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॥ श्रीहरिः ॥
*भोगासक्ति कैसे छूटे ?*
*किसी तरहसे दूसरोंको सुख मिल जाय, आराम मिल जाय- ऐसा जो भाव है, यह बहुत दामी चीज है, मामूली नहीं है।*
*अगर आप चाहते हो कि विषय सामने आनेपर हम विचलित न हों, तो इस सिद्धान्तको पकड़ लो कि दूसरोंको सुख कैसे हो ?*
*दूसरोंको आराम कैसे हो ? वस्तु मेरे पास हरदम नहीं रहेगी, अतः दूसरेके काम आ जाय तो अच्छा है-ऐसा भाव होनेसे सबके हितमें रति हो जायगी।*
*जब दूसरोंके हितमें आपकी रति, प्रीति हो जायगी, तब भोगपदार्थ सामने आनेपर भी उनका त्याग करना सुगम हो जायगा।*
*परन्तु 'मेरेको कैसे सुख हो ? मेरेको सम्मान कैसे मिले ? मेरी बड़ाई कैसे हो ? मेरी बात कैसे रहे ? मेरेको आराम कैसे मिले ?' - यह भाव रहेगा तो त्रिकालमें भी कल्याण नहीं होगा, क्योंकि ऐसा भाव रखना पशुता है, मनुष्यता नहीं है।*
*दूसरेके हितका भाव होनेसे आपकी सुख भोगनेकी इच्छाका नाश हो जायगा।*
–परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज
–‘साधन सुधा सिंधु’ गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकसे साभार
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नहीं होता
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# तीसरा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन श्रेष्ठ माना गया है।विशिष्ट स्थिति में ही भोर में होलिका दहन करना चाहिए ऐसे में 2 मार्च को रात 1.26 से 2.38 बजे के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा
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इसलिए यह आप पर निर्भर करता है कि आप होलिका दहन पूजा करने के लिए कौन सा मुहूर्त चुनेंगे।
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चीरबंधन एवं रंग धारण — 27 फरवरी प्रातः भद्रा से पहले (11:30 से पूर्व)
रंग वाली होली / दुलहण्डी — 4 मार्च 2026
चंद्र ग्रहण और सूतक काल
चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान सूतक काल
हिंदू परंपरा के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले प्रारंभ होता है। इस ग्रहण के लिए, सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे (भारतीय समयानुसार) से शुरू होकर ग्रहण समाप्त होने तक (शाम 6:47 बजे) तक जारी रहेगा। इन घंटों के दौरान, कई धार्मिक गतिविधियाँ पारंपरिक रूप से स्थगित कर दी जाती हैं। भक्तों को मंदिर जाने और विशिष्ट पूजा-पाठ करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दौरान की जाने वाली सामान्य प्रथाओं में मंत्रों का जाप करना, आध्यात्मिक शुद्धि के लिए ध्यान करना और पके हुए भोजन को तुलसी के पत्तों से ढककर उसकी शुद्धता बनाए रखना शामिल है
पूर्ण चंद्रग्रहण पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, रूस और पूरे एशिया में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण का सामान्य प्रभाव:
पूर्ण चंद्रग्रहण 3 मार्च, 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे शुरू होगी और शाम 6:33 से 6:40 बजे के बीच अपने चरम पर पहुंचेगी। ग्रहण इसके तुरंत बाद शाम 6:47 बजे समाप्त हो जाएगा। भारत में, चंद्रमा शाम 6:20 से 6:30 बजे के बीच उदय होगा, जिसका अर्थ है कि नागरिक पूर्णग्रहण के अंतिम 20 से 25 मिनट ही देख पाएंगे। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में चंद्रमा के जल्दी उदय होने के कारण दृश्यता सबसे स्पष्ट रहने की उम्मीद है, हालांकि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में भी आसमान साफ रहने पर यह घटना देखी जा सकेगी।
यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा, जो शुक्र ग्रह से संबंधित है और प्रेम, जुनून, आनंद, सौंदर्य और विलासिता का प्रतीक है। यह पिछले जन्म के संबंधों को भी उजागर करेगा और सभी कर्मिक बंधनों को दूर करेगा। सिंह राशि सूर्य द्वारा शासित है, इसलिए सिंह राशि के जातक अपने परिचितों के सामने अपनी शक्ति और अहंकार का प्रदर्शन करेंगे और निश्चित रूप से इस कदर अधिकार का प्रदर्शन करेंगे कि कोई भी उन्हें पराजित नहीं कर सकेगा।
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होली मुहूर्त निर्णय 2026 :
तथ्य स्पस्टीकरण ======================
• पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे
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•भद्रकाल 2 मार्च को शाम 5:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च, 2026 को सुबह 5:30 बजे तक चलेगा।
होलिका दहन और भद्र काल
भद्रा की पूंछ 3 मार्च को 01:25 ए एम से 02:35 ए एम तक है
और भद्रा मुख 02:35 ए एम से 04:30 ए एम तक है.
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• 3 मार्च को सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू होगा
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2 मार्च 2026 (शास्त्रों के अनुसार श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त)
चूंकि पूर्णिमा 2 मार्च को प्रदोष काल में विद्यमान है, इसलिए कई विद्वान इसे ही श्रेष्ठ मान रहे हैं:
मुख्य मुहूर्त: शाम 06:24 से शाम 06:36 तक (अवधि 12 मिनट).
भद्रा पुच्छ मुहूर्त: मध्यरात्रि 01:23 से 02:34 (2 मार्च की रात).
