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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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" #बाँझ "
नारी
बेचारी... !
पैदा करे तो दोष
ना करे तो लाँछन...
कलमुँही, बाँझ है.. !
बाँझ तो वसुधा भी होती...
वह भी तो नारी है...
पैदा न करे तो
ताड़न की अधिकारी है... !
पर अम्बर ?
नहीं नहीं अम्बर नहीं...
वह तो नर है...
औऱ नर...
वह तो कलङ्क-हीन है...
अनन्त काल से कभी
गर्भ न धारण कर सका...
वह तो महा-बाँझ हुआ ना ?
नहीं कदापि नहीं...
सृष्टि में ऐसा क़ोई नियम नहीं...
🌺🙏🏿🌺
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बहुत घुटी-घुटी रहती हो
बस खुलती नहीं हो तुम !
खुलने के लिए जानते हो
बहुत से साल पीछे जाना होगा
औऱ फ़िर वहीं से चलना होगा
जहाँ से काँधे पर बस्ता उठा कर
स्कूल जाना शुरू किया था
इस ज़ेहन को बदल कर
क़ोई नया ज़ेहन लगवाना होगा...
'दीप्ति नवल' के हस्ताक्षर...✍🏼
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🔴दो व्यक्ति एक—दूसरे के प्रेम में पड़ जाते हैं। तो कोई भी पुरुष किसी स्त्री के प्रेम में पड़ता है, तो कहता है कि तुझसे ज्यादा सुंदर इस पृथ्वी पर कोई स्त्री नहीं है। और सभी स्त्रियां इसको मान लेती हैं। मानना चाहती हैं गहरे में। और इसको सुनते से ही स्त्री सुंदर हो जाती है। भरोसा आ जाता है! और जब कोई इतना सुंदर मान रहा हो, तो वह भी सुंदर दिखाई पड़ने लगता है। और तब हम कहते हैं कि तुझसे सुंदर पुरुष, तुझसे श्रेष्ठ पुरुष, खोजना असंभव है। और तब म्युचुअल कल्पना की दौड़ शुरू होती है। और तब वे दोनों एक— दूसरे को शिखर पर उठाए चले जाते हैं। और यह शिखर जितना ऊंचा होगा, उतनी ही खाई में कल गिरेंगे। क्योंकि यह शिखर कल्पना का है।
इसलिए ध्यान रखें, प्रेम—विवाह जिस खतरे में ले जाता है, कोई विवाह नहीं ले जा सकता। और प्रेम—विवाह जिस बुरी तरह असफल होता है, कोई विवाह असफल नहीं हो सकता। उसका कारण यह नहीं है कि प्रेम—विवाह बुरा है; उसका कुल कारण इतना है कि प्रेम—विवाह एक म्युचुअल कल्पना पर निर्मित होता है।
भारत में विवाह एक सफल संस्था है, क्योंकि हमने प्रेम को बिलकुल ही काट दिया है उसमें से। कल्पना का सवाल ही नहीं, जमीन पर ही चलाते हैं आदमी को। यहां पति—पत्नी होते हैं, प्रेमी— प्रेयसी होते ही नहीं। कभी आकाश में चढ़ते ही नहीं, तो गड्डे में गिरने का सवाल ही नहीं आता। समतल भूमि पर चलते रहते हैं।
अमेरिका में बुरी तरह विवाह अस्तव्यस्त हुआ जा रहा है। और उसका कारण है कि विवाह की बुनियाद दो आदमी एक—दूसरे को
नशे में डालकर रखते हैं। वह नशा कितनी देर चलेगा? कितनी देर चल सकता है? वह नशा जल्दी ही उतर जाता है। और इतने बड़े सपनों के बाद जब जमीन पर लौटते हैं, तो लगता है कि बेकार हो गया, धोखा हो गया। गलती हो गई, भूल हो गई। वे सब कविताएं धुआ हो जाती हैं।
हम सब ऐसे ही जीते हैं लेकिन, इसलिए हमें खुशामद प्रीतिकर लगती है। क्योंकि कोई हमें भरोसा दिलाता है। बिलकुल झूठ भी कोई आपसे कह दे, कोई आपसे कह दे कि आप जैसा बुद्धिमान आदमी नहीं है। आपके भीतर कोई आपसे कहे भी कि झंझट में मत पड़ो, यह झूठ ही मालूम पड़ता है; क्योंकि आपको अपनी बुद्धि का अच्छी तरह पता है! फिर भी इनकार करने का मन नहीं होता, मानने का मन होता है। और दस आदमी अगर इकट्ठे होकर कहने लगें, तो फिर तो इनकार करने का सवाल ही नहीं। हजार दो हजार की भीड़ इकट्ठी हो जाए, फिर तो कोई सवाल ही नहीं। और आपको आसमान में उठाया जा सकता है।♣️
