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Stories for you & your little ones 🤴👸 by Praveen Singh Sengar, Channel link @octanestoryworld created on 31st Oct 2020 Contact admin : @Iampraveensengar

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Have you ever wondered what an ophthalmologist sees when he examines your eye? Well, then watch this

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One of Istanbul's beauties The Bosphorus and the suspension bridges over it
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🍯One teaspoon of honey is the result of a lifetime of work by 2 bees.
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Everyone Has a Story in Life. A 24 year old boy seeing out from the train's window shouted.. "Dad, look the trees are going behind" Dad smiled and a young couple sitting nearby, looked at the 24 year old's childish behavior with pity, suddenly he again exclaimed.. "Dad, look the clouds are running with us!" The couple couldn't resist and said to the old man... "Why don't you take your son to a good doctor?" The old man smiled and said..."I did and we are just coming from the hospital, my son was blind from birth, he just got his eyes today." Every single person on the planet has a story.Don't judge people before you truly know them. The truth might surprise you.
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بدون متن...
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بدون متن...
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10th 🍎 effect
10th 🍎 effect
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*साभार* विवाह के दो वर्ष हुए थे जब सुहानी गर्भवती होने पर अपने घर पंजाब जा रही थी ...पति शहर से बाहर थे ... जिस रिश्ते के भाई को स्टेशन से ट्रेन मे बिठाने को कहा था वो लेट होती ट्रेन की वजह से रुकने में मूड में नहीं था इसीलिए समान सहित प्लेटफॉर्म पर बनी बेंच पर बिठा कर चला गया .... गाड़ी को पांचवे प्लेटफार्म पर आना था ... गर्भवती सुहानी को सातवाँ माह चल रहा था. सामान अधिक होने से एक कुली से बात कर ली.... बेहद दुबला पतला बुजुर्ग...पेट पालने की विवशता उसकी आँखों में थी ...एक याचना के साथ  सामान उठाने को आतुर .... सुहानी ने उसे पंद्रह रुपये में तय कर लिया और टेक लगा कर बैठ गई.... तकरीबन डेढ़ घंटे बाद गाडी आने की घोषणा हुई ...लेकिन वो बुजुर्ग कुली कहीं नहीं दिखा ... कोई दूसरा कुली भी खाली नज़र नही आ रहा था.....ट्रेन छूटने पर वापस घर जाना भी संभव नही था ... रात के साढ़े बारह बज चुके थे ..सुहानी का मन घबराने लगा ... तभी वो बुजुर्ग दूर से भाग कर आता हुआ दिखाई दिया .... बोला चिंता न करो बिटिया हम चढ़ा देंगे गाडी में ...भागने से उसकी साँस फूल रही थी ..उसने लपक कर सामान उठाया ...और आने का इशारा किया सीढ़ी चढ़ कर पुल से पार जाना था कयोकि अचानक ट्रेन ने प्लेटफार्म चेंज करा था जो अब नौ नम्बर पर आ रही थी वो साँस फूलने से धीरे धीरे चल रहा था और सुहानी भी तेज चलने हालत में न थी गाडी ने सीटी दे दी भाग कर अपना स्लीपर कोच का डब्बा ढूंढा .... डिब्बा प्लेटफार्म खत्म होने के बाद इंजिन के पास था। वहां प्लेटफार्म की लाईट भी नहीं थी और वहां से चढ़ना भी बहुत मुश्किल था .... सुहानी पलटकर उसे आते हुए देख ट्रेन मे चढ़ गई...