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Important Update for UGC NET Students
NTA’s website is currently very busy due to heavy traffic, so the Provisional Answer Key may take some time to load.
Please don’t worry. Wait for a while and keep trying/reloading the NTA website. You may be able to check your Provisional Answer Key once the traffic reduces.
Stay patient and keep checking. All the best!
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If anyone facing difficulty you can share your application number and Password for answer key to check we will send your provisional answer key and response sheet.
Share on our official WhatsApp number 7973109547
Thanks !
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प्रिय यूजीसी नेट अभ्यर्थियों,
आज 15 अगस्त है—स्वतंत्रता दिवस। 🇮🇳
और शायद इस बार यह दिन आपके लिए एक और इंतज़ार की खुशी लेकर आया है।
काफी लंबे इंतज़ार के बाद एनटीए ने कहा है कि कल, 16 अगस्त को यूजीसी नेट जून 2026 की उत्तर कुंजी जारी की जाएगी।
आपने परीक्षा दी, फिर परिणाम का इंतज़ार किया, हर अपडेट पर उम्मीद लगाई और कई दिनों तक मन में यही सवाल रहा—“आखिर उत्तर कुंजी कब आएगी?”
अब लगता है कि इंतज़ार की घड़ियाँ समाप्त होने वाली हैं।
कल उत्तर कुंजी आएगी तो हो सकता है किसी के चेहरे पर मुस्कान होगी, किसी को अपनी मेहनत का भरोसा मिलेगा और किसी को आगे की तैयारी के लिए नई दिशा मिलेगी।
लेकिन एक बात याद रखना—एक उत्तर कुंजी आपकी पूरी क्षमता का फैसला नहीं करती।
आपकी असली पहचान आपकी मेहनत, आपकी निरंतरता और हार न मानने की आदत है।
जिसने ईमानदारी से मेहनत की है, उसका परिणाम देर से आ सकता है… लेकिन उसकी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
मेरी तरफ से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🇮🇳
कल उत्तर कुंजी आएगी…
और उम्मीद है कि बहुत से चेहरों पर लंबे इंतज़ार के बाद एक प्यारी-सी मुस्कान भी आएगी। ❤️
आप मेहनत करते रहिए, बाकी हम सब साथ हैं।
— दविंदर सर
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उत्तर- (2) व्याख्या ;
'मूषिका वंश' की रचना अतुल ने की थी। मुशिक या मुशिका वंश महाकात्यम कवि अतुल द्वारा ग्यारहवीं शताब्दी में रचित एक संस्कृत वंशवादी ग्रंथ है। इसमें मुशिंका वंश के पौराणिक इतिहास का वर्णन है जिसने भारत के वर्तमान केरल राज्य के उत्तरी भाग पर शासन किया था। माना जाता है कि इस वंश का शासक श्रीकांत 11 वीं सदी के चोल शासक राजेन्द्र प्रथम का समकालीन था। इस ग्रंथ की रचना मुशिक शासक श्रीकांत के शासन काल में लिखी गयी थी। इसकी सत्यता का प्रमाण राजतरंगिणी है जिसमें कल्हण ने भी दर्शाया है।
जबकि बिल्हण ग्यारहवीं शताब्दी के कश्मीर के प्रसिद्ध कवि थे जिनकी रचना चौरपंचाशिका प्रसिद्ध है। उनकी दूसरी रचना विक्रमांकदेव चरित है जो इतिहास का ग्रंथ है। बिल्हण के इस ग्रंथ में कल्याणी के चालुक्यों के राजा विक्रमादित्य पंचम के पराक्रमों का वृत्तांत हैं।
कल्हण कश्मीर के महाराज हर्षदेव के महामात्य चंपक के पुत्र और संगीत मर्मज्ञ कनक के अग्रज थे। इनकी रचना राजतरंगिणी है जिसमें 'कश्मीर तथा उत्तर भारत के इतिहास का वर्णन है। इसमें 1148-1150 का वर्णन है।
संध्याकर नंदी पाल राजाओं द्वारा आश्रय प्राप्त एक विद्वान थे। इन्होंने 'रामपाल चरित नामक एक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की। राजा रामपाल का शासनकाल 1075-1120 ई. तक था। इस पुस्तक में रामपाल के शासन में कैवर्तों के विद्रोह का वर्णन किया गया है।
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Hello students,
कैसा रहा आप सब का एग्जाम ?
जल्दी जल्दी मेमोरी बेस्ड क्वेश्चंस शेयर कीजिए l
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विजयी भवः! 💐
मेरी ओर से आपको ढेरों शुभकामनाएँ। आपने जो मेहनत, समर्पण और धैर्य दिखाया है, वही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। परीक्षा कक्ष में आत्मविश्वास के साथ जाइए, मन शांत रखिए और हर प्रश्न को ध्यान से पढ़कर उत्तर दीजिए।
ईश्वर आपको सफलता, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करें। आपका परिश्रम अवश्य रंग लाए।
विजयी भवः!
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उत्तर- (3) / व्याख्या बाल गंगाधर तिलक ने कहा था रेलवे और टेलीग्राफ भारत के लिए कम लाभकारी थे और वे "दूसरे की पत्नी को सजाने" के सामने थे।
परीक्षाउपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य-
तिलक ने 1853 में रेलवे के विकास एवं 1854 ई. में डाकतार व्यवस्था को भारत के लिए कम लाभकारी बताया था जिसे लार्ड डलहौजी ने विकसित किया उसमें की गई भारतीय रुपये के उपयोग पर तिलक ने इस व्यवस्था को 'दूसरे की पत्नी को सजानें" के समान थे, कहा था।
जी. सुब्रमण्यम अय्यरः- जी. एस. अय्यर ने रेलों की स्थापना के पीछे ब्रिटिश नीति क्या थी इसे स्पष्ट करते हुए लिखा है कि -
"इंग्लैण्ड के निदेशक, कम्पनी के उन्नायक, धनकुबेर, लोहाधिपति, कोयला, स्वामी, रेलवे इंजीनियर और निदेशक तथा इन सबसे बढ़-चढ़ कर अपनी पेंशन में महत्वपूर्ण वृद्धि की इच्छा रखने वाले सेवा निवृत्त ऐग्लों-भारतीय कर्मचारी, सबके सब भारत में रेलों के निर्माण को द्रुतगति देने में रूचि रखते हैं। वे यूरोपीय व्यापारी भी जिनके हाथ भारत का सारा विदेश व्यापार है और जिनका व्यापार अब समुद्र के तटवर्ती नगरों तक सीमित न रहकर भारत के ग्रामांचलों तक फैलने जा रहा है, समान रूप से भारत भूमि में रेलों के जाल के प्रसार के लिए उत्सुक है।"
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