्मीबाई की समाधि, कला वीथिका, नगरपालिका संग्रहालय, चिड़ियाघर, गुरुद्वारा, सूर्य मंदिर बवनगजा बवनगजा एक प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल है यहाँ 72 फीट ऊंची जैन मूर्ति है उदयगिरी की गुफाएं विदिशा स्थित उदयगिरि में बीस गुफाएं हैं। गुफा नं० 1 और 20 जैन धर्म से सम्बंधित है। गुफा नं० 5 में वराह अवतार की विशाल प्रतिमा है। इन गुफाओं का समय गुप्तकाल (4-5वीं शताब्दी) का है। मुक्तागिरी मुक्तागिरी मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है यहाँ 52 मंदिर है उज्जैन: यह क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। दर्शनीय स्थल: महाकालेश्वर मंदिर, जंतर-मंतर, चिंतामणि गोपालजी का मंदिर, संदीपनी आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, भर्तृहरि गुफा। यहां पर 12 वर्षों बाद कुम्भ का मेला लगता है। 2005 में इसे पवित्र नगर घोषित किया गया। Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

मकबरा/समाधि स्थान तानसेन का मकबरा ग्वालियर मुहम्मद गौस का मकबरा ग्वालियर बैजु बावरा की समाधि चंदेरी, अशोकनगर होशंगाबाद का मकबरा मांडू, धार पेशवा बाजीराव की समाधि रावरखेड़ी, खरगौन मत्येंद्र पीर की समाधि उज्जैन महारानी सांख्यराजे की समाधि शिवपुरी रानी दुर्गावती की समाधि बरेला, जबलपुर रानी झांसी की समाधि ग्वालियर नवाब हसन सिद्दीकी का मकबरा भोपाल रानी अवंती बाई की समाधि मंडला झलकारी बाई की समाधि ग्वालियर गिरधारी बाई की समाधि मंडला अब्दुल्ला शाह चंगस का मकबरा धार Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Museums of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश के संग्रहालय Museums of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश के संग्रहालय निम्नलिखित हैं: मध्य प्रदेश में केंद्र शासन के संग्रहालय 1. पुरातत्व संग्रहालय, सांची, जिला रायसेन: इसमें हिन्दू और बौद्ध दोनों धर्मों से सम्बंधित अवशेष हैं। 2. पुरातत्व संग्रहालय, खुजराहो, छत्तरपुर: इसमें चंदेल काल ( 11-12वीं शती) की प्रतिमाएं सुरक्षित हैं, जिनमे अग्नि और स्वाहा, अर्धनारीश्वर, आदिनाथ, गजलक्ष्मी तथा मैथुन मूर्तियां प्रमुख हैं। राज्य शासन के संग्रहालय राज्य शासन के अधीन राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर संग्रहालय संचालित हैं:- राज्य स्तरीय संग्रहालय: ये 7 हैं: केंद्रीय संग्रहालय, गुजरीमहल (ग्वालियर) 1909 राजकीय संग्रहालय, भोपाल (1887 और 1964) केंद्रीय पुरातात्विक संग्रहालय, इंदौर (1931) रानी दुर्गावती संग्रहालय, जबलपुर (1975-76) राजकीय संग्रहालय, धुबेला (छतरपुर) (1955) तुलसी संग्रहालय, रामवन (सतना) (1978) दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय, भोपाल जिला संग्रहालय: ये 9 हैं, शिवपुरी, धार, मंडला, विदिशा, शहडोल, राज गज, देवास, मंदसौर और होशंगाबाद में। इनमे से शिवपुरी तीर्थकर प्रतिमाओं के लिए और मंडला जीवाश्म अवशेषों के लिए प्रसिद्द है। स्थानीय संग्रहालय: इनकी संख्या 5 है – भानपुरा (मंदसौर), आशापुरी (रायसेन), महेश्वर (खरगौन), गंधर्वपुरी (देवास) और दमोह में संचालित स्थानीय संग्रहालयों में स्थानीय स्तर पर प्राप्त पाषाण प्रतिमाओं का संग्रह है। विश्वविद्यालयी संग्रहालय तीन विश्वविद्यालयों सागर विश्वविद्यालय, जबलपुर विश्वविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन ने अपने यहां पुरातत्व संग्रहालय स्थापित कर रखे हैं। Notes 👉JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