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प्रेम एक आस है,
प्रेम ही तो प्यास है,
अनन्त पर भले दिखे,
प्रेम दिल के पास है,
प्रेम मीठी भूल है,
प्रेम चुभता शूल है,
जो टूटे से न टूटता,
प्रेम वह विश्वाश है,
प्रेम ही तो दर्द है,
प्रेम ही हमदर्द है,
तपते दिल की है रुह,
प्रेम ही सर्द रात है,
प्रेम है शाश्वत सरल,
ये ही सुधा ये ही गरल,
निःस्वास वेदना का ये,
यही तो आस की एक साँस है,,,,,
में और मेरी रती ❤️💋
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अपने अधरों से मुझे पिला दो तो क़ोई बात बने ।
ज़ुल्फ़ों के साये में मुझे सुला दो तो क़ोई बात बने ll
ख़्यालों में खोये रहते हैं सदा यह आपको क्या पता ।
अचानक आ जाओ मेरे सामने तो क़ोई बात बने ll
तेरी यादें सोने कहाँ देतीं सारी रात मुझे ।
आँख लगते ख़्वाबों में आ जाओ तो क़ोई बात बने ll
गुमसुम कर देता है मुझे तेरे न आने का यह ग़म ।
आ कर मुस्कुराहट दिला जाओ तो क़ोई बात बने ll
ऐ हवाओं उनसे मिल कर आती हो मेरे पास तुम ।
उनकी ख़ुशबू भी साथ ले आओ तो क़ोई बात बने ll
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शरीर से प्रेम है तो
आसन करें
साँस से प्रेम है तो
प्राणायाम करें
आत्मा से प्रेम है तो
ध्यान करें
परमात्मा से प्रेम है तो
समर्पण करें...
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प्रेम हो जाता है। प्रेम न किसी आज्ञा को मानता है और न किसी अनुमति को, न किसी विधि को, न किसी विधान को। शिष्यत्व क्या है? प्रेम का ऊंचा से ऊंचा, गहरा से गहरा नाम है। तुम मुझे प्रेम करना चाहते हो, तो मैं कैसे रोक सकता हूं? तुम अगर मेरे प्रेम में आंसू गिराओ, तो मैं कैसे रोक सकता हूं? और तुम अगर, जिसे मैं ध्यान कहता हूं, उस ध्यान में डुबकियां लगाओ तो मैं कैसे रोक सकता हूं?
अब तो इतना ही समझाऊंगा कि ध्यान क्या है। अगर उसे ही तुम्हारे भीतर प्यास पैदा हो जाए, तो कर लेना ध्यान। अब आज्ञा न दूंगा कि प्रेम करो। अब तो सिर्फ प्रेम की व्याख्या कर लूंगा, और सब तुम पर छोड़ दूंगा। अगर प्रेम की अनूठी, रहस्यमय बात को सुनकर भी तुम्हारे हृदय की धड़कनों में कोई गीत नहीं उठता, तो आदेश देने से भी कुछ न होगा। और अगर गीत उठता है, तो यह कोई लेने-देने की बात नहीं है।
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स्त्री वो नहीं जो हजारों मर्दों, को दीवाना बना दे....
स्त्री वो है जो एक ही मर्द को
हजार बार दीवाना कर दे...!!❤
ऊफ्फ्फ्फ
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स्त्रीणां द्विगुण आहारो लज्जा चापि चतुर्गुणा । साहसं षड्गुणं चैव कामश्चाष्टगुणः स्मृतः ॥
अर्थात स्त्री को भूख पुरूष से 2 गुना ज्यादा लगती है,एवं शर्म पुरुषों से 4 गुना ज्यादा आती आंहि।स्त्री में साहस पुरुष से 6 गुना ज्यादा होता है एवं काम(सेक्स) भावना स्त्री में पुरुष से 8 गुना ज्यादा होती है।
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विवाहित स्त्री से प्रेम होना
गलत या सही पता नहीं...
