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दोस्तो sci अकसर एग्जाम के दृष्टिकोण से थोड़ा टफ कहा जाता है ।
अगर बेसिक clear है तो आगे पढ़ने में आसानी और समझ में जल्दी आने लगता है तो आप notes को पढ़े और समझे
और अगर आपको हमारा work अच्छा लगे तो हमारे यूट्यूब चैनल को subscribe करे धन्यवाद
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सजीव जीवो के लक्ष्ण :-
● सजीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
●सजीवों में वृद्धि होती है।
●सभी सजीव शोषण करते हैं /सांस लेते हैं।
●सभी सजीव उद्दीपन करते हैं।
●सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
●सभी सजीव गति करते हैं।
●सभी सजीव प्रजनन करते हैं।
उद्दीपन :-
◆मनोविज्ञान में अर्थ :- इंद्रियों द्वारा पकड़े जाने योग्य किसी भी 'परिवर्तन' को उद्दीपन कहते हैं।
◆उद्दीपन का शाब्दिक अर्थ :- ज्योति अग्नि अथवा किसी भाव को बढ़ा देना है। 'उत्' उपसर्ग पूर्वक 'दीप' मूल शब्द में 'णिच्' (संस्कृत) 'अन' (हिंदी) प्रत्यय लगाने पर उद्दीपन शब्द की निष्पत्ति होती है।
◆ उत्सर्जन :- सजीवों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
Book Notes :-
●किसी स्थान का परिवेश जिसमें पौधे, जंतु एवं अन्य जीव रहते हैं उनका आवास कहलाता है।
●विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जंतुओं एक ही आवास में एक साथ रह सकते हैं।
●पौधों और जीवो के विशिष्ट लक्षण एवं स्वभाव जो उन्हें एक आवास विशेष में रहने के अनुकूल बनाते हैं अनुकूलन कहलाता है।
●आवास अनेक प्रकार के होते हैं परंतु सामान्यतः इन्हें स्थलीय (जमीन पर) एवं जलीय आवास (जल में) वर्गीकृत किया जाता है।
●विभिन्न आवास में सजीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती है।
पौधे, जंतु एवं सूक्ष्म जीव संयुक्त रूप से जैव घटक बनाते हैं।
●चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश एवं ताप हमारे परिवेश के कुछ अवशेष घटक हैं।
●सजीव वस्तुओं के कुछ सामान्य लक्षण है :- उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वह श्वसन, उत्सर्जन, पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया, प्रजनन, वृद्धि एवं गति करते हैं।
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"Class 6 Science Chapter 9 Notes"
●समुंद्र में जंतु एवं पौधे लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं तथा श्वसन के लिए जल में मिले वायु ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
●रेगिस्तान (मरुस्थल) दिन में बहुत गर्म होता हैं और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है।
●जिन विशेष संरचनाएं विशिष्ट संरचनाएं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे 'अनुकूलन' कहते हैं।
●आवास :- किसी सजीव का वह स्थान जिसमें वह रहता है उसका आवास कहलाता है।
●स्थलीय आवास :- जमीन पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतुओं के आवास को स्थानीय आवास कहते हैं।
●जलीय आवास :- जलाशय, दल-दल, झील, नदियां एवं समुद्र जहां पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उसे जलीय आवास है।
●जैव घटक :- किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।
●अजैव घटक :- चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएं आवास के अजैव घटक हैं।
सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक है।
●पर्यनुकूलन :- अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के साथ समाजस्य स्थापित करने के लिए कुछ जीवो में थोड़े समय के लिए परिवर्तन हो सकते हैं अल्प अवधि में किसी एक जीव के शरीर में होने वाले यह छोटे-छोटे परिवर्तन पर्यनुकूलन कहलाते हैं। जैसे :- यदि हम मैदानी क्षेत्र में रहते हैं और अचानक ही ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में चले जाए तो हमें कुछ दिनों तक सांस लेने में शारीरिक व्यायाम में असुविधा हो सकती है।
◆ पहाड़ पर हमें तीव्र गति से सोंग्स देना पड़ता है। कुछ दिनों बाद हमारा शरीर पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण के प्रति अपने आप को ढाल लेता है तथा हमें श्वास लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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"Class 6 Science Chapter 8 Notes"
◆ शरीर के विभिन्न भागों को उसी स्थान से मोड़ा व घुमाया जा सकता है जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े हो। इन स्थानों को संधि कहते हैं।
◆संधि शरीर के उस भाग को कहते हैं जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
◆जो अस्थियां संधियों पर हील नहीं सकती, ऐसी संधियों को अचल संधि कहते हैं।
◆हमारे शरीर की सभी अस्थियां हमारे शरीर को सुंदर आकृति प्रदान करने के लिए एक ढांचे का निर्माण करती है इस ढांचे को कंकाल कहते हैं।
◆मानव कंकाल अनेक अस्थियों, संधियों एवं उपास्थियो से मिलकर बना होता है।
◆संकुचन की अवस्था में पेशी छोटी, कठोर एवं मोटी हो जाती है यह अस्थि को खींचती है।
◆मछली का सिर एवं पूछ उसके मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है शरीर की ऐसी आकृति धारा रेखीय कहलाती है।
'गेट ऑफ एनिमल्स' अरस्तु द्वारा पुस्तक लिखी गई है अरस्तु प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक थे।
Book's Notes
◆अस्थियां एवम उपास्थियां मानव कंकाल बनाते हैं यह शरीर का पिंजर बनाता है और इसे एक आकृति भी देता है कंकाल चलने में सहायक है और आंतरिक अंगों की रक्षा करता है।
