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डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है, पर डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 😂😂
पुरुषों के पास मायका नहीं होता, ना कोई ऐसा आँगन, जहाँ वे निःसंकोच लौट सकें, जहाँ कोई माथा चूमकर कहे-"थक गए हो न? थोड़ा आराम कर लो...
वे चलते रहते हैं निरंतर, एक पुत्र, एक पति, एक पिता बनकर, अपने कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ लिए, पर कभी खुद के लिए ठहर नहीं पाते..
कभी मन भारी हो तो कहाँ जाएँ? ना कोई गोद जहाँ सिर रखकर सिसक सकें, ना कोई दीवार जहाँ अपना दिल टिका सकें..! क्योंकि उन्हें बचपन से सिखाया गया है- "मर्द बनो, मजबूत रहो...
पर क्या मजबूत होने का अर्थ अपनी भावनाओं को मार देना है? क्या रो लेना सिर्फ़ औरतों का हक़ है?
काश, समाज समझ पाता कि पुरुष भी इंसान होते हैं, कि उनके भी दिल धड़कते हैं, कि उन्हें भी कभी-कभी सिर्फ़ एक एक प्यार भरी थपकी चाहिए होती है, जो कह "कोई बात नहीं, मैं हूँ न...
#ForFriends
Everyone wants to be the sun to brighten up someone's life but why not to be the moon to shine on someone's darkest hour?
कल मैं एक शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुआ, जहाँ गया शहर के कई प्रतिष्ठित शिक्षक, कॉलेजों के प्रोफेसर और कोचिंग संस्थानों के शिक्षक मौजूद थे। मुझे वहाँ होस्ट की भूमिका निभाने का अवसर मिला। मन में यह उम्मीद थी कि मंच से शिक्षा, विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षण पद्धतियों पर चर्चाएँ होंगी, लेकिन जो हुआ, वह मेरी कल्पना से बिल्कुल अलग था।
जब शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित किया गया और उन्हें कुछ सुनाने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कविताओं, शायरी और गीतों के माध्यम से अपने दिल की बात कही। किसी ने अपनी पत्नी के लिए प्रेम भरे शब्द कहे, तो किसी ने किसी खोए हुए रिश्ते की यादों को स्वर दिए। किसी की आवाज में अधूरे प्रेम की कसक थी, तो किसी की पंक्तियों में अपने जीवनसंगिनी के प्रति अटूट प्रेम का एहसास। मंच पर बार-बार प्रेम, यादें और भावनाएँ गूँज रही थीं।
यह सब देखकर मैं हैरान था। मैंने सोचा था कि बात होगी किताबों की, ज्ञान की, शिक्षा व्यवस्था की, लेकिन यहाँ तो दिल की कहानियाँ, प्रेम की अनुभूतियाँ और अधूरे सपनों की बातें हो रही थीं। इसने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद एक पुरुष अपने प्रेम को खुलकर तभी व्यक्त करता है, जब उसकी प्रेमिका उसके सामने नहीं होती।
यह अनुभव मेरे लिए नया और अनोखा था। यह एहसास हुआ कि शिक्षक सिर्फ पाठ पढ़ाने वाले नहीं होते, बल्कि उनके भीतर भी प्रेम, संवेदनाएँ और भावनाएँ उतनी ही गहरी होती हैं, जितनी किसी और के दिल में। जीवन में सिर्फ ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रेम की बातें, भावनाओं की अभिव्यक्ति और अधूरी कहानियों का जिक्र भी जरूरी है।
कल मैं एक शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुआ, जहाँ गया शहर के कई शिक्षक, कॉलेजों के प्रोफेसर और कोचिंग संस्थानों के शिक्षक मौजूद थे। मेरी भूमिका वहाँ होस्ट की थी, और मैंने सोचा था कि मंच से शिक्षा, किताबों और छात्रों के भविष्य पर चर्चाएँ होंगी। लेकिन जब शिक्षकों को अपनी बात कहने का अवसर मिला, तो उन्होंने शिक्षा के बजाय प्रेम की बातें साझा कीं, अपनी पत्नियों के बारे में, अपनी प्रेम कहानियों के बारे में, और यहाँ तक कि उन अधूरे रिश्तों के बारे में भी, जो कभी पूरे न हो सके।
यह देखकर मैं हैरान था। मुझे लगा था कि चर्चा केवल शिक्षण और विद्यार्थियों के विषय में होगी, लेकिन वहाँ प्रेम की भावनाएँ अधिक प्रबल थीं। इसने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद एक पुरुष अपने प्रेम को खुलकर तभी व्यक्त करता है, जब उसकी प्रेमिका उसके सामने न हो।
इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि जीवन सिर्फ पढ़ाई, करियर और जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रेम, भावनाएँ और अधूरी कहानियाँ भी अहम भूमिका निभाती हैं। शिक्षक भी इंसान होते हैं, जिनके पास केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि दिल में छिपे एहसास भी होते हैं। यह आयोजन मेरे लिए एक नया अनुभव था, जिसने यह एहसास कराया कि कभी-कभी हमारी जिंदगी में प्रेम की बातें भी उतनी ही जरूरी होती हैं, जितनी शिक्षा की।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: समाज में बदलाव और महिलाओं की वास्तविक स्वतंत्रता पर मेरे विचार
Read Here: https://t.me/Magadh_University_Bodhgaya/4581
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Couldn't wait for Women's Day to celebrate the strongest woman in my life, Meri Maa❤️ Gave her a little surprise a day early because she deserves to be celebrated every day.
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