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UJJWAL IAS AYODHYA®™

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📈 تحلیل کانال تلگرام UJJWAL IAS AYODHYA®™

کانال UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) در بخش زبانی هندی بازیگری فعال است. در حال حاضر جامعه شامل 19 685 مشترک است و جایگاه 10 239 را در دسته آموزش و رتبه 22 273 را در منطقه الهند دارد.

📊 شاخص‌های مخاطب و پویایی

از زمان ایجاد در невідомо، پروژه رشد سریعی داشته و 19 685 مشترک جذب کرده است.

بر اساس آخرین داده‌ها در تاریخ 17 ژوئن, 2026، کانال فعالیت پایداری دارد. در ۳۰ روز گذشته تغییر اعضا برابر 50 و در ۲۴ ساعت گذشته برابر -2 بوده و همچنان دسترسی گسترده‌ای حفظ شده است.

  • وضعیت تأیید: تأیید نشده
  • نرخ تعامل (ER): میانگین تعامل مخاطب 23.05% است و در ۲۴ ساعت نخست پس از انتشار، محتوا معمولاً 14.40% واکنش نسبت به کل مشترکان کسب می‌کند.
  • دسترسی پست‌ها: هر پست به طور میانگین 4 539 بازدید دریافت می‌کند. در اولین روز معمولاً 2 835 بازدید جمع‌آوری می‌شود.
  • واکنش‌ها و تعامل: مخاطبان به‌طور فعال حمایت می‌کنند؛ میانگین واکنش به هر پست 7 است.
  • علایق موضوعی: محتوا بر موضوعات کلیدی مانند टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज تمرکز دارد.

📝 توضیح و سیاست محتوایی

نویسنده این فضا را محل بیان دیدگاه‌های شخصی توصیف می‌کند:
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به لطف به‌روزرسانی‌های پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 18 ژوئن, 2026)، کانال همواره به‌روز و دارای دسترسی بالاست. تحلیل‌ها نشان می‌دهد مخاطبان به‌طور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کرده‌اند.

19 685
مشترکین
-224 ساعت
+247 روز
+5030 روز
آرشیو پست ها
🔳 *मानव रोग एवं उपचार –* ▪️पेनिसिलिन प्रथम एंटीबायोटिक है। ▪️पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने किया था। ▪️टाइफाइड रोग में मुख्यतः मानव की आत प्रभावित होती है। ▪️प्लाज्मोडियम का वाहक कार्य मादा एनाफिलीज मच्छर करती है ▪️मलेरिया में लाल रुधिर कणिका नष्ट हो जाती है तथा रुधिर की कमी हो जाती है। ▪️डेंगू को हड्डी तोड़ ज्वार भी कहते हैं। ▪️डेंगू से पीड़ित रोगी के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। ▪️जल में नाइट्रेट की मात्रा 10ppm से अधिक होने पर ब्लू बेबी सिंड्रोम रोग हो जाता है। ▪️ पोटेशियम की कमी से निम्न रक्तचाप की बीमारी हो जाती है। ▪️मूत्र में एल्बुमिन की अधिक उपस्थिति एवं उसके प्रभाव से किडनी के फेल हो जाने के आशंका होती है। ▪️हीमोफीलिया एक अनुवांशिक लिंग सहलग्न रोग है। ▪️हीमोफीलिया रोग का वहन स्त्रियां करती हैं। ▪️डाउन सिंड्रोम एक अनुवांशिक विकार है। ▪️ मिनीमाता एक तंत्रिका संबंधी रोग है।

