es
Feedback
PMC INSTITUTE UJJAIN

PMC INSTITUTE UJJAIN

Ir al canal en Telegram

Join us For- All one Day Exam , SSC, Railway, MP POLICE, MPSI, BANKING, ARMY, NAVY, AIRFORCE

Mostrar más
999
Suscriptores
Sin datos24 horas
-87 días
-1430 días
Archivo de publicaciones
नीति आयोग की कृषि विपणन सुधार रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर कौन सा राज्य रहा ?
Anonymous voting

हाल ही में किस राज्य सरकार द्वारा उन्नत आरोग्य श्री योजना शुरू की गई ?
Anonymous voting

काशी तमिल संगम के दूसरे संस्करण का आयोजन किस राज्य में किया जा रहा है ?
Anonymous voting

हाल ही में किसे छत्तीसगढ़ विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया?
Anonymous voting

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार 2023 से किसे सम्मानित किया जाएगा?
Anonymous voting

कूनो फेस्टिवल का आयोजन किस राज्य में किया जा रहा है?
Anonymous voting

IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी कौन है?
Anonymous voting

army maths age.pdf3.17 MB

Article.pdf3.18 MB

reasoning.pdf6.77 MB

ssc maths.pdf4.17 MB

reasoning.pdf6.60 MB

ssc math.pdf3.62 MB

ssc maths.pdf4.01 MB

राष्ट्रीय गणित दिवस ⬧ श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर, 1887 को कोयंबटूर जिले के इरोड नामक गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिताजी श्रीनिवास अयंगर, एक स्थानीय कपड़े की दुकान में मुनीम थे। उनकी माता जी का नाम कोमलताम्मल था। ⬧ भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया गया था। इसके साथ ही, श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा भी की गई थी। ⬧ आज दुनिया श्रीनिवास रामानुजन के सैकड़ों गणितीय सिद्धांतों को देखकर आश्चर्यचकित होती है। उनमें से कई सिद्धांत तो ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक समझा नहीं जा सका है। यह सुनकर कोई भी हतप्रभ हो सकता है कि दक्षिण भारत के कुम्भकोणम नामक छोटे-से कस्बे में अध्ययन करने वाला यह गणितज्ञ अपने विश्वविद्यालय की परीक्षा में असफल हो गया था। यह भी कम चौंकाने वाला तथ्य नहीं है कि महज 32 साल की उम्र में दुनिया से कूच कर जाने वाले विलक्षण प्रतिभा का धनी यह महान गणितज्ञ, गणित की गुत्थियों की एक ऐसी विरासत पीछे छोड़ गया, जिसे लंबे समय तक दुनिया के प्रतिभाशाली मस्तिष्क समझ नहीं सके। ⬧ विश्व प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुजन की याद में हर साल 22 दिसंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय गणित दिवस ऐसा ही एक उत्सव है, जो हमें भारतीय गणित की समृद्ध परंपरा का स्मरण कराता है, उस पर गौरवान्वित होने का अवसर देता है। रामानुजन को ‘गणितज्ञों का गणितज्ञ’ और 'संख्याओं का जादूगर' कहा जाता है। उन्हें यह संज्ञा ‘संख्या-सिद्धान्त’ पर उनके योगदान के लिए दी जाती है। ⬧ उन्हें यह संज्ञा ‘संख्या-सिद्धान्त’ पर उनके योगदान के लिए दी जाती है। रामानुजन की प्रतिभा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके निधन के बाद उनकी 5000 से अधिक प्रमेय (थॉरम) छपवाई गईं। इन गणितीय प्रमेयों में अधिकतर ऐसी थीं, जिन्हें कई दशक बाद तक सुलझाया नहीं जा सका। ⬧ कुम्भकोणम के एक मित्र के.एस. श्रीनिवासन की चेन्नई में अचानक रामानुजन से मुलाकात हुई तो उन्होंने गंभीरता से कहा- "रामानुजन, लोग तुम्हें जीनियस कहते हैं।" रामानुजन ने अपनी कोहनी दिखाते हुए पलटकर पूछा- "क्या! जरा मेरी कोहनी तो देखो, यही तुम्हें सच्ची कहानी बता सकती है।" ध्यान से देखने पर श्रीनिवासन ने पाया कि रामानुजन की कोहनी की चमड़ी काली और मोटी हो गई थी। पूछने पर रामानुजन ने बताया कि "दिन-रात मैं स्लेट पर गणनाएँ करता हूँ, और हर क्षण लिखकर मिटाना पड़ता है, जिसके लिए कपड़े के टुकड़े का उपयोग करने से समय अधिक खर्च होता है। इसलिए, मैं अपनी कोहनी का उपयोग मिटाने के लिए करता हूँ। मेरी कोहनी ही मुझे जीनियस बना रही है।" ⬧ मद्रास पोर्ट में मामूली क्लर्क का काम करने वाले रामानुजन वर्ष 1913 में कैम्ब्रिज में मशहूर गणितज्ञ प्रोफेसर जी.एच. हार्डी को पत्र लिखते हैं, और अपने शोध का नमूना भेजते हैं। रामानुजन की प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रोफेसर हार्डी उन्हें अपने साथ काम करने के लिए कैम्ब्रिज बुलाते हैं। कुछ समय बाद उन्हें रॉयल सोसायटी और ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज का फेलो चुना जाता है। उनका जीवनकाल छोटा था, पर उन्होंने उपलब्धियों की एक लंबी लकीर खींच दी। ⬧ गणित के क्षेत्र में की गई रामानुजन की खोजें आधुनिक गणित और विज्ञान की बुनियाद बनकर उभरी हैं। सही अर्थों में वह भारत की गौरवशाली गणितीय परंपरा के वाहक थे।

photo content