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𝐔𝐭𝐤𝐚𝐫𝐬𝐡 𝐂𝐄𝐓 12𝐓𝐇 𝐋𝐄𝐕𝐄𝐋 2024

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मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा। तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा॥ अर्थ : - मेरे पास अपना कुछ भी नहीं है। मेरा यश, मेरी धन-संपत्ति, मेरी शारीरिक-मानसिक शक्ति, सब कुछ तुम्हारी ही है। जब मेरा कुछ भी नहीं है तो उसके प्रति ममता कैसी? तेरी दी हुई वस्तुओं को तुम्हें समर्पित करते हुए मेरी क्या हानि है? इसमें मेरा अपना लगता ही क्या है? ❤️I request to all please add this list👍 https://t.me/addlist/YgXc-65nyWthM2Y1

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कई रसूखदारों के नाम सामने आने लगे। तब पीड़ित युवतियों के बयान, अन्य सबूतों के आधार पर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 1994 में आरोपियों में से एक पुरुषोत्तम ने जमानत पर छूटने के बाद आत्महत्या कर ली। केस का पहला फैसला मुकदमा दर्ज होने के 6 साल बाद 1998 में आया। तत्कालीन जिला जज कन्हैयालाल व्यास ने 8 आरोपियों को उम्रकैद से दंडित किया। इस फैसले से कुछ समय पहले प्रकरण के आरोपी फारूक चिश्ती को मानसिक रोग सिजोफ्रेनिया होने की बात सामने आई। इसकी वजह से उसके खिलाफ मुकदमा टला। बाद में उसकी अलग से सुनवाई हुई। जिला न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील पेश की थी, जहां से सजा कम कर 10 साल कारावास कर दी गई। सजा कम होने बाद मुल्जिमों सहित राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग अपील दायर की। जिसका निस्तारण करते हुए 10 साल की सजा यथावत रखी गई। SOURCE