🔳 *मानव रोग एवं उपचार –* ▪️ *जीवाणु जनित रोग तथा वाहक जीवाणु* ▪️टिटनेस – क्लोस्ट्रीडियम टेटानी ▪️टाइफाइड – साल्मोनेला टाइफी ▪️हैजा– विब्रियो कोलेरा ▪️निमोनिया – स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया ▪️क्षय रोग– माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस ▪️प्लेग –यर्सिनिया पेस्टिस ▪️डिप्थीरिया – कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया ▪️काली खासी – बोर्डेटेला पर्टुसिस ▪️सिफलिश – ट्रेपोनेमा पैलिडम ▪️ *विषाणु जनित रोग तथा वाहक विषाणु* ▪️एड्स – एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी ▪️इन्फ्लूएंजा – इन्फ्लूएंजा वायरस ▪️चेचक – वेरियोला वायरस ▪️चिकेनपॉक्स– वेरिसेला-ज़ोस्टर वायरस ▪️खसरा – पैरामिक्सोवायरस ▪️रेबीज –रेबीज वायरस ▪️हर्पीज – हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस

🔳 *कार्बोहाइड्रेट –* ▪️यह हाइड्रोजन कार्बन तथा ऑक्सीजन के मिश्रण से मिलकर बना होता है। ▪️कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड। ▪️मोनोसैकेराइड सरल शर्करा होते हैं, जैसे ग्लूकोज और फ्रुक्टोज। ▪️ओलिगोसैकेराइड दो से दस मोनोसैकेराइड अणुओं से जुड़े होते हैं, जैसे सुक्रोज और लैक्टोज। ▪️पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides): 10 से अधिक मोनोसैकेराइड अणुओं से बने होते हैं। उदाहरण के लिए, स्टार्च (अनाज, आलू में) और सेल्यूलोज (पौधों के तने में). । ▪️चावल, मक्का ,गेहूं, बाजरा आलू, शकरकंद आदि कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं। ▪️ कार्बोहाइड्रेट शरीर को गर्मी एवं ऊर्जा प्रदान करते हैं। ▪️यह न्यूक्लिक अम्ल ( RNA एवं DNA) का निर्माण करते हैं

🔳 *प्रोटीन–* ▪️ यह एक जटिल कार्बनिक यौगिक है। ▪️यह 20 प्रकार के अमीनो अम्ल से मिलकर बना है। ▪️बाल किरेटिन नामक प्रोटीन का बना होता है। ▪️दूध में कैसीन नामक प्रोटीन उपस्थित होता है जिसके कारण दूध का रंग सफेद होता है। ▪️गाय का दूध पीला कैरोटीन की उपस्थिति के कारण होता है । ▪️दुग्ध प्रोटीन को पचाने वाला एंजाइम रेनिन होता है। ▪️प्रोटीन एक जटिल नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ है। ▪️अमीनो अम्ल प्रोटीन की संयोजक इकाइयां होते हैं। ▪️अमीनो अम्ल त्वचा ,मांसपेशियों तथा हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। ▪️भोजन में वसा में प्रति यूनिट कैलोरी की मात्रा सर्वाधिक होती है। ▪️प्रोटीन शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है। ▪️शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है। ▪️कुछ प्रोटीन हार्मोन के रूप में कोशिकाओं की क्रिया का नियमन करती है। ▪️संकुचन शील प्रोटीन( एक्टिन और मायोसीन) पेशीयो को सिकोड़कर शरीर एवं अंगों को गति प्रदान करती है।

🔳 *विटामिन* – ▪️ *खोज* – फंक ने किया था। ▪️यह जटिल कार्बनिक यौगिक है। ▪️शरीर में उपापचई अभिक्रियाओं में उत्प्रेरकों की क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं। ▪️ *जल में घुलनशील विटामिन* – B और C ▪️ *वसा में घुलनशील विटामिन* – A, D E,K ▪️ *विटामिन और उसका रासायनिक नाम और उसकी कमी से उत्पन होने वाला रोग –* ▪️विटामिन ए: रेटिनॉल – रतौंधी ▪️विटामिन बी1: थायमिन – बेरी बेरी ▪️विटामिन बी2: राइबोफ्लेविन– किलोसिस ▪️विटामिन बी3: नियासिन (निकोटिनिक एसिड)– प्लेग्रा ▪️ विटामिन बी5: पैंटोथेनिक एसिड– चर्म रोग, बाल सफेद ▪️ विटामिन बी6: पाइरिडोक्सिन– चर्म रोग , पेशीय ऐंठन ▪️विटामिन बी7: बायोटिन – बाल झड़ना ▪️ विटामिन बी9: फोलिक एसिड– कुण्डित वृद्धि ▪️विटामिन बी12: साइनोकोबालामिन – तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी ▪️विटामिन सी: एस्कॉर्बिक एसिड – स्कर्वी ▪️विटामिन डी: कैल्सिफेरॉल – रिकेट्स ▪️विटामिन ई: टोकोफेरोल – जनन क्षमता की कमी ▪️विटामिन के: फाइलोक्विनोन – रक्त थक्का न जमना

