मराठी व्याकरण - MPSCExams.com
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📊 شاخصهای مخاطب و پویایی
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📝 توضیح و سیاست محتوایی
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به لطف بهروزرسانیهای پرتکرار (آخرین داده در تاریخ 02 مه, 2026)، کانال همواره بهروز و دارای دسترسی بالاست. تحلیلها نشان میدهد مخاطبان بهطور فعال با محتوا تعامل دارند و آن را به نقطه اثرگذاری مهم در دسته آموزش تبدیل کردهاند.
در حال بارگیری داده...
| تاریخ | رشد مشترکین | اشارات | کانالها | |
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| 04 آوریل | 0 | |||
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| 02 آوریل | 0 | |||
| 01 آوریل | 0 |
| 2 | मुंबई पोलीस आयुक्तालय भरती 2024-25 अंतर्गत पोलीस शिपाई 2643 जागांसाठी भरती | Mumbai Police Bharti 2025
https://mpsctestseries.in/mumbai-police-bharti-2025/ | 1 493 |
| 3 | 🚨 खुशखबर! 🔥 अखेर महाराष्ट्र पोलीस भरती २०२४-२५ ची जाहिरात प्रकाशित! 🚔💥
https://mpsctestseries.in/maharashtra-police-recruitment-2024-25/ | 1 433 |
| 4 | 5_6339183733882494782.pdf
पोलिस भरती जाहिरात प्रसिद्ध करणेबाबत……. | 1 348 |
| 5 | सामान्य ज्ञान सराव पेपर 19 | सर्व स्पर्धा परीक्षेस उपयुक्त
https://mpsctestseries.in/general-knowledge-question-paper-19/ | 1 412 |
| 6 | दिल्ली पोलिस आणि CAPFs अंतर्गत 3073 सब-इन्स्पेक्टर (SI) जागांसाठी भरती
https://mpsctestseries.in/ssc-cpo-recruitment-2025/ | 1 449 |
| 7 | Marathi Varnamala | मराठी वर्णमाला। मुळाक्षरे। व्यंजन।स्वर | 52 वर्ण संपूर्ण माहिती
https://mpsctestseries.in/marathi-varnamala/ | 1 591 |
| 8 | मराठी व्याकरण संभाव्य सराव प्रश्नसंच 24 | सर्व स्पर्धा परीक्षेस उपयुक्त
https://mpsctestseries.in/marathi-grammar-mock-test-24/
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| 9 | मराठी व्याकरण घटक 2 : संधी - विसर्ग संधी
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विसर्ग संधी
१) विसर्ग उकार संधी
विसर्गाच्या मागे 'अ' हा स्वर असून पुढे मृदू व्यंजन आल्यास विसर्गाचा 'उ' होतो व तो मागील 'अ' मध्ये मिसळून त्याचा 'ओ' होतो.
नोट: या संधियुक्त शब्दातील दुसऱ्या अक्षराला काना व मात्रा असतो.
उदा.
यशः + धन = यशोधन
मनः + रथ = मनोरथ
अधः + वदन = अधोवदन
तेजः + निधी = तेजोनिधी
मनः + रंजन = मनोरंजन
तपः + बल = तपोबल
मनः + राज्य = मनोराज्य
रजः + गुण = रजोगुण
यशः + गिरी = यशोगिरी
२) विसर्ग र् संधी
विसर्गाच्या मागे 'अ/आ' खेरीज कोणताही स्वर असून पुढे मृदू वर्ण आल्यास विसर्गाचा 'र्' होतो व पुढील वर्णाबरोबर संधी होते.
उदा.
निः + अंतर = निरंतर
दुः + जन = दुर्जन
बहिः + अंग = बहिरंग
दुः + आत्मा = दुरात्मा
निः + विकार = निर्विकार
धनुः + विद्या = धनुर्विद्या
निः + इच्छा = निरिच्छा
निः + लोभ = निर्लोभ
३) विसर्गाच्या मागे 'इ' किंवा 'उ' असून पुढे 'क, ख, प, फ' हे वर्ण आले तर विसर्गाचा 'ष्' होऊन संधी होते.
उदा.