पर याद राखिए ना टूटे उसके
विश्वास की डोर,
ना बिखरे उसके घर के मोती,
समझिए उसकी भावनाओं को और
ध्यान रखें उसकी उदासियों का,
उसका प्रेम देह के लिए नहीं
वो चाहती है कुछ वक्त अपने लिए,
कुछ शब्द अपने लिए
कुछ मीठी तरंग अपने लिए,
कुछ अनछुए पल अपने लिए,
जो न कह पाई किसी से
हो कोई उसे सुनने वाला
कोई दर्द बांटने वाला....
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!! चूमना सेहत के लिए फ़ायदेमन्द !!
किस करने से महज़ 10 सेकण्ड में
80 मिलियन अच्छे बैक्टेरिया ट्रान्सफर होते हैं ।
ये बैक्टेरिया शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमन्द होते हैं,
जिनसे इम्मयून सिस्टम अच्छा रहता है ।
किस के दौरान शरीर में
एड्रेनालाईन नामक हार्मोन बनता है
जो दिल के लिए फ़ायदेमन्द है ।
यह पूरे शरीर में रक्त सञ्चार के लिए
पम्प होने में दिल की मदद करता है ।
इससे ब्लड प्रेशर कम करने और
शरीर में रक्त सञ्चार ठीक रखने में मदद मिलती है ।
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अगर 2 -4 शॉर्ट में #वीर्यपात हो जाता है तो निम्न बातों का ध्यान रखे :-
1. फॉरप्ले देर तक करिये ,जब तक योनि पूर्ण गीली न हो जाय , स्त्री की आंखें बंद,ओठ फड़कने लगे, तेज गहरी सांस लेने लगे, शरीर बिल्कुल ढीली कर दे ,कमरे में सिर्फ स्त्री के सिसकिया सुनाई दे ,तब अपने शेर को गुफा में प्रवेश करिये ।।
2. फॉरप्ले करते समय योनि के भग को जीभ से चाटिए ।। खुरदरा गर्म जीभ जब योनि को टच करता है तो यिनी जल्दी गीली और स्त्री सन्तुष्ट होती हैं ।
3. जब आपका शेर गुफा में बाहर भीतर हो रहा हो तो उस समय ध्यान सम्भोग से हटाएं और धीरे धीरे बाहर भीतर करें तेजी से नही ।
4. जब लगे कि आपका वीर्यपात होने वाला है तो रूक जाएं और सांस गहरी लें मुहँ के द्वारा ।
5. उपरोक्त क्रिये करिये हो सकता है प्रियतमा सन्तुष्ट हो जाएं ।।
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सन्त अगस्तीन से किसी ने पूछा कि
मुझे एक शब्द में सारा शास्त्र समझा दें,
ताकि मैं सदा याद रख सकूँ ।
तो अगस्तीन ने बहुत सोचा और कहा
कि फिर अगर ऐसा ही कोई शब्द चाहते हो,
तो
" प्रेम "
इस एक शब्द को याद रखना ।
इसके विपरीत मत जाना ।
और सदा इसके अनुकूल व्यवहार करना ;
शेष सब अपने से सुधर जायेगा ।
तुम जरा सोचो ।
तुम्हारे जीवन में प्रेम आ जाये,
मन्दिर न भी गये तो हम मन्दिर पहुँच जायेंगे ।
हमारे जीवन में प्रेम आ जाये और
हमने शास्त्र न भी पढ़े तो हम शास्त्र पढ़ लेंगे ।
ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पण्डित होय !
प्रेम सम्हल जाये
तो कुछ बड़ी दार्शनिक चर्चाओं में
पड़ने की जरूरत नहीं है ।
प्रेम अस्तित्वगत धर्म है ।
"एक्ज़ीसटेंशियल" !
