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देववाणी संस्कृतम् ई-गुरुकुलम्

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पठन्तु संस्कृतं वदन्तु संस्कृतं रक्षन्तु संस्कृतं च। । जयतु संस्कृतम्। जयतु भारतम्। ।वसुधैव कुटुम्बकम् ।।

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🌍 देववाणी संस्कृतम् 🚩 ट्रस्ट हरिद्वारम् *भगवान् श्रीकृष्ण कौन—सी भाषा बोलते थे?* 1—संस्कृत 2—हिन्दी 3—अंग्रेज़ी 4—उर्दू 5—फारसी 🙏जन्माष्टमी के पावन पर्व भगवान् श्रीकृष्ण की भाषा को सीखने के लिए संकल्प लीजिए।  तभी आप कृष्ण भक्त हैं अन्यथा भगवान् कृष्ण जी को धोखा दे रहे हैं। बोलिए,  *अहम् अपि संस्कृतं जानामि*( मैं भी संस्कृत जानता हूँ ) https://youtu.be/_kpprxepZ6Y *शेयर कर एक करोड भगवान् श्रीकृष्ण के भक्तों तक पहुंचाइए।*

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सादरं नमामि🙏 *देववाणी संस्कृतम्* *ट्रस्ट* (हरिद्वारम् ) 🚩निःशुल्क-संस्कृतशिक्षणकेन्द्रम्। 🚩स्वतन्त्रता अमृतमहोत्सव के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकानाएं प्रेषित करता हूँ।। 🚩आगामी वर्ष 2023 तक एक करोड़ लोगों को ऑनलाइन निःशुल्क संस्कृत शिक्षण प्रदान करने हेतु कृतसंकल्प हैं।। 🙏संस्कृत भाषा को ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र के जन-जन की भाषा बनाने के लिए निःस्वार्थ भाव से अपने आस-पास के 100—100 लोगों को शेयर कीजिए। 🚩"देववाणी संस्कृतम्"🚩 यूट्यूब चैनल को निम्न लिंक पर क्लिक कर सब्स्क्राइब करके प्रत्येक व्यक्ति को संस्कृत का समर्थन अवश्य चाहिए।।👇👇👇 https://www.youtube.com/channel/UC_GCTK6v1eIIpyfXyVsKz-g 🚩भारतस्य आत्मा संस्कृतम्। 👩‍💻 🚩भारतीयानां माता संस्कृतम्।👩‍💻 🚩ग्रामे ग्रामे संस्कृतम्।👩‍💻 🚩गृहे गृहे संस्कृतम्।✍ 🚩सर्वप्रथम आपका आत्मीय धन्यवाद करता हूँ कि आपने मुझे संस्कृत माता के माध्यम से दूर देश में रहते हुए अपने साथ जुड़ने का सुअवसर प्रदान किया। इसी के साथ विनम्र निवेदन करता हूँ कि संस्कृत माता को एक करोड़ लोगों तक ऑनलाइन निःशुल्क पहुंचाने के लिए आप अपने आस- पास के अधिक से अधिक लोगों को संस्कृत शिक्षण के लिए प्रेरित कर "देववाणी संस्कृतम्" यूट्यूब चैनल से जोड़कर सहयोग प्रदान कीजिए। । इसी के साथ आपके तथा आपके परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, सुखमय, शान्तिमय और मंगलमय जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। । निवेदकः— ऑनलाइन संस्कृतशिक्षकः आचार्यः श्रवण कुमारः { व्याकरण-दर्शन-निरुक्त-वेदाचार्यः} (हरिद्वारम् ) जयतु संस्कृतम्। जयतु भारतम्। वसुधैव कुटुम्बकम्।।🌍

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100% निःशुल्क । शेयर कीजिए सर्वत्र। लिंक पर क्लिक कर धाराप्रवाह संस्कृतसंभाषण और लेखन सीखिए मात्र 3 मास में।। त्रैमासिक-संस्कृतशिक्षा: https://www.youtube.com/playlist?list=PLXYdCipgusUaGcMByd0zjR12JhSSHiHtR