ं के राजा को पराजित कर दियाइसके बाद सन 1197 में मुहम्मद गौरी ने भी ग्वालिअर पर आक्रमण किया व इसे दिल्ली संतनत में सामिल कर दिया1526 के पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद बाबर ने भी मध्य प्रदेश के ग्वालिअर, चंदेरी, व रायसेन पर अधिकार कर लियामध्य प्रदेश के इतिहास में सत्रहवी शताब्दी में मराठो का उदय हुआ पेशवा बाजीराव ने मध्य प्रदेश के कई हिस्सों को अपने अधिकार में ले लियाअंग्रेजो ने पेशवा बाजीराव को 1818 में पराजित कियामध्य प्रदेश राज्य के प्रतीक चिन्ह – Madhya Pradesh State Symbolsमुगल कालमराठों के उत्कर्ष और ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ मध्यप्रदेश में इतिहास का नया युग प्रारंभ हुआ।पेशवा बाजीराव ने उत्तर भारत की विजय योजना का प्रारंभ किया।विंध्यप्रदेश में चंपत राय ने औरंगजेब की प्रतिक्रियावादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया था।चंपतराय के पुत्र छत्रसाल ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने विंध्यप्रदेश तथा उत्तरी मध्यभारत के कई क्षेत्र व महाकौशल के सागर आदि जीत लिए थे।मुगल सूबेदार बंगश से टक्कर होने पर उन्होंने पेशवा बाजीराव को सहायतार्थ बुलाया व फिर दोनों ने मिलकर बंगश को पराजित किया। इस युद्ध में बंगश को स्त्री का वेष धारण कर भागना पड़ा था।इसके बाद छत्रसाल ने पेशवा बाजीराव को अपना तृतीय पुत्र मानकर सागर, दमोह, जबलपुर, धामोनी, शाहगढ़, खिमलासा और गुना, ग्वालियर के क्षेत्र प्रदान किए।पेशवा ने सागर, दमोह में गोविंद खेर को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया। उसने बालाजी गोविंद का अपना कार्यकारी बनाया।जबलपुर में बीसा जी गोविंद की नियुक्ति की गई।गढ़ा मंडला में गोंड राजा नरहरि शाह का राज्य था। मरोठों के साथ संघर्ष में आबा साहब मोरो व बापूजी नारायण ने उसे हराया।कालांतर में पेशवा ने रघुजी भोसले को इधर का क्षेत्र दे दिया। भोसले का पास पहले से नागपुर का क्षेत्र था। यह व्यवस्था अधिक समय तक नहीं टिक सकी। अंग्रेज सारे देश में अपना प्रभाव बढ़ाने में लगे हुए थें। मराठों के आंतरिक कलह से उन्हें हस्तक्षेप का अवसर मिला।सन् 1818 में पेशवा को हराकर उनहोंने जबलपुर-सागर क्षेत्र रघुजी भोसले से छीन लिया।सन् 1817 में लार्ड हेस्टिंग्स ने नागपुर के उत्तराधिकार के मामले में हस्तक्षेप किया और अप्पा साहब को हराकर नागपुर एवं नर्मदा के उत्तर का सारा क्षेत्र मराठों से छीन लिया। उनके द्वारा इसमें निजाम का बरार क्षेत्र भी शामिल किया गया।सहायक संधि के बहाने बरार को वे पहले ही हथिया चुके थे। इस प्रकार अंग्रेजों ने मध्यप्रांत व बरार को मिला-जुला प्रांत बनाया।महाराज छत्रसाल की मृत्यु के बाद विंध्यप्रदेश, पन्ना, रीवा, बिजावर, जयगढ़, नागौद आदि छोटी-छोटी रियासतों में बंट गया।अंग्रेजों ने उन्हें कमजोर करने के लिए आपस में लड़ाया और संधियाँ की। अलग-अलग संधियों के माध्यम से इन रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य के संरक्षण में ले लिया गया।सन् 1722-23 में पेशवा बाजीराव ने मालवा पर हमला कर लूटा था। राजा गिरधर बहादुर नागर उस समय मालवा का सूबेदार था। उसने मराठों के आक्रमण का सामना किया जयपुर नरेश सवाई जयसिंह मराठों के पक्ष में था।पेशवा के भाई चिमनाजी अप्पा ने गिरधर बहादुर और उसके भाई दयाबहादुर के विरूद्ध मालवा में कई अभियान किए। सारंगपुर के युद्ध में मराठों ने गिरधर बहादुर को हराया।मालवा का क्षेत्र उदासी पवार और मल्हारराव होलकर के बीच बंट गया। बुरहानपुर से लेकर ग्वालियर तक का भाग पेशवा ने सरदार सिंधिया को प्रदान किया।इसके साथ ही सिंधिंया ने उज्जैन, मंदसौर तक का क्षेत्र अपने अधीन किया।सन् 1731 में अंतिम रूप से मालवा मराठों के तीन प्रमुख सरदारों पवार (धार एवं देवास) होल्कर (पश्चिम निमाड़ से रामपुर-भानपुरा तक ) और सिंधिया (बुहरानपुर, खंडवा, टिमरनी, हरदा, उज्जैन, मंदसौर व ग्वालियर)ʔ के अधीन हो गया।भोपाल पर भी मराठों की नजर थी। हैदराबाद के निजाम ने मराठों को रोकने की योजना बनाई, लेकिन पेशवा बाजीराव ने शीघ्रता की और भोपाल जा पहुंचा तथा सीहोर, होशंगाबाद का क्षेत्र उसने अधीन कर लिया।सन् 1737 में भोपाल के युद्ध में उसने निजाम को हराया।युद्ध के उपरांत दोनों की संधि हुई। निजाम ने नर्मदा-चंबल क्षेत्र के बीच के सारे क्षेत्र पर मराठों का आधिपत्य मान लिया।रायसेन में मराठों ने एक मजबूत किले का निर्माण किया।मराठों के प्रभाव के बाद एक अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खाँ ने भोपाल में स्वतंत्र नवाबी की स्थापना की।बाद में बेगमों का शासन आने पर उन्होंनें अंग्रेजों से संधि की और भोपाल अंग्रेजों के संरक्षण में चला गया।अंग्रजों ने मराठों के साथ पहले, दूसरे, तीसरे, और चौथे युद्ध में क्रमश: पेशवा, होल्कर, Notes 👉 JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

