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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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#पुरुष नही चाहता कि उनसे जुड़ी हुई स्त्री उनसे आगे रहे या उनसे पीछे, वो चाहता है की वो उनके साथ चले, जब भी गिरे उन्हें संभाल ले, जब वो टूटे उन्हें समेट ले,जब वो हार कर थक जाये तो उनमे नया उत्साह भरे, इस जीवन रूपी संघर्ष मे वो हर पल बस उनका साथ और प्रेम चाहता है.....
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पुरषों की #कामोत्तेजना बढ़ाकर उन्हें छोड़ जाया करती हैं, कुछ स्त्रियां अधिकतम की तलाश पर.....
प्रेम के बहाने से....
कौन कहता हैं कि स्त्रियां बलात्कर नही करती ?❤️💋💋💋
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#प्रेम दो स्वतंत्र व्यक्तियों के बीच का बहाव है-------
जिसे तुमने चाहा वह तुम्हें मिल गया।
लेकिन मिलने के बाद तुमने उस पर बहुत अपने को आरोपित किया।
तुमने उसे अपनी संपत्ति बनाना चाहा,
तुमने उसके सब तरफ पहरे बिठा दिए।
तुमने कहा, बस मुझ से प्रेम और किसी से भी नहीं,
मेरे साथ हंसना और किसी और के साथ नहीं,
और तुम बड़े भयभीत हो गए....
तुम सुरक्षा करने लगे, और
तुम सदा चिंता करने लगे और
तुम जासूसी करने लगे —और
अगर तुमने अपनी पत्नी को या अपने पति को किसी के साथ हंसते और मुस्कुराते देख लिया तो तुम्हारे भीतर आग लग गई;
इससे तुमने कष्ट पाया,
इससे तुम पीड़ित हुए,
लेकिन यह पीड़ित होने का कारण प्रेम नहीं है। दूसरे को संपत्ति मानने में ही पीड़ा है।
कोई इस जगत में किसी की संपत्ति नहीं है,
न कोई इस जगत में किसी की संपत्ति होने को पैदा हुआ है,
न किसी को होना चाहिए, यह अपमान है।
कोई किसी का गुलाम नहीं।
प्रेम दो स्वतंत्र व्यक्तियों के बीच का बहाव है।
जब भी उन में से कोई गुलाम हो जाएगा, एक या दोनों गुलाम हो जाएंगे, तभी बहाव रुक जाता है। और जब बहाव रुक जाता है तब बड़ी पीड़ा है, तब बड़े काटे चुभ जाते है, तब जीवन में घाव हो जाते हैं।
प्रेम से लोग दुख पा रहे हैं, वह प्रेम के कारण नहीं, प्रेम के नाम पर कुछ और चल रहा है, अहंकार चल रहा है। यह अहंकार ही है।
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#स्त्री_और_प्रेम ......
