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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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जिन अंगों को देखकर
तू हैवान बन जाता है..
मत भूल.. एक से तू आता है
तो दूजे से पाला जाता है।
🙏🙏🙏
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वक्षस्थल को दें सही आकार
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
आयुर्वेदिक उपचार : अरंडी के पत्ते, घीग्वार (ग्वारपाठा) की जड़, इन्द्रायन की जड़, गोरखमुंडी एक छोटी कटोरी, सब 50-50 ग्राम। पीपल वृक्ष की अन्तरछाल, केले का पंचांग (फूल, पत्ते, तना, फल व जड़) , सहिजन के पत्ते, अनार की जड़ और अनार के छिलके, खम्भारी की अन्तरछाल, कूठ और कनेर की जड़, सब 10-10 ग्राम। सरसों व तिल का तेल 250-250 मिलीग्राम तथा शुद्ध कपूर 15 ग्राम। यह सभी आयुर्वेद औषधि की दुकान पर मिल जाएगा।
निर्माण विधि : सब द्रव्यों को मोटा-मोटा कूट-पीसकर 5 लीटर पानी में डालकर उबालें। जब पानी सवा लीटर बचे तब उतार लें। इसमें सरसों व तिल का तेल डालकर फिर से आग पर रखकर उबालें। जब पानी जल जाए और सिर्फ तेल बचे, तब उतारकर ठंडा कर लें, इसमें शुद्ध कपूर मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। बस दवा तैयार है। असामान्य व अविकसित स्तन
प्रयोग विधि : इस तेल को नहाने से आधा घंटा पूर्व और रात को सोते समय स्तनों पर लगाकर हलके-हलके मालिश करें।
लाभ : इस तेल के नियमित प्रयोग से 2-3 माह में स्तनों का उचित विकास हो जाता है और वे पुष्ट और सुडौल हो जाते हैं। ऐसी युवतियों को तंग चोली नहीं पहननी चाहिए और सोते समय चोली पहनकर नहीं सोना चाहिए। इस तेल का प्रयोग लाभ न होने तक करना चाहिए।
* फिटकरी 20 ग्राम, गैलिक एसिड 30 ग्राम, एसिड आफ लेड 30 ग्राम, तीनों को थोड़े से पानी में घोलकर स्तनों पर लेप करें और एक घंटे बाद शीतल जल से धो डालें। लगातार एक माह तक यदि यह प्रयोग किया गया तो 45 वर्ष की नारी के स्तन भी नवयौवना के स्तनों के समान पुष्ट हो जाएंगे।
* गम्भारी की छाल 100 ग्राम व अनार के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों चूर्ण 1-1 चम्मच लेकर जैतून के इतने तेल में मिलाएं कि लेप गाढ़ा बन जाए। इस लेप को स्तनों पर लगाकर अंगुलियों से हलकी-हलकी मालिश करें। आधा घंटे बाद कुनकुने गर्म पानी से धो डालें। जो भी परिणाम मिले, उसकी सूचना कृपया हमें जरूर दें।
* छोटी कटेरी नामक वनस्पति की जड़ व अनार की जड़ को पानी के साथ घिसकर गाढ़ा लेप करें। इस लेप को स्तनों पर लगाने से कुछ दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है।
* बरगद के पेड़ की जटा के बारीक नरम रेशों को पीसकर स्त्रियां अपने स्तनों पर लेप करें तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है और कठोरता आती है।
* इन्ही के साथ सर्वोत्तम यह भी रहेगा कि रात को सोने से पहले किसी भी तेल की 10 मिनट तक मालिश करें। या तो स्वयं करें या अपने पति से कराएं, मालिश के दिनों में गेप न करें, रेगुलर करें व दो माह बाद चमत्कार देखें। स्तनों की मालिश हमेशा नीचे से ऊपर ही करें।
* स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। कुछ व्यायाम भी हैं, जो वक्षस्थल के सौन्दर्य और आकार को बनाए रखते हैं।
001 असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं
002 कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं।
003 जैतून के तेल की स्तनों पर धीरे-धीरे मालिश करने से करने से स्तनों की सुन्दरता बढ़ जाती है।