निः + कर्ष = निष्कर्ष
दुः + काळ = दुष्काळ
निः + कारण = निष्कारण
निः + पाप = निष्पाप
निः + फळ = निष्फळ
निः + कपट = निष्कपट
दुः + कीर्ती = दुष्कीर्ती
बहिः + कृत = बहिष्कृत
दुः + परिणाम = दुष्परिणाम
बहिः + कार = बहिष्कार
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४) विसर्गाच्या मागे 'अ' हा स्वर असून पुढे 'क, ख, प्, फ्' ही कठोर व्यंजने आली तर विसर्ग कायम राहतो, परंतु पुढे स्वर आल्यास विसर्ग लोप पावतो.
उदा.
रजः + कण = रजःकण
प्रातः + काल = प्रातःकाल
अधः + पात = अधःपात
इतः + पर = इतःपर
तेजः + पुंज = तेजःपुंज
इतः + उत्तर = इतउत्तर
अतः + एव = अतएव
५) पदाच्या शेवटी 'र्' येऊन त्याच्यापुढे कठोर व्यंजन आल्यास 'र्' चा विसर्ग होतो.
उदा.
अंतर् + करण = अंतःकरण
चतुर् + सूत्री = चतुःसूत्री
६) पहिल्या पदाच्या शेवटी 'स्' येऊन त्याच्या पुढे कोणतेही व्यंजन आल्यास 'स्' चा विसर्ग होतो.
उदा.
मनस् + पटल = मनःपटल
तेजस् + कण = तेजःकण
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७) विसर्गाच्या ऐवजी येणाऱ्या 'र्' च्या मागे 'अ' व पुढे मृदू वर्ण आल्यास तो 'र्' तसाच राहून संधी होते.
उदा.
पुनर् + जन्म = पुनर्जन्म
अंतर् + आत्मा = अंतरात्मा
अंतर् + गत = अंतर्गत
पुनर् + उक्ती = पुनरुक्ती
पुनर् + उच्चार = पुनरुच्चार
८) विसर्गाच्या पुढे 'च् / छ' आल्यास विसर्गाचा 'श्' होतो. 'त् / थ्' आल्यास 'स्' होतो.
उदा.
निः + चल = निश्चल
दुः + चिन्ह = दुश्चिन्ह
मनः + ताप = मनस्ताप
निः + तेज = निस्तेज
मनः + चक्षु = मनश्चक्षु
९) विसर्गाच्या पुढे 'कृ' धातूची रूपे असल्यास विसर्गाचा 'स्' होऊन संधी होते.
उदा.
नमः + कार = नमस्कार
पुरः + कार = पुरस्कार
वयः + कर = वयस्कर
१०) विसर्गाच्या पुढे:
- च, छ आल्यास → विसर्गाचा श् होतो
- ट, ठ आल्यास → विसर्गाचा ष् होतो
- त, थ आल्यास → विसर्गाचा स् होतो
उदा.
अधः + तल = अधस्तल / अधःस्थल
शनैः + चर = शनैश्चर
अधः + छवि = अधश्छवि
चक्षुः + तेज = चक्षुस्तेज
रामः + टीकते = रामष्टीकते
११) विसर्गाच्या पुढे श्, स्, ष् आल्यास विसर्ग कायम राहतो.
उदा.
दुः + शासन = दुःशासन
निः + स्वार्थी = निःस्वार्थी
निः + संदेह = निःसंदेह
निः + संशय = निःसंशय
निः + शेष = निःशेष
१२) विसर्गाच्या मागे इ / उ असून पुढे मृदू वर्ण आल्यास विसर्गाचा र् होतो; परंतु पुढे पुन्हा र् आल्यास मागील र् चा लोप होतो व त्याच्या मागील ऱ्हस्व स्वराचा दीर्घ स्वर होतो.
उदा.
निः + रव = नीरव
निः + रस = नीरस
📌 संस्कृत संधी व निव्वळ मराठी संधी तुलना:
- मंत्र + आलय = मंत्रालय
- मंत्री + आलय = मंत्रालय
- एक + ऊन = एकोन
- एक + ऊन = एकूण
- एक + एक = एकैक
- एक + एक = एकेक
- किती + एक = कित्येक
- किती + एक = कितीक
⭐ वैशिष्ट्यपूर्ण संधी:
अ / आ सोडून इतर कोणत्याही स्वरापुढे स् आल्यास, स् चा ष् होतो.
