ब्रह्मचर्य जीवन पुस्तकें
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●ये दुनिया गोरखधंदा है, यहाँ सब माया में अँधा है ।
सुविचार वाला ये पोस्ट हर दिन पढ़ें ।🙏😊
आज किसी ने भी प्रतिज्ञा नही लिखा है । 5 मिनट भी नही लगता है लिखने में ।
लिखिए और पांचो बातों का दिन भर पालन भी करिये । देखिये फिर कुछ दिनों में ब्रह्मचर्य आपका प्रकृति बन जायेगा ।
जब भी मन गलत राह पर भटके
ॐ मन्त्र, गायत्री मंत्र या फिर
ॐ हं हनुमंते नमः
(ॐ हम् हनुमंते नमः) का जाप करें ।
सुविचार
इस पोस्ट को रोजाना पढ़ें। जब भी मुझे कोई और सुविचार मिलेगा मैं इस पोस्ट को अपडेट कर दूंगा। आप भी सुझा सकते हैं जिन्हें मैं यहां जोड़ूंगा।
यदि आप अंग्रेजी/हिंदी नहीं समझते हैं तो आप भाषा का अनुवाद कर सकते हैं।
●मैं अपनी इंद्रियों का स्वामी हूं न कि इन्द्रियाँ मेरी स्वामी हैं।
●जैसे गाय को मांस से कोई लेना-देना नहीं है। उसी तरह मुझे लड़कियों या किसी के शरीर से कोई लेना-देना नहीं है।
●"तीनों लोक का साम्राज्य त्यागना, स्वर्ग का अधिकार छोड़ना, इससे भी उत्तम वस्तु हो उसे भी त्याग देना परन्तु ब्रह्मचर्य को भंग न करना।'' -भीष्म पितामह
●जिसका ब्रह्मचर्य जिंदा है उसके आगे मौत भी शर्मिंदा है ।
●परिपक्वता तब प्राप्त होती है जब व्यक्ति तात्कालिक सुखों को दीर्घकालिक मूल्यों के लिए स्थगित कर देता है।
●"यदि आप कड़ी मेहनत से कुछ अच्छा हासिल करते हैं, तो परिश्रम का थकान जल्दी चला जाता है, लेकिन मेहनत के लाभ टिक जाती है; यदि आप आनंद की तलाश में कुछ शर्मनाक करते हैं, तो खुशी जल्दी समाप्त हो जाती है, लेकिन शर्मिंदगी बरकरार रहती है"
●इच्छाएं राजाओं को गुलाम बना देती हैं और धैर्य गुलाम से राजा बना देता है।
●जब तक न सफल हो, नींद - चैन को त्यागो तुम संघर्षों का मैदान मत छोड़ मत भागो तुम ॥
●जितना घिसोगे और तपोगे उतना चमकोगे।
●जो व्यक्ति अपने 1 घण्टे का मूल्य नहीं समझता, उस व्यक्ति को बहुत सी असफलताएं झेलनी पड़ती हैं।
●खुश रहना एक आदत है और मैं खुश हूं
●मन नहीं कर रहा?-काम करो
रोना आ रहा?-काम करो
मौसम खराब है? - काम करो
बिजली नहीं है?- काम करो
फेलियर? - काम करो
सेक्सस?- काम करो
बुखार है या इतवार है? - आराम करो
●इस बात पर ज़रा भी संदेह न करें कि भौतिक सुख आपको कभी खुश नहीं कर सकते। यह किसी पुरानी बीमारी के लिए अस्थायी दवा की तरह है। यह आपको शांत करता है एक पल के लिए लेकिन उसके बाद आप खुद को फिर से दुखी पाते हैं।
●हस्तमैथुन अपने आप में मौत है, यह आपको कमज़ोर बनाता है और धीरे-धीरे आपको मौत की ओर ले जाता है, आपको शक्तिहीन बनाता है और बिना शक्ति का मतलब है कोई जीवन नहीं।
प्रतिज्ञा
(ऊपर फ़ोटो में जो प्रतिज्ञा है केवल उसे लिखना है , इसे हर दिन केवल पढ़ना है)
