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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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लोग बस कहते हे की वे १०:३० को सोते हे
वो तो सिर्फ हमारे लिए हे
ट्वीट्स बताती है 👍👍
की कब तक जागे थे
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🖤P282:-
❤❤❤सप्त धातु:-
💚7 धातु + 3 दोष ( वात पित कफ)+1 मल =11
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में सप्त धातु होतें हैं, पूरा शरीर इनके द्वारा ही ऑपरेट होता है, आज हम आपको जो सप्त धातु पोषक चूर्ण के बारे में बताने जा रहें हैं ये उत्तम रसायन है, यह नस नाड़ियों एवम वात वाहिनियों को शक्ति प्रदान करता है. सात्विक भोजन औ सदाचरण के साथ इसके निरंतर सेवन से रोग प्रतिरोधक शक्ति बनी रहती है, और वृद्ध अवस्था के रोग नहीं सताते.
-अश्वगंधा (असगंध) 100 ग्राम,
-आंवला चूर्ण 100 ग्राम,
-हरड 100 ग्राम,
इन तीनो चीजों के चूर्ण को आपस में मिला लीजिये, अभी इसमें 400 ग्राम पीसी हुयी खांड मिश्री मिला लीजिये. और इसको किसी कांच की भरनी में भर कर रख लीजिये. प्रतिदिन एक चम्मच गर्म पानी के साथ या गर्म दूध के साथ ये चूर्ण पूरे साल फांक सकते हैं. जो व्यक्ति पूरी उम्र इसको खायेगा उसकी तो आयु कितनी होगी इसका अंदाजा भी लगा पाना मुश्किल है. अगर कोई व्यक्ति इसको 3 महीने से 1 साल तक खायेगा तो उसका शरीर भी कई सालों तक निरोगी रहेगा. इस योग को बनाने के लिए बस एक बात का ध्यान रखें के सभी वस्तुएं साफ़ सुथरी ले कर ही चूर्ण बनवाएं, कीड़े वाली अश्वगंधा ना लें. इसलिए ये सामग्री किसी विश्वसनीय दुकानदार से ही लें.
💙सप्त धातुओं का वर्णन –
1. रस
2. रक्त
3. मांस
4. मेद
5. अस्थि
6. मज्जा
7. शुक्र
अगर कोई रोगी या बीमार व्यक्ति जिसको चाहे कब्ज हो या कोई भी बड़ा रोग हो उसको इस चूर्ण को सेवन करने से पहले एक बार शरीर को शोध लेना चाहिए, उसके लिए हमने एक बहतरीन चूर्ण बताया था शरीर शोधन चूर्ण शरीर की सात धातुओं को पोषण देने वाला बहुत उत्तम चूर्ण है
पहले वाली धातु अपने से बाद वाली धातु को पोषण देती है और धातुओं को जितना भी पोषण मिलेगा शरीर उतना ही मजबूत होगा । यह आयुर्वेद का एक बहुत गूढ़ सिद्धांत है
💙इस पोस्ट में हम इस बारे में ज्यादा गहराई में ना जाते हुये आपको एक ऐसे चूर्ण के बारे में बता रहे हैं जो इन सात धातुओं को पोषण देता है और इसको घर पर निर्मित करना भी बहुत आसान है
-अश्वगंधा 100 ग्राम
-तुलसी बीज 50 ग्राम
-सौंठ 100 ग्राम
-हल्दी चूर्ण 50 ग्राम
-हरड़ 30 ग्राम
-बहेड़ा 60 ग्राम
-आवंला 90 ग्राम
इन सभी चीजों को ऊपर लिखी गयी मात्रा में लेकर धूप में सुखाकर मिक्सी में पीस कर और सूती कपड़े में छानकर चूर्ण तैयार कर लें । एयर टाईट डिब्बे में बंद रखने पर यह चूर्ण 6-8 महीने तक खराब नही होता है । ये सभी चीजें आपको अपने आस पास किसी जड़ी-बूटी वाले के पास बहुत आसानी से मिल जायेंगी ।
💜सेवन विधी :-
10 साल से कम उम्र के बच्चों को चौथाई से एक ग्राम, 16 साल तक के किशोर को 2 ग्राम और उससे बड़े व्यक्ति को 3-5 ग्राम तक सेवन करना है रात को सोते समय पानी, शहद, मलाई अथवा दूध के साथ
💙इस चूर्ण के सेवन से मिलने वाले लाभ :-
💛 शरीर में समस्त धातुओं को उचित पोषण देता है जिससे शरीर मजबूत और गठीला बनता है ।
💛 पाचन सही रखता है जिससे खाया पिया शरीर को पूरी तरह से लगता है
💛 बालों में चमक और मजबूती लाता है
💛 त्वचा कांतिमय बनती है
💛 शरीर में कैल्शियम की कमी नही होती जिससे हड्डियॉ मजबूत होती हैं
💛 वात दोष के बढ़ने से हो जाने वाले रोगों से बचाव रहता है
💛 शरीर में एलर्जी और अन्य इंफेक्शन जल्दी से नही होते हैं
इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
🙏
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एक स्त्री का जीवन ऐसा ही होता है...🙏
स्त्री की सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा होता है उसका स्वास्थ्य...