🔳 *एड्रिनल ग्रंथि–* ▪️ *कोर्टिसोल:* यह एक ग्लूकोकोर्टिकॉइड हार्मोन है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपयोग को नियंत्रित करता है. यह रक्तचाप, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है और हड्डियों के निर्माण को कम करता है. ▪️ *एल्डोस्टेरोन:* यह एक मिनरलोकॉर्टिकॉइड हार्मोन है जो रक्तचाप और रक्त पीएच स्तर को नियंत्रित करता है. यह रक्त में सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स को नियंत्रित करता है. ▪️ *एड्रेनालाईन (एपिनेफ्रीन):* यह एक आपातकालीन हार्मोन है जो "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है. यह हृदय गति, श्वसन दर और रक्तचाप को बढ़ाता है. ▪️ *नॉरएड्रेनालाईन (नॉरएपिनेफ्रीन):* यह भी एक आपातकालीन हार्मोन है जो एड्रेनालाईन के साथ मिलकर "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है.

🔳 *प्रमुख अंतः स्रावी ग्रंथि –* ▪️ *पीयूष ग्रंथि–* इसे मास्टर ग्रंथि के नाम से जाना जाता है। ▪️ *प्रमुख हार्मोन–* ▪️ *सोमेट्रोटेपिन –* यह शरीर की वृद्धि तथा हड्डियों की वृद्धि का नियंत्रण करता है। ▪️इसकी कमी से बौनापन होता है । ▪️इसकी अधिकता से गीगांटिज्म की समस्या हो जाती है। ▪️ *थायराइड उत्तेजक हार्मोन–* थायरॉयड ग्रंथि को थायरोइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो चयापचय को नियंत्रित करते हैं. ▪️ *एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन–* अधिवृक्क ग्रंथियों को कोर्टिसोल हार्मोन का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. ▪️ *फॉलिकल -उत्तेजक हार्मोन –* महिलाओं में अंडाशय को उत्तेजित करता है और पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन को उत्तेजित करता है. ▪️ *ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन* –महिलाओं में ओव्यूलेशन को ट्रिगर करता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करता है ▪️ *थायराइड ग्रंथि–* ▪️थायराइड ग्रंथि से मुख्य रूप से दो हार्मोन स्रावित होते हैं: ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) और थायरोक्सिन (T4)। ▪️ ये चयापचय दर को नियंत्रित करते हैं. शरीर के तापमान, हृदय गति और अन्य शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं. विकास और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

🔳 *स्वसन तंत्र–* ▪️ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के आदान-प्रदान की क्रिया। ▪️ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज के दहन से ऊर्जा मुक्त होती है ,तथा जल और कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होता है। ▪️ग्रसनी 13 सेंटीमीटर लंबी कीप के आकार की गुहा होती है। ▪️एपिग्लोटिस, भोजन के समय यह ढक्कन की भांति कार्य करती है जिससे भोजन श्वास नली में प्रवेश नहीं करता। ▪️ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन नामक लाल वर्णक द्वारा होता है, हिमोग्लोबिन लाल रुधिर कणिका में पाया जाता है । ▪️ फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर की समस्त कोशिकाओं तक तथा कोशिकाओं से कार्बनडाइऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचाना रुधिर का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। ▪️ *अवायवीय श्वसन–* यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। ▪️ इसमें खाद्य पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड और एथील अल्कोहल बनते हैं। ▪️ इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। ▪️ *ऑक्सी श्वसन –* यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है तथा इस क्रिया में खाद्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। ▪️ इसमें कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनते हैं तथा अधिक मात्रा में उर्जा उत्पन्न होती है।