मेरा नाम _ है। आज मेरी आयु वर्ष महीने दिनों की है। आज दिनांक 25 अक्टूबर 2024 है।
1. मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि दुर्बलता और माया के और ले जाने वाले विचारों को तुरंत ही होश्पूर्वक परमात्मा के तरफ मोड़ दूंगा। क्योंकि दुर्बलता पाप है।
2. मैं अपना जीवन इन्द्रियों के तुच्छे इच्छाओं के दासता में नही बिताऊँगा।
3. मैं अपना जीवन शक्ति थानी वीर्य बबर्बाद नहीं करूंगा बल्कि इसे ओजस में परिवर्तित करूंगा।
4. स्त्रीयों को बहन / माता की दृष्टि से देखूंगा।
5. चैनल पर जाकर प्रतिज्ञा, सुविचार और नियमों को पढूंगा ।
6.जिस तरह एक गाय माँस नही खाती और न ही उसे माँस से कोई मतलब होता है उसी तरह मुझे स्त्रियों के शरीर से कोई प्रयोजन नही है ।
(हस्ताक्षर)
दैनिक प्रतिज्ञा नीचे फ़ोटो में जैसा मैंने लिखा है ठीक वैसा ही केवल 5 प्रतिज्ञा लिख कर ब्रह्मचर्य जीवन समूह में हर दिन भेजना है । भेजने के बाद आप उस पन्ने को फाड़ के फेक सकते है या रख सकते है आपकी इच्छा । लिखावट खराब है तो कोई बात नही, मेरा भी खराब है । प्रतिज्ञा करने से आपका मन दिन भर गलत विचारो के तरफ नही जाएगा । नाम दिनांक और आयु अवश्य लिखना है । प्रतिज्ञा में और कुछ नही जोड़ना है ताकि अधिक लंबा न हो । कुछ जोड़ना है तो जोड़ कर चैनल पर अपलोड किया जाएगा और हर दिन उसे चैनल पर पढ़ सकते है । पांचवा प्रतिज्ञा में जो सुविचार और नियमों की बात है वो भी चैनल पर नीचे है जिसे हर दिन आकर पढ़ना है ।
🤔🤔🤔कल से हम आपके लिए एक नया पहल करने जा रहे है जिसमें आपको हर दिन कॉपी पर दिनांक के साथ एक ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा लिख कर समूह में फ़ोटो भेजना है, हर दिन सुबह (फ़ोटो भेजने के बाद आप चाहे तो उस पेज को फाड़ के फेक सकते है)
क्या आप उसमें भाग लेंगे ?
यदि चित्त से विषयासक्ति नष्ट नहीं हुई तो बाहर से विषय- सेवन त्याग देने पर भी साधक सुखी नहीं हो सकता ।
इसलिए आवश्यकता है हमें सत्संग के द्वारा चित्त में स्थित विषयासक्ति को नष्ट करने की अर्थात् चित्त का परिवर्तन करने की । भले ही हमारा भोजन सात्त्विक है, हम आसन-व्यायाम-प्राणायाम भी नियम से करते हैं किन्तु हमारा चिन्तन ठीक नहीं है तो हम विषय- संयोग होने पर उससे बच नहीं सकते हैं । हमारे मस्तिष्क में जो यह बात बैठी हुई है कि 'स्त्री-शरीर में सुख है । जब तक यह बात हमारी बुद्धि से नहीं निकलेगी तब तक हम बलात् इन्द्रियों एवं मन को कब तक रोक सकते हैं । मन से कितने समय तक लड़ सकते हैं, आखिरकार हमें परास्त होना ही पड़ेगा। वही बात आज सबके साथ हो रही है । अगर यह बात हम बुद्धि में बैठा लें कि विषय तो विष से भी ज्यादा विषैले, दुःखदायी, भय एवं अशांतिदायक हैं, तब विषयों से स्वाभाविक अरुचि होना संभव है ।