◆मानव कंकाल की खोपड़ी, मेरुदंड, पसलियां, वक्ष की अस्थि, कंधे एवं श्रोणि, मेखला तथा हाथ एवं पांव की अस्थियों से बनता है
◆पेशियों के जोड़े के एकांतर क्रम में सिकुड़ने एवं फैलने से अस्थियां गति करती है
◆अस्थियों की संधियां अनेक प्रकार की होती है यह उस संधि की प्रकृति एवं गति की दिशा पर निर्भर करता है।
◆पक्षियों की दृढ़ पेशियां तथा हल्की अस्थियां मिलकर उन्हें उड़ने में सहायता करती है यह पंखों को फड़फड़ा कर उड़ते हैं।
◆मछली शरीर के दोनों और एकांतर क्रम में वलय बनाकर जल में तैरती है।
◆सर्प अपने शरीर के दोनों और एकांतर कर्म में वलय बनाते हुए भूमि पर वलयाकार गति करता हुआ आगे कि ओर फिसलता हैं। बहुत सारी अस्थियां यवम उससे जुड़ी पेशियां शरीर को आगे की और धक्का देती हैं।
◆तिलचट्टे का शरीर एवं पैर कठोर आवरण से ढके होते हैं जो बाह्य कंकाल बनाता है वक्ष की पेशियां तीन जोड़ी पैरों एवं दो जोड़ी पंखों से जुड़ी होती है जो तिलचट्टे को चलने एवं उड़ने में सहायता करती हैं।
◆केंचुए में गति शरीर की पेशियों के बारी-बारी से विस्तरण एवं संकुचन से होती है। शरीर की अध: सतह पर शूक केंचुए को भूमि पर पकड़ बनाने में सहायक है।
◆घोंघा पेशीय पाद की सहायता से चलता है।
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. मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस: 30 जुलाई
मानव तस्करी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह हर साल 30 जुलाई को मनाया जाता है।
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केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा "मेमोरीज़ नेवर डाई" नामक पुस्तक का विमोचन किया गया है।
अमित शाह ने तमिलनाडु के रामनाथपुरम की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान पुस्तक का विमोचन किया।
◆यह पुस्तक दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और विरासत के लिए एक श्रद्धांजलि है।
●डॉ. एपीजेएम नसीमा मरैकयार और वैज्ञानिक डॉ. वाई.एस. राजन ने इस पुस्तक का सह-लेखन किया है।
श्री शाह ने कहा की डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान का दिखाया गया सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
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आचार संहिता के उल्लंघन के लिए हरमनप्रीत कौर को दो अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को आईसीसी आचार संहिता के दो अलग-अलग उल्लंघनों के बाद अगले दो अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
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निशा बिस्वाल अमेरिकी वित्त एजेंसी की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन गई हैं।
निशा बिस्वाल एक भारतीय-अमेरिकी नीति विशेषज्ञ हैं।
निशा बिस्वाल यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन के डिप्टी सीईओ के रूप में काम करेंगी।
◆वह वर्तमान में यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स में अंतर्राष्ट्रीय रणनीति और वैश्विक पहल के लिए वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं।
◆उनके पास अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी56 रॉकेट पर 7 सिंगापुर उपग्रहों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
30 जुलाई को, इसरो के पीएसएलवी-सी56 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा में एसडीएससी- एसएचएआर के पहले लॉन्च पैड से सिंगापुर के डीएस-एसएआर उपग्रह और छह सह-यात्री पेलोड को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
●पीएसएलवी-सी56/डीएस-एसएआर एसटी इंजीनियरिंग, सिंगापुर के लिए न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) का समर्पित वाणिज्यिक मिशन है।
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Important questions answers
1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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Class 6 Science Chapter 7 Important Notes
● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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Class 6 Science Chapter 5 Notes
● गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूंसे को हाथों द्वारा अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं।
● सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणो अथवा अनाज को पृथक करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं।
● निष्पावन, अनाज के भारी बीजो से भूसे को अलग करने की एक विधि है इसे खाली मैदान में ऊंचे समतल स्थान पर खड़े होकर किया जाता है।
◆ मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रकम को अवसादन कहते हैं।
◆अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
◆किसी मिश्रण के कणों की आमाप में अंतर का उपयोग चालन तथा निस्यंदन प्रक्रियाओं द्वारा पृथक्करण में किया जाता है।
◆जल को उसके वास्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।
◆जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
◆जिस विलियन में कोई पदार्थ और अधिक ना घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलियन होता है।
◆जल विलय पदार्थों की विभिन्न मात्राएं घोलता है।
रेत और जल के मिश्रण में रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं और निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक किया जा सकता हैं।
◆द्रव तथा उसमें अविलेय पदार्थ के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है।
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