कभी मासिक दर्द से कराह रही है,
तो कभी गर्भ धारण करके उल्टी,मितली,
चक्कर, यूरिन निकल जाने की समस्या झेल रही है, तो कभी रजोनिवृत्ति की बेला में समय असमय रक्तस्राव, सिरदर्द, मूड स्विंग्स,
रक्तचाप बढ़ना-घटना झेल रही है।
ये लिस्ट स्त्री के उन कष्टों की है जो सामान्य है, सेहतमंद हैं।
इन सबको आसानी से न झेल पाने वाली स्त्रियाँ इससे भी कहीं कहीं अधिक भयंकर स्वास्थ्य समस्याओं से घिरी होतीं हैं...
रक्तस्राव अधिक हो तो परेशानी, कम हो तो समस्या। गर्भाशय में अक्सर ही सिस्ट या ट्यूमर हो जाता है। मिसकैरेज शरीर को जितना तोड़ जाता है उतना एक नार्मल डिलीवरी नहीं तोड़ती। मिसकैरेज से बच गयी तो सीज़ेरियन मुँह खोले दानव की तरह प्रतीक्षा करता है। संतान न हो पा रही हो तो ज़रा उस स्त्री का दर्द पूछिये जो आई वी एफ सेंटर्स के चक्कर लगा रही है। शरीर की एक एक कोशिका हिल जाती है। टेस्ट पर टेस्ट, टेस्ट पे टेस्ट, इंजेक्शन्स पर इंजेक्शन्स... एक स्थिति ऐसी आती है, पेशेंट स्त्री बिस्तर पर मुर्दा देह की तरह पड़ी होती है....भोंक दो जो कुछ भी भोंकना हैं...ड्रिप है,सुई है, एनेस्थीसिया है या खंजर कुछ पता नहीं चलता। पता तब चलता है जब एक एक घाव चीख चीख कर कहता है, मुझे भरना है!
संभोग दोनों के लिये एक आनंददायी क्रिया है, पर यदि वास्तव में स्त्री को भी आनंद मिले तब। अधिकतर तो यही होता है स्त्री के मन में इससे होने वाले वजाइनल संक्रमण का भय मंडरा रहा होता है। निवृति के बाद उसे पाँच मिनट भी नींद में समाने का सुख नहीं होता, उसे भागना होता है वॉशरूम की तरफ। फिर भी इस संक्रमण से बचने का कोई उपाय नहीं..!
कार्यालय में , बाज़ार में, पार्टी में, मेले में, ठेले में...
न जाने कब तक यूरिन रोककर मुस्कराना पड़ेगा... नहीं पता ब्लाडर भर कर फटने की कगार पर आ जाये तब भी कहीं किसी सड़क के किनारे बैठ नहीं सकते इज़्ज़त यूरिन इंफेक्शन से बड़ी चीज़ है...