ध्यान व्यायाम-प्राणायाम और सात्विक आहार ब्रह्मचर्य धारण करने में सहायक अवश्य है लेकिन मुख्य बात है चिंतन बदलना, बाकी ये सब गौड बातें हैं। यदि हमारा चिंतन विषयों का बना रहा तो हम ब्रह्मचर्य को रोक पाने में समर्थ नही हो सकते हैं, अतः चिंतन बदलना बहुत जरूरी है और उसके बदलने के लिए नित्य सत्संग, शास्त्र स्वाध्याय और नामजप तीनों अति आवश्यक हैं ।
ऐसा करने से चिंतन बदलेगा और व्यायाम-प्राणायाम आदि से शरीर की नस-नाड़ियाँ मजबूत होंगी। शुद्ध आहार से मन चलायमान नहीं होगा । आप तीनों को करें, आहार ठीक कीजिये, भजन-साधन से चिंतन ठीक कीजिये और दृढ़ निश्चय के द्वारा उन अशुभ क्रियाओं को दूर कीजिये, जो अशुभ क्रियाएँ आप कर रहे हैं तो आप सुधर जायेंगे नहीं तो कुछ दिनों बाद ऐसा होने लगेगा कि आपकी विचार शक्ति लुप्त हो जायेगी । आपके अन्दर बिना किसी कारण के भय और घबराहट बनी रहेगी यानी सैकड़ों तरह की परेशानियाँ आ जायेंगी ।
@b_jivan
जब तक चिंतन अपवित्र है तब तक ब्रह्मचर्य धारण करना बड़ा कठिन है । ब्रह्मचर्य संयम के लिए आवश्यक मुख्य बात है कि हमारा चिंतन बदले ।
🕉🕉🕉🧘♂🧘♂🧘♂🕉🕉🕉
जब भी कामवासना सताये तुरंत दौड़ के यहाँ आएं और नित्य दिन इस पोस्ट को पढ़ें । बहुत मेहनत से बनाया हूँ :
●प्रतिज्ञा
वीर्यरक्षा मेरा परम कर्तव्य है । मैं इसकी रक्षा कर अपने शरीर को पुष्ट करूँगा । मैं देश के लिए ब्रह्मचारी रहूंगा अथार्त मैं गुलाम संतान उत्पन्न नही करूँगा ।
●“तीनों लोक के साम्राज्य का त्याग करना, स्वर्ग का अधिकार छोड़ देना, इससे भी कोई उत्तम वस्तु हो, उसको भी छोड़ देना परन्तु ब्रह्मचर्य को भंग न करना।’’
-भीष्म पितामह
@b_jivan
●जिसका ब्रह्मचर्य जिंदा है उसके आगे मौत भी शर्मिंदा है ।
●पहले ज़माने में वीर्यवान भारत के सपूत मौत से भी नहीं डरते थे । और आज वीर्यनाश के कारण घरों से बाहर निकलने से घबराते हैं । बहुत खेद की बात है ।
●"मृत्यु कभी भी आ सकती है। मैं आपको यह इसलिए बता रहा हूँ ताकि आपको अपनी मृत्यु के बारे में पता चले। यदि आप लगातार इस संभावना से अवगत हैं कि आप किसी भी क्षण मर सकते हैं, तो आपका उत्साह बढ़ जाएगा। इस जागरूकता को विकसित करने का प्रयास करें। और देखें कि क्या इससे आपकी साधना पर कोई फर्क पड़ता है।"
#Annamalai_Swami
@b_jivan
●ब्रह्मचारी के लिए सबसे बड़ा नियम ईश्वर प्रार्थना है । नियमित रुप से प्रातः सायं ईश्वर की प्रार्थना ब्रह्मचर्य की रक्षा का एक अच्छा साधन है । ईश्वर-प्रार्थना आदि नियमों का पालन करने से ब्रह्मचर्य का साथ ही दूसरे कार्यों की सफलता में भी सहायता मिलती है।
