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सकराय माता
- सकराय माता खण्डेलवालों की कुलदेवी मानी जाती है। इनका मुख्य पूजा स्थल झुन्झुनूं जिले के उदयपुरवाटी में स्थित है। इनका शाकम्भरी नाम इनके द्वारा फल, सब्जियाँ व कंद-मूल उत्पन्न करने की
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शीतला माता/सेढ़ल माता/ महामाया माता/चेचक निवारक देवी/शिशु रक्षक देवी के रूप में शीतला माता की पूजा चित्र कृष्ण सप्तमी व अष्टमी को की जाती है।
यह बच्चों की संरक्षिका देवी है इस दिन ठंडा भोजन (बास्योडा) का भोग लगाया जाता है।
शीतला माता का वाहन -: गधा
पुजारी -: कुम्हार जाति का
शीतला माता के मंदिरों में मूर्ति की जगह पत्थर के खंड होते हैं।
राजस्थान में शीतला माता ऐसी देवी है जो खंडित रूप में पूजी जाती है
इनका मंदिर सवाई माधोपुर सिंह ने सील की डूंगरी (चाकसू नामक स्थान) पर जयपुर में बनवाया1 012
आवरी माता का प्रसिद्ध स्थान निकुंभ चित्तौड़गढ़
छींक माता का प्रसिद्ध स्थान जयपुर
करणी माता का प्रसिद्ध स्थान देशनोक बीकानेर
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सुगाली माता 👇👇
1857 की क्रांति की देवी सुगाली माता
इनकी मूर्ति पाली संग्रहालय में
10 सिर व 54 हाथ
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जैसलमेर के भाटी राजपूत वंश की कुलदेवी आवडी/ हिंगलाज माता है
बीकानेर के राठौर की कुलदेवी करणी माता
