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I.A.S.(हिंदी माध्यम)

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الهند187 457دسته بندی مشخص نشده است
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अगर खिड़कियां बंद रखी जाती हैं, तो गैर वातानुकूलित कोच जून के मध्‍य में थोड़ा गर्म हो सकते हैं जिससे अंदर का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास हो सकता है लेकिन, एक मच्छरदानी लगाने और खिड़कियां खुली रखी जाए,तो हवा के आर पार होने से तापमान में सुधार होने की संभावना रहेगी। ऐसी स्थिति अस्‍थायी हो सकती क्‍योंकि मानसून के आने के साथ बारिश हो जाने से तापमान में सुधार हो जाएगा। गर्मियों में डिब्‍बों के अंदर तापमान को कम रखने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे रोगियों और कर्मचारियों को आराम मिलेगा। इसके लिए निम्‍नलिखित उपाय आजमाए जा रहे हैं :- प्लेटफार्मों पर खड़े ऐेसे डिब्‍बों के उपर कवर शीट्स (सफेद कनात) या उपयुक्त सामग्री बिछाई जा रही है ताकि बाहर के तापमान से डिब्‍बों के अदंर गर्मी से बचाव किया जा सके। डिब्‍बों के अदंर बबल रैप की शीट लगाई जा रही है ताकि अदंर के तामपान को एक डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सके। डिब्‍बों की छतों पर गर्मी को परावर्तित करने वाले पेंट लगाए जा रहे हैं। उत्‍तरी रेलवे की ओर से इसका प्रयोग किया गया है। परीक्षण के दौरान पाया गया कि इससे डिब्‍बों केअदंर का तापमान 2.2डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है। डिब्‍बों पर पेंट की ऐसी और एक परत चढ़ाए जाने के लिए मुंबई आईआईटी के सहयोग से परीक्षण किए जाने की योजना है। इसका परीक्षण 20 जून को किया जाएगा और परीक्षण के नतीजे रिकार्ड किए जाएंगे। डिब्‍बों की छत को पेंट करने के अलावा बांस आदी की टाटी का इस्‍तेमाल भी किया जा रहा है ताकि तामपान को और घटाया जा सके। डिब्‍बों के अदंर सचल कूलर लगाने का भी प्रयोग किया जा रहा है इससे अदंर का तामपान तीन डिग्री सेल्सियस तक कम करने में मदद मिली है। पानी की फुहार चलाने का भी प्रयोग किया जा रहा है। इससे मौजूद शुष्‍क मौसम में रोगियों को काफी आराम मिलने की संभावना है। भारतीय रेल, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार इन रेल डिब्‍बों को सेवा प्रदाता के रूप में उपलब्ध करा रही है। इनका उपयोग राज्यों द्वारा एक आकस्मिक उपाय के रूप में किया जाएगा जब उनके पास कोविड रोगियों को अलग रखने की सुविधाएं अपर्याप्‍त हो जाएंगी। ऐसे 5 हजार से अधिक कोच आपातस्थिति के लिए तैयार रखे गए हैं।

