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Ye billa wala reel sir mere feed me aa rha hai ya aapke feed me bhi aa rha hai ye billa?
सब कुछ तो ठीक लेकिन अगर अभी 1 से 2 दिन में तबियत खराब हो गया तो, मम्मी के अकॉर्डिंग सबकुछ इसी के चलते हुआ है वाला थ्योरी पूरे घर में चलेगा।
बुरे बन जाओ, गलत साबित हो जाओ, सबको नाराज़ कर दो, बदतमीज बन जाओ, पर जियो, जिंदा लाश नहीं बनना है।
जो रो-रो कर जीत जाते थे, आँसू छुपाकर हार रहे हैं
देखो ये कल के जिद्दी बच्चे, आज सब स्वीकार रहें हैं।
जिंदगी कितनी अजीब होती जा रही है ना… कुछ समझ ही नहीं आता कि क्या वाकई हम इसे जी भी पा रहे हैं या बस काट रहे हैं। हम प्लान बनाते हैं, दोस्तों से कहते हैं कि चलो कहीं घूमने चलते हैं… थोड़ा रिलैक्स करेंगे, हँसी-खुशी कुछ दिन बिताएंगे। लेकिन कभी-कभी वही ट्रिप आखिरी सफर बन जाती है। कोई सोच भी नहीं सकता कि टेररिस्ट आकर गोलियों से सब कुछ खत्म कर देंगे। जो चेहरा हँसता हुआ निकला था, वो कभी लौटकर नहीं आता।
फिर कोई सोचता है कि चलो अपने फेवरेट टीम की जीत का जश्न मनाने चलते हैं। ट्रॉफी परेड होती है, लोग चिल्लाते हैं, गाते हैं… पूरा माहौल खुशी से भर जाता है। लेकिन उस भीड़ में अचानक एक भगदड़ मचती है, लोग गिरते हैं, कुचले जाते हैं। और वही जगह, जो कुछ मिनट पहले जश्न से भरी थी, अचानक रोने की आवाज़ों से गूंजने लगती है।
कुछ लोग सुबह घर से निकलते हैं, किसी जरूरी काम से, या शायद किसी छोटी-सी छुट्टी पर। प्लेन में बैठते हैं, सोचते हैं दो-तीन घंटे में पहुंच जाएंगे, फिर सब ठीक होगा। पर वो प्लेन कभी पहुंचता ही नहीं। आसमान से उड़ता हुआ सीधा किसी हादसे में बदल जाता है। और फिर सिर्फ नाम रह जाते हैं, यादें रह जाती हैं।
कितने लोग होंगे जिन्होंने किसी से कहा होगा, "बाद में बात करते हैं", "अभी व्यस्त हूँ", "कभी मिलेंगे"… और वो 'कभी' कभी आया ही नहीं।
इसलिए अगर तुम किसी को याद कर रहे हो, किसी से कुछ कहना चाहते हो, माफ़ करना चाहते हो, गले लगाना चाहते हो… तो कर लो। आज कर लो। क्योंकि कौन जाने कल हो या न हो। जिंदगी अब बिल्कुल भी भरोसे के लायक नहीं रही।
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