🔳 *कंकाल तंत्र–* ▪️वयस्क मनुष्य का अंतः कंकाल 206 हड्डियों का बना होता है। ▪️मनुष्य की खोपड़ी में कुल 29 अस्थियां होती हैं। ▪️मनुष्य का कशेरुक दंड 26 हड्डियों से मिलकर बना होता है। ▪️गर्दन का पहला कशेरुक एटलस कशेरुक कहलाता है , यह खोपड़ी को सीधे रखता है। ▪️कशेरुक दंड का कार्य मेरूरज्जूको सुरक्षा प्रदान करना है । ▪️ *प्रमुख अंगों में पाई जाने वाली हड्डियां* – ▪️सिर की कुल हड्डियां – 29 ▪️कपाल – 8 ▪️फेसियल – 14 ▪️ कान – 6 ▪️ रीड की कुल हड्डियों की संख्या – 26 ▪️ पसलियों की कुल संख्या – 24 ▪️ऊपरी बाहु – 2 ▪️कलाई( कार्पुलस )– 16 ▪️हथेली( मेटाकारपल्स) – 10 ▪️ जांघ ( फीमर) – 2 ▪️घुटना( पटेला) – 2 ▪️टखना( टार्सल्स) – 14 ▪️तलवा( मेटा टार्सल्स) – 10 ▪️अंगुलियों( फार्लेंजेज) – 28

▪️ *मेंड्यूला* – इसका कार्य हृदय स्पंदन की दर को प्रबलता, श्वसन दर , खांसना, छींकना, स्वाद, लार का निकलना , जीभ की गति का नियंत्रण करना है। ▪️ *मेरुरज्जू* – इसका कार्य प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय है। ▪️यह मस्तिष्क से आने जाने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। ▪️प्रतिवर्ती क्रियाओं की खोज सर्वोत्तम मार्शल हाल ने किया था। ▪️मानव शरीर में 12 जोड़ी कपालीय तंत्र तथा 31 जोड़ी मेरुरज्जू पाई जाती है। ▪️ *अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य–* आंख की पुतली को फैलाना ,हृदय स्पंदन की दर को बढ़ाना, पसीने के श्रावण को उत्तेजित करना, मूत्राशय के पेशियों को शिथिल करना आदि। ▪️परानुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य– आंखों की पुतली को संकुचित करना, हृदय स्पंदन की दर को घटाना, मूत्र त्याग के लिए पेशियों को सिकोड़ना, बाह्य जननांगों को उत्तेजित करना आदि। ▪️ तंत्रिका ऊतक की इकाई को न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका कहते हैं। ▪️ तंत्रिका कोशिकाएं शरीर की सबसे लंबी कोशिकाएं होती हैं।

🔳 *तंत्रिका तंत्र –* ▪️यह वातावरण में परिवर्तन की सूचनाओं को संवेदी अंगों से प्राप्त करके उसका तीव्र गति से प्रसारण करती है। ▪️यह शरीर के विभिन्न अंगों के बीच कार्यात्मक समन्वय स्थापित करती है। ▪️ *केंद्रीय तंत्रिका तंत्र –* इसके अंतर्गत मस्तिष्क एवं मेरुरज्जू आते है। ▪️ *मस्तिष्क* – इसका वजन 1.3 से 1.4 किलोग्राम तक होता है। ▪️ *अग्रमस्तिष्क* में सेरीब्रम, थैलेमस और हाइपोथैलेमस होता है। ▪️सेरीब्रम मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। ▪️सेरीब्रम में इच्छा शक्ति, बुद्धि, ज्ञान, स्मृति, चिंतन का केंद्र होता है। ▪️थैलेमस में ताप, स्पर्श आदि का केंद्र है। ▪️हाइपोथैलेमस का कार्य अन्तःस्त्रावी ग्रंथियों से स्रावित होने वाले हार्मोस का नियंत्रण करना है। ▪️यह भूख , प्यास, क्रोध का भी नियंत्रण केंद्र है। ▪️ *सीरीबेलम –* यह मस्तिष्क का दूसरा बड़ा भाग है। ▪️यह पश्च मस्तिष्क में पाया जाता है। ▪️इसका कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना है।