एसी डक्ट के माध्यम से कोविड वायरस के संभावित संक्रमण के जोखिम को देखते हुए वातानुकूलित डिब्बे उपयुक्त नहीं भारतीय रेल ने 5231 गैर वातानुकूलित डिब्‍बों को आइसोलेशन कोच में बदला प्राकृतिक रूप से प्रकाश और हवा की अच्छीा सुविधा के साथ यदि वातानुकूलित व्यवस्था हो तो ऐसे डिब्बों में एसी डक्ट नहीं होने चाहिए गैर-वातानुकूलित डिब्बों को कोविड देखभाल केंद्रों में परिवर्तित करने का निर्णय अधिकार प्राप्त समूह द्वारा लिया गया था सामान्य तौर पर माना जाता है कि उच्च तापमान वायरस से लड़ने में मदद करता है और खुली खिड़कियों के माध्यम से हवा के परिसंचरण से रोगियों को लाभ हो सकता है गैर वातानुकूलित डिब्‍बों को आइसोलेशन कोच बनाया जाना तकनीकि और स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से जरुरी हैं मरीजों और कर्मचारियों को आराम मिले इसके लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है आइसोलेशन कोच वाली ऐसी प्रत्येक रेलगाड़ी को आवश्यक रूप से एक या एक से अधिक कोविड समर्पित स्वास्थ्य केन्द्रों तथा कम से कम एक कोविड समर्पित अस्पताल के साथ जोड़ा जाना चाहिए जहां मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें स्थानांतरित किया जा सके। इनमें डॉक्टर और अर्ध चिकित्साकर्मी उन राज्य सरकारों की ओर से उपलब्ध कराए जाने चाहिए जिन्होंने इसकी मांग की है: रेलवे की इसमें भूमिका सिर्फ सेवा प्रदाता की है कोविड-19से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए, भारतीय रेल ने अपनी रेलगाडि़यों के 5231 गैर-वातानुकूलित डिब्बों को कोविड केयर सेंटर में परिवर्तित कर दिया है। इन डिब्‍बों का इस्‍तेमाल कोविड के संदिग्‍ध और पुष्‍ट मामलों के प्रबंधन के लिए 'स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। ये सुविधाएं स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा विकसित एकीकृत कोविड योजना का हिस्सा हैं और आमतौर पर इनका उपयोग तब किया जाता है जब राज्यों की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं अपर्याप्‍त हो जाती हैं। योजना के तहत यह भी तय किया गया कि इन डिब्‍बों में प्राकृतिक रूप से हवा और प्रकाश की पर्याप्‍त सुविधा हो और ऐसे में यदि वातानुकूलित सुविधा उपलब्‍ध कराई जाए तो उसमें डक्‍ट नहीं हों। इन रेल डिब्‍बों को कोविड के मरीजों के अनुरुप बदलने का फैसला लेने के पहले नीति आयोग और स्‍वास्‍थ्‍य तथा परिवार कल्‍याण मंत्रालय के साथ इन डिब्‍बों को वातानुकूलित रखने या नहीं रखने पर चर्चा की गई थी। अंत में इस बात पर सहमति बनी कि वातानुकूलित डिब्‍बे कोविड मरीजों के लिए सही नहीं होंगे क्‍योंकि इनमें लगे डक्‍ट के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। यह माना गया कि आम तौर पर अधिक तापमान वाले परिवेश में वायरस से लड़ने में मदद मिलेगी और खुली खिड़कियों से हवा के परिसंचरण से मरीजों को लाभ होगा। जैसा कि अधिकार प्राप्‍त समूह द्वारा निर्देशित और वांछित है, ये कोविड केयर कोचमें केवल कोविड के ऐसे मरीजों की देखभाल के लिए होंगे जिनमें संक्रमण हल्‍का या मामूली होगा या जो कोविड के संदिग्‍ध मरीज होंगे।आइसोलेशन कोच वाली ऐसी प्रत्येक रेलगाड़ी को आवश्यक रूप से एक या एक से अधिक कोविड समर्पित स्वास्थ्य केन्‍द्रों तथा कम से कम एक कोविड समर्पित अस्‍पताल के साथ जोड़ा जाना होगा जहां मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें स्थानांतरित किया जा सके। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा ऐसी रेलगाडि़यों के लिए तैयार की गई मानक प्रक्रिया के अनुसार,इनके पास प्‍लेटफार्म पर एक आपातकालीन सुविधा संबधित स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदाता द्वारा आवश्‍यक रूप से बनाई जानी होगी। यह सुविधा, यदि स्थायी रूप में उपलब्ध नहीं है, तो अस्थायी व्यवस्था के रूप में प्रदान की जा सकती है। यह सलाह दी गई कि ऐसे रेल डिब्‍बों का इस्‍तेमाल कोविड उपचार के लिए उसी स्थिति में किया जाएगा जब संबधित राज्‍यों के पास ऐसी सुविधाएं अपर्याप्‍त रह जाएंगी। संभावना है कि जुलाई के मध्‍य में जब कोविड का संक्रमण अपने चरम पर होगा तब इन रेल डिब्‍बों की दरकार होगी। यह दोहराया गया कि गैर-वातानुकूलित डिब्बों को कोविड देखभाल केंद्रों में परिवर्तित करने का निर्णय अधिकार प्राप्‍त समूह द्वारा इसलिए लिया क्योंकि संभावित संचरण जोखिम के कारण वातानुकूलित डिब्बे इस काम के लिए अनुपयोगी होंगे और इनकी जगह गैर वातानुकूलित डिब्‍बे बेहतर रहेंगे क्योंकि उनमें खुली खिड़कियों से हवा का परिसंचरण होने से रोगियों को लाभ मिलेगा।