उदा.
अनु + संग = अनुषंग
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| 10 | मित्रांनो, स्पर्धा परीक्षा संबंधी महत्वाचे चॅनेल नक्की जॉइन करा.
मराठी व्याकरण
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| 13 | 🚨 मराठी व्याकरण - समानार्थी शब्द 5 🎯
इशारा = सूचना
इंद्र = सुरेंद्र, नाकेश, वसाव, सहस्त्राक्ष, वज्रपाणी, देवेंद्र
इहलोक = मृत्युलोक
ईर्षा = चुरस
इच्छा = आकांक्षा, आस, मनीषा, स्पृहा, लिप्सा, अपेक्षा
ईश्वर = देव, ईश, निर्जर, परमेश्वर, अलक्ष, सूर, विभूध, अलख, प्रभू, त्रिदश
उत्सव = समारंभ, सण, सोहळा
उक्ती = वचन
उशीर = विलंब
उणीव = कमतरता
उपवन = बगीचा
उदर = पोट
उदास = खिन्न
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उत्कर्ष = भरभराट
उपद्रव = त्रास
उपेक्षा = हेळसांड
उठावाची = उठायची
ऊर्जा = शक्ती
ॠण = कर्ज
ॠतू = मोसम
ऋषी = तपस्वी, मुनी, साधू, तापस
एकजूट = एकी, ऐक्य
ऐश्वर्य = वैभव
ऐट = रुबाब, डौल
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| 14 | मराठी व्याकरण घटक 2 : संधी - व्यंजन संधी / हल् संधी
व्यंजन संधी / हल् संधी
━━━━━━━━━━━━━━━
१) प्रथम व्यंजन संधी :
स्पर्श व्यंजनांपैकी अनुनासिकाशिवाय कोणत्याही व्यंजनापुढे कठोर व्यंजन आले असता, त्या पहिल्या व्यंजनाच्या जागी त्याच्याच वर्गातील पहिले कठोर व्यंजन येते.
👉 याला 'प्रथम व्यंजन संधी' असे म्हणतात.
सूचना : संधी झालेल्या दोन वर्णांपैकी पहिले व्यंजन हे स्पर्श व्यंजन गटातील पहिल्या स्तंभातील (क्, च्, ट्, त्, प्) व्यंजनांपैकी असते. तेव्हा ती प्रथम व्यंजन संधी असते.
उदाहरणे :
- विपद् + काल → द् + क् = त्क् → विपत्काल
- वाग् + पति → ग् + प् = क्प् → वाक्पति
- वाग् + ताडन → ग् + त् = क्त् → वाक्ताडन
- षड् + शास्त्र → ड् + श् = ट्श् → षट्शास्त्र
━━━━━━━━━━━━━━━
२) तृतीय व्यंजन संधी :
स्पर्श व्यंजन गटातील कठोर व्यंजनापुढे अनुनासिकाखेरीज स्वर किंवा मृदू व्यंजन आल्यास, त्या पहिल्या व्यंजनाच्या जागी त्याच वर्गातील तिसरे व्यंजन येऊन संधी होते.
👉 याला 'तृतीय व्यंजन संधी' असे म्हणतात.
नोट :संधी झालेल्या दोन वर्णांपैकी पहिले व्यंजन हे स्पर्श व्यंजन गटातील तिसऱ्या स्तंभातील (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) व्यंजनांपैकी असते.
उदाहरणे :
- वाक् + विहार → क् + व् = ग्व् → वाग्विहार
- षट् + रिपू → ट् + र् = ड्र → षड्रिपू
- सत् + आचार → त् + आ = दा → सदाचार
- उत् + गम → त् + ग् = दग् → उद्गम
━━━━━━━━━━━━━━━
अनुनासिक संधी :
स्पर्श व्यंजन गटातील प्रथम व्यंजनापुढे अनुनासिक आल्यास, पहिल्या व्यंजनाबद्दल त्याच्याच वर्गातील अनुनासिक येऊन संधी होते.
👉 याला अनुनासिक संधी म्हणतात.
नोट : अनुनासिक संधीत झालेले दोन्हीही वर्ण अनुनासिक असतात.