बाकी सब बकवास है ।
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जब कयामत बरसाती हुई हुस्न की अदाएं सामने हो तो लिंग में तनाव मन मे मदहोशी पैदा होना लाजमी है । जब आग और लकड़ी साथ हो तो आग का भड़कना और लकड़ी को स्वाहा होने की चेष्टा बढ़ती ही है।
आलिंगन , चुम्बन से शुरू हुई प्रेम लीला सम्भोग पर आकर रुक जाता है क्योंकि कंडोम नही तब या तो हस्तमैथुन या ओरल सेक्स जिससे पुरुष तो सन्तुष्ट हो जाते हैं पर प्रियतमा की जिस्म की आग और भड़कती है जब वो अपनी गर्म जीभ से लिंग को स्पर्श कर अपनी ओठों में कसकर चुस्ती है प्रेमी स्तन का मर्दन करता है तो योनि रूपी गंगोत्री से गंगा की प्रवाह शुरू हो जाता है ।
और तब तक पुरुष का स्खलन और स्त्री तड़पती रहती है। ohhhhhhh issssssssss
ऐसी स्थिति में स्त्री मानसिक तनाव में आ सकती है तो करिये सम्भोग इस तरह ।
1. ओमन ऑन टॉप :- इसमे पुरुष लेट जाएं फोरप्ले करके और स्त्री पुरुष की भूमिका निभाये लिंग को अपनी योनि में ले और ऊपर नीचे होए जिससे वीर्यपात होने के बाद वीर्य गर्भाशय में नही जाएगा और सुरक्षित सम्भोग होगा ।
2 . स्टैंडिंग पोजिशन :- किसी दीवार के सहारे स्त्री का 1 टांग उठाकर खड़े खड़े सेक्स करने से वीर्य गर्भाशय में नही जाएगा।
3. किसी भी पोजिशन में सेक्स करने के बाद वीर्यपात होते ही स्त्री उठकर बैठ जाय जिस तरह वो पेशाब करती है इससे पूरा वीर्य बाहर हो जाएगा साथ ही पेशाब करे और सही से योनि को धो ले ।
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संत अगस्तीन से
किसी ने पूछा कि मुझे
एक शब्द में सारा शास्त्र समझा दें,
ताकि मैं सदा याद रख सकूं।
तो अगस्तीन ने बहुत सोचा और कहा
कि फिर अगर ऐसा ही कोई शब्द चाहते हो,
तो
" प्रेम "
इस एक शब्द को याद रखना।
इसके विपरीत मत जाना।
और सदा इसके अनुकूल व्यवहार करना;
शेष सब अपने से सुधर जायेगा।
तुम जरा सोचो।
तुम्हारे जीवन में प्रेम आ जाये,
मंदिर न भी गये तो तुम मंदिर पहुंच जाओगे।
तुम्हारे जीवन में प्रेम आ जाये
और तुमने शास्त्र न भी पढ़े तो तुम शास्त्र पढ़ लोगे।
ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय!
प्रेम सम्हल जाये
तो कुछ बड़ी दार्शनिक चर्चाओं में
पड़ने की जरूरत नहीं है।
प्रेम अस्तित्वगत धर्म है। "एक्ज़ीसटेंशियल'!
बाकी सब बकवास है।
💞ओशो💞
आचार्य श्री रजनीश
जिनसूत्र--(भाग--1) प्रवचन--20
पलकन पग पोंछूं आज पिया के
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यौन का कड़वा सच......