श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के प्रवर्तकों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंस एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर योजना के अंतर्गत 36 परियोजनाओं की हुई समीक्षा परियोजनाओं का मासिक आभासी निरीक्षण किया गया केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर्स के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने से संबंधित योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) द्वारा समर्थित निर्माणाधीन एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स (एपीसी) के प्रवर्तकों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बात की। बैठकों के दौरान केन्द्रीय एफपीआई राज्य मंत्री श्री रामेश्वर तेली भी मौजूद रहे। मंत्रालय द्वारा असम, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों के लिए स्वीकृत 36 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। प्रवर्तकों ने केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के साथ संवाद किया और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में मिले अनुभवों या सामने आई चुनौतियों को साझा किया। श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि एमओएफपीआई ने इन परियोजनाओं के लिए जरूरी भौतिक निरीक्षण के विकल्प के रूप में नया तंत्र विकसित किया है। सूचना प्रौद्योगिकी साधनों के उपयोग से मासिक आभासी (वर्चुअल) निरीक्षण किए जा रहे हैं। एक दल के द्वारा आभासी निरीक्षण मॉडल के माध्यम से परियोजना की निगरानी और प्रगति के आकलन का काम किया जा रहा है। एपीसी योजना के लिए समीक्षा बैठक 17.06.2020 और 18.06.2020 को हुई थीं, जो मौजूदा परियोजनाओं की गहन समीक्षा के लिए एमओएफपीआई द्वारा आयोजित ऑनलाइन बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा था। परियोजनाओं के प्रवर्तकों की सहायता के लिए परिचालन, श्रम और लॉजिस्टिक समस्याओं से संबंधित अन्य चिंताओं पर भी विचार किया गया। इसलिए, कई परियोजनाओं के लिए पूरी करने की तारीख बढ़ा दी गई है, क्योंकि लॉकडाउन की बंदिशों के चलते संयंत्र और मशीनरी लगाने की प्रक्रिया में खासी देरी हो गई थी। इस साल की शुरुआत में, सरकार ने आईटी टूल्स के एकीकरण और ई-ऑफिस कार्यान्वयन में सराहनीय कार्य के लिए एमओएफपीआई को सम्मानित किया था। एमओएफपीआई ऑनलाइन और अन्य आभासी साधनों के माध्यम से परियोजनाओं की स्वीकृति तथा समीक्षा के लिए अंतर-मंत्रालयी बैठकों का आयोजन कर रहा है। इसके साथ ही मंत्रालय अपने समर्पित कार्यबल के साथ मिलकर सक्रिय दृष्टिकोण के साथ उद्योग संगठनों, विभिन्न हितधारकों और परियोजनाओं के प्रवर्तकों द्वारा रखे गए विभिन्न मुद्दों और चिंताओं का हल निकाल रहा है। मंत्रालय अपने एक समर्पित निवेश पोर्टल ‘सम्पदा पोर्टल’ के माध्यम से संबंधित योजनाओं के अंतर्गत सब्सिडी के आवेदन स्वीकार करने, आवश्यक प्रक्रिया और संस्तुति का काम करता है।

