❍➖⃟🥀❰𝙎𝙝𝙖𝙮𝙧𝙞 𝘿𝙞𝙡 𝙎𝙚❱"𓆩᪵❤️𓆪̥
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𝑾𝒆𝒍𝒄𝒐𝒎𝒆 𝒕𝒐 𝒐𝒖𝒓 𝑪𝒉𝒂𝒏𝒏𝒆𝒍 •┈❥ᴀʟʟ ᴛʏᴘᴇꜱ ᴏꜰ ꜱᴛᴀᴛᴜꜱ ᴄᴀᴩᴛɪᴏɴ ᴀᴠᴀɪʟᴀʙʟᴇ ʜᴇʀᴇ 💖 •┈❥ ᴍᴏᴛɪᴠᴀᴛɪᴏɴᴀʟ ʟɪɴᴇ...🥺🥀 •┈❥ sᴀᴅ ᴄᴀᴘᴛɪᴏɴs...😔💯 •┈❥ ʟᴏᴠᴇ sᴛᴀᴛᴜs...❤️
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फ़र्क नहीं पड़ता..." तुमने कहा— "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता।" बस इतना-सा वाक्य था, मगर उसने मेरे भीतर हज़ार रिश्तों की आवाज़ तोड़ दी। मैं तो हर आँसू में तुम्हारा ही नाम छुपाती रही, और तुमने मेरी पूरी मोहब्बत को एक बेपरवाह लफ़्ज़ में समेट दिया। जिस स्त्री के आँसू तुम्हें कभी छू न सके, यक़ीन मानो, एक दिन उसकी ख़ामोशी भी तुम तक नहीं पहुँचेगी। प्रेम में सबसे बड़ा दुख बिछड़ जाना नहीं होता, सबसे बड़ा दुख तब होता है जब सामने वाला कह दे— "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता।" उस दिन स्त्री रोती नहीं, वह भीतर ही भीतर अपने भावनाओं का अंतिम संस्कार कर देती है।#𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍
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फ़र्क नहीं पड़ता..." तुमने कहा— "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता।" बस इतना-सा वाक्य था, मगर उसने मेरे भीतर हज़ार रिश्तों की आवाज़ तोड़ दी। मैं तो हर आँसू में तुम्हारा ही नाम छुपाती रही, और तुमने मेरी पूरी मोहब्बत को एक बेपरवाह लफ़्ज़ में समेट दिया। जिस स्त्री के आँसू तुम्हें कभी छू न सके, यक़ीन मानो, एक दिन उसकी ख़ामोशी भी तुम तक नहीं पहुँचेगी। प्रेम में सबसे बड़ा दुख बिछड़ जाना नहीं होता, सबसे बड़ा दुख तब होता है जब सामने वाला कह दे— "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता।" उस दिन स्त्री रोती नहीं, वह भीतर ही भीतर अपने भावनाओं का अंतिम संस्कार कर देती है। #𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍
हर बार टूटती हुई स्त्री हर बार टूटती है एक स्त्री, मगर हर बार उसकी आवाज़ नहीं टूटती— वह बस और अधिक मौन हो जाती है। वह बिखरती है इस उम्मीद में कि शायद कोई उसके बिखरे हुए मन को समेट लेगा, पर जब कोई नहीं आता, तो अपने ही आँसुओं से ख़ुद को फिर से जोड़ लेती है। कितनी अजीब होती है प्रेम में पड़ी स्त्री... हर चोट के बाद भी नफ़रत नहीं सीखती, बस थोड़ा-सा और चुप रहना सीख जाती है। लोग कहते हैं— "वह पहले जैसी नहीं रही।" उन्हें कौन बताए, हर बार टूटने के बाद कोई भी पहले जैसा नहीं रहता। स्त्री एक दिन में नहीं बदलती, वह हर अनसुने दर्द, हर अधूरे इंतज़ार, और हर उस शब्द से बदलती है जो उसके प्रेम से अधिक उसके मौन को घायल कर जाता है। और सबसे बड़ी विडंबना यह है— जिस स्त्री ने सबके लिए जीना सीखा, उसे ही सबसे अधिक अपने ही टूटे हुए मन को अकेले संभालना पड़ता है।#𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍
प्रेम में पड़ी हुई स्त्री प्रेम में पड़ी हुई स्त्री कठिन होती है, पर उसका प्रेम अत्यंत सरल होता है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री एक पुरुष से इतना अथाह प्रेम करती है कि उसके लिए तन, मन और आत्मा से समर्पित रहती है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री जब उस पुरुष का आलिंगन करती है, तो मानो अपनी बाँहों में पूरी सृष्टि को समेट लेती है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री अल्हड़ होती है, नटखट होती है; क्योंकि उस पुरुष में वह एक छोटे से बालक को देखती