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जिह्वा करो प्रयोग फिर, लो बगलों की गन्ध
जब पानी लस लस करे, तब छोड़ो कटि बन्ध।
मोहिनी नारि नर का हो का खेला
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💖मां और बेटी 💖
एक सब्जी की दुकान पर जहाँ से मैं अक्सर सब्जियाँ लेती हूँ जब मैं पहुँची तो सब्जी वाली फोन पर बात कर रही थी अत: कुछ क्षण रुकना ठीक समझा और उसने रुकने का संकेत भी किया तो रुक गयी और उसकी बात मेरे कान में भी पड़ रही थी।
वह अपनी उस बेटी से बात कर रही थी जिसकी शादी तीन चार दिन पहले हुई थी।
वह कह रही थी "देखो बेटी घर की याद आती है ठीक है लेकिन वह घर अब तुम्हारा है।तुम्हें अब अपना सारा ध्यान अपने घर के लिया लगाना है और बार बार फोन मत किया करो और छिपकर तो बिलकुल भी नहीं।
जब भी यहाँ फोन करना तो सास या पति के सामने करना।
तुम अपने फोन पर मेरे फोन का इंतजार कभी मत करना। मुझे जब बात करना होगा तो मैं तुम्हारी सास के नंबर पर लगाऊँगी।तब तुम भी बात करना और बेटी अब ससुराल में हो जरा जरा सी बात पर तुनकना छोड़ दो सहनशक्ति रखो।
अपना घर कैसे चलाना है ये सब अपनी सास से सीखो।
एक बात ध्यान रखो इज्जत दोगी इज्जत पाओगी।ठीक है । सुखी रहो"
मैंने प्रशंसा के भाव में कहा "बहुत सुंदर समझाया आपने"
उसने कहा बहन माँ को बेटी के परिवार में अनावश्यक दखल नहीं देनी चाहिये। उन्हें अपने घर की बातों को भी बिना मतलब इधर उधर नहीं करना चाहिये। वहाँ हो तो समस्या का हल खुद ढूँढ़ो।
मैं उस देवी का मुँह देखती रह गयी। सभी माँ को इसी तरह से सोचना चाहिए ताकि बेटी अपने घर को खुद का घर समझे।
🙏🙏
#हर_बेटी_मेरी
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जब योनि चाटते हो या स्त्रियां लिंग चूसती हैं तो अगर और ज्यादा आनंद लेना चाहते हैं तो डार्क चॉकलेट को योनि और लिंग पर पेस्ट करके प्रयोग करें कामुकता बढ़ेगी। पर ध्यान रहे लिंग ,योनि की सफाई पर।
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सुहागन ❤️❤️
सुहाग रात से ही
हम सुहागिनों का जिस्म पर गहना चढ़ता है ।।
पायल की छमछम से घर घर में खुशियां आती है ।
और जब सईया जी योनि और लिंग का ताल मिलाते हैं तब पायल की छमछम घर में गूंजती हैं
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वैलेंटाइन डे वह दिन है
जब .....!!!
बेटियाँ अर्थी निकालती हैं अपने बाप की इज्जत का...
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जब अंग देखता हूँ तेरा ये नजर वहीं रुक सी जाती
हो परी कोई या नदी कोई चलती है पल-पल इतराती
सर से नख तक की सुन्दरता
जी मेरा आज नहीं भरता..
एक तो योवन का अल्लड़पन ऊपर से चलती बलखाती
हो परी कोई या नदी कोई
श्वेत राशि जल नदी उदर
नाभी या कोई पड़ी भँवर
कटि के तट पर टकराये लहर
कहाँ ? सब्र-बाँध फिर रहे ठहर
क्या नहीं डूबने को काफी, जो केश घटायें लहराती
हो परी कोई या नदी कोई
गोरी बाँहों की नजुकता
छूने की मन में उत्सुकता
ले कदम मेरा उस ओर बढ़ा
क्यूँ रोके आज नहीं रुकता
चंचल सी चितवन वाली वो कुछ इठलाती सी शरमाती
हो परी कोई या नदी कोई
होठों की लाली क्या बोलूँ
काजल को किससे मैं तोलूँ
अंगार और बादल फीके
इतने प्यारे इतने नीके
दाँतों पे दामिनि बलि जाये, धीरे से जब वो मुस्काती
हो परी कोई या नदी कोई
घनकेश घटा पिंडली छूती
क्या शब्द लिखेंगे अनुभूति
घुंघरू की मनमोहक रुन-झुन
कोई नागिन नृत्य करे धुन सुन
उड़ते आँचल को थाम थाम, पैरों को लय पर थिरकाती
हो परी कोई या नदी कोई
चितवन कमान अर्ध-वलयाकार
नयनों समाये सागर हजार