स्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने नई दिल्ली में आई-लैब (संक्रामक रोग निदान प्रयोगशाला) लांच की। यह भारत में लांच की गयी पहली बार आई-लैब है। आई-लैब देश भर में कोविड-19 के परीक्षण को बढ़ाने में मदद करेगा। इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अपने COVID परीक्षण केन्द्रों में से तैनात किया जाएगा। वर्तमान में देश में 20 से अधिक ऐसे हब हैं, जो दैनिक आधार पर संचालित होते हैं, इन हब में 100 परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं जिन्होंने अब तक 2 लाख 60 हजार परीक्षण किये हैं। I-Lab का उद्देश्य आई-लैब एक मोबाइल परीक्षण सुविधा है जिसका उपयोग देश के ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गम क्षेत्रों में कोविड-19 के लिए नमूने एकत्र करने और परीक्षण के लिए किया जाएगा। DBT- AMTZ COMMand एशिया के पहले चिकित्सा उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ- आंध्र प्रदेश मेड-टेक ज़ोन (AMTZ) – विशाखापत्तनम में स्थित, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने प्रौद्योगिकी की कमी को दूर करने के लिए DBT- AMTZ COMMAND (COVID Medtech Manufacturing Development) कंसोर्टिया की स्थापना की है। देश का पहला आई-लैब AMTZ में 8 दिनों के रिकॉर्ड समय में बनाया गया था। आई-लैब COVID-19 के अलावा मोबाइल परीक्षण सुविधा अन्य संक्रामक रोगों का निदान करने में भी सक्षम है। इसकी कुछ विशेषताएं हैं: इनमें से प्रत्येक I-Lab हर दिन 25 RD-PCR (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) टेस्ट कर सकती है, यह 300 एलिसा (एंजाइम-लिंक्ड इम्युनोसे) परीक्षण, एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियों के लिए परीक्षण करने के लिए कर सकती है।

20 जून, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े पैमाने पर ग्रामीण सार्वजनिक कार्य योजना-गरीब कल्याण रोज़गार अभियान का शुभारंभ करेंगे। लक्ष्य इस योजना का लक्ष्य देश भर के ग्रामीण हिस्सों में ग्रामीण नागरिकों को आजीविका सहायता प्रदान करके, खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए आजीविका समर्थन प्रदान करने के कारण देश के ग्रामीण हिस्सों में होने वाले आर्थिक प्रभाव को कम करना होगा। केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत लगभग 25 योजनाओं को एक साथ लाकर देश भर के 116 जिलों में योजना के तहत लक्ष्य प्राप्त करने की योजना बनाई है। यह योजना कैसे काम करेगी? 6 राज्यों (ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश) के 116 जिलों से, कुल 6.7 मिलियन प्रवासी श्रमिकों (जो देश में कुल रिटर्निंग प्रवासी श्रमिकों का लगभग दो-तिहाई है) की मैपिंग की गई है। इस योजना के तहत, सरकार की 25 योजनाओं में गृह निर्माण, घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से पीने का पानी, सड़क निर्माण इत्यादि की योजनाएँ शामिल हैं। वापसी करने वाले प्रवासी कामगारों को इस योजना के तहत उनके कौशल के आधार पर काम दिया जाएगा। योजना के लिए बजट गरीब कल्याण रोज़गार अभियान मई, 2020 के महीने में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 20 ट्रिलियन के राहत पैकेज का एक हिस्सा है। बजट में वित्त मंत्री ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए 61,500 करोड़ रुपए की की घोषणा की थी। 18 जून, 2020 वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में 50,000 करोड़ रुपए का संचार किया जाएगा।

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"spotlight discussion on :- 41 कोयला खदानों के शुभारंभ में प्रधानमंत्री जी का संबोधन"

"सामयिकी :- कोरोना वायरस सक्रमंण पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डाक्टर मनोज से आकाशवाणी सवांददाता आनंद श्रीवास्तव की बातचीत"

"सुर्खियों मे :- देश विदेश मे घटित कोरोना वाइरस से सबंधित कुछ सकारात्मक सूचनाएं"

