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ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜

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पहली बार जो लिखे दिल के पन्ने पर शख्स , वो ताउम्र रहे ऐसी सियाही दे दे जो तय है उसका जाना ज़िंदगी से , तो उसकी यादों से मुझे रिहाई दे दे ।।🍁🌙🪐

सुप्रभात हर हर महादेव 💚

तेरी आहटों को, खबर है मेरे सब्र की! तू कहाँ, गले लगाने को तड़पता है! 🩷~Abhiwrites🫰

मै उसको भा गया हूं ये मेरा मसला नही है, उसका इलाज कीजिए उसकी पसंद बहुत बुरी है! ~😈

कोई रिश्ता बनाने से लगाव अब रहा ही नहीं एक शख्स की ख्वाहिशें मुझे यूं पाबंद कर गई .... 🫧

मिलेंगी खुशियां बेशुमार , तकलीफों का वैराग्य जायेगा राज होगा महादेव का , सावन सा सौभाग्य आयेगा ... 🔱

सर्वम अनित्यं ! 🔱 हर हर महादेव 🔱

तेरा चेहरा ,तेरी ख़ुशबू ,तेरी बातें ,तेरी मुस्कान ! एक तेरे जाने से, मेरी सारी दौलत लुट सी गई! ⚡️अभिwrites⚡️

A Real person doesn't need anybody's consent at any time! Good morning guy's🖼️ Have a wonderful day 🔂

गीत कोई खूबसूरत सा गुनगुनाने लगता हूं, पहुंचता हूं उसके शहर तो मुस्कुराने लगता हूं... ~🤏🩷

एक दो झूठ नहीं, अभी कई बहाने लगेंगे कहानियाँ गढ़नी पड़ेगी, कई फसाने लगेंगे इस कदर आन मिले हो तुम मुझमें , कि तुमसे निकलने में मुझे ज़माने लगेंगे .... 🎀

न सोचा करो हर बार कि हम भूल जायेंगे तुमको , न तुम इतने आम हो , न ये मेरे बस की बात है .. ..🌷🦋

किसी ने तुम्हारा नाम लिखा पन्ना निकाल दिया यूं ही मुझे यकीन है कोई तुम्हे अपनी किताबों में सजा कर रखेगा तुम ना बरबाद करना खुद को किसी न चाहने वाले पे मुझे यकीन है कोई तुम्हे सर आंखों पर बैठा कर रखेगा .... ❤️🫂

कही होकर भी नहीं हूँ और कही न होकर भी हूँ! बड़ी कशमकश में हूँ कि आज-कल कहाँ हूँ और कहाँ नहीं हूँ! ~⭐️

एक थकी हुई सी ज़िंदगी को सुकून दे जाती हैं , उसकी बाहें मानो घर बैठे पहाड़ हो मेरे लिए ... ❤️

कोई मोहब्बत ना समझा उसकी , किसी का वो इश्क़ कमाल हो गया उसका हर जवाब कम था कहीं , किसी का वो उलझन भरा सवाल हो गया किसी ने ठुकरा दी उसके साथ रातें भी , किसी का वो सुबह का पहला खयाल हो गया ... 🌙🌻🧸💛

आबादी का किस्सा सुनाता हूँ। कभी उसे देख देख मुस्काता था। आज भरे चौराहे बेवज़ह मुस्कुराता हूँ। यार मेरे मुझे घर ले जाने की बात करते है। पगाल हूँ ,सर न फोड़ दूँ, पास आने से भी डरते है। पुल के ऊपर जहां हम शाम बिताते थे। नदी के बहाव का लुफ़्त उठाते थे। उसी पुल ने नीचे कोने में खुली चट्टान पर मेरा बसेरा है। रात कितनी भी घनी क्यों न हो,दिखता मुझे सवेरा है। कभी नदी के बहाव को रोक देता हूँ। कभी हँसते हँसते खुद का सर फोड़ देता हूँ। जब कोई उस पार मिट्टी जलाने आता है। यूँ लगता है जैसे ,ऊपर से खुद मेरा बुलावा आता है। आसमान खुला है, एक प्यारी सी तस्वीर छायी है। लगता है खाने की थाली लिए मेरी माँ आयी है। ~अभि

किस्मत मेहरबान है मुझ पे मुझे यूं ही अकेला छोड़ा जाने की आदत है , तुम न गिनवाओ कारण मुझसे दूर होने के तुम जाओ , तुम्हे जाने की इजाज़त है ।। 😌

गम:❤️ वो टकरा जाता है हर रोज़ मुस्कुरा कर, एक हम है, जो भरे अश्क़ों से भी गले लगा लेते है! ~आbhiwrites 🩷