━━━━━━━━━━━━━━━
उदाहरणे :
१) षट् + मास
ट् + म् = ण् + म् → षण्मास
२) जगत् + नाथ
त् + न् = न् + न् → जगन्नाथ
३) सत् + मती
त् + म् = न् + म् → सन्मती
४) चित् + मय
त् + म् = न् + म् → चिन्मय
━━━━━━━━━━━━━━━
४. पहिल्या पदाच्या शेवटी प्रथम रांगेतील कठोर वर्ण येऊन त्यापुढे पुन्हा कठोर वर्ण आल्यास तो प्रथम कठोर वर्ण कायम राहतो व पुढील कठोर वर्णाबरोबर संधी होते.
उदाहरणे:
उत् + तम = उत्तम
उत् + कर्ष = उत्कर्ष
उत् + पत्ती = उत्पत्ती
पृथक् + करण = पृथक्करण
धिक् + कार = धिक्कार
५. त् या व्यंजनापुढे च्, छ् आल्यास त् बद्दल च् येतो व पुढील च् / छ बरोबर संधी होते.
उदाहरणे:
सत् + चरित्र = सच्चरित्र
तत् + छत्र = तच्छत्र
उत् + छेद = उच्छेद
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६. त् या व्यंजनापुढे ज् किंवा झ् आल्यास त् बद्दल ज् होतो व पुढील वर्णाबरोबर संधी होते.
उदाहरणे:
1. उत्त + ज्वल
त् + ज् = ज् + ज् → त् चा ज् → उज्ज्वल
2. सत् + जन
त् + ज् = ज् + ज् → त् चा ज् → सज्जन
3. जगत् + जीवन
त् + ज् = ज् + ज् → त् चा ज् → जगज्जीवन
७. 'त्' या व्यंजनापुढे 'ट/ठ आल्यास 'त्' बद्दल 'ट्' होतो.
उदाहरण:
तत् + टीका → त् चा ट् → तट्टीका
८. 'त्' या व्यंजनापुढे 'ल्' आल्यास 'त्' बद्दल 'ल्' येतो.
उदाहरणे:
उत् + लंघन → त् चा ल् → उल्लंघन
उत् + लेख → त् चा ल् → उल्लेख
तत् + लीन → त् चा ल् → तल्लीन
विद्युत् + लता → त् चा ल् → विद्युल्लता
९. 'त्' या व्यंजनापुढे 'श्' आल्यास 'त्' बद्दल 'च्' होतो व पुढील 'श्' बद्दल 'छ' होतो.
उदाहरणे:
सत् + शिष्य → सच्छिष्य
सत् + शील → सच्छील
१०. 'त्' या व्यंजनापुढे 'ह' आल्यास 'त्' बद्दल 'द्' होतो व पुढील 'ह' बद्दल 'ध्' होतो.
उदाहरण:
तत् + हित → त् + ह = द् + ध् → तद्धित
११. 'म्' पुढे स्वर आल्यास तो 'म्' मध्ये मिसळतो; परंतु व्यंजन आल्यास 'म्' चा लोप होतो व मागील अक्षरावर अनुस्वार येतो.
उदाहरणे:
सम् + आचार = समाचार
सम् + गती = संगती
सम् + मती = संमती
सम् + आलोचन = समालोचन
सम् + ताप = संताप
सम् + तोष = संतोष
सम् + योग = संयोग
किम् + कर = किंकर
सम् + कल्प = संकल्प
सम् + बंध = संबंध
सम् + पूर्ण = संपूर्ण
१२. 'छ' पूर्वी हस्व स्वर आला तर त्या दोहोंमध्ये 'च्' हा वर्ण येतो.
उदाहरणे:
रत्न + छाया → अ + छ् = च् + छ् → रत्नच्छाया
रंग + छटा → अ + छ = च् + छ → रंगच्छटा
शब्द + छल → अ + छ् = च् + छ् → शब्दच्छल
१३. प्रथम पदाच्या शेवटी 'न्' असून पुढे तद्धित प्रत्यय असल्यास न चा लोप होतो.
