Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
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॥ रूपध्यान कीजिये ॥ रूपध्यान करते समय भगवान् की जिस लीला में जाना चाहो, चले जाओ तथा उनके दिव्य मिलन व दर्शन के लिए तड़पन पैदा करो। लाख - लाख आसूँ बहाओ लेकिन किसी भी आसूँ को तब तक सच्चा न मानो, जब तक स्वयं श्यामसुंदर आकर अपने पीताम्बर से आँसुओं को न पोछे
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6-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9901 से9905)
प्यारी छवि लखि प्यारी गोविंद राधे। कह कोउ माथे काला टीका लगा दे।।9901।।
ललिता कही लाली गोविंद राधे।
सारी तनु कारी टीका कहाँ पै लगा दे।।9902।।
लाली कह हँसि माथे गोविंद राधे। लगा के अबीर काला टीका लगा दे।।9903।।
लाली बने लाल सोचें गोविंद राधे। समय होत बलवान बता दे।।9904।।
एक कह सुना तो था गोविंद राधे। यशुमति के भई छोरी बता दे।।9905।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
🌸🌷🌸🌷🌸🌷🌸
| 2 | राधे राधे, अगली Grand Prize Ceremony का होमवर्क है नारद भक्ति दर्शन series का *9th लेक्चर।*
*14 सितम्बर* को हमारी प्यारी दीदियाँ इस लेक्चर से संबंधित प्रश्न (Quiz Questions) पूछेंगी।
यह प्रवचन Kripalu Nidhi पर English subtitles के साथ FREE उपलब्ध है। कृपया ध्यानपूर्वक सुनें।
https://link.kripalunidhi.org/video/18770 | 62 |
| 3 | 5-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9896 से9900)
बलिहारी ब्रजगोरी गोविंद राधे।
ब्रह्म को भी होरी में छोरी बना दे।।9896।।
ब्रह्म को भी होरी में गोविंद राधे। छोरी बना के ब्रज गोरी नचा दे।।9897।।
होरी देखो ब्रज गोरी गोविंद राधे। नारी रचयिता को नारी नचा दे।।9898।।
लाल को बना के लाली गोविंद राधे।
कुंज में नचा के आली लाल खिझा दे।।9899 ।।
कारी कारी प्यारी प्यारी गोविंद राधे। लखि पूछें प्यारी काकी प्यारी बता दे।।9900।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
🫶🥰🫶🥰🫶🥰🫶 | 61 |
| 4 | 🥳*अजन्मा जनमेउ ब्रज महँ आय*✨
✨*यशोदा माँ बाबा नँदराय।*🎊 | 60 |
| 5 | 4-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9891 से9895)
होरी की ठिठोरी लखु गोविंद राधे।
परम पुरुष को भी छोरी बना दे।।9891।।
ब्रह्म को बना के छोरी गोविंद राधे। कुंज में नचा के गोरी होरी मना दे।।9892।।
ब्रह्म था नपुंसक गोविंद राधे।
ब्रज गोरी होरी में छोरी बना दे।।9893।।
दर्पण छवि लखि गोविंद राधे । श्याम वर माँगें विधि नारी बना दे।।9894।।
ब्रह्मा तो बना ना पाया गोविंद राधे। ब्रज गोरी होरी में छोरी बना दे।।9895।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
💖🩷💖💙💖💚💖 | 72 |
| 6 | ✨ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी LIVE ✨🌺
🥳Only 1 day to go!