Desh Deshantar - HCQ and precautions | कोरोना मरीज : HCQ और सावधानियां

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❄️कोविड -19 से मुकाबला करने हेतु AIIB ने भारत को 750 मिलियन डॉलर का ऋण मंजूर किया निवेश परिचालन के लिए AIIB के उपाध्यक्ष ने बताया कि भारत का समर्थन करने का उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को दीर्घकालिक नुकसान से बचाने के लिए आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित करना है.  एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) ने भारत को 750 मिलियन डॉलर (लगभग 5,688 करोड़ रुपये) का ऋण प्रदान करने को मंजूरी दी है. लाखों लोगों पर कोविड -19 महामारी के बुरे प्रभावों को रोकने के लिए अपनी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए भारत सरकार की सहायता के लिए यह ऋण स्वीकृत किया गया है. विश्व बैंक के अनुसार, भारत में इस महामारी की चपेट में आये लगभग 270 मिलियन लोग राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं और लगभग 81 मिलियन लोग घनी आबादी वाली अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे हैं जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है. हालांकि AIIB नीति-आधारित वित्तपोषण के लिए नियमित साधन से युक्त नहीं है, लेकिन यह अपने सदस्यों को विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से सहायता देने के लिए असाधारण आधार पर ऐसे वित्तपोषण प्रदान कर रहा है जो एशियाई विकास बैंक या विश्व बैंक द्वारा सह-वित्तपोषित हैं. बजटीय सहायता का महत्व एशियाई विकास बैंक द्वारा सह-वित्तपोषित यह बजटीय सहायता, अनौपचारिक क्षेत्र और व्यवसायों की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने के लिए दी जायेगी. यह जरूरतमंदों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार करने के साथ ही देश की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने में भी मदद करेगी. भारत को मिला AIIB का आर्थिक समर्थन आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान ने गरीब परिवारों को, विशेषकर महिलाओं को, विषमतापूर्वक प्रभावित किया है, जो ज्यादातर अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं. निवेश संचालन के लिए AIIB के उपाध्यक्ष, डीजे पांडियन ने कहा कि दुनिया के कई मध्यम और निम्न-आय वाले देश इस स्वास्थ्य संकट के प्रारंभिक चरण में हैं, लेकिन ये देश पहले से ही कोविड -19 महामारी के हानिकारक प्रभावों को महसूस कर रहे हैं. यह पूरे भारत में उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ा खतरा है, जो हाल ही में गरीबी से उभरे हैं. पांडियन ने आगे यह भी कहा कि भारत को हमारा सहायता प्रदान करने का उद्देश्य, भारत की अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को होने वाले दीर्घकालिक नुकसान को रोकने के लिए आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित करना है. AIIB का भारत को कुल संप्रभु ऋण, जो पहले से ही मंजूर किया जा चुका है, 3.06 बिलियन डॉलर है. इसमें हाल ही का 500 मिलियन डॉलर का कोविड -19 आपातकालीन प्रतिक्रिया ऋण भी शामिल है. AIIB के कोविड -19 संकट रिकवरी सुविधा (CRF) के तहत, भारत को दियिया जाने वाला वर्तमान स्वीकृत दूसरा ऋण होगा. यह सुविधा कोविड - 19 के संकट से जल्दी निपटने के अलावा, AIIB के सदस्य देशों की वित्तीय, आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए और इस महामारी से निपटने के लिए समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के एक हिस्से के तौर पर निर्मित की गई थी. AIIB के बारे में: यह एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जिसका मिशन एशिया में आर्थिक और सामाजिक स्थितियों को बेहतर बनाना है. इसने जनवरी 2016 में अपना परिचालन शुरू किया और अब इसके दुनिया-भर में 102 स्वीकृत सदस्य हैं. इस बैंक का मुख्यालय बीजिंग, चीन में है.