वर्तमान परिवेश में
मनुष्य के अन्दर तनाव बढने का
मुख्य कारण असन्तुष्ट यौन सम्बन्ध है ।
असन्तुष्ट यौन के कारण ही मनुष्य आज
आनन्दपुर्वक जीवन जीने से असफल है ।
असफल और असन्तुष्ट यौन सम्बन्ध में
पचहत्तर प्रतिशत पुरुष शीघ्रपात के शिकार होते हैं ।
जो गहन मिलन से पहले ही वे स्खलित हो जाते हैं
और उन की क्रीड़ा समाप्त हो जाती है ।
उसमें नब्बे प्रतिशत स्त्रियाँ
कभी चरम सन्तुष्टि को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं ।
वह कभी भी गहन सम्भोग के
शिखर आनन्द तक नहीं पहुँच पाती हैं ।
असन्तुष्टी और असफल यौन सम्बन्ध के कारण ही
अक्सर स्त्रियाँ चिड़चिड़ी और क्रोधी होती हैं ।
सन्तुष्टी की चाह में जब उनको असन्तुष्टि मिलती है
वह चिलमिला उठती हैं ।
एक स्त्री सम्भोग में बहुत कम उतरती है ।
और जब वह उतरती है तो
चरमता तक पहुँचना चाहती है ।
जब वह चरमता में पहुँचने का आश रख कर
सम्भोग में उतरती है
और निराशा हाथ लगती है
तो वह चिड़चिड़ी और कोध्री हो जाती है ।
एक स्त्री की कामुकता
परमाणु बम से कम नहीं होती है ।
उसको सम्भालना
हर किसी की बस की बात नहीं है ।
उसकी कामुकता को
फ़िर कोई औषधि शान्त नहीं कर सकती है ।
कोई दर्शनशास्त्र, धर्म या नीति उसे
अपने पुरुषों के प्रति सहृदय नहीं बना सकती है ।
वह स्त्री अतृप्त है तो वह क्रुद्ध होगी ही ।
और आधुनिक मनोविज्ञान और तन्त्र
दोनों में स्पष्ट लिखा है कि
जब तक स्त्री काम भोग में
गहन तृप्ति को नहीं प्राप्त करती,
वह परिवार और समाज के लिए
समस्या बनी रहती है ।
जिससे वह वञ्चित हो गयी ।
वह चीज उसे क्षुब्ध करती रहेगी ।
वह उसके कारण तनाव महसूस करती रहेगी ।
स्त्री पुरुष के बीच झगड़ा हो, तनाव हो,
वह उदास हो, घर में शान्ति ना हो तो
उस स्थिती का अवलोकन कर चिन्तन मनन करना ।
उस स्थिती का मूल कारण समझ में आ जायेगा ।
उस स्थिती के लिये सिर्फ स्त्री ही दोषी नहीं है ।
इस गलती में कहीं ना कहीं हमारा हाथ भी है ।
इसका प्रमुख कारण
यौन के प्रति पुरुष का रुका स्वभाव
सबसे ज्यादा कारण होता है ।
सम्भोग में पुरुष का स्वखलन होते ही
वह स्त्री के प्रति बेपरवाह हो जाता है ।
वह यह नहीं सोचता कि
वह भी चरम आनन्दता प्राप्त करना चाहती है ।
वह सम्भोग में लम्बा और गहरे तह तक जाना चाहती है ।
बस पुरुषों का स्वखलन हुआ,
आनन्द लिया और स्त्री को
उसके हाल में छोड देते हैं ।
इस रूखा स्वभाव और
अतृप्त यौन सम्बन्ध के चलते
स्त्री मन हीनभावना से कुण्ठित हो जाता है ।
वह कामुकता के चरमता को
ना उपलब्ध होने के कारण
काम विमुख हो जाती है ।
फ़िर वह आसानी से काम भोग में
उतरने को नहीं राजी होती है ।
बहुत कम पुरुष स्त्री को
गहन सुख की उपलब्धि करा पाते हैं ।
स्त्री जब तक सम्भोग के चरमता को नहीं छू पाती,
तव तक वह भोगरत रहना पसन्द करती है ।
वह भोग की गहनता में उतर कर
सम्भोग करना पसन्द करती है ।
लेकिन एक पुरूष
भोग के गहरे पन में उतरने से डरता है ।
पुरूष का भोग केवल शारीरिक होता है ।
उसमें गहनता होती ही नहीं है ।
स्त्रियों को सम्भोग में
चरम आनन्द का अहसास नहीं मिलता
तो वह तनाव में आ जाती है ।
मन में प्रश्नों का ज्वार-भाटा उठने लगता है ।
और उसे लगने लगता है कि
पुरुष केवल अपने आनन्द के लिये
उसका उपयोग कर रहा है ।
उनका शोषण कर रहा हैं ।
उसे लगता है कि
पुरुष को
उसकी खुशी से कोई लेना देना नहीं है ।
उसे वह भोग्या वस्तु समझ रहा है ।
पुरुष का तो स्खलित होते ही
वह सन्तुष्ट हो जाता है ।
फिर वह करवट ले कर सो जाता है ।
लेकिन स्त्री को
सम्भोग के चरम आनन्द का
अहसास ना होने के कारण
वह आँसू बहाती रहती है ।
वह अनुभव उसके लिए तृप्तिदायक नहीं होता है ।
जिसके वजह से सम्भोग के प्रति
वह कुण्ठित और रूखी स्वभाव की हो जाती है ।
बस पुरूष को तृप्ती कर सन्तुष्टि देती है ।
लेकिन खुद असन्तुष्ट और अतृप्त रह जाती है ।
आज प्रायः स्त्री को तो
चरम आनन्द का ज्ञान ही नहीं है ।
उनको सम्भोग का अर्थ केवल
योनी लिंग का घर्षण ही पता है ।
वह यह भी नहीं जानती कि
कामुकता के चरम तक कैसे पहुँचे ।
बस बिस्तर पर लेट जाना और
पुरुष जैसा करे
उसी को स्त्री सम्भोग मानती है ।
वह यह भी नहीं जानती हैं कि
चरम कामुकता क्या होती है ?