●ऐ पुरुष ! तुम चर्ममयी नरक कुंड की ओर क्यों तकते हो ? क्या नरक के कीट बनने के लिये ? छी ! छी ! इससे तुम्हारा कैसे उद्धार होगा । क्या यही स्वर्ग सुख है । जरा तुम्ही सोचो की ये स्वर्ग भोग है या नरक भोग ? इस प्रकार तो सुअर कुकुर और गोबर के कीड़े भी आनंद मनाते है ! इससे फिर तुम्हारा दर्जा ऊँचा कैसे ? ऊँचे दर्जे के लिए हमे अवश्य अपने आचार विचार भी ऊँचे रखने चाहिए ! केवल मनुष्य की देह धारण कर लेने से कोई "मनुष्य" नही हो सकता । विद्या और विनय, तप व शांति, क्रांति व दान्ति (दामन शक्ति) इत्यादि सदगुणो गुणों से ही मनुष्य "मनुष्य" बन सकता है। इन सब की जड़ एक मात्र ब्रह्मचर्य है ये सत्य बात कभी न भूलो ।
स्रोत - "ब्रह्मचर्य ही जीवन है" ग्रंथ
@b_jivan
●हस्तमैथुन से :
जनेन्द्रिय टेढ़ी, छोटी व शिथिल हो जाती है ।
व मुख की ओर मोटी और जड़ की ओर पतली सी पड़ जाती है ।
उसके ऊपर एक मोटी नस उभर आती है ।
ये नपुंसकता के चिन्ह है ।
ऐसे बालक पूर्ण-वयस्क होने पर स्त्री सहवास के योग्य नही रह जाता ।
जो व्यक्ति ब्रह्मचर्य को नष्ट कर देता है वह कुरूप, बदसूरत चेहरे और आंखों वाला हो जाता है और अपनी चमक और आकर्षण खो देता है।
चेहरे पर दाग-धब्बे और झुर्रियां नजर आने लगती हैं।
आंखें सुस्त हो जाती हैं और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
बाल सफ़ेद होने लगते हैं और बाल झड़ने भी लगते हैं।
वे थोड़ा सा प्रयास करने पर ही थक जाते हैं और हांफने लगते हैं।
वे दुर्बल हो जाते हैं।
बार-बार भूख लगने लगती है क्योंकि उनका लीवर कमजोर हो जाता है।
पाचन अग्नि कमजोर होने के कारण उन्हें ज्यादातर समय कब्ज की शिकायत रहती है।
या तो उन्हें नींद नहीं आएगी या फिर घंटों सोने के बाद भी वे हमेशा आलसी बने रहेंगे। उनकी आंखें हमेशा भारी रहेंगी।
बिना वजह हाथ-पैरों के जोड़ों में दर्द होता है।
थोड़ा सोचने पर भी सिरदर्द हो जाता है।
बिना कोई दृश्य देखे या कोई क्रिया किए स्वप्नदोष हो जाता है। वीर्य नष्ट हो जाता है।
वीर्य इतना पतला हो जाता है कि बिना प्रयास किए ही पेशाब करते समय भी वीर्यपात हो जाता है।
इससे नपुंसकता तक हो सकती है।
उन्हें कानों से लगातार आवाजें सुनाई देने लगती हैं।
बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना।
हथेलियों, तलवों, हाथों और पैरों पर पसीना आना।
छोटे-छोटे काम करने में भी हाथ कांपने लगते हैं।
यहां तक कि एक छोटा सा मौसमी बदलाव भी उन्हें बीमार कर सकता है। थोड़ी सी गर्मी या थोड़ी सी सर्दी बीमारी का कारण बन जाती है। प्रकृति की मार उनसे तनिक भी सहन नही होती ।
चेहरे पर दाने निकल आते हैं।
कभी-कभी आँखों के आगे अँधेरा छा जाता है; व्यक्ति खड़े होते समय अचानक शून्य और बेहोश हो जाता है।
आंखों में जलन होना, बिना किसी कारण आंखों से पानी आना।