LOC और LAC में क्या अंतर है? ———————————— भारत के अपने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा संबंधी कई विवाद हैं. कई बार इन सीमा विवादों के कारण इन देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई. भारत के नागरिक के रूप में हमें अपने देश की सीमाओं को जानना चाहिए और पड़ोसी देशों के साथ विवादों का कारण बनना चाहिए. आइये इस लेख में इसके बारे में जानते हैं. इस लेख में LOC और LAC के बीच अंतर को प्रकाशित किया है. वास्तविक विषय पर आने से पहले हमें LOC और LAC की अवस्थिति और अर्थ जानना चाहिए. ⚫️ LOC क्या है: - (What is LOC):- LOC या लाइन ऑफ कंट्रोल एक लाइव लाइन है जिसमें फायरिंग और फेस तो फेस इंटरेक्शन तक का सामना करना पड़ता है. यह सीमा स्पष्ट रूप से मिलिट्री द्वारा सीमांकित है. यह सीमा भारतीय संघ राज्य क्षेत्र यानी जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटती है. LOC की लंबाई लगभग 776 किलोमीटर है जो कि पाकिस्तान द्वारा 1947 में धोखे से कब्ज़ा ली गयी थी. LOC का भारतीय भाग (दक्षिणी और पूर्वी भाग) जम्मू और कश्मीर के रूप में जाना जाता है जो कश्मीर का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है. ⚫️ क्या है LAC:- (What is LAC) LAC वास्तविक नियंत्रण रेखा है जो चीन और भारत के बीच की सीमा है. "वास्तविक नियंत्रण रेखा" (एलएसी) की अवधारणा 1993 में एक द्विपक्षीय समझौते में आई थी, हालांकि इन दोनों देशों के बीच जमीनी स्थिति पर कोई ठोस समझौता नहीं हुआ था. इसी कारण इन दोनों देशों के बीच यदा-कदा झगड़े होते रहते हैं. LAC, भारतीय नियंत्रित क्षेत्र को चीनी-नियंत्रित क्षेत्र से अलग करता है. यह बड़ा खाली क्षेत्र है और भारत और चीन की सेनाओं द्वारा लगभग 50 से 100 किलोमीटर की दूरी बनाकर इसकी निगरानी की जाती है. चीनी सरकार LAC को लगभग 2,000 किमी मानती है जबकि भारत LAC को 3,488 किमी लंबा मानता है. LAC को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: लद्दाख में पश्चिमी क्षेत्र, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मध्य क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र जो अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम तक फैला है. LOC और LAC की अवस्थिति जानने के बाद अब हम LOC और LAC के बीच अंतर जानने की स्थिति में हैं ⚫️ LOC और LAC के बीच अंतर (Difference between LOC and LAC):- तुलना का आधार ➖LOC➖LAC फुल फॉर्म➖लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल➖लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल अवस्थिति➖कश्मीर के तीन क्षेत्र (आज़ाद कश्मीर, गिलगिट और बलिस्तान) पाकिस्तान के कब्जे में और दो तिहाई, जम्मू, लद्दाख और कश्मीर घाटी, भारत द्वारा प्रशासित.(हालाँकि पूरी काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है).➖यह उत्तरी भारतीय राज्यों के तीन क्षेत्रों में बिखरा हुआ है: पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश), पश्चिमी (लद्दाख, कश्मीर) और मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश). आकार➖यह स्पष्ट रूप से मिलिट्री द्वारा सीमांकित किया जाता है और बहुत सारी गतिविधियां (टकराव, गोलीबारी आदि का सामना करना) होती हैं. भारतीय और पाकिस्तान की सेना यहां मौजूद है.➖ये बड़े खाली क्षेत्र हैं और लगभग 50 से 100 किलोमीटर की दूरी भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच बनी हुई है. क्षेत्र (लंबाई)➖776 किलोमीटर (अनौपचारिक)➖4,057 किलोमीटर (अनौपचारिक) किन देशों के बीच➖भारत औएर पाकिस्तान➖भारत और चीन LAC पर कोई स्पष्ट सीमांकन नहीं है, यही कारण है कि दोनों देशों के बीच गतिरोध कई बार हुआ है; इसके उदाहरण; 2017 में डोकलाम, 2014 में चुमार, 2013 में डेपसांग और 1987 में सुमदोरोंग चू पर विवाद हो चुका है.