🔳 *उत्सर्जन तन्त्र –* ▪️ *फेफड़ा* – इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन श्वसन क्रिया के द्वारा होता है। ▪️ लहसुन प्याज और कुछ मसाले के वाष्पशील घटकों का भी उत्सर्जन होता है। ▪️ *यकृत* – इससे अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करता है। ▪️एमिनो अम्ल के नाइट्रोजनी पदार्थों का उत्सर्जन करता है। ▪️ *वृक्क( किडनी)–* यह स्तनधारियों में एक जोड़ी पाया जाता है। ▪️यह लगभग 10 लाख वृक्क नलिकाओं( नेफ्रॉन) से मिलकर बना होता है। ▪️नेफ्रांस , वृक्को की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। ▪️इसका कार्य मूत्र निर्माण एवं परासरण नियंत्रण( जल एवं खनिज का नियंत्रण) है। ▪️मूत्र का निर्माण वृक्क नलिकाओं में ही होता है। ▪️मूत्र में लगभग 95% जल ,2% अनावश्यक लवण , 2.3 % यूरिया , यूरिक अम्ल आदि पाए जाते है। ▪️मूत्र का pH मान 6 होता है। ▪️वृक्क की पथरी कैल्सियम ऑक्जेलेट की बनी होती है।

▪️ *प्लाज्मा* – यह निर्जीव तरल भाग है। ▪️इसके माध्यम से रासायनिक पदार्थों का संवहन होता है। ▪️ *रुधिर कणिकाएँ–* ▪️1. *लाल रुधिर कणिकाएँ (इरिथ्रोसाइट्स):* ये कणिकाएँ ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को बांधता है, ▪️ *(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स):* ये कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। वे हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। ▪️( *3) प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स):* ये रुधिर के थक्का बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है। ▪️प्लाज्मा की कुल मात्रा कुल रुधिर का 55% होती है। ▪️एक सामान्य मनुष्य में हीमोग्लोबिन की मात्रा 15 ग्राम प्रति 100ml रुधिर होता है। ▪️शरीर में रुधिर का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है। ▪️लाल रुधिर कणिका का जीवन का लगभग 120 दिन होता है। 🔳 *रक्त समूह –* ▪️ *खोज* – कार्ल लैंडस्टीनर ▪️ *एंटीजन 2 प्रकार के होते है–* A और B ▪️ *एंटीबॉडी 2 प्रकार के होते है–* a और b ▪️ *रक्त समूह 4 प्रकार के होते है–* A, B ,AB और O ▪️ *AB रक्तसमूह को सर्वग्राही कहते है* । ▪️ *O रक्त समूह को सर्वदाता कहते है* ।

▪️हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त तथा दाहिने भाग में अशुद्ध रक्त बहता है। ▪️हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते है। ▪️ *लसिका* – यह हल्का पीला द्रव्य होता है। ▪️इसमें मात्र श्वेत रूधिराणु पाए जाते हैं। ▪️ इसका बहाव केवल अंगों से हृदय की ओर होता है। ▪️ इसका कार्य लिंफोसाइट्स का निर्माण करना होता है। ▪️ इसमें उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है। ▪️ यह घाव भरने में सहायक होती है ▪️ *रुधिर* – यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है। ▪️यह क्षारीय प्रकृति का होता है, इसका PH मान 7.4 है। ▪️वयस्क मनुष्य में लगभग 5 से 7 लीटर रुधिर होता है। ▪️ रुधिर के दो भाग होते हैं: प्लाज्मा और रक्तकणिका