ये सारे कष्ट उनके है जिन्होंने सामान्य जीवन जिया है। उनके बारे में तो मैंने लिखा ही नहीं जिन्होंने यौन शोषण सहा, बलात्कार झेला, तेज़ाब की आग झेली, पति के हाथों पिटाई सही।
सच यही है इन सब हेल्थ इश्यूज़ के कारण ही स्त्री जितनी कार्यक्षमता रखती है उतना कर पाने में सक्षम नहीं होती। कहीं न कहीं हर पायदान पर पिछड़ती चली जाती है।
इसीलिए स्त्री... तुम अपना ख़्याल ख़ूब ख़ूब रखा करो हर रोज नई तरीके से जिया करो😊
♥️♥️♥️
🙏
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अश्लीलता या यूँ कहें की वासना
ये एक मनोभाव है ... शायद एक कलुषित मनोभाव समझा जाता है इसे ... लेकिन मेरा मानना है हर बुरी चीज बुरी नही होती हर अच्छी चीज अच्छी नही होती
एक मित्र ने मेरी पोस्ट देखी जिसमें तस्वीरो को लेकर सवाल उठाए... के वो तस्वीरें जो मेरी पोस्ट पर होती हैं ... अश्लीलता समेटे होती हैं
किसी तस्वीर से संबन्धित वासना और अश्लीलता की बात आती है तो मेरा मानना है
यह भाव दृश्य से अधिक दृष्टि पर निर्भर करता है ... दृष्टा पर निर्भर करता है ..
स्त्री का शरीर अश्लीलता का वासना का पर्याय कैसे हो सकता है ... नारी प्रेम और वात्सल्य की अभीव्यक्ति है .. ना की वासना की
पुरुष माता के गर्भ से लेकर किसी ना किसी रूप में नारी के ऋण तले दबा ही रहता है .... क्योंकि इस जीवन में नारी उसे किसी भी रूप में मिले
माँ, बहन, प्रेमिका, पत्नी या दोस्त ... हर रूप मे अपना स्नेह लुटाती है हर रूप में उसे सम्भालती आई है ... उसके स्वभाव में ही प्रेम और ममता है .. वासना और अश्लीलता से उसका दूर दूर तक कोई नाता नही ... फिर उसकी किसी तस्वीर में इनका स्थान कहाँ से
रही बात लोगों की तो इन लोगों में पुरुष और स्त्री दोनो आते हैं... लोगो को यहाँ कौन खुश रख पाया है ... भगवान राम और माँ सीता पर ऊँगली उठाने वाले लोग किसी स्त्री की तस्वीर को, आपको या हमको बख्श देंगे ऐसा हम कैसे सोच सकते हैं
यहाँ तो छः महीने की बच्ची और साठ वर्ष की वृद्ध स्त्री में भी अश्लीलता नजर आ जाती है ... तभी तो पाश्विक वृत्ति के घृणित लोग उनसे दुष्कर्म करते हुए भी लज्जा का अनुभव नही करते ....
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,,,प्रतीकात्मक रूप में,, कहानी,,,
,,,,ब्रा यानी चोली और पैंटी यानी कच्छू की दुख दर्द भरी कहानी,उनकी ही जुबानी।
,,,जब किसी को अंतरकरण और अन्तर्मन से अपना बना लिया जाता है और उसके साथ रहने का चस्का लग जाता है तो उनसे एक पल को बिछुड़ना नहीं सुहाता। ऐसे ही ब्रा का छातियां और पैंटी का योनि के साथ संबंध है,,,
,,,हां कह सकते हैं कि पुरुष और स्त्री का ऐसा ही संम्बन्ध होना चाहिए और वो भी एक पल को एक दूसरे को ना भूलें और सैक्स लाइफ में एक दूसरे का साथ निभायें।,,,,
,,, मैंने देखा कि हमारी मैडम की ब्रा और पैंटी हांफती, कांपती,दौड़ती आ रहीं हैं। मैंने कहा कि तुम दौनौं को तो मैडम की छातियों और योनि पर होना चाहिए था। तुम लोग यहां कहां भागदौड़ में लगे हो।
,,तभी ब्रा और पैंटी बोली कि रात में किसी पुरुष ने आकर मैडम की टांगें ऊपर कर मुझ पैंटी को और हाथ ऊपर कर मुझ ब्रा को उतार कर और बुरी नजर से घूर कर पलंग के किनारे पर दूर फैंक दिया,तभी से हम मैडम के शरीर से अलग हैं अब जबकि मैडम ने हमें बाथरूम में छोड़