उदाहरण:
हस्तिन् + दंत → न् + दं = दं → हस्तिदंत
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| 15 | मल्याळी जेष्ठ अभिनेते मोहनलाल यांना 2023 या वर्षाचा दादासाहेब फाळके पुरस्कार जाहीर
दादासाहेब फाळके पुरस्कार: संक्षिप्त माहिती - २०२५ ची अपडेटसह
📌 परिचय
- नाव: दादासाहेब फाळके पुरस्कार
- स्थापना: १९६९ मध्ये भारत सरकारने
- उद्देश: भारतीय चित्रपटसृष्टीच्या विकासासाठी उत्कृष्ट योगदान देणाऱ्यांचा सन्मान
- सन्मान: स्वर्ण कमळ पदक, शाल, १० लाख रुपये रोख
📌 महत्त्वाची माहिती
- प्रदाता: माहिती व प्रसारण मंत्रालयांतर्गत चित्रपट महोत्सव संचालनालय
- निवड: चित्रपट तज्ज्ञ व सरकारी प्रतिनिधींची समिती
📌 २०२५ ची अपडेट
- प्राप्तकर्ता (२०२३): मोहनलाल (मलयाळम अभिनेता, दिग्दर्शक, निर्माता)
- प्रस्तुती: २३ सप्टेंबर २०२५, राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू, विज्ञान भवन, नवी दिल्ली
- कारण: ३००+ चित्रपट, दिग्दर्शन व निर्मितीतील योगदान
📌 प्रमुख प्राप्तकर्ते
- १९६९: देविका रानी (पहिली प्राप्तकर्ता)
- २०२२: मिथुन चक्रवर्ती (अभिनेता)
- २०२३: मोहनलाल (प्रस्तुती: २३ सप्टेंबर २०२५)
📌 इतर मुद्दे
- दादासाहेब फाळके (१८७०-१९४४): भारतीय चित्रपटसृष्टीचे जनक, 'राजा हरिश्चंद्र' (१९१३)
- सर्वोच्च चित्रपट सन्मान | 690 |
| 16 | ३) ओ + ई = अव् + ई = अवी
- गो + ईश्वर = गवीश्वर
४) औ + इ = आव् + इ = आवि
- नौ + इक = नाविक
५) ओ + अ = अव् + अ = अव
- पो + अन = पवन
६) औ + अ = आव् + अ = आव
- पौ + अन = पावन
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| 17 | मराठी व्याकरण घटक 2 : संधी - स्वरसंधी
*स्वरसंधी*
*१) दीर्घत्व संधी :*
दोन सजातीय स्वर लागोपाठ आल्यास या दोन्हींबद्दल त्याच जातीतील एकच दीर्घ स्वर येतो, याला दीर्घत्व संधी असे म्हणतात.
दीर्घत्व संधी ओळखण्याची खूण – संधी होऊन तयार झालेल्या वर्णाला काना, दुसरा उकार किंवा दुसरी वेलांटी असते.
*सूत्रे :*
अ / आ + अ / आ = आ (काना)
इ / ई + इ / ई = ई (दुसरी वेलांटी)
उ / ऊ + उ / ऊ = ऊ (दुसरा उकार)
---
*उदाहरणे :*
*१) अ + अ = आ*
- सूर्य + अस्त = सूर्यास्त
- कट + अक्ष = कटाक्ष
- रूप + अंतर = रूपांतर
- स्वभाव + अनुसार = स्वभावानुसार
- मिष्ट + अन्न = मिष्टान्न
- स + अभिनय = साभिनय
- प्रथम + अध्याय = प्रथमाध्याय
- सह + अध्यायी = सहाध्यायी
- पुरुष + अर्थ = पुरुषार्थ
- सह + अनुभूती = सहानुभूती
- मंद + अंध = मंदांध
*२) अ + आ = आ*
- हिम + आलय = हिमालय
- देव + आलय = देवालय
- फल + आहार = फलाहार
- अनाथ + आश्रम = अनाथाश्रम
- गोल + आकार = गोलाकार
- मंत्र + आलय = मंत्रालय
- शिशिर + आगमन = शिशिरागमन
- सिंह + आसन = सिंहासन
- धन + आदेश = धनादेश
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*आदेश म्हणजे काय ?*
👉 संधी होताना एका वर्णाच्या जागी दुसरा वर्ण येणे म्हणजे बदल होणे.
यालाच आदेश असे म्हणतात.