भानजी भागिनेयी/स्वस्रीया (स्त्री.) बाबा (दादा) पितामह: (पुँ.) दाई (दादी) पितामही (स्त्री.) परदादा प्रपितामह: (पुँ.) परदादी प्रपितामही (स्त्री.) नाना मातामह: (पुँ.) नानी मातामही (स्त्री.) परनाना प्रमातामह: (पुँ.) परनानी प्रमातामही (स्त्री.) यार (प्रेमी) जार:/उपपति:/प्रेमी (पुँ.) प्रेमिका प्रेमिका/उपपत्नी (स्त्री.) दोस्त सखा/मित्रम् (नपुं.)/वयस्य:/ सुहृद् (वि.) / सार्थी (पुँ.) सहेली आलि:/वयस्या/सखी/सहचरी (स्त्री.) मालिक स्वामी (पुँ.) नौकर भृत्य:/सेवक:/परिचारक: (पुँ.) नौकरानी भृत्या/सेविका/परिचारिका (स्त्री.) आदमी मनुष्य:,नर:, मानव: (पुँ.) मर्द पुरुष: (पुँ.) मादा मातृजातीया (वि.) महिला महिला, ललना, नारी, स्त्री (स्त्री.) औरत महिला (स्त्री.) जवान स्त्री युवती/युवति: (स्त्री.) कामेच्छु स्त्री कामुकी (स्त्री.) प्रेमी से मिलने वाली स्त्री अभिसारिका (स्त्री.) जिसका पति मर गया हो विधवा, मृतभर्तृका (स्त्री.) जिसका पति जीवित हो सधवा, सनाथा, सौभाग्यवती (स्त्री.) जिसकी पत्नी मर गयी हो विधुर: (पुँ.) जिसकी पत्नी जीवित हो सपत्नीक: (पुँ.) स्वयं पति को चुनने वाली स्वयंवरा (स्त्री.) सुहागिन स्त्री सौभाग्यवती स्त्री (स्त्री.) पतिव्रता स्त्री पतिव्रता/साध्वी/ सच्चरित्रा (स्त्री.) वेश्या वेश्या/गणिका/ पण्याङ्गना (स्त्री.) वुँâवारी कन्या का पुत्र कानीन: (पुँ.) खानदानी सगोत्र: (पुँ.) पति पत्नी-दम्पती (पुँ., द्विव०) रिश्तेदार / सम्बन्धी ज्ञाति:, बन्धु: (पुँ.) घनिष्ठ अन्तरङ्ग:, निकटतक: (पुँ.) दुलारा प्रिय: (वि.), दुर्लालित: (पुँ.)