तुरंत ट्रेन रेंगने लगी ...कुली अभी दौड़ ही रहा था ... हिम्मत करके उसने एक एक सामान रेलगाड़ी के पायदान के पास रख दिया । अब आगे बिलकुल अन्धेरा था .. जब तक सुहानी ने हडबडाये कांपते हाथों से दस का और पांच का का नोट निकाला ... तब तक कुली की हथेली दूर हो चुकी थी... उसकी दौड़ने की रफ़्तार तेज हुई .. मगर साथ ही ट्रेन की रफ़्तार भी .... वो बेबसी से उसकी दूर होती खाली हथेली देखती रही ... और फिर उसका हाथ जोड़ना नमस्ते और आशीर्वाद की मुद्रा में .... उसकी गरीबी ... उसका पेट .... उसकी मेहनत ... उसका सहयोग ... सब एक साथ सुहानी की आँखों में कौंध गए .. उस घटना के बाद सुहानी डिलीवरी के बाद दुबारा स्टेशन पर उस बुजुर्ग कुली को खोजती रही मगर वो कभी दुबारा नही मिला ... आज वो जगह जगह दान आदि करती है मगर आज तक कोई भी दान वो कर्जा नहीं उतार पाया उस रात उस बुजुर्ग की कर्मठ हथेली ने किया था ... सच है कुछ कर्ज कभी नही उतारे जा सकते......! 🌸🌲🌸🌲🌸🌲🌸🌲 🌳🌼🌳🌼🌳🌼🌳🌼
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🫣 Unpacking the human nervous system Despite the fact that there is almost two metres of distance between the brain and the
🫣 Unpacking the human nervous system Despite the fact that there is almost two metres of distance between the brain and the tips of your toes, signals from it reach your feet in 1/100th of a second. Which, for humans, is effectively instantaneous.
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Don't forget to turn down the volume ❗️ Ear test: this sine wave extends from 3 kHz to 20 kHz - just over the full spectrum o
Don't forget to turn down the volume ❗️ Ear test: this sine wave extends from 3 kHz to 20 kHz - just over the full spectrum of perfect, intact human hearing. 5 kHz is the beginning of the high frequency range 10 kHz - if this frequency cannot be heard, serious hearing problems are likely. 12 kHz - an inability to hear this frequency may indicate the early stages of hearing loss. 15 kHz - a sound that some people after the age of 60 are unable to hear. 16 kHz - almost all people after the age of 60 cannot hear this frequency. 17 kHz - a frequency that is problematic for many in middle age. 18 kHz - problems hearing this frequency are the beginning of age-related hearing changes. You are now an adult. 19 kHz is the limit of average hearing. 20 kHz - only children can hear this frequency. This test is enough for a rough estimate, but if you can't hear sounds above 15 kHz, it's worth seeing a doctor.
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Brazil has recorded the rarest and creepiest medical case - lithopedion. An 81-year-old woman was found with a "stone baby" i
Brazil has recorded the rarest and creepiest medical case - lithopedion. An 81-year-old woman was found with a "stone baby" inside her, which had been inside her for 56 years. The fetus died, but the woman did not seek medical attention, and the body subjected it to calcification.