स्त्री में प्रेम की तीव्रता कदापि नही होती (perhaps)जबकि पुरुष सिर्फ़ प्रेम की तीव्रता से ही संचालित होता है।
स्त्री बिना प्रेम के भी पुरुष के साथ असानी से रह जाती है जबकि पुरुष बिना प्रेम के नही रह सकता.. विद्रोही हो जाता है।
पुरुष सहज निर्लिप्त होता है जबकि स्त्री के प्रेम में अनेकों लिप्ततांए होती है। शायद यही वजह है कि पुरुष प्रेम में #प्रणोत्सर्ग तक कर देता है.. मगर स्त्री सामान्यतः नहीं।
कई वर्षों तक प्रेम में बने रहने और फिर ब्रेकअप होने के बाद ये अनुभव हुआ है मुझे की लगता है कि प्रेम मात्र पुरुष का विषय है।
इन्डोर्फिन हार्मोन के अनलिमिटेड सीक्रेशन से मस्तिष्क एक खुमारी व दीवानगी का शिकार हो जाता है एवं चेतन मस्तिष्क की गतिविधियां सीक्रेशन इम्पैक्ट को फोलो करने लगती है। ‘सेंसेस आफ एबसेंस व गेट इट एचीव ‘ का भाव इतना तीव्र हो जाता है कि पुरुष आत्महत्या अथवा हत्या जैसे कदम उठा लेता है।
अधिक संवेदना तो शायद नहीं पर हाँ..अधिक मजबूती के साथ स्त्री तसल्ली से जिंदा रहती है।
तभी वो पति व प्रेम में से किसी एक को चुनना हो तो पति को चुनती है...प्रेम को नहीं..।
ना प्रेम होने के बावजूद भी पति को शारीरिक संसर्ग के लिए आमंत्रण भी देती है व संतानोत्पति भी करती है। वह केवल #तात्कालिक_सुविधा देखती है ,बस ! ....प्रेम को पाने के लिए मरने - मारने तक नहीं जाती क्योंकि प्रेम एक आवेग के साथ बहता है । स्त्री मात्र सुविधाजनक वर्तमान में जीना पसंद करती है ।
स्त्री का प्रेम अंगीठी की आँच सा सीमित होता है जबकि पुरुष का प्रेम दावानल सा होता है .. सबकुछ स्वाहा करने सा ....।
क्या स्त्रियों में यह आवेग संभव है ?
पता नहीं ! शायद नहीं !!
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कोई भी स्त्री
वह पल नहीं भूलती।
जो उसने अपने प्यार के साथ बिताए होते हैं।
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कहने को सभी पुरुष इतरा कर कहते हैं
"इनसे मिलिये, मेरी पत्नी…………!"
……..मगर "पत्नी" नाम की यह विचित्र और अद्भुत जीव ...कितने राज अपने सीने में लिये घूम रही है, इसे ईश्वर भी नहीं जानता!
आइये एक एक कर विश्लेषण करते हैं:—
1—कोई स्त्री पत्नी होने के बाद भी अपने पति के प्रति पूर्ण वफादार है या नहीं,इस राज को उसका पति कभी नहीं जान पाता। हो सकता है पत्नी विवाह से पहले के किसी प्रेमी को अभी भी दिल में रखे हो। कहा जाता है कि स्त्री अपने पहले प्यार को कभी नहीं भूलती ,भले ही वह उससे विवाह के बाद न मिले।
अगर ऐसा है, तो वह कभी भी पति के समक्ष ईमानदारी से समर्पित नहीं होगी। पति को समर्पण के समय भी उसके मन मस्तिष्क में उसका पूर्व प्रेमी ही बसा होगा।अपने पूर्व प्रेमी का नाम वह कभी (सही) नही बतायेगी।
2—इसके अलावा एक स्त्री सम्भोग के समय तृप्त हुई या नहीं, यह भी ऐसा राज है,जिसे (स्त्री गुप्त रखना चाहे तो), पुरुष कभी नहीं जान पाता!
3—स्त्री सैक्स के लिये कितनी भी उतावली हो, पति से कभी भी अपनी इच्छा जाहिर नहीं करेगी। आम धारणा है कि वैश्या तक भी पुरुष से उसका शरीर नहीं मांगती? लज्जा इसका कारण है।
4—यह भी सम्भव है कि पत्नी समलैंगिक (लेस्बियन) हो, तो वह यह राज भी कभी पति को नहीं बतायेगी।
5—विवाह से पहले से चली आ रही किसी (लम्बी चलने वाली) बीमारी को भी स्त्री छुपा सकती है। मशहूर अभिनेता शशिकपूर को उनकी पत्नी जेनेफर ने कैन्सर की बीमारी से पीड़ित होने का राज खुद नहीं बताया था।विवाह के अनेकों वर्षों बाद पत्नी की तबियत ज्यादा खराब होने पर डाक्टरों ने ही शशि को बताया कि बीमारी पुरानी है!