है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री को जब अपने घावों पर मरहम नहीं मिलता, तब वह अपने मौन से ही अपने घावों को सींचती रहती है; प्रेम में पड़ी हुई स्त्री माँ के समान होती है। वह उस पुरुष पर आने वाली विपत्तियों को पहले ही महसूस कर लेती है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री उसी पुरुष के लिए उससे भी लड़ जाती है। वह नहीं चाहती कि उस पर किसी और का अधिकार हो, इसलिए उसे दुनिया की नज़रों से बचाकर रखना चाहती है। प्रेम में पड़ी हुई स्त्री स्वयं को खोने से अधिक उस पुरुष को खोने से डरती है। बस, पुरुष के लिए स्त्री को समझना इतना ही कठिन रहा, और स्त्री का प्रेम पुरुष के लिए सदैव इतना ही सरल रहा।🥺#𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍
मौन का अनुवाद कितना कठिन है न— जब शब्द नहीं रोते, केवल मौन भीगता है, और जिसे पढ़ना था, वही उसे पढ़ नहीं पाता। मैंने अपने दुःख को आँसुओं में नहीं, मुस्कानों के पीछे छिपाया था; पर तुम्हारी दृष्टि उस पर्दे तक कभी पहुँची ही नहीं। तुम पूछते रहे— "सब ठीक है न?" और मैं हर बार "हाँ" कहकर अपने ही हृदय को झुठलाती रही। प्रेम का सबसे गहरा दुःख रो लेना नहीं होता, दुःख तो तब जन्म लेता है जब अपना ही कोई तुम्हारे मौन का अर्थ समझ नहीं पाता।#𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍
तुम्हें शायद कभी पता भी न चले... कि मेरे भीतर एक स्त्री हर रोज़ तुम्हें खो देने के भय से मरती है, और वही स्त्री हर सुबह तुम्हारे सामने मुस्कुराकर जी उठती है। मैं रोती हूँ... पर तुम्हारे सामने नहीं। क्योंकि मुझे डर है, कहीं मेरे आँसू तुम्हें यह एहसास न दिला दें कि मेरा प्रेम तुम्हारे लिए एक बोझ है। तुमसे बिछड़ने की कल्पना भर से मेरे भीतर का सारा संसार काँप उठता है। ऐसा लगता है जैसे मेरी धड़कनों का घर धीरे-धीरे उजड़ रहा हो। मैंने अपने आँसुओं को अपनी पलकों की कैद में रखा, तुमसे मैंने कभी यह नहीं कहा कि मुझे तुम्हें खोने से डर लगता है... क्योंकि प्रेम अधिकार नहीं माँगता, वह बस चुपचाप अपने हिस्से का टूटना स्वीकार कर लेता है। अगर किसी दिन मेरी आँखों में बिना वजह नमी दिखाई दे, तो समझ लेना— वह किसी शिकायत की नहीं, तुम्हें खो देने के उस भय की नमी है जिसे मैं हर रोज़ अपने भीतर दफ़न कर देती हूँ। मैंने तुम्हें सिर्फ़ प्रेम नहीं किया, मैंने तुम्हें अपने भीतर इस तरह बसाया है कि अगर कभी तुम चले गए... तो लोग कहेंगे मैं ज़िंदा हूँ, लेकिन सच यह होगा— मेरे भीतर जीने वाली स्त्री उसी दिन मर चुकी होगी।#𝙂𝙪𝙢η𝙖𝙖𝙢_𝙄𝙨𝙝𝙪 ✍🫥
हो अगर इश्क़ मुझसे, तो इस तरह निभाना, कि तेरे दिल पर सिर्फ़ मेरा ही हक़ हो। न तेरी चाहत में कोई और शामिल हो, न तेरी वफ़ा पर किसी और का हक़ हो। जिस दिन तेरे होठों पर किसी और का नाम हो, उसी दिन मुझसे आख़िरी सलाम हो। झूठे वादों से बेहतर है सच्ची जुदाई, कम-से-कम इश्क़ का इतना तो एहतराम हो। तुझे बदलने में मैंने अपना वक़्त नहीं, अपनी पूरी मोहब्बत लगा दी थी। मगर तू अपनी आदतों का ही होकर रह गया, जैसे मेरी मोहब्बत तेरे लिए कभी काफ़ी न थी। जिस रात तू किसी और की बाँहों में सुकून से सोए, उस रात मेरी रूह दर्द के नाम हो। तुझे शायद मेरी कमी कभी महसूस न हो, मगर मेरी हर साँस तेरे ही नाम हो। तेरी ख़ुशी से मुझे कोई शिकायत नहीं, चाहे उसमें मेरा कोई मुकाम न हो। फिर भी दुआ है—तू हमेशा आबाद रहे, भले मेरी दुनिया का हर सपना गुमनाम हो।
गुमनाम लेखिका इशू ✍✍