❄️भारत 8वीं बार चुना गया UNSC का अस्थाई सदस्य, जानें विस्तार से भारत का अस्थायी सदस्य के तौर पर 15 देशों की सुरक्षा परिषद में शामिल होना लगभग तय था. भारत 2021-22 कार्यकाल हेतु एशिया-प्रशांत श्रेणी से अस्थायी सदस्य रहेगा. भारत 17 जून 2020 को 8वीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अस्थाई सदस्य चुन लिया गया. अब भारत साल 2021-22 के लिए इस सर्वोच्च संस्था का अस्थायी सदस्य बन गया है. 193 सदस्यीय महासभा में 184 वोट हासिल करने के बाद दो साल के कार्यकाल हेतु भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना गया. भारत के साथ-साथ आयरलैंड, मैक्सिको और नॉर्वे ने भी 17 जून 2020 को आयोजित सुरक्षा परिषद के चुनाव जीते. भारत साल 2021-22 के कार्यकाल के लिए एशिया पैसिफिक कैटगरी से अस्थायी सीट के लिए एक उम्मीदवार था. रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से संबंधित पाबंदियों के कारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मतदान के विशेष इंतजाम किए गए थे. भारत की जीत तय थी भारत का अस्थायी सदस्य के तौर पर 15 देशों की सुरक्षा परिषद में शामिल होना लगभग तय था. भारत 2021-22 कार्यकाल हेतु एशिया-प्रशांत श्रेणी से अस्थायी सदस्य रहेगा. भारत की जीत इसलिए भी तय मानी जा रही थी क्योंकि वे समूह की इस इकलौती सीट के लिए एकमात्र उम्मीदवार था. अमेरिका ने किया स्वागत अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थायी सदस्य चुने जाने पर गर्मजोशी से स्वागत किया है. अमेरिका ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की जीत पर हम उन्हें बधाई देते हैं. हम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर एक साथ काम करने हेतु तत्पर हैं. भारत 8वीं बार UNSC का अस्थाई भारत इसके पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में यह जिम्मेदारी निभा चुका है. सुरक्षा परिषद में मौजूदगी से किसी भी देश का यूएन प्रणाली में दखल और दबदबे का दायरा बढ़ जाता है. ऐसे में 8 साल बाद भारत का सुरक्षा परिषद में पहुंचना काफी महत्वपूर्ण है. हर साल होता है चुनाव महासभा प्रत्येक साल दो वर्ष के कार्यकाल के लिए कुल 10 में से पांच अस्थाई सदस्यों का चुनाव करती है. ये दस अस्थाई सीटें क्षेत्रीय आधार पर वितरित की जाती हैं. पांच सीटें अफ्रीका और एशियाई देशों के लिए, एक पूर्वी यूरोपीय देशों, दो लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों और दो पश्चिमी यूरोपीय और अन्य राज्यों के लिए वितरित की जाती हैं. परिषद में चुने जाने के लिए उम्मीदवार देशों को सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. UNSC क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 प्रमुख हिस्सों में से एक है. इसका मुख्य कार्य विश्वभर में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है. इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ में नए सदस्यों को जोड़ना और इसके चार्टर में बदलाव से जुड़ा काम भी सुरक्षा परिषद के काम का हिस्सा है. यह परिषद दुनियाभर के देशो में शांति मिशन भी भेजता है और अगर दुनिया के किसी हिस्से में मिलिट्री ऐक्शन की जरूरत होती है तो सुरक्षा परिषद रेजोल्यूशन के जरिए उसे लागू भी करता है. सुरक्षा परिषद के बाकी के दस सदस्य दो साल की अवधि के लिए चुने जाते है. हर साल इन दस में से पांच चुने जाते है. यह चुनाव क्षेत्रीय आधार पर होते है.

Current Affairs Quiz 18 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-18-jun/
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