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A surgeon in London remotely performed surgery on a banana that was in California - using 5G connectivity to do so
A surgeon in London remotely performed surgery on a banana that was in California - using 5G connectivity to do so
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*कर भला हो भला* गुप्ता जी, पेशे से व्यापारी थे। कस्बे से दुकान की दूरी महज़ 9 किलोमीटर थी। एकदम वीराने में थी उनकी दुकान कस्बे से वहाँ तक पहुंचने का साधन यदा कदा ही मिलता था, तो अक्सर लिफ्ट मांग कर ही काम चलाना पड़ता था और न मिले तो प्रभु के दिये दो पैर, भला किस दिन काम आएंगे। लिफ्ट मांगते, साधन तलाशते गुप्ता जी रोज यही सोचा करते। *कैसे उजड्ड वीराने में दुकान खोल धरा है पता नहि किसकी सलाह थी इससे भला तो चुंगी पर परचून की दुकान खोल लो।* धीरे धीरे कुछ जमापूंजी इकठ्ठा कर, उन्होंने एक स्कूटर ले लिया। बिलकुल नया चमचमाता स्कूटर। स्कूटर लेने के साथ ही उन्होंने एक प्रण लिया कि वो कभी किसी को लिफ्ट के लिए मना न करेंगें। आखिर वो जानते थे जब कोई लिफ्ट को मना करे तो कितनी शर्मिंदगी महसूस होती है। अब गुप्ता जी रोज अपने चमचमाते स्कूटर से दुकान जाते, और रोज कोई न कोई उनके साथ जाता। लौटते में भी कोई न कोई मिल ही जाता। एक रोज लौटते वक्त एक व्यक्ति परेशान सा लिफ्ट के लिये हाथ फैलाये था, अपनी आदत अनुसार गुप्ता जी ने स्कूटर रोक दिया। वह व्यक्ति पीछे बैठ गया। थोड़ा आगे चलते ही उस व्यक्ति ने चाकू निकाल गुप्ता जी की पीठ पर लगा दिया। जितना रुपया है वो, और ये स्कूटर मेरे हवाले करो - व्यक्ति बोला। गुप्ता जी की सिट्टी पिट्टी गुम, डर के मारे स्कूटर रोक दिया। पैसे तो पास में ज्यादा थे नहीं, पर प्राणों से प्यारा, पाई पाई जोड़ कर खरीदा स्कूटर तो था। एक निवेदन है - स्कूटर की चाभी देते हुए गुप्ता जी बोले। क्या? - वह व्यक्ति बोला। यह कि तुम कभी किसी को ये मत बताना कि ये स्कूटर तुमने कहाँ से और कैसे चोरी किया, विश्वास मानो मैं भी रपट नहीं लिखउँगा - गुप्ता जी बोले। क्यों? - व्यक्ति हैरानी से बोला। यह रास्ता बहुत उजड्ड है, निरा वीरान। सवारी मिलती नहीं, उस पर ऐसे हादसे सुन आदमी लिफ्ट देना भी छोड़ देगा - गुप्ता जी बोले। व्यक्ति का दिल पसीजा, उसे गुप्ता जी भले मानुष प्रतीत हुए, पर धंधा तो धंधा होता है। ठीक है कहकर- वह व्यक्ति स्कूटर ले उड़ा। अगले दिन गुप्ता जी सुबह सुबह अखबार उठाने दरवाजे पर आए, दरवाजा खोला तो स्कूटर सामने खड़ा था। गुप्ता जी की खुशी का ठिकाना न रहा, दौड़ कर गए और अपने स्कूटर को बच्चे जैसा प्यार लगे, देखा तो उसमें एक कागज भी लगा था। गुप्ता जी, यह मत समझना कि तुम्हारी बातें सुन मेरा हृदय पिघल गया। कल मैं तुमसे स्कूटर लूट उसे कस्बे ले गया, सोचा कबाड़ी वाले के पास बेच दूँ। अरे ये तो गुप्ता जी का स्कूटर है - इससे पहले मैं कुछ कहता कबाड़ी वाला बोला अरे गुप्ता जी ने मुझे बाजार कुछ काम से भेजा है - कहकर मैं बाल बाल बचा। परन्तु शायद उस व्यक्ति को मुझ पर शक सा हो गया था। फिर मैं एक हलवाई की दुकान गया, जोरदार भूख लगी थी तो कुछ सामान ले लिया - अरे ये तो गुप्ता जी का स्कूटर है - वो हलवाई भी बोल पड़ा। हाँ, उन्हीं के लिये तो ये सामान ले रहा हूँ, घर में कुछ मेहमान आये हुए हैं - कहकर मैं जैसे तैसे वहां से भी बचा। फिर मैंने सोचा कस्बे से बाहर जाकर कहीं इसे बेचता हूँ। शहर के नाके पर एक पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिया। कहाँ, जा रहे हो और ये गुप्ता जी का स्कूटर तुम्हारे पास कैसे - वह मुझ पर गुर्राया। किसी तरह उससे भी बहाना बनाया। हे,गुप्ता जी तुम्हारा यह स्कूटर है या आमिताभ बच्चन। सब इसे पहचानते हैं। आपकी अमानत मैं आपके हवाले कर रहा हूँ, इसे बेचने की न मुझमें शक्ति बची है न हौसला। आपको जो तकलीफ हुई उस एवज में स्कूटर का टैंक फुल करा दिया है। पत्र पढ़ गुप्ता जी मुस्कुरा दिए, और बोले - _कर भला तो हो भला।_ 🦚🌸🦚
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Incredible beauty. Designer Jeremy Sinkus creates shells made of glass that glow all the colors of the rainbow in the sun.