🔳 *परिसंचरण तंत्र–* ▪️रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे ने की। ▪️ *हृदय* – यह रक्त परिसंचरण का केंद्रीय भाग है। ▪️यह चार कोष्ठों का बना होता है– दायां अलिंद, बाया अलिंद, दायां निलय, एवं बायां निलय ▪️यह एक मिनिट में 72 बार धड़कता है। ▪️एक धड़कन में 70 मिली. रक्त पंप करता है। ▪️सामान्य मनुष्य का रक्त दाब 120/ 80 mm. Hg होता है। ▪रक्तदाब मापने के लिए स्फाइगमोमैनोमीटर का प्रयोग करते है। ▪️शरीर में अत्यधिक अम्लीयत हृदयगति को बढ़ाती है, जबकि अत्यधिक छारीयता हृदय गति को अनियमित करती है। ▪️ *शिरा* – शरीर से हृदय की ओर रक्त ले जाती है। ▪️इसमें अशुद्ध रक्त अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त होता है। ▪️पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रक्त होता है । ▪️ *धमनी* – हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाती हैं। ▪️ इसमें शुद्ध रक्त अर्थात ऑक्सीजन युक्त रक्त होता है। ▪️ पलमोनरी धमनी में अशुद्ध रक्त होता है।

🔳 *यकृत –* ▪️यह मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। ▪️यह ग्लूकोज की अधिक मात्रा को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करती है। ▪️यकृत में फाइब्रिनोजेन प्रोटीन का निर्माण होता है जो विटामिन K के साथ रुधिर का थक्का जमने में सहायक होता है। ▪️प्रोटीन की अधिक मात्रा को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करता है। ▪️हिपैरिन प्रोटीन का निर्माण करता है। ▪️यह पित्त का संश्लेषण करती है। ▪️पित्त पित्ताशय में एकत्र रहता है। ▪️पित्त भोजन में आए हुए जीवाणुओं को नष्ट करता है। ▪️पित्तरस वसा का इमल्सीकरण करता है। ▪️ *अग्नाशय* – मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि। ▪️यह अंतस्रावी एवं बहिस्रावी दोनों प्रकार की ग्रंथि है। ▪️इसमें कार्बोहाइड्रेट वसा एवं प्रोटीन को पचाने वाले एंजाइम पाए जाते हैं। ▪️अग्नाशयी रस को पूर्ण पाचक रस कहा जाता है। ▪️ *इन्सुलिन* – *खोज* – बैटिंग एवं बेस्ट ने ▪️ यह ग्लूकोस से ग्लाइकोजन के निर्माण की क्रिया को नियंत्रित करता है। ▪️ इसकी कमी से मधुमेह नामक रोग होता है। ▪️ इसकी अधिकता से हाइपोगलासिमिया नामक रोग होता है।

▪️ *आमाशय* – इसके पाइलोरिक ग्रंथियां से जठर रस का श्रावण होता है। ▪️जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। ▪️यह भोजन को अम्लीय बना देता है, तथा भोजन पर लार के प्रभाव को समाप्त कर देता है। ▪️जठर रस में पेप्सिन एवं रेनिन नामक एंजाइम होते हैं । ▪️पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करके पेप्टोंस में परिवर्तित कर देता है। ▪️रेनिंग दुग्ध के पाचन में सहायक होता है। ▪️ *छोटी आंत –* ग्रहणी में ट्रिप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटिओसेज एवं पेप्टोज में तोड़ता है। ▪️एमाइलेज–यह काईम की मंड ,ग्लाइकोजन एवं अन्य पॉलिसैकेराइड्स को माल्टोज ,लैक्टोज और सुक्रोज नामक डाइसैकेराइड शर्करा में तोड़ता है। ▪️ *लाइपेज* – यह एमलसिफाइड वसा का ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड में परिवर्तन करता है। ▪️आंत्रीय रस क्षारीय होता है ,तथा एक स्वस्थ मनुष्य में प्रतिदिन 2 लीटर आंत्रीय रस स्रावित होता है। ▪️ छोटी आंत में भोजन की पाचन क्रिया पूर्ण होती है एवं बचे हुए भोजन का अवशोषण होता है। ▪️अवशोषण के पश्चात बड़ी आत मल इकट्ठा होता है तथा गुदाद्वार से बाहर निकलता है।