6—विवाह से पहले यदि दुर्भाग्य से स्त्री के साथ कोई बलात्कार हुआ हो, तो इस बारे में वह हमेशा चुप रहेगी।
7—अगर स्त्री को मजबूरी में विवाह से पहले कोई गर्भपात (abortion)कराना पड़ा हो, तो इस बारे में भी वह खामोश रहेगी।
8—यह भी सम्भव है कि अब शादी के इतने बर्ष बाद पत्नी का पति के किसी मित्र, करीबी रिश्तेदार (जैसे ननदोई) या अन्य से कोई प्रेम प्रसंग विकसित हो गया हो, तो वह इस राज को भी छुपा जायेगी। ऐसे हजारों-लाखों राज सिर्फ राज ही बने हुए हैं!
9—कई बार घरेलू नौकर, ड्राईवर या पति के दुकान के कर्मचारी से भी स्त्री के शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं। ये अवैध सम्बन्ध भी स्त्री गुप्त रखती है।
10—गर्भ में पल रहे "राज" को भी सिर्फ एक गर्भवती स्त्री ही जान पाती है, पुरुष नहीं। यह भी सम्भव है कि पति को इस राज के कारक(स्रोत) की भी जानकारी न हो। वह कारक कोई पर -पुरुष भी हो सकता है! यह स्त्रियों का ऐसा सबसे बड़ा राज होता है।
11--अगर किसी ने प्रेम-विवाह किया, और लड़की के परिवार के बारे में पति को कोई जानकारी नहीं है, तो सम्भव यह भी है कि वह लड़की (स्त्री) पहले से शादीशुदा हो, और अपने पूर्व पति को छोड़ चुकी हो।तो, वह स्त्री भी अपने पहली जिन्दगी को गुप्त ही रखेगी,और वर्तमान पति को पिछ्ली जिन्दगी के बारे में भनक भी नहीं लगने देगी।
12—आमतौर पर स्त्री अचानक पैदा हुए इमरजैन्सी(जैसे तलाक) जैसे हालात में आर्थिक रूप से खुद को सुरक्षित बनाने के लिये पति के पैसों से एक छोटी रकम (पति को बिना बताए) संजोती रहती है। इसके लिये वह गुप्त बैंक खाता भी रख सकती है, जिसकी कोई जानकारी वह पति को कभी नहीं देती।
……तो,अब यह भी सोचो स्त्रियों के इतने राज अगर ताउम्र "राज" ही बने रहते हैं, तो इनसे शादी करके पुरुष क्या खाक हासिल कर लेगा ? यानि घर में एक "अनबूझ पहेली" मौजूद है, ये सोच सोच कर ही पति का ब्लड प्रैशर हाई हो जायेगा……………!!🤣😂
इन सब से एक ही बात निकल कर आती है कि शादी करना खुद को उल्लू बनाना है। बेहतर है अकेले रहो, मस्त रहो। सिर्फ दो रोटी बनवाने के लिये किसी अजनबी (हाँ अजनबी) को गले की फाँस बनाना कौन सी अक्लमंदी कही जाएगी?🤣😂
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पुरुष होकर किसी महिला के प्रति आकर्षित होना पुरुष का नैसर्गिक व्यवहार है। उसके बाद उसका काम उस महिला को आकर्षित करना है। जिससे किसी प्रायोजन से दोनो #हमबिस्तर हो पाये तो उस पल का भरपुर आनन्द ले पाये और एक अच्छी याद बने। बलात्कार इस प्रकिया में कहीं नही आता।❤️💋
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स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व ।जब तक स्त्री माँ नही बन जाती तब तक उसकी ऊर्जा पूर्णतः स्तनों तक नही पहुँचती..!