*२) गुणादेश संधी :*
👉 दोन स्वर एकत्र आल्यावर ते बदलून ए, ओ, अर् असे रूप धारण करतात,
त्यास गुणादेश संधी म्हणतात.
सूत्र :
अ / आ + इ / ई = ए
अ / आ + उ / ऊ = ओ
अ / आ + ऋ = अर्
*गुणादेश संधीची उदाहरणे :*
*१) अ + इ = ए*
- ईश्वर + इच्छा = ईश्वरेच्छा
- स्व + इच्छा = स्वेच्छा
- लोक + इच्छा = लोकेच्छा
- मनुष्य + इतर = मनुष्येतर
- राष्ट्र + इतिहास = राष्ट्रिहास
*२) अ + ई = ए*
- गण + ईश = गणेश
- राम + ईश्वर = रामेश्वर
- गुण + ईश = गुणेश
*३) आ + इ = ए*
- महा + इंद्र = महेंद्र
- यथा + इष्ट = यथेष्ट
*४) आ + ई = ए*
- रमा + ईश = रमेश
- उमा + ईश = उमेश
- महा + ईश = महेश
*५) अ + उ = ओ*
- अयोध्या + ईश = अयोध्येश
- राजा + ईश = राजेश
- लंका + ईश्वर = लंकेश्वर
- चंद्र + उदय = चंद्रोदय
- सूर्य + उदय = सूर्योदय
- पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
- अन्य + उक्ती = अन्योक्ती
- निसर्ग + उपचार = निसर्गोपचार
- गणेश + उत्सव = गणेशोत्सव
- प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
- दीर्घ + उत्तरी = दीर्घोत्तरी
- स्वभाव + उक्ती = स्वभावोक्ती
- अल्प + उपाहार = अल्पोपाहार
- राष्ट्र + उत्तेजक = राष्ट्रोत्तेजक
- उत्तम + उत्तम = उत्तमोत्तम
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*३. वृद्ध्यादेश :*
जर खालीलप्रमाणे दोन स्वर एकत्र येऊन ऐ, औ स्वर तयार झाल्यास त्यास वृद्ध्यादेश असे म्हणतात.
अ / आ + ए / ऐ = ऐ
अ / आ + ओ / औ = औ
उदाहरणे :
*१) अ + ए = ऐ*
- क्षण + एक = क्षणैक
- एक + एक = एकैक
*२) आ + ए = ऐ*
- सदा + एव = सदैव
*३) अ + ऐ = ऐ*
- मत + ऐक्य = मतैक्य
- जन + ऐक्य = जनैक्य
*४) आ + ऐ = ऐ*
- प्रजा + ऐक्य = प्रजैक्य
- विद्या + ऐश्वर्य = विद्यदैश्वर्य
*५) अ + ओ = औ*
- जल + ओघ = जलौघ
*६) आ + ओ = औ*
- गंगा + ओघ = गंगौघ
- यमुना + ओघ = यमुनौघ
*७) अ + औ = औ*
- वृक्ष + औदार्य = वृक्षौदार्य
- बाल + औत्सुक्य = बालौत्सुक्य
- वन + औषधी = वनौषधी
*८) आ + औ = औ*
- महा + औदार्य = महौदार्य
- क्षमा + औचित्य = क्षमौचित्य
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*४. यणादेश :*
इ, उ, ऋ (हस्व / दीर्घ) यांच्या पुढे विजातीय स्वर आल्यास —
- 'इ/ई' बद्दल 'य्'
- 'उ/ऊ' बद्दल 'व्'
- 'ऋ' बद्दल 'र्'
हे वर्ण येतात आणि त्यात पुढील स्वर मिसळून संधी होते. अशा प्रकारे य्, व्, र् असे बदल होतात. त्याला यणादेश असे म्हणतात.
उदाहरणे :
*१) इ + अ = य् + अ = य*
- प्रीति + अर्थ = प्रीत्यर्थ
- अति + अल्प = अत्यल्प
- अति + अंत = अत्यंत
- प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष
- प्रति + अंतर = प्रत्यंतर
- कोटि + अवधि = कोट्यवधि
*२) इ + आ = य् + आ = या*
- इति + आदी = इत्यादी
- अति + आचार = अत्याचार
- अति + आनंद = अत्यानंद
- वि + आसंग = व्यासंग
*महत्त्वाचे नियम :*
य्, व्, र् ऐवजी अनुक्रमे इ, उ, ऋ असे बदल होतात. तेव्हा त्याला संप्रसारण म्हणतात.