काम के गहन तल तक
कैसे पहुँचा जा सकता है ?
उन्होंने कभी इसका अनुभव ही नहीं किया ।
वह कभी भी
उस शिखर तक पहुँच ही नहीं पायी है ।
सम्भोग के समय जहाँ
उनके शरीर का रोआँ-रोआँ से कम्पित हो उठे,
वह तृप्त हो,
अङ्ग-अङ्ग उससे निखरे ।
उसका अनुभव करना ही
एक स्त्रीत्व का सपना रहता है ।
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औरत में काम
योनि के ऊपरी भाग में
''भगनासा'' (^) (clitoris) में ही
निवास करता है ,,---
और यह मासिक के
पांचवे दिन से लेकर 15 दिन तक
अतिरिक्त उत्तेजना में रहता है
अतः
काम क्रीड़ा के पहले
10,15 मिनट तक किसी भी
प्रकार से (उँगली, लिंग, जिह्वा)
इसका मुलायम स्पर्श
अति आवश्यक है ---
( इसका स्पर्श मात्र ही औरत को स्खलन करा देगा - काम क्रीड़ा की जरूरत ही नहीं )
पुरुषों को
इसकी न जानकारी के कारण ही
80 % औरतें जीवन पर्यन्त
स्खलन महसूस ही नही कर पाती ...
काम क्रीड़ा के पहले इसे हल्के स्पर्श से जगाने से योनि फूल जाती है मुख खुल जाती है तभी पुरूष को अपने अंग को प्रवेश कराना डी चाहिए
परन्तु
स्त्रियां शर्म के वजह से
अपने पुरुष मित्र से
यह स्वयं की सच्चाई बताती ही नहीं ,
---- पुरुष अनभिज्ञ रह जाता है
और बच्चे पैदा होने तक ही मर्दानगी समझ लेता है
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मैं इसलिए औरत नहीं हूँ
कि मेरी माँग में
तुम्हारे नाम का सिन्दूर है
और माथे पे बिन्दिया ।
मैं इसलिए औरत नहीं हूँ
कि तुम्हारे शर्ट की टूटी हुई
बटन टाँक सकूँ ।
या तुम्हारे जूते के शू लैशेज बान्ध सकूँ
धोती रहूँ तुम्हारे गन्दे कपड़े
और खाना परोसने के बाद
पानी देने के लिए भी दोडूँ
मैं इसलिए औरत नहीं हूँ
कि पकाती रहूँ
तुम्हारी पसन्द का खाना
और सोचूँ
कि पति के दिल का रास्ता
उसके पेट से गुजरता है ।
क्यों तुम्हें याद है क्या
कि मेरे दिल का रास्ता
कहाँ से गुजरता है ।
तुम्हारी तरह पेट या पीठ से नहीं
थोड़ा सा प्यार
थोड़ा सी परवाह
मान सम्मान से है ।
मैं औरत हूँ
क्योंकि प्रकृति ने बनाया मुझे
रचा है मेरे अस्तित्व को मेरे लिए
तुम्हें खुश करने के लिए नहीं ।
मैं औरत हूँ
क्योंकि मेरे अपने कुछ ख़्वाब हैं
मेरी अपनी कुछ इच्छाएँ हैं
कुछ अपनी ख्वाहिशें हैं
कुछ अपनी आशाएँ हैं ।
मैं खुद की औरत हूँ
मेरा कोई परमेश्वर नही
बन्दिशें मुझे स्वीकार नही
मैं आजाद हूँ उन्मुक्त हूँ
हाँ मैं औरत हूँ ।
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