🔳 *मानव शरीर पाचन तंत्र–* ▪️मनुष्य के आहार नाल की लंबाई 8 से 10 मीटर तक होती है। ▪️ छोटी आत की लंबाई लगभग 6 मीटर होती है। ▪️ *दांत* – मनुष्य के दोनों जबड़े में 16-16 अर्थात कुल 32 दांत होते हैं। ▪️2 कृंतक, 1 रदनक, 2 अग्रचवर्णक, 3 चवर्णक ▪️दांत की ऊपरी परत कैल्शियम फास्फेट एवं कैल्शियम कार्बोनेट की बनी होती है। ▪️इनैमल सबसे कठोर पदार्थ होता है। ▪️ *जीभ* – यह एक मांसल पेशी है। ▪️इसका आगे का भाग मीठा, पीछे का भाग तीखा, एवं दोनों बगल के भाग खट्टे का अनुभव करते है। ▪️ *लार ग्रंथियां* – तीन जोड़ी पाई जाती है। ▪️लार में 99% जल और 1 % एंजाइम , प्रोटीन , एवं लवण होता है। ▪️टायलिन एवं लाइसोजाइम एंजाइम पाए जाते है । ▪️ इनका कार्य भोजन का पाचन एवं जीवाणु रहित करने का होता है।

🔳 *कुछ फल तथा उनके खाने योग्य भाग–* ▪️अनार – बीजों के रसदार वाह्य चोल ▪️आम – मध्य फल भित्ति ▪️अमरूद – फल भित्ति ▪️सेब – मांसल पुष्पासन ▪️नासपती – मांसल पुष्पासन ▪️मक्का – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️गेहूं – भ्रूण तथा भ्रूणपोष ▪️काजू – पुष्पवृत एवं बीजपत्र ▪️नींबू – अतः फलभित्ति के रसदार रोम ▪️अंगूर – फलभित्ति ▪️टमाटर – फलभित्ति ▪️केला – मध्य एवं अतःफलभित्ति ▪️मुंगफली – भ्रूण ▪️कटहल – परीदलपुंज व बीज ▪️ इमली –मध्य फल भित्ति ▪️ सिंघाड़ा – बीज

🔳 *जड़ –* ▪️ये पौधों के अवरोही भाग है। ▪️ *मूसला जड़* – अंकुरण के समय मूलांकुर बढ़कर प्राथमिक जड़ का निर्माण करती है, इससे अनेक द्वितीयक एवं तृतीयक जड़ निकलते हैं। ▪️ *अपस्थानिक जड़ –* पौधों के मूलांकुर के अतिरिक्त, अन्य किसी भी भाग से निकलने वाली जड़। ▪️ *झकड़ा जड़ –* इन जड़ों से कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है। ▪️गाजर ,मूली, शलजम जड़ों के रूपांतरण हैं, इनमें जड़ भोजन संग्रहण का कार्य करती है। ▪️ *तना –* यह सूर्य के प्रकाश की ओर विकसित होता है। ▪️आलू ,अदरक, हल्दी, लहसुन तथा प्याज रूपांतरित तना है। ▪️ *पत्ती* – यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा भोजन बनाती हैं। ▪️कुछ पौधों की पत्तियां कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं जैसे– नागफनी ▪️ *पुष्प* – यह पौधों का जनन अंग होता है। ▪️पुमंग नर जननांग है और जायांग मादा जननांग। ▪️पुमंग में एक से अधिक पुंकेसर होते हैं। ▪️ *फल* –परिपक्व अंडाशय को फल कहते हैं।