Madhya Pradesh History – मध्य प्रदेश का इतिहासMadhya Pradesh History – ऐतिहासिक दृष्टि से मध्य प्रदेश बहुत महत्वपूर्ण राज्य है। मध्यप्रदेश के इतिहास को निम्नानुसार बांटा जा सकता है:प्रागैतिहासिक मध्यप्रदेशपाषाण एवं ताम्रकालप्राचीन कालशुंग और कुषाणमध्यकालमुगल कालआधुनिक काल (स्वंत्रता संग्राम)प्रागैतिहासिक मध्यप्रदेशप्रदेश के विभिन्न भागों में किए गए उत्खनन और खोजों में प्रागैतिहासिक सभ्यता के चिन्ह मिले हैं।आदिम प्रजातियां नदियों के काठे और गिरी-कंदराओं में रहती थी। जंगली पशुओं में सिंह, भैंसे, हाथी और सरी-सृप आदि प्रमुख थे।कुछ स्थानों पर “हिप्पोपोटेमस” के अवशेष मिले हैं।शिकार के लिए ये नुकीले पत्थरों औरहड्डियों के हथियारों का प्रयोग करते थे।मध्यप्रदेश के भोपाल, रायसेन, छनेरा, नेमावर, मोजावाड़ी, महेश्वर, देहगांव, बरखेड़ा, हंडिया, कबरा, सिघनपुर, आदमगढ़, पंचमढ़ी, होशंगाबाद, मंदसौर तथा सागर के अनेक स्थानों पर इनके रहने के प्रमाण मिले हैं।इस काल के मानव ने अपनी कलात्मक अभिरूचियों की भी अभिव्यक्ति की हैं। होशंगाबाद के निकट की गुलओं, भोपाल के निकट भीमबैठका की कंदराओं तथा सागर के निकट पहाड़ियों से प्राप्त शैलचित्र इसके प्रमाण हैं।ये शैलचित्र मंदसौर की शिवनी नदी के किनारे की पहाड़ियों, नरसिंहगढ़, रायसेन, आदमगढ़, पन्ना रीवा, रायगढ़ और अंबिकापुर की कंदराओं में भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।कुछ यूरोपीय विद्वानों ने इस राज्य का पूर्व, मध्य एवं सूक्ष्माश्मीय काल ईसा से 4000 वर्ष पूर्व का माना है।दूसरी ओर डॉ. सांकलिया इस सभ्यता को ईसा से 1,50,000 वर्ष पूर्व की मानते हैं।पाषाण एवं ताम्रकालमध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी में आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व मोहनजोदड़ो व हड़प्पा की समकालीन सभ्यता का विकास हुआ जिसके मुख्य केंद्र महेश्वर, नागदा, कामका, वरखेडा, एरण आदि माने जाते है |इन स्थानों से खुदाई करके धातु के बर्तन, औजार, म्रदुभांड आदि मिले हैबालाघाट एवं जबलपुर जिलों के कुछ भागों में ताम्रकालीन औजार मिले हैं।प्राचीन कालप्राचीन भारत के 16 महाजनपदो में से अवन्ती महाजनपद मध्य प्रदेश में स्थित था जिसकी राजधानी महिष्मति व उज्जैनी थीमध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सीरोहा तहसील के रूपनाथ गाँव की एक चट्टान पर अशोक का शिलालेख अंकित हैमध्य प्रदेश के उज्जैनी , निमाड़ , साँची (रायसेन) और भरहुत (सतना) में अशोक