कमर, रीढ़ और छाती में दर्द होना।
रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती है और वे सीधे बैठने की क्षमता खो देते हैं।
मसूड़ों में सूजन, मुंह से दुर्गंध, शरीर के पसीने से दुर्गंध।
नाक के किनारों पर धीरे-धीरे कालापन बढ़ने लगता है, जो धीरे-धीरे गालों तक फैल जाता है।
छाती की हड्डियाँ दिखाई देने लगती हैं।
वीर्यरक्षा के लाभ
1.https://t.me/b_jivan/306?single
2.https://t.me/b_jivan/273
3.https://t.me/b_jivan/134
4.https://t.me/b_jivan/263
5.https://t.me/b_jivan/283
Quotes:
https://t.me/b_jivan/170
https://t.me/b_jivan/160
https://t.me/b_jivan/162
●इस कॉन्सेप्ट में आपके अर्जेस आने की संभावना बहुत ही कम होते हैं लेकिन फिर भी आपको उसके लिए तैयार रहना पड़ेगा। मुझे इस दौरान किसी प्रकार का कोई urges नहीं आया है ।
●उपरोक्त सारी चीजें करने पर आप किसी भी प्रकार के वीर्य नाश से बच सकेंगे नाईट फॉल भी आपको केवल बिना सपनों के होगा।
●निम्नलिखित बातें अपनाकर आप बिना सपनों के होने वाले नाईट फॉल से भी बच सकते हैं :
1.भोजन सही समय पर करें
2.रात में भारी भोजन न करें और 7 बजे से पहले भोजन कर लें।
3.सात्विक भोजन करें (लहसुन, प्याज, मांस, तेज मसाला, आदि का त्याग केरे)
4.वीर्य पतला हो तो गाड़ा करने वाली ओषधियो का प्रयोग करें
●No PSPO को एक जीवनशैली है न कि मात्र एक उपाय या चैलेंज । इसलिए अपने जीवन जीने के ढंग को बदलिए ,कोई शॉर्टकट नही ढूंढ़िए ।
●No PSPO को अपनाने से मुझे 1 महीने तक बिल्कुल भी किसी प्रकार का वीर्य नाश नहीं हुआ। 1 महीने के बाद मुझे विदाउट ड्रीम नाईट फॉल हुआ एक बार और फिर से वीर्य नाश रहित इस जर्नी पर कंटिन्यू हू।
●No PSPO क्या है?
यह एक तरह से ब्रह्मचर्य ही हैं यह No PMO से कहीं ज्यादा अधिक कारगर है। No PMO बहुत आसान है लेकिन उसमें वीर्य नाश हो जाता है उसमें इतनी पाबंदियां नहीं है वही ब्रह्मचर्य बहुत विशाल हो जाता है और उसको पूरी तरह से पालन करना थोड़ा दुष्कर है हर कोई व्यक्ति पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर सकता। एक तरह से यह ब्रह्मचर्य का आधुनिकीकरण है। इसके द्वारा मैं और मेरे दोस्त खूब लाभ ले रहे हैं।
●No PSPO के 3 भाग है और तीनों ही महत्वपूर्ण है
●पहला भाग हैं *No PSPO* जिसमें
*P* = no porn (pic/video/audio/writtensexstory)
*S* = no semen relapse means no masterbation no wetdream nightfall no any type semen relapse (leaving without dream nightfall)
*P* = no protein relapse (its mean semen niklne se pahle niklne wala pdarth ko bhi nhi nikale इस चीज के बारे में आगे विस्तार से दिया गया है।)
*O* = no orgasm
●Protein Relapse से कैसे बचे?