शरीर शास्त्री ये प्रश्न उठाते रहते है। कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है। क्योंकि पुरूष को बच्चे को दूध तो पिलाना नहीं है। फिर उनकी क्या आवश्यकता है। वे ऋणात्मक ध्रुव है। इसलिए तो पुरूष के मन में स्त्री के स्तनों की और इतना आकर्षण है। वे धनात्मक ध्रुव है।
इतने काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैस पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस है। और यह कोई नई बात नहीं है। गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र भी स्तनों के ही है। स्तन उनमें महत्वपूर्ण है। बाकी का सारा शरीर ऐसा मालूम पड़ता है कि जैसे स्तनों के चारों और बनाया गया हो। स्तन आधार भूत है।
क्योंकि स्तन उनके धनात्मक ध्रुव है। और जहां तक योनि का प्रश्न है वह करीब-करीब संवेदन रहित है। स्तन उसके सबसे संवेदनशील अंग है। और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तनों के आस-पास है।
यही कारण है कि हिंदू कहते है कि जबतक स्त्री मां नहीं बन जाती, वह तृप्त नहीं होती। पुरूष के लिए यह बात सत्य नहीं है। कोई नहीं कहेगा कि पुरूष जब तक पिता न बन जाए तृप्त नहीं होगा। पिता होना तो मात्र एक संयोग है। कोई पिता हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। यह कोई बहुत आधारभूत सवाल नहीं है। एक पुरूष बिना पिता बने रह सकता है। और उसका कुछ न खोये।
लेकिन बिना मां बने स्त्री कुछ खो देती है। क्योंकि उसकी पूरी सृजनात्मकता, उसकी पूरी प्रक्रिया तभी जागती है। जब वह मां बन जाती है। जब उसके स्तन उसके अस्तित्व के केंद्र बन जाते है। तब वह पूर्ण होती है। और वह स्तनों तक नहीं पहुंच सकती यदि उसे पुकारने वाला कोई बच्चा न हो।
तो पुरूष स्त्रियों से विवाह करते है ताकि उन्हें पत्नियाँ मिल सके, और स्त्रियां पुरूषों से विवाह करती है ताकि वे मां बन सकें। इसलिए नहीं कि उन्हें पति मिल सके। उनका पूरा का पूरा मौलिक रुझान ही एक बच्चा पाने में है जो उनके स्त्रीत्व को पुकारें।
तो वास्तव में सभी पति भयभीत रहते है, क्योंकि जैसे ही बच्चा पैदा होता है वे स्त्री के आकर्षण की परिधि पर आ जाते है। बच्चा केंद्र हो जाता है। इसलिए पिता हमेशा ईर्ष्या करते है, क्योंकि बच्चा बीच में आ जाता है। और स्त्री अब बच्चे के पिता की उपेक्षा बच्चे में अधिक उत्सुक हो जाती है। पुरूष गौण हो जाता है। जीने के लिए उपयोगी, परंतु अनावश्यक। अब मूलभूत आवश्यकता पूर्ण हो गई।
पश्चिम में बच्चों को सीधे स्तन से दूध न पिलाने का फैशन हो गया है। यह बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसका अर्थ यह हुआ कि स्त्री कभी अपनी सृजनात्मकता के केंद्र पर नहीं पहुंच सकेगी। जब एक पुरूष किसी स्त्री से प्रेम करता है तो वह उसके स्तनों को प्रेम कर सकता है। लेकिन उन्हें मां नहीं कह सकता।
केवल एक छोटा बच्चा ही उन्हें मां कह सकता है। या फिर प्रेम इतना गहन हो कि पति भी बच्चे की तरह हो जाए। तो यह संभव हो सकता है। तब स्त्री पूरी तरह भूल जाती है कि वह केवल एक संगिनी है, वह अपनी प्रेमी की मां बन जाती है। तब बच्चे की आवश्यकता नहीं रह जाती, तब वह मां बन सकती है। और स्तनों के निकट उसके अस्तित्व का केंद्र सक्रिय हो सकता है।