छत पर कमरा है मेरा, कमरा भी कोने वाला। काम आसानी से हो जाता है, रोने वाला। दिल उदासी के मलबे तले दब गया, रात लगता रहा — अब गया, अब गया। क्या कहा जा रहा था तुम्हें छोड़कर, रोकने से रुका, इसका मतलब गया। बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं, लगेगा, लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं। नहीं लगेगा उसे देखकर कि मैं खुश हूँ, मैं खुश नहीं हूँ, मगर देखकर लगेगा नहीं। मैं उसके बाद चल नहीं पाया किसी के साथ, उसने भी सिर्फ़ काम चलाया किसी के साथ। जो मुश्किलों से मैंने उसको सिखाया था, दोस्त, उसने वो इश्क़ करके दिखाया किसी के साथ। वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है, जो उसका होता है, समझो ग़ुलाम होता है। किसी का होकर दोबारा न आना मेरी तरफ़, मोहब्बतों में हलाला हराम होता है।#Ishufeelings✍
छत पर कमरा है मेरा, कमरा भी कोने वाला। काम आसानी से हो जाता है, रोने वाला। दिल उदासी के मलबे तले दब गया, रात लगता रहा — अब गया, अब गया। क्या कहा जा रहा था तुम्हें छोड़कर, रोकने से रुका, इसका मतलब गया। बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं, लगेगा, लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं। नहीं लगेगा उसे देखकर कि मैं खुश हूँ, मैं खुश नहीं हूँ, मगर देखकर लगेगा नहीं। मैं उसके बाद चल नहीं पाया किसी के साथ, उसने भी सिर्फ़ काम चलाया किसी के साथ। जो मुश्किलों से मैंने उसको सिखाया था, दोस्त, उसने वो इश्क़ करके दिखाया किसी के साथ। वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है, जो उसका होता है, समझो ग़ुलाम होता है। किसी का होकर दोबारा न आना मेरी तरफ़, मोहब्बतों में हलाला हराम होता है।#Ishufeelings✍
छत पर कमरा है मेरा, कमरा भी कोने वाला। काम आसानी से हो जाता है, रोने वाला। दिल उदासी के मलबे तले दब गया, रात लगता रहा — अब गया, अब गया। क्या कहा जा रहा था तुम्हें छोड़कर, रोकने से रुका, इसका मतलब गया। बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं, लगेगा, लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं। नहीं लगेगा उसे देखकर कि मैं खुश हूँ, मैं खुश नहीं हूँ, मगर देखकर लगेगा नहीं। मैं उसके बाद चल नहीं पाया किसी के साथ, उसने भी सिर्फ़ काम चलाया किसी के साथ। जो मुश्किलों से मैंने उसको सिखाया था, दोस्त, उसने वो इश्क़ करके दिखाया किसी के साथ। वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है, जो उसका होता है, समझो ग़ुलाम होता है। किसी का होकर दोबारा न आना मेरी तरफ़, मोहब्बतों में हलाला हराम होता है। #Ishu feelings ✍
छत पर कमरा है मेरा, कमरा भी कोने वाला। काम आसानी से हो जाता है, रोने वाला। दिल उदासी के मलबे तले दब गया, रात लगता रहा — अब गया, अब गया। क्या कहा जा रहा था तुम्हें छोड़कर, रोकने से रुका, इसका मतलब गया। बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं, लगेगा, लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं। नहीं लगेगा उसे देखकर कि मैं खुश हूँ, मैं खुश नहीं हूँ, मगर देखकर लगेगा नहीं। मैं उसके बाद चल नहीं पाया किसी के साथ, उसने भी सिर्फ़ काम चलाया किसी के साथ। जो मुश्किलों से मैंने उसको सिखाया था, दोस्त, उसने वो इश्क़ करके दिखाया किसी के साथ। वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है, जो उसका होता है, समझो ग़ुलाम होता है। किसी का होकर दोबारा न आना मेरी तरफ़, मोहब्बतों में हलाला हराम होता है।#Ishu feelings ✍
Dedicated for 10 jagah muh maarne waalo ke liye 😎😎