प्रोटीन relapse तब होता है जब sex organ एक्सट्रीमली एक्साइटिड हो। जब प्राकृतिक रूप से sex organ exited होता है तो कभी भी प्रोटीन रिलेप्स नहीं होता Protein relapse केवल तब होता है जब कृत्रिम रूप से यानी अपने मन के विचारों या हाथ आदि के द्वारा होता है। अब हाथों को तो हम कंट्रोल कर सकते हैं लेकिन मन के sexual विचारों को कैसे कंट्रोल करें? इसके लिए सेक्सुअल विचारों का 3 भागों में बंटवारा किया है :
1.sex organs ke bare me thoughts
2 any ladki ke bare me sex thoughts
3 Purv me dekhe huye kamuk chitra
●इनके मेरे पास पृथक पृथक हल है लेकिन उससे कहीं अधिक कारगर उपाय मैं आपको बताऊंगा जो इस प्रकार हैं कि :
अपने आपको अजीवन ब्रह्मचारी समझें साथ ही अपने आप को पुरूष मानना बन्द करें । ये सुन के अजीब लगता होगा लेकिन पुरुष को ही स्त्री चाहिए होता है । लिंग तो शरीर का होता है आत्मा का कोई लिंग नही होता । इसलिए इस शरीर से स्वम् को पृथक मानिये । इसे एक वाहन मात्र मान कर इसका उपयोग केवल और केवल अपने आत्मा की जागृति के लिए करें । आत्मज्ञान के लिए करें ।
(तब तक जब तक आप इस यात्रा को करना चाहते हों जैसे 3 महीने 6 महीने 1 साल या 5 साल) यानी आपको सोच रखनी है कि आपको कोई विवाह नहीं करना, कभी सेक्स नहीं करना, इसे आपके लिए सेक्स ऑर्गन का काम केवल मूत्र विसर्जन है और कुछ नहीं और आपका सेक्स ऑर्गन से कोई मतलब नहीं, पत्नी से किसी लड़की से सेक्स का कोई मतलब नहीं और पूर्व के कामुक विचार सोचना भी बेकार है। क्योंकि जो चीज हमको नहीं चाहिए, उसे सोच कर समय बर्बाद क्यों करना। उदाहरण के लिए अगर आपको डॉक्टर बनना ही नहीं तो आप नीट बगेरा क्यों करेंगे।
●जब भी उत्तेजना आये तो इसी बात का ध्यान करें कि कामवासना से मेरा कोई संबंध नही । मैं शरीर नही हु मैं आत्मा हूँ और आत्मा को शारीरिक भोगों से आनंद नही आता । आत्मा को एक ही चीज़ से आनंद आता है और वो है परमात्मा से जुड़ कर ।
परमात्मा से जुड़ने के कई साधन हैं जैसे प्रार्थना, ध्यान,पवित्रता, भजन, अर्थ सहित वैदिक मंत्रों का उच्चारण इत्यादि ।
●दूसरा उपाय है कि अपना लक्ष्य बहुत बड़ा बनाना है इतना बड़ा की उसके बारे में सोच कर आपको स्वम् डर लगे ।इतिहास के सारे ब्रह्मचारी के जीवन में बहुत बड़े लक्ष्य थे इसलिए वे ब्रह्मचर्य में भी सफल हुए ।
●दूसरा भाग है *Do KGEMS*
*K* = Kegal exercise daily
*G* = get up 4am daily
*E* = exercise daily
*M* = morning meditation daily
*S* = sleep only after doing below activities daily
eg. 1. Brahamcharya aasan
2. Meditation
3. Positive affirmation
4. पेशाब करके सोयें
5. रात को पानी कम पियें
●इनमें एक चीज का विशेष ध्यान रखे रोज सुबह 4 बजे जरूर उठे वरना स्वप्नदोष जरूर होगी।
●सुबह खूब पानी पिये.
●आप चाहें तो कभी-कभी बाइनॉरल बीट्स सुन सकते हैं और नियमित रूप से कुछ समय भगवान की भक्ति भी कर सकते हैं।
●तीसरा भाग है *ALWAYS READY TO FIGHT WITH URGES*
1. कभी भी ब्रह्मचर्य का घमंड मत करो हमेशा ध्यान रखो कि आपको अर्जेस कभी भी आ सकता है
2. Urges normal h सबको आते हैं लेकिन urges के दौरान क्या करना है यह हर किसी को नहीं आता
जब urges आए तो क्या करें ?
1. उस समय एकांत में ना रहे दोस्त और परिवार के साथ रहे
2. इतना एक्सरसाइज करो कि थक जाओ और इनर्जी ना बचे
3. वीर्य नाश से होने वाली हानियों का विचार करें और अपने लक्ष्य पर कार्य करते रहें
4. Meditation करे
5. पूरी लय और राग के साथ ईश्वर की भक्ति करें
इन पांचो तरीकों में से कोई सा भी तरीका आप अपना सकते हैं।