*4 SEP | 8 PM – 1 AM*
*Live Link:* https://www.youtube.com/live/yrHwQbryx-g | 83 |
| 7 | देखो संसार में कोई किसी से प्यार करता है तो क्या करता है ? चिन्तन। हाँ! वो लड़का कितना अच्छा है, वो लड़की कितनी अच्छी है, वो हमको मिल जाय। उसका ध्यान कर रहा है चिन्तन, कीर्तन-भजन, मनन, रात-रात भर जागता है। ऐसे ही तो भक्त करता है भगवान् के लिये। कोई अन्तर नहीं। लेकिन फल में अन्तर इसलिये है कि हम जिससे प्यार कर रहे हैं उसके पास जो कुछ भी होगा, वो हमको मिल जायेगा। बस सीधी सी बात। हमने एक लड़के से ब्याह किया उसकी लॉटरी खुल गई, करोड़पति हो गया तो हम करोड़पति की बीबी हो जायेंगे। एक दूसरी लड़की ने ब्याह किया एक उसी के बराबर पढ़े लिखे से, लेकिन वो शराबी हो गया, भिखमंगा हो गया तो वो भिखारिन हो जायगी। इसी प्रकार हम प्यार तो करेंगे ही कहीं न कहीं। कोई बच नहीं सकता, कुत्ता बिल्ली भी, मनुष्य की कौन कहे। कहीं न कहीं प्यार करना पड़ेगा आज नहीं कल। और वो जहाँ प्यार करेगा, मरने के बाद उसी की प्राप्ति होगी। ब्रह्मज्ञानी जड़भरत, हिरन के बच्चे से उन्होंने प्यार कर लिया, उसको पाला-पोसा, पास में सुलावें, हाथ से खिलायें, गोद में ले के चिपटावें, चूमें। तो मरने के बाद हिरन बनना पड़ा उनको। जहाँ भी प्यार होगा, जिससे भी होगा उसमें जो शक्ति होगी वही तुमको मिल जायेगी। तुमने अपने बाप से बहुत प्यार किया, बहुत अटैचमेन्ट, एक हो गये। अब मरने के बाद पाप किया हुआ बाप नरक में गया या गधा बना संसार में, तो तुमको उसका बेटा बनना पड़ेगा। जिससे प्यार करोगे मरने के बाद उसी की प्राप्ति होगी। ये फिलॉसफी है।
*यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः ।*
*भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ॥* (गीता ९-२५)
*प्रवचनांश- जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज* | 80 |
| 8 | *"भगवान् और महापुरुष से प्यार करना, बस इसी का नाम प्रेम और संसार से प्यार करना इसका नाम आसक्ति।"*
*"तुमने अपने बाप से बहुत प्यार किया, बहुत अटैचमेन्ट, एक हो गये। अब मरने के बाद पाप किया हुआ बाप नरक में गया या गधा बना संसार में, तो तुमको उसका बेटा बनना पड़ेगा। जिससे प्यार करोगे मरने के बाद उसी की प्राप्ति होगी। ये फिलॉसफी है।"*
____
संसार में हमारी बुद्धि आनन्द मानती है कि वहाँ आनन्द है। बड़ी सीधी-सी बात समझो। हम जो आनन्द चाहते हैं, वह संसार में है।
हमको नहीं मिला, लेकिन है। हमारा बाप खराब है, हमारी माँ खराब है, हमारा बेटा खराब है, हमारा पति खराब है, लेकिन संसार में सुख है; ये बुद्धि में भ्रम भरा हुआ है। इसलिये मन संसार की ओर भाग रहा है जब से पैदा हुआ। मरते-मरते तक। तो उसके मन का अटैचमेन्ट संसार में ही रहा और उसका फल दुःख, अशान्ति, चौरासी लाख योनियों में भटकना, नरक भोगना, स्वर्ग भोगना ये सब जितने दुःख हैं ये सब भोग रहा है। उसको कहते हैं आसक्ति। मन का संसार के विषयों में अटैचमेन्ट होना। वो जड़ हो चाहे चेतन हो।