ने स्तूपों का निर्माण करवायासम्राट अशोक ने रूपनाथ (जबलपुर) , पवाया, बेसनगर, एरण आदि स्थानों पर स्तम्भ स्थापित करायेभारत में 320 से 510 ई. तक गुप्त वंश का शासन रहाइस वंश के सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने उज्जैनी को अपनी राजधानी बनाया जो वर्तमान मध्य प्रदेश में स्थित हैगुप्त वंश के अंत के बाद मध्य प्रदेश पर अनेक छोटी बड़ी शक्तियों ने शासन कियाशुंग और कुषाणमौर्यों के पतन के बाद शुंग मगध के शासन हुए। सम्राट पुष्यमित्र शुंग विदिशा में थे। इनके पूर्वजों को अशोक पाटलिपुत्र ले गए थे। उन्होंने विदिशा को अपनी राजधानी बनाया।अग्निमित्र महाकौशल, मालवा, अनूप (विंध्य से लेकर विदर्भ) का राज्यापाल था सातवाहनों ने भी त्रिपुरी, विदिशा, अनूप आदि अपने अधीन किए।गौतमी पुत्र सातकर्णी की मुद्राएं होशंगाबाद, जबलपुर, रायगढ़ आदि में मिली हैं।सातवाहनों ने ईसा पूर्व की दूसरी सदी से 100 ईसवी तक शासन किया था।कुषाण काल की कुछ प्रतिमाएं जबलपुर से प्राप्त हुई हैं।शक क्षत्रप रूद्रदमन प्रथम ने सातवाहनों को हराकर दूसरी शताब्दी में पश्चिमी मध्यप्रदेश जीता।उत्तरी मध्य भारत में नागवंश की विभिन्न शाखाओं ने कांतिपुर, पद्मावती और विदिशा में अपने राज्य स्थापित किए।नागवंश नौ शताब्दियों तक विदिशा में शासन करता रहा।शकों से संघर्ष हो जोने के बाद वे विंध्य प्रदेेश चले गये वहां उन्होंने किलकिला राज्य की स्थापना कर नागावध को अपनी राजधानी बनाया।त्रिपुरी और आसपास के क्षेत्रों में बोधों वंश ने अपना राज्य स्थापित किया।आटविक राजाओं ने बैतूल में, व्याघ्रराज ने बस्तर में तथा महेन्द्र ने भी बस्तर में अपने राज्य स्थापित किए।चौथी शताब्दी में गुप्तों के उत्कर्ष के पूर्व विंध्य शक्ति के नेतृत्व में वाकाटकों ने मध्यप्रदेश के कुछ भागों पर शासन किया।राजा प्रवरसेन ने बुंदलेखण्ड से लेकर हैदराबाद तक अपना आधिपत्य जमाया।छिंदवाड़ा, बैतूल, बालाघाट आदि में वाकाटकों के कई ताम्र पत्र मिले हैं।मध्यकालमध्यकालीन इतिहास के प्रारंभ में मध्य प्रदेश में अनेक छोटे बड़े राज्य थे जिनमे से अधिकांस पर राजपूतो का शासन थामध्य प्रदेश के मालवा में परमारों का , विंध्य प्रदेश में चंदेलो व महाकौशल में कलचुरियों का शाशन थामध्य प्रदेश के मध्यकालीन इतिहास में राजा भोज का महत्वपूर्ण स्थान है इन्होने भोपाल नगर की स्थापना की थी11 वी शताब्दी में मध्य प्रदेश के इतिहास में एक नए युग का प्रारंभ हुआ सन 1019 में महमूद गजनी ने ग्वालिअर पर आक्रमण किया व वहा