संस्कृत भारती: एतदीयः - इसका, तदीयः - उसका, यदीयः - जिसका, परकीयः (अन्यदीयः) - दूसरे का, आत्मीयः (स्वकीयः, स्वीयः) - अपना। महत् - महान्, यावत् - जितना तावत् - उतना, कियत् - कितना, एतावत् (इयत्) - इतना। तत्र - वहाँ, अत्र - यहाँ, कुत्र - कहाँ, यत्र - जहाँ, कुत्रापि - कहीं भी, अन्यत्र - दूसरे स्थान पर, सर्वत्र - सब स्थानों पर, उभयत्र - दोनों स्थानों पर, अत्रैव - यहीं पर तत्रैव - वहीं पर, यत्र-कुत्रापि - जहाँ कहीं भी, इतः - यहाँ से, ततः - वहाँ से, कुतः - कहाँ से, कुतश्चित् - कहीं से, यतः - जहाँ से, इतस्ततः - इधर-उधर, सर्वतः - सब ओर से, उभयतः - दोनों ओर से, उपरि - ऊपर, अधः - नीचे, अग्रे, (पुरः, पुरस्तात्) - आगे, पश्चात् - पीछे, बहिः - बाहर, अन्तः - भीतर उपरि-अधः - ऊपर-नीचे, इदानीम् (सम्प्रति, अधुना) - अब / इस समय, तदा / तदानीम् - तब / उस समय, कदा - कब यदा - जब, सदा (सर्वदा) - हमेशा, एकदा - एक समय कदाचित् - कभी, क्व - कब क्वापि - कभी भी, सद्यः - तत्काल (अतिशीघ्र) पुनः - फिर अद्य - आज अद्यैव - आज ही, अद्यापि - आज भी, श्वः - आने वाला कल ह्यः - बीता हुआ कल, परश्वः - आने वाला परसों परह्य: - बीता हुआ परसों प्रपरश्वः - आने वाला नरसों प्रपरह्य: - बीता हुआ नरसों, शीघ्रम् - जल्दी, शनैः शनैः - धीरे-धीरे, पुनः पुनः - बार-बार, युगपत् - एक ही समय में, सकृत् - एक बार असकृत् - अनेक बार, अनन्तरम् - इसके बाद, कियत् कालम् - कब तक, एतावत् कालम् - अब तक, तावत् कालम् - तब तक, यावत् कालम् - जब तक, अद्यावधि - आज तक, कथम् - कैसे / किस प्रकार इत्थम् - ऐसे / इस प्रकार, यथा - जैसे, तथा - वैसे / उस प्रकार, सर्वथा - सब तरह से, अन्यथा - नहीं तो / अन्य प्रकार से, कथञ्चित्, कथमपि - किसी भी प्रकार से, यथा यथा - जैसे-जैसे, तथा-तथा - वैसे-वैसे, यथा-कथञ्चित् - जिस किसी प्रकार से, तथैव - उसी प्रकार, बहुधा / प्रायः - अक्सर। स्वयम् - खुद, वस्तुतः - असल में, कदाचित् (सम्भवतः) - शायद , सम्यक् - अच्छी तरह, सहसा (अकस्मात्) - अचानक, वृथा - व्यर्थ, समक्षम् (प्रत्यक्षम्) - सामने , मन्दम् - धीरे, च - और, अपि - भी , वा / अथवा - या , किम् - क्या, प्रत्युत (अपितु) - बल्कि, यतः - चूँकि, यत् - कि, यदि - अगर, तथापि - तो भी / फिर भीहिन्दी संस्कृत अतिथि अतिथि:, अभ्यागत: (पुँ.) पिता पिता/जनक:/तात: (पुँ.) अम्मा अम्बा/माता/जननी (स्त्री.) भाई भ्राता (पुँ.) बड़ा भाई अग्रज: (पुँ.) छोटा भाई अनुज: (पुँ.) सगा भाई सहोदर: (पुँ.) चचेरा भाई पितृव्यपुत्र:/पितृव्यज: (पुँ.) ममेरा भाई मातुलपुत्र:/मातुलेय: (पुँ.) फुफेरा भाई पैतृष्वस्रीय:/पैतृष्वसेय: (पुँ.) मौसेरा भाई मातृष्वस्रीय:/मातृष्वसेय: (पुँ.) सौतेला भाई विमातृज: (पुँ.) बहिन भगिनी/स्वसा/सोदर्या (स्त्री.) बड़ी बहिन (दीदी) अत्तिका/अग्रजा (स्त्री.) छोटी बहिन अनुजा (स्त्री.) सगी बहिन सहोदरा (स्त्री.) पति पति:/भर्ता/वर: (पुँ.) पत्नी अर्धाङ्गिनी/पत्नी/भार्या/ जाया (स्त्री.) चाचा पितृव्य:/तातक: (पुँ.) चाची पितृव्या,पितृव्याणी, पितृव्यपत्नी (स्त्री.) बड़े पापा प्रतात:,ज्येष्ठतात: (पुँ.) बड़ी अम्मा ज्येष्ठाम्बा,अम्बाला,प्राम्बा (स्त्री.) मामा मातुल: (पुँ.) मामी मातुली,मातुलानी (स्त्री.) फूफा पितृष्वसृपति: (पुँ.) बुआ (फुफू) पितृष्वसा (स्त्री.) मौसा मातृष्वसृपति: (पुँ.) मौसी मातृष्वसा (स्त्री.) भौजी भ्रातृजाया/प्रजावती/भामिनी (स्त्री.) साला श्याल: (पुँ.) साला पुत्र-श्यालज: (पुँ.) सरहज श्यालिनी/श्यालपत्नी (स्त्री.) साली श्याली/श्यालिका (स्त्री.) साढ़ू श्यालिपति:, सढोक: (पुँ.) बहनोई आवुत्त:/भगिनीपति: (पुँ.) देवर देवर:, देवा (पुँ.) देवरानी याता (स्त्री.) जेठ ज्येष्ठ:, पत्यग्रज: (पुँ.) जेठानी ज्येष्ठा (स्त्री.) ननद ननान्दा (स्त्री.) नन्दोई ननान्दृपति: (पुँ.) समधी सम्बन्धी (पुँ.) समधिन सम्बन्धिनी (स्त्री.) सास श्वश्रू: (स्त्री.) ससुर श्वसुर: (पुँ.) दामाद जामाता (पुँ.) पतोहू पुत्रवधू:, स्नुषा (स्त्री.) बेटा पुत्र:,तनय:, सुत:, आत्मज: (पुँ.) सगा बेटा औरस:,उरस्य: (पुँ.) बेटी पुत्री, तनया,सुता,आत्मजा (स्त्री.) धेवता (नाना का नाती) दौहित्र:/नप्ता (पुँ.) धेवती (नाना की नातिन) दौहित्री/नप्त्री (स्त्री.) पोता पौत्र: (पुँ.) पोती पौत्री (स्त्री.) परपोता प्रपौत्र: (पुँ.) परपोती प्रपौत्री (स्त्री.) भतीजा भ्रातृव्य:/भ्रातृज:/ भ्रात्रीय: (पुँ.) भतीजी भ्रातृसुता/भ्रातृव्या/भ्रातृजा (स्त्री.) भानजा भागिनेय:/स्वस्रीय: (पुँ.)