दो तरह का संसार है। एक तो चेतन है-माँ, बाप, बेटा, स्त्री, पति। इनमें कहीं भी मन का अटैचमेन्टहो वो भी आसक्ति है और खाने-पीने का सामान ये मैटीरियल जगत् का जो और पदार्थ है इसमें आसक्ति हो गई तो भी आसक्ति है। यानी माया के अण्डर में रहने वाले किसी में भी मन आसक्त हुआ तो उसको आसक्ति कहते हैं और उसका परिणाम चौरासी लाख योनियों में भटकना, दुःख भोगना, कर्म बन्धन। अब दूसरा एरिया बचा भगवान् और महापुरुष का। ये दोनों शुद्ध हैं। भगवान् और भगवान् को प्राप्त कर लेने वाला सन्त महापुरुष। अगर इनमें मन का अटैचमेन्ट होता है, किसी ने कर लिया, तो उसको प्रेम कहते हैं। लेकिन उस शुद्ध प्रेम को हम संसार में यूज करते हैं। हमारा मम्मी से बहुत प्रेम है, हमारा डैडी से बहुत प्रेम है, हमारा बीबी से बहुत प्रेम है। सब जगह प्रेम शब्द का प्रयोग कर देते हैं। आइ लव यू का क्या मतलब है ? हम तुमसे प्रेम करते हैं। प्रेम की परिभाषा तो जानते हो कि करोगे ही? क्या बलाय है प्रेम? ये लव क्या है ? 'लव इज गॉड' ये तो भगवान् का स्वरूप है। वो तुमको कहाँ, कब मिल गया, किससे मिल गया ? तुम्हारा तो अटैचमेन्ट गलत जगह में है। एक जहर पी रहा है उसमें अटैचमेन्ट है, एक अमृत पी रहा है उसमें अटैचमेन्ट है। वो जो अमृत पी रहा है उसको प्रेम कहते हैं, उसको अमृतत्व मिलेगा और जो जहर पी रहा है वो आसक्ति है, वो संसार में घूमा करेगा, सम्बन्ध युक्त होकर दुःख भोगा करेगा। अरे ! ये मनुष्य शरीर में ही इतना दुःख पा रहे हैं आप लोग, ये मनुष्य शरीर तो देव दुर्लभ है। तब इतना दुःख है। कुत्ते, बिल्ली, गधे बनेंगे तो क्या हाल होगा ? एक पेट भरने के लिये सारा दिन कुत्ता घूमता है चारों ओर, बन्दर घूमता है चारों ओर, पक्षी घूमते हैं सारी दुनियाँ में, पेट भर जाय। कितना दुःख मिलता होगा उनको, सोचो। हमारे देश में तो नाइन्टी परसेन्ट लोग अपना पका पकाया खाना बढ़िया ठाट से खाते हैं, घर में रहते हैं। इस पर भी इतना दुःख है। और जिनके कुछ नहीं- न रहने का घर है, न सर्दी-गरमी-बरसात से बचने का कोई उपाय है, न पेट भर खाने का, कल का क्या आज का भी प्रबन्ध नहीं है। और योनि वाले कितना दुःख भोग रहे हैं। फिर भी उनको हम पकड़ करके अपने सुख के लिये यूज करते हैं। ये घोड़ा है, ये बैल है, ये गाय है, ये भैंस है, जितने भी हैं सबको मनुष्य अपना गुलाम बना करके अपना स्वार्थ सिद्ध करता है। डण्डे मारता है उनको। इन योनियों में भी तो हजार बार, लाख बार, आप लोग गये हैं। अगर भगवान् की भक्ति न करेंगे तो फिर जाना होगा। तो वो दुःख कितना होगा।
तो भगवान् और महापुरुष से प्यार करना, बस इसी का नाम प्रेम और संसार से प्यार करना इसका नाम आसक्ति। प्यार करने के तरीके में कोई अन्तर नहीं है। जैसे लैला मजनूँ प्यार करते हैं, ऐसे ही मीरा और श्रीकृष्ण, गोपी और श्रीकृष्ण प्यार करते हैं। अरे! वही इन्द्रियाँ हैं उनके भी, जो हमारे पास हैं। और कहाँ से एक्स्ट्रा इन्द्रियाँ लायेंगे वो। लेकिन जैसे एक ने कप में लेकर दूध पिया, एक ने कप में ले के शराब पिया, एक ने कप में ले के जहर पी लिया; तो पीने के तरीके में कोई अन्तर नहीं है। लेकिन एक ने दूध पिया तो ताकत आई, एक ने शराब पिया बुद्धि खो बैठा, एक ने जहर पिया शरीर नष्ट हो गया। ऐसे ही यह हमारा मन है। हमने अपना तन, मन, प्राण संसार को दिया तो संसार का फल भोगो। भगवान् को, सन्त को दिया तो उनकी प्रापर्टी ले लो। माया से परे हो जाओ, दिव्य आनन्द प्राप्त करो, दिव्य ज्ञान प्राप्त करो। समर्पण का स्वरूप एक है। | 68 |
| 9 | Sin texto... | 62 |
| 10 | *रूपध्यान कीजिए! 🙏🏻*
श्यामसुंदर कुछ मक्खन तो हाथ में लिये हुए हैं, कुछ मुख में लिये हैं, कुछ शरीर में लपेटे हैं एवं कुछ मक्खन बलराम के मुख में देते हुए सुशोभित हो रहे हैं। | 62 |
| 11 | 3-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9886 से9890)
नाचि नाचि थकि गई गोविंद राधे। अब सब सखि मिलि चरण दबा दे।।9886।।