उदा.
- येथे → इथे
- नव → नऊ
- गाय → गाईला
*५. आदेश नियम :*
'ए, ऐ, ओ, औ' या स्वरांपुढे जर एखादा स्वर आला तर त्याबद्दल अनुक्रमे
अय्, आय्, अव्, आव् असे आदेश होऊन पुढील स्वर यात मिसळतो.
उदाहरणे :
१) ए + अ = अय् + अ = अय
- ने + अन = नयन
२) ऐ + अ = आय् + अ = आय
- गै + अन = गायन | 1 |
| 18 | ३) ओ + ई = अव् + ई = अवी
- गो + ईश्वर = गवीश्वर
४) औ + इ = आव् + इ = आवि
- नौ + इक = नाविक
५) ओ + अ = अव् + अ = अव
- पो + अन = पवन
६) औ + अ = आव् + अ = आव
- पौ + अन = पावन
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| 19 | मराठी व्याकरण घटक 2 : संधी - स्वरसंधी
*स्वरसंधी*
*१) दीर्घत्व संधी :*
दोन सजातीय स्वर लागोपाठ आल्यास या दोन्हींबद्दल त्याच जातीतील एकच दीर्घ स्वर येतो, याला दीर्घत्व संधी असे म्हणतात.
दीर्घत्व संधी ओळखण्याची खूण – संधी होऊन तयार झालेल्या वर्णाला काना, दुसरा उकार किंवा दुसरी वेलांटी असते.
*सूत्रे :*
अ / आ + अ / आ = आ (काना)
इ / ई + इ / ई = ई (दुसरी वेलांटी)
उ / ऊ + उ / ऊ = ऊ (दुसरा उकार)
---
*उदाहरणे :*
*१) अ + अ = आ*
- सूर्य + अस्त = सूर्यास्त
- कट + अक्ष = कटाक्ष
- रूप + अंतर = रूपांतर
- स्वभाव + अनुसार = स्वभावानुसार
- मिष्ट + अन्न = मिष्टान्न
- स + अभिनय = साभिनय
- प्रथम + अध्याय = प्रथमाध्याय
- सह + अध्यायी = सहाध्यायी
- पुरुष + अर्थ = पुरुषार्थ
- सह + अनुभूती = सहानुभूती
- मंद + अंध = मंदांध
*२) अ + आ = आ*
- हिम + आलय = हिमालय
- देव + आलय = देवालय
- फल + आहार = फलाहार
- अनाथ + आश्रम = अनाथाश्रम
- गोल + आकार = गोलाकार
- मंत्र + आलय = मंत्रालय
- शिशिर + आगमन = शिशिरागमन
- सिंह + आसन = सिंहासन
- धन + आदेश = धनादेश
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*आदेश म्हणजे काय ?*
👉 संधी होताना एका वर्णाच्या जागी दुसरा वर्ण येणे म्हणजे बदल होणे.
यालाच आदेश असे म्हणतात.
*२) गुणादेश संधी :*
👉 दोन स्वर एकत्र आल्यावर ते बदलून ए, ओ, अर् असे रूप धारण करतात,
त्यास गुणादेश संधी म्हणतात.