अपनी उपयोगिता के आधार पर हमारा ग्रुप जॉइन करें JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPPSCTESTSERIES0 @MPPSCANSWERWRITING0 For All MP govt EXAM PREPRATION @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

🦆 ​​विश्व मलेरिया दिवस : 2021 🦆 प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य, इस रोग के नियंत्रण हेतु किए
🦆 ​​विश्व मलेरिया दिवस : 2021 🦆 प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य, इस रोग के नियंत्रण हेतु किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को जानना तथा उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आवश्यकतानुसार उनमें सुधार करना हैं। ✍🏻 कारण : 'प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम' नामक परजीवी से होने वाला यह रोग अपने संवाहक मादा एनाफिलीज मच्छर की मदद से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। विश्व मलेरिया दिवस उन आधिकारिक वैश्विक सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक हैं जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिन्हित किया गया है। 💁🏻‍♀ प्रारम्भ : 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के 60 वें सत्र के दौरान विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना की गई थी। इससे पूर्व 25 अप्रैल, 2001 में यह अफ्रीका मलेरिया दिवस के रूप में था, जिसे एक ऐतिहासिक घोषणा में 44 मलेरिया ग्रसित देशों ने अफ्रीकी शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर कर विश्व मलेरिया दिवस के रूप में स्वीकार करने हेतु सहमती जतायी थी। ताकि, दुनिया भर के देशों में मलेरिया के अस्तित्व की पहचान करने और लोगों में जागरूकता लाकर इस रोग से विश्व स्तर पर लड़ने का प्रयास किया जा सके।

🙏 HAPPY LORD MAHAVIR JAYANTI🙏 🍃 Lord Mahavira was also known as Vardhamana. 🍃 He was the 24th Tirthankara of Jainism. 🍃
🙏 HAPPY LORD MAHAVIR JAYANTI🙏 🍃 Lord Mahavira was also known as Vardhamana. 🍃 He was the 24th Tirthankara of Jainism. 🍃 Lord Mahavira was born in the 6th century BCE in Bihar. 🍃 He was born to queen Trishala and king Siddhartha. 🍃 He was born on the 13th day of the bright half of the moon, in Chaitra month. 🍃 Lord Mahavira had a high interest in meditation and in Jainism. 🍃 At the age of 30 he took the spiritual path and left his throne to practice Jainism.