सब सखि लाल को गोविंद राधे। लाल गुलाल ते लाल बना दे।।9887।।
सब सखि लाल को गोविंद राधे। पिचकारिन रँग माहिं डुबा दे।।9888।।
पुनि कह लाली अब गोविंद राधे। याको निज पति ढिग द्रुत पहुँचा दे।।9889।।
सब कह होरी है गोविंद राधे।
होरी है होरी है लाल खिझा दे।।9890।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
🎊💚🎊❤️🎊💙🎊 | 73 |
| 12 | 🌸*ऐसे हैं हमारे श्री महाराज जी*🌸 | 78 |
| 13 | रूपध्यान कीजिए! 🙏🏻
नन्द के आनन्द गोविंद राधे।
प्रकटे आनन्दकन्द बता दे॥
पुत्र जन्म सुनि नन्द गोविंद राधे।
रोम रोम आनन्दमग्न बता दे॥ | 97 |
| 14 | Calendar September 2026
कैलेंडर सितम्बर 2026 | 97 |
| 15 | 2-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9881 से9885)
पुनि कह सखि याय गोविंद राधे। लै चलु स्वामिनि जू को दिखा दे।।9881।।
लाली लखि कह आली गोविंद राधे।
यह काकी है नारि बता दे।।9882।।
बड़ भागी जाकी गोविंद राधे।
ऐसी सुन्दर नारि बता दे।।9883।।
लाली कह यह आली गोविंद राधे।
नाचना जानती होगी बता दे।।9884।।
सब सखि वाद्य वृंद गोविंद राधे।
लै आओ याको नाच दिखा दे।।9885।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
🥁💃🪘💃🥁💃🪘 | 86 |
| 16 | साप्ताहिक फोन पर संदेश
8882480000 पर कॉल करें और 3 दबाकर सुनें जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की दिव्य वाणी में इस सप्ताह का फ़ोन पर संदेश। | 54 |
| 17 | आज का अनमोल रत्न:
कृष्ण के माता पिता गोविंद राधे।
नाम लीला वस्तु कृष्ण रूप हैं बता दे॥
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
Shri Krishn’s parents, name, leelas, and possessions are all forms of Shri Krishn Himself. | 52 |
| 18 | राधे राधे 🙏
आगामी (1–4 सितम्बर) जन्माष्टमी साधना शिविर में आपका हार्दिक स्वागत है। गुरु-निर्दिष्ट साधना के माध्यम से भक्ति में प्रगति करने का यह एक अत्यंत शुभ अवसर है।
यदि आपने अभी तक पधारने का विचार नहीं किया है, तो कृपया इस शुभ अवसर का लाभ अवश्य लें।
पंजीकरण के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें
https://registration.jkp.org.in/
यदि आप पहली बार पधार रहे हैं, तो कृपया 8882480000 पर कॉल करके हमारे एडवाइज़र से संपर्क करें। वे आपकी यात्रा एवं शिविर से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे। | 51 |
| 19 | *श्यामसुन्दर का दासत्व* भक्ति चैलेंज 8️⃣7️⃣ (1 - 13 सितम्बर) में ऐसे भाग लें:
🦚 पदों को याद करें, वीडियो _+917704075255_ पर WhatsApp करें।
🦚 अपना सत्संगी / आश्रमवासी आई. डी. लिखकर मैसेज करें।
🦚 दो या अधिक मित्रों को चैलेंज करें, उन्हें अपना वीडियो भेजें।
🦚 तुरंत उत्तर न आये तो वैकल्पिक नंबर _+919559064008_ पर वीडियो भेजें।
*होमवर्क: नारद भक्ति दर्शन, प्रवचन 9*
रोज़ 6 Lucky Winners जीतेंगे Prizes
14 सितम्बर को होगा Grand Prize 🎁 | 74 |
| 20 | 1-9-26
🌺 📖_राधा गोविंद गीत📖🌺
(9876 से9880)
कोउ कर अँगुरिन गोविंद राधे।
रतन खचित मुँदरिन पहिरा दे।।9876।।
कोउ सखि दोउ कर गोविंद राधे। मेहँदी बूटेदार रचा दे।।9877।।
कोउ सखि दोउ पद गोविंद राधे।
कनकन नूपुर भल पहिरा दे।।9878।।
कोउ पद अँगुरिन गोविंद राधे। कनकन बिछुवन भी पहिरा दे।।9879।।
कोउ सखि दोउ पद गोविंद राधे। लाल मिहावरि सुघर लगा दे।।9880।।
~🌹जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
❣️🦶❣️🦶❣️🦶❣️ | 89 |