प्यासे मन से आये पुकार
डूबूँ इसमें बस बार बार
तट के ताड़ों के दल झुकते, ।।। पलकों ।।।को जब-जब झपकाती
हो परी कोई या नदी कोई
होठों का परस्पर आलिंगन
या पंखुडियों का सहज मिलन
या इन्द्रधनुष कोई आकर
खुद लिपट गया हो शरमाकर
मैं मंत्रमुग्ध बँध सा जाता, धीमे से स्वर में जब गाती
हो परी कोई या नदी कोई
नथुनों पर अधरों की लाली
या सुबह अभी होने वाली
कोमल कपोलों के भँवर
फूलों पर बैठे या मधुकर
लगता जैसे ऋतुराज आ गया, सुध-बुध मेरी खो जाती
हो परी कोई या नदी कोई
जब अंग देखता हूँ तेरा ये नजर वहीं रुक सी जाती
हो परी कोई या नदी कोई चलती है पल-पल इतराती
सर से नख तक की सुन्दरता
जी मेरा आज नहीं भरता
विश 💋
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तो हमेशा स्त्री के लिए औरत की जगह महिला या स्त्री शब्द का उपयोग करे 🙏 इस से उनके मन सम्मान को ठेस नही पहुंचेगी 🙏
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मेरी प्रियतमा ने मुझे औरत शब्द कहने पर काफी कठोर शब्दों का उपयोग किया था
अब समझ आया क्यूं
क्यो कि
औरत (عورة) शब्द का वास्तविक अर्थ
~~~~~
यह एक अरबी भाषा का शब्द है, जो सीधे तौर पर अरबी से उर्दू भाषा [1] में आया है।
अरबी भाषा में औरत (عورة) का अर्थ होता है स्त्री का गुप्ताङ्ग (genitals/genitalia) अथवा योनि (Vagina)।
अरबी इस्लामी परम्परा में स्त्री केवल भोग की वस्तु के रूप में मानी तथा जानी व समझी जाती है। अतः उसकी योनि अथवा गुप्ताङ्ग को ही आधार बना कर स्त्रियों को योनि अथवा गुप्ताङ्ग अथवा औरत (अरबी में) नामकरण कर दिया गया।
अरबी शब्दकोष में भी औरत (عورة) का यही अर्थ गुप्ताङ्ग (स्त्री का) (genitals/genitalia) अथवा योनि (Vagina) मिलता है।
[1] यद्यपि उर्दू में इसका अनुवाद woman, lady, female के रूप के किया गया, तथापि इस शब्द का मूल उद्गम स्थल अरब ही हैं जहाँ पर woman, lady, female को औरत सिर्फ़ योनि अथवा गुप्ताङ्ग के आधार पर उनकों औरत कहा गया है।
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लैला सिर्फ मजनूं को सुंदर दिखाई पडती थी,
किसी को सुंदर नहीं दिखाई पड़ती थी।
गांव के सम्राट ने मजनूं को बुलाकर कहा
कि मुझे तुझ पर दया आती है
पागल! यह लैला बिलकुल साधारण है
और तू नाहक दीवाना हुआ जा रहा है।
यह देख—एक दर्जन स्त्रियां उसने खड़ी कर दीं
महल से। इनमें से कोई भी चुन ले।
तुझे रास्ते पर रोते देखकर मैं भी दुखी हो जाता हूं।
और दुख और भी ज्यादा हो जाता है
कि किस लैला के पीछे पड़ा है?
काली—कलूटी है,
बिलकुल साधारण है।
ये देख इतनी सुंदर स्त्रियां।
मजनूं ने गौर से देखा,
कहने लगा,
क्षमा करें।
इनमें लैला कोई भी नहीं है।
फिर वही बात,
सम्राट ने कहा,
लैला में कुछ भी नहीं रखा है।
मजनूं कहने लगा,
आप समझे नहीं।
लैला को देखना हो तो मजनूं की आंख चाहिए।
मेरी आंख के बिना आप देख न सकेंगे।
लैला होती ही मजनूं की आंख में है।
तो तुम जिस स्त्री के प्रेम में पड़ गये हो,
तुमसे कोई पूछे क्यों पड़ गये?
तो तुम कहते हो, सुंदर है।
तुम कहते हो, उसकी वाणी मधुर है।
तुम कहते हो, उसकी चाल में प्रसाद है।
मगर ये सब बातें झूठ हैं।
तुम प्रेम में पड़ गये हो
इसलिए चाल में प्रसाद मालूम पड़ता,
वाणी मधुर मालूम पड़ती,
चेहरा सुंदर मालूम पड़ता।
कल जब तुम्हारा सपना टूट जायेगा,
यही चाल बेढब लगने लगेगी
और यही वाणी कर्कश हो जायेगी
और यही चेहरा अति साधारण हो जायेगा।
यह एक सपना है
जो तुमने प्रेम के कारण देखा।
प्रेम अकारण है।
#___मे #प्रेम #हूं..!!
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