Incredible beauty. Designer Jeremy Sinkus creates shells made of glass that glow all the colors of the rainbow in the sun.
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*मुश्किल के समय के लिए बचत करना जरूरी है* एक बार एक जंगल मे एक टिड्डा रहता था। उस ही जंगल में एक चींटी भी रहती थी। एक बार टिड्डा और चींटी एक ही पेड़ पर थे, उन दोनों ने एक दूसरे को देखा, बातचीत हुई और उनकी दोस्ती हो गयी। अब कभी जब दोनो मिलते तो वे एक दूसरे का अभिवादन करते और खूब बातें किया करते थे। गर्मियों के दिन थे। उन ही दिनों टिड्डा एक दिन दोपहर का खाना खाकर पेड़ में बैठकर आराम कर रहा था और गाना गुनगुना रहा था। उस ही पेड़ के नीचे चींटी अपनी अन्य साथियों के साथ भोजन इकट्ठा कर रही थी। अचानक टिड्डे की नजर अपनी दोस्त चींटी पर पड़ी उसने चींटी को रुकवाया और उससे बातचीत करने लगा। टिड्डा बोला, ” दोस्त तुम इतनी धूप में यह क्या कर रही हो। “ चींटी बोली, ” दोस्त बरसात के दिन नजदीक हैं। उन दिनों खाना ढूंढना बहुत मुश्किल होता है। अतः हम बरसात के लिए भोजन इकट्ठा कर रहे हैं। तुमने क्या अपना भोजन इकट्ठा कर लिया है? जो तुम इतने निश्चिंत हुए हो?” टिड्डा बोला, ” नहीं दोस्त मैं ऐसा नहीं करता। अभी तो मैं खाना खा कर आराम ही कर रहा था। तुम करो भोजन इकट्ठा, मैं गाना गाता हूँ फिर मैं सो जाता हूँ।” चींटी को उस पर गुस्सा आया लेकिन वह बिन कुछ कहे ही अपने झुंड में वापस चले गयी। और भोजन इकट्ठा करने लगी।. बरसात के दिन शुरू हो गए। शुरू में ही चार- पांच दिन लगातार वर्षा हुई। टिड्डा 4 दिनों से भूखा था बारिश के कारण उसे कहीं भी खाना नही मिला, वह इधर उधर भटकता रहा। फिर उसे याद आया कि उसकी दोस्त चींटी ने तो खूब सारा भोजन इकट्ठा किया है! क्यो न उसके पास मदद के लिए जाया जाए। वह चींटी के घर गया और उसका दरवाजा खटखटाया। चींटी ने दरवाजा खोला। तब टिड्डे ने अपना दुख चींटी को बताया। चींटी को उस पर बहुत गुस्सा आया औऱ वह बोली, ” जब मैं मेहनत से भोजन इकट्ठा कर रही थी तो तुम आराम से सोकर गाना गा रहे थे! अब भुगतो! मुझे आलसी लोग पसन्द नहीं है। तुम चले जाओ यहाँ से, हमने निश्चित खाना इकट्ठा किया है मैं नहीं दे सकती तुम्हें।” टिड्डा उदास होकर वहां से चल दिया। क्योंकि अब बचत और निवेश का समय निकल चुका था तो उसके पास कोई रास्ता न बचा था । KidsStory
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*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई* *एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर* *बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,* *जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* *इतने में एक कौवा आया।* *उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* *एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।* *कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी।* *अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।* *जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया,* *पर वह तो वहां था ही नहीं।* *इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।* *रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची,* *बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।* *राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* *दूसरा बनवा देंगे।* *लेकिन रानी मानी नहीं,* *उसे उसी हार की रट थी।* *कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए।* *अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।* *राजा ने कोतवाल को कहा,* *मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*, *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, *प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।* *राजा ने ऐलान किया,* *जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* *उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।* *अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* *सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* *ढूंढते-* *ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।* *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* *पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा*।*इधर* *उधर* *बहुत हाथ मारा* *पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* *फिर कोतवाल ने देखा,* *तो वह भी कूद गया।