स्त्रैण अस्तित्व की पूरी सृजनात्मकता मातृत्व पर ही आधारित है। इसीलिए तो स्त्रियां अन्य किसी तरह के सृजन में इतनी उत्सुक नहीं होती। पुरूष सर्जक है। स्त्रियां सर्जक नहीं है। न उनके चित्र बनाए है। न महान काव्य रचे है। न कोई बड़ा ग्रंथ लिखा है। न कोई बड़े धर्म बनाए है। वास्तव में उसने कुछ नहीं किया हे। लेकिन पुरूष सृजन किए चला जाता है। वह पागल है। वह आविष्कार कर रहा है, सृजन कर रहा है। भवन निर्माण कर रहा है।
तंत्र कहता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि पुरूष नैसर्गिक रूप से सर्जक नहीं है। इसलिए वह अतृप्त और तनाव में रहता है। वह मां बनना चाहता है। वह सर्जक बनना चाहता है। तो वह काव्य का सृजन करता है। वह कई चीजों का सृजन करता है। एक तरह से सृजन उसकी मां हो जाये। लेकिन स्त्री तनाव रहित होती है। यदि वह मां बन सके तो तृप्त हो जाती है। फिर किसी और चीज में उत्सुक नहीं रहती।
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कामना में डूबी स्त्री की
आँखें लाल ❤️
और होंठ नीले होते हैं
जब तुम इन नीले होंठों को चूमते हो
तो नाभि के पास खिंच जाती हैं दो लकीरें
एक होती है लज्जा
और एक अधैर्य की
वो चाहती है कि आप उसे अपने बाहो मे शमा जाने दे
बाहो मे लेने के बाद आप उसे ये एहसास दिलाये की आप भी कितने अधूरे है उनके बिना एक स्त्री यही चाहती है
उसके अकेलेपन को दूर करें
उसके अंदर कि तड़प को महसूस करें
वो क्या चाहती है आपसे उसे सुनो
फिर उसके चलते हुए साँसो को महसूस करो उसके दिल कि धड़कन को अपने स्पर्श करो
तुम्हारे स्पर्श से उपजी कंपकपाहट
और श्वास की सित्कार से
स्त्री एक स्वप्न को जन्म देती है
उस स्वप्न में वो तुम्हारा हाथ पकड़
पानी पर चल रही है नंगे पाँव
सुनो पुरुष
नदी पार करने के बाद
स्त्री के पैरों को भी चूम लेना
ये पैर तुम्हारे पास
सदियों की दूरी नापकर आये हैं....।।
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स्त्री सम्पूर्ण उसे ही मिलती है,
जिससे वो प्रेम करती है.....!
क्या कभी मेरे हिस्से में आएगा ?? 😞
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हार्वर्ड युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने शोध में पाया कि गाजर में पाने जाने वाला तत्व पुरुषों की प्रजन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। शोध के मुताबिक गाजर में केरोटीन नामक रसायन पाया जाता है जो शुक्राणुओं की संख्या को न सिर्फ बढ़ाता है बल्कि उनकी गुणवत्ता भी सुधारता है। इस शोध में यह भी कहा गया कि सभी नारंगी और पीले रंग की सब्जियों में यह गुण होता है।
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पुरषों लड़को का ❤ शादीशुदा औरतें के झुमको बिंदी काजल चूड़ी साड़ी और तो और sin दूर मंगलसूत्र पे भी आ जाता है
but अफ़सोस.....
#घरवाला नहीं मानेगा
और
घरवाले भी नहीं मानेगे 😊
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यदि पुरुष स्त्री को अपनी
बाहों में लेना चाहता है तो
उसका तात्पर्य केवल वासना
मात्र ही नहीं हो सकता है
कई दफा इसका अर्थ होता है
वह स्त्री को उसकी आत्मा तक
स्पर्श करना चाहता है
उस स्त्री के मन को टटोलना चाहता है
जो अथाह प्रेम को अपने
मन में कहीं दबा लेती है
वह अपने सीने से लगाकर
स्त्री की आंखों के आँसुओ को
प्रेम से सोख लेना चाहता है
उस स्त्री के सूखे वीरान पड़े जीवन को
प्रेम की बारिशों में
भिगो देना चाहता है
यह वासना नही है
उस पुरुष का अथाह समर्पण है
उस स्त्री के लिए
जिसे वह हृदय से प्रेम करता है.
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