हर गली में इश्क़ का झंडा उठाने वाले,
वफ़ा का नाम आते ही नज़रें चुराने वाले।
खुद को आशिक़ कहते हो बड़े शौक़ से,
सच तो ये है, बस हर जगह मुँह मारने वाले।
जिसे देखो उसी पर दिल हार जाते हो,
हर रोज़ नया इश्क़ फ़रमा जाते हो।
वफ़ा तुम्हारे बस की बात नहीं,
बस टाइमपास को प्यार बता जाते हो।
किरदार से पहचान होती है इंसान की,
हर किसी पर मर मिटना शान नहीं होती।
जो हर चेहरे पर फ़िदा हो जाए,
उसकी मोहब्बत कभी सच्ची नहीं होती।
हर किसी से मुस्कुराकर दिल लगाने वाले,
आखिर में अकेले ही रह जाने वाले।
इश्क़ नहीं, ये सिर्फ़ आदत है तुम्हारी,
हर मोड़ पर रंग बदल जाने वाले।
✍✍😎😎
💗
एक लड़का हैं
वो एक नज़्म,है
मैं उसे लिखना चाहती हूं✍
वो है एक किताब,
मैं उसे पढ़ना चाहती हूँ। 📙
भीड़ में जिस चेहरे पर रुके उसकी निगाहें,
काश वो चेहरा मेरा हो।
मैं उसे दिखना चाहती हूँ,🙈
मैं चाँद हूँ,🎑 वो पृथ्वी। 🌏
मैं उसके इर्द-गिर्द ही चलना चाहती हूं👫
वो सपना है कि जिसके ख़ातिर,
मैं घर से अपने निकलना चाहती हूँ।🥰
मुझ में हैं कामियाँ लाखों, लेकिन
मैं उसके लिए बदलना चाहती हूँ।🫰
एक लड़का है...
जिसे मैं इतना चाहती हूँ।
जिसे मैं इतना चाहती हूँ 🙈❤️
#DipShw 😘🙈🫂✍
⋆𓍯𓂃𓏧♡💖कौन रखेगा मेरे होठों पे उँगली अपनी कौन बोलेगा "नहीं ऐसा नहीं कहते..❤️
⋆𓍯𓂃𓏧♡💖
Tere jaisa koi mila hi nahi,
milta bhi kaise kabhi paya hi nahi.
jahan tak nazar gayi dikha sirf tu hi, tere baad nazar koi aaya hi nahi..💗
#Anjaaŋ_Abhi
#Badŋaam_Abhi
🍂🍂
रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया
वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया
यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आएगा
जाते हुए चराग़ बुझा कर नहीं गया
बस इक लकीर खींच गया दरमियान में
दीवार रास्ते में बना कर नहीं गया
शायद वो मिल ही जाए मगर जुस्तुजू है शर्त
वो अपने नक़्श-ए-पा तो मिटा कर नहीं गया
🍂🍂
# Ishu_feelings✍💔
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रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया
वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया
यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आएगा
जाते हुए चराग़ बुझा कर नहीं गया
बस इक लकीर खींच गया दरमियान में
दीवार रास्ते में बना कर नहीं गया
शायद वो मिल ही जाए मगर जुस्तुजू है शर्त
वो अपने नक़्श-ए-पा तो मिटा कर नहीं गया
🍂🍂
# Ishu feelings ✍💔
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दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से
वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला
तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया
आज तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला
मुंतज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला
मैं ने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला
🍂🍂
# Ishu feelings ✍💔
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दश्त में प्यास बुझाते हुए मर जाते हैं
हम परिंदे कहीं जाते हुए मर जाते हैं
हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हँस
जो तअ'ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं
उन के भी क़त्ल का इल्ज़ाम हमारे सर है
जो हमें ज़हर पिलाते हुए मर जाते हैं
ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन
लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं
🍂🍂
# Ishu feelings ✍💔