सूत्र :
अ / आ + इ / ई = ए
अ / आ + उ / ऊ = ओ
अ / आ + ऋ = अर्
*गुणादेश संधीची उदाहरणे :*
*१) अ + इ = ए*
- ईश्वर + इच्छा = ईश्वरेच्छा
- स्व + इच्छा = स्वेच्छा
- लोक + इच्छा = लोकेच्छा
- मनुष्य + इतर = मनुष्येतर
- राष्ट्र + इतिहास = राष्ट्रिहास
*२) अ + ई = ए*
- गण + ईश = गणेश
- राम + ईश्वर = रामेश्वर
- गुण + ईश = गुणेश
*३) आ + इ = ए*
- महा + इंद्र = महेंद्र
- यथा + इष्ट = यथेष्ट
*४) आ + ई = ए*
- रमा + ईश = रमेश
- उमा + ईश = उमेश
- महा + ईश = महेश
*५) अ + उ = ओ*
- अयोध्या + ईश = अयोध्येश
- राजा + ईश = राजेश
- लंका + ईश्वर = लंकेश्वर
- चंद्र + उदय = चंद्रोदय
- सूर्य + उदय = सूर्योदय
- पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
- अन्य + उक्ती = अन्योक्ती
- निसर्ग + उपचार = निसर्गोपचार
- गणेश + उत्सव = गणेशोत्सव
- प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
- दीर्घ + उत्तरी = दीर्घोत्तरी
- स्वभाव + उक्ती = स्वभावोक्ती
- अल्प + उपाहार = अल्पोपाहार
- राष्ट्र + उत्तेजक = राष्ट्रोत्तेजक
- उत्तम + उत्तम = उत्तमोत्तम
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*३. वृद्ध्यादेश :*
जर खालीलप्रमाणे दोन स्वर एकत्र येऊन ऐ, औ स्वर तयार झाल्यास त्यास वृद्ध्यादेश असे म्हणतात.
अ / आ + ए / ऐ = ऐ
अ / आ + ओ / औ = औ
उदाहरणे :
*१) अ + ए = ऐ*
- क्षण + एक = क्षणैक
- एक + एक = एकैक
*२) आ + ए = ऐ*
- सदा + एव = सदैव
*३) अ + ऐ = ऐ*
- मत + ऐक्य = मतैक्य
- जन + ऐक्य = जनैक्य
*४) आ + ऐ = ऐ*
- प्रजा + ऐक्य = प्रजैक्य
- विद्या + ऐश्वर्य = विद्यदैश्वर्य
*५) अ + ओ = औ*
- जल + ओघ = जलौघ
*६) आ + ओ = औ*
- गंगा + ओघ = गंगौघ
- यमुना + ओघ = यमुनौघ
*७) अ + औ = औ*
- वृक्ष + औदार्य = वृक्षौदार्य
- बाल + औत्सुक्य = बालौत्सुक्य
- वन + औषधी = वनौषधी
*८) आ + औ = औ*
- महा + औदार्य = महौदार्य
- क्षमा + औचित्य = क्षमौचित्य
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*४. यणादेश :*
इ, उ, ऋ (हस्व / दीर्घ) यांच्या पुढे विजातीय स्वर आल्यास —
- 'इ/ई' बद्दल 'य्'
- 'उ/ऊ' बद्दल 'व्'
- 'ऋ' बद्दल 'र्'
हे वर्ण येतात आणि त्यात पुढील स्वर मिसळून संधी होते. अशा प्रकारे य्, व्, र् असे बदल होतात. त्याला यणादेश असे म्हणतात.
उदाहरणे :
*१) इ + अ = य् + अ = य*
- प्रीति + अर्थ = प्रीत्यर्थ
- अति + अल्प = अत्यल्प
- अति + अंत = अत्यंत
- प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष
- प्रति + अंतर = प्रत्यंतर
- कोटि + अवधि = कोट्यवधि
*२) इ + आ = य् + आ = या*
- इति + आदी = इत्यादी
- अति + आचार = अत्याचार
- अति + आनंद = अत्यानंद
- वि + आसंग = व्यासंग
*महत्त्वाचे नियम :*
य्, व्, र् ऐवजी अनुक्रमे इ, उ, ऋ असे बदल होतात. तेव्हा त्याला संप्रसारण म्हणतात.
उदा.
- येथे → इथे
- नव → नऊ
- गाय → गाईला
*५. आदेश नियम :*
'ए, ऐ, ओ, औ' या स्वरांपुढे जर एखादा स्वर आला तर त्याबद्दल अनुक्रमे
अय्, आय्, अव्, आव् असे आदेश होऊन पुढील स्वर यात मिसळतो.
उदाहरणे :
१) ए + अ = अय् + अ = अय
- ने + अन = नयन
२) ऐ + अ = आय् + अ = आय
- गै + अन = गायन | 1 |
| 20 | ४) औ + इ = आव् + इ = आवि
- नौ + इक = नाविक
५) ओ + अ = अव् + अ = अव
- पो + अन = पवन
६) औ + अ = आव् + अ = आव
- पौ + अन = पावन
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