3 मार्च 2026 (पंचांग विशेष के अनुसार)
कुछ स्थानीय पंचांगों के अनुसार उदय व्यापिनी पूर्णिमा न होने के बावजूद प्रदोष काल को प्राथमिकता दी गई है:
होलिका दहन मुहूर्त: शाम 06:22 से रात 08:50 तक (अवधि 02 घंटे 28 मिनट).
रंगवाली होली (धुलेंडी): बुधवार, 4 मार्च 2026.
विशेष सावधानी: 2 मार्च को भद्रा 'भूमिलोक' की है जो सर्वथा त्याज्य है. 3 मार्च को भद्रा मुख का समय सुबह 02:35 am से 04:30 am तक रहेगा, जिसमें दहन वर्जित है.
जब, हम 2 मार्च, 2026 को होलिका दहन मनाएंगे, इसलिए लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भद्रकाल 2 मार्च को शाम 5:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च, 2026 को सुबह 5:30 बजे तक चलेगा।
* होलिका दहन भद्रकाल से या तो पहले करने की सलाह दी जाती है।
या बाद में, पहले तो होगा नहीं अब बाद में करे तो 3 मार्च को सूतक काल सुब23 बजे से शुरू होगा
* ग्रहण सूतक काल शुरू हो जायेगा तो उससे पहले ही दहन होगा, क्युकी ग्रहण काल समाप्ति, 3 मार्च शाम 6:47 pm से पहले ही पूर्णिमा समाप्त होजायेगी
ऐसी स्थिति में इस वर्ष प्रतिपदा वृद्धिगामिनी है। सामान्यतः नियम के अनुसार 3 मार्च की प्रदोष बेला में होलिका दहन अपेक्षित था, परंतु चन्द्रग्रहण होने के कारण ग्रहण नियम लागू होगा।
शास्त्र में स्पष्ट निर्देश है —
अत्र चेच्चंद्र ग्रहणं तदा ततोऽ र्वार्ड्.निशि भद्रावर्जपूर्णिमायां होलिकादीपनम्।
तथा —
अथ परेऽह्णि ग्रस्तोदयस्तदा पूर्वदिने भद्रावर्ज रात्रिचतुर्थ्य यामे विष्टिपुच्छे वा होलिका कार्य।
अर्थात् यदि चन्द्रग्रहण हो तो भद्रा रहित पूर्णिमा में रात्रि में होलिका दहन किया जाए।
यदि अगले दिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो तो पूर्व दिवस में भद्रा त्यागकर रात्रि के चतुर्थ याम अथवा विष्टिपुच्छ काल में होलिका दहन करना चाहिए।
शास्त्रागत मान्यताओं पर ध्यान दें तो होलिका दहन मध्य रात्रि से पूर्व कर लेना ज्यादा श्रेयस्कर होता है।
ऐसी स्थिति में भद्रा का मुख त्याग कर भद्रा के पुच्छ में रात बजे से पूर्व होलिका दहन का मुहूर्त उत्तम होगा।
भद्रा की पूंछ 2 मार्च की रात या 3 मार्च को 01:25 ए एम से 02:35 ए एम तक है
शास्त्रों के अनुसार भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में 2 मार्च को रात 1.26 से 2.38 बजे के बीच होलिका दहन करना शुभ रहेगा, क्योंकि इस समय भद्रा लग रही है। इस दिन नवपंचम योग, लक्ष्मीनारायण योग और पंचग्रही योग बन रहे हैं, जो सुख-समृद्धि के संकेत हैं।
2 मार्च को पूर्णिमा तिथि सायं 5:18 बजे से प्रारंभ हो जाएगी तथा इसी समय भद्रा भी आरंभ हो जाएगी , जो रात में 4:46 बजे तक व्याप्त रहेगी।भद्रा तज्य है
कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन कर सकते हैं।
इसके लिए 3 मार्च को सुबह सूतक लगने से पहले होलिक दहन कर सकते हैं। होलिका दहन मुहूर्त: 3 मार्च, मंगलवार, ब्रह्म मुहूर्त 05:05 ए एम से 05:55 ए एम के बीच.
लेकिन विशिष्ट स्थिति में ही भोर में होलिका दहन करना चाहिए। भोर वेला 5 बजे होलिका दहन उचित नहीं है, भद्रा की पुंछ में ही होलिका दहन होना चाहिए।
निष्कर्ष:निर्णय
होलिका दहन कब करना चाहिए?
तीन मुहूर्त प्राप्त होते है
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# पहला मुहूर्त भद्रा युक्त
मुख्य मुहूर्त: शाम 06:24 से शाम 06:36 तक (अवधि 12 मिनट).
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# दूसरा मुहूर्त
2 मार्च रात्रि 29:29 (अर्थात 3 मार्च प्रातः 5:29 बजे) से लेकर सूर्योदय पूर्व लगभग 6:30 बजे तक।
होलिका दहन मुहूर्त: 3 मार्च, मंगलवार, ब्रह्म मुहूर्त 05:05 ए एम से 05:55 ए एम के बीच.यह काल ग्रहण नियम से शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त है।3 मार्च 2026 को सूतक काल शुरू होने से ठीक पहले मिलेगा, 3 मार्च को सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू होगा, इसलिए होलिका दहन सुबह 5:30 से 6:23 बजे के बीच भी किया जा सकता है। इस दिन होलिका दहन करने पर आपको पूर्णिमा तिथि मिलेगी और भद्र काल नहीं होगा।किन्तु भोर वेला में दहन
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