आज रात्रि 8:00 बजे बहुत ही महत्वपूर्ण मंथली मैगजीन शेयर की जावेगी हिंदी और इंग्लिश दोनों में इसलिए सभी चैनल @MP_PSC_NOTES पर जुड़े रहें और डाउनलोड कर ले क्योंकि कॉपीराइट के कारण जल्दी उसे डिलीट करना पड़ेगा धन्यवाद🙏🙏✌️✌️ अपनी उपयोगिता के आधार पर ग्रुप जॉइन करें JOIN NOW 👇👇 😷MASK लगाए social Distance बनाये रखे sanitizer🧴🤲 का प्रयोग करें *MPPSC PRE+ MAINS के नोट्स के लिए JOIN NOW👉👉* https://t.me/MP_PSC_NOTES *MPPSC SPECIAL QUIZ MCQ के लिए👉👉JOIN NOW * Https://t.me/MP_PSC_QUIZ *MPPSC PRE+MAINS की टेस्ट सीरीज FREE मे पाने के लिएJOIN NOW* Https://t.me/MPPSCTESTSERIES0 *MPPSC MAINS ANSWER WRITING उत्तर लेखन की तैयारी FREE मे करने के लिएJoin Now* Https://t.me/MPPSCANSWERWRITING0 *मध्य प्रदेश की सभी सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए आवश्यक सभी books नोट्स PDF TEST SERIES को फ्री में पाने के लिए नीचे वाले चैनल को ज्वाइन करें* *For All MP govt EXAM PREPRATION* https://t.me/MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

आप सभी हमारे चैनल के साथ जुड़े रहेंगे दोस्तों एक-दो दिन में पुनः सभी पीडीएफ फिर से शेयर किए जाएंगे आप सभी परेशान ना हो ग्रुप में हमारे साथ जुड़े रहे हो🙏🙏

दृष्टि ias की आज शेयर की गई पीडीएफ अब डिलीट कर दी गई है... ISI Tarah PDF नोट्स FREE Mein pane ke liye Hamare Sath Jude Rahe

आप सभी से जो Drishti IAS PAID NOTES शेयर करने का वादा किया था वह सभी PDF NOTES पीडीएफ शेयर कर दी गई है जो कि आपकी परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी होंगे यह बहुत ही प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान की पीडीएफ है इन को आप जरूर डाउनलोड करें और हमारे चैनल से जुड़े रहे जिससे आगे भी आपको इसी तरह की पीडीएफ और स्टडी मैटेरियल प्राप्त होता रहे Yah PDF 10:30 Baje delete kar di javegi isase pahle aap Sabhi download karna JOIN & DOWNLOAD👉👉 @MP_PSC_NOTES ☝️☝️☝️☝️☝️☝️

MP के लिए सर्वोत्तम बुक Drishti MP Updated Full BookJOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

•┈┈••✦✿✦•♥️•✦✿✦••┈┈• 💥💥👇👇💥💥 For more PDFs For Test Series For Important Facts 💥💥💥💥💥💥💥💥💥 👆👆👆👆👆👆👆👆👆 •┈┈••✦✿✦•♥️•✦✿✦••┈┈•JOIN NOW 👇👇 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯

•┈┈••✦✿✦•♥️•✦✿✦••┈┈• 💥💥👇👇💥💥 For more PDFs For Test Series For Important Facts 💥💥💥💥💥💥💥💥💥 👆👆👆👆👆👆👆👆👆 •┈┈••✦✿✦•♥️•✦✿✦••┈┈•JOIN NOW 👇👇 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯JOIN NOW 👇👇 @MP_PSC_NOTES @MP_PSC_QUIZ @MPEXAMGURUJI 🎯🎯🎯👆👆🎯🎯