*  *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* *फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।* *लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।* *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* *तो वह गायब हो जाता।* *जब कुछ नहीं मिलता,* *तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। *सारे* *शरीर पर बदबूदार गंदगी,* *भीगे हुए खडे़ हैं।* *दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।* *इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।* *इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* *राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,* *क्यों कूद रहे हो इसमें?* *लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।* *संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?* *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है।* _*इस कहानी का क्या मतलब हुआ?*_ *जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और* *यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती* *इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नही
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Never judge someone
Never judge someone
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_*अंतिम प्रयास*_ *एक समय की बात है. एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था. एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया.* *राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ. उसने उस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया और प्रतिमा निर्माण का कार्य राज्य के महामंत्री को सौंप दिया.* *महामंत्री गाँव के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास गया और उसे वह पत्थर देते हुए बोला, “महाराज मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं. सात दिवस के भीतर इस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा तैयार कर राजमहल पहुँचा देना. इसके लिए तुम्हें ५० स्वर्ण मुद्रायें दी जायेंगी.*। *५० स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार ख़ुश हो गया और महामंत्री के जाने के उपरांत प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के उद्देश्य से अपने औज़ार निकाल लिए. अपने औज़ारों में से उसने एक हथौड़ा लिया और पत्थर तोड़ने के लिए उस पर हथौड़े से वार करने लगा. किंतु पत्थर जस का तस रहा. मूर्तिकार ने हथौड़े के कई वार पत्थर पर किये. किंतु पत्थर नहीं टूटा.*। *पचास बार प्रयास करने के उपरांत मूर्तिकार ने अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किंतु यह सोचकर हथौड़े पर प्रहार करने के पूर्व ही उसने हाथ खींच लिया कि जब पचास बार वार करने से पत्थर नहीं टूटा, तो अब क्या टूटेगा.* *वह पत्थर लेकर वापस महामंत्री के पास गया और उसे यह कह वापस कर आया कि इस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन है. इसलिए इससे भगवान विष्णु की प्रतिमा नहीं बन सकती.* *महामंत्री को राजा का आदेश हर स्थिति में पूर्ण करना था. इसलिए उसने भगवान विष्णु की प्रतिमा निर्मित करने का कार्य गाँव के एक साधारण से मूर्तिकार को सौंप दिया. पत्थर लेकर मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही उस पर हथौड़े से प्रहार किया और वह पत्थर एक बार में ही टूट गया.* *पत्थर टूटने के बाद मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट गया. इधर महामंत्री सोचने लगा कि काश, पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास और किया होता, तो सफ़ल हो गया होता और ५० स्वर्ण मुद्राओं का हक़दार बनता.* *सीख – मित्रों, हम भी अपने जीवन में ऐसी परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं. कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं।* *कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं।* *जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता. यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती. क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाय।* 🌻🌱🌻🌱🌻🌱🌻🌱 🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸
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Anatomical simulator💀 You can take all the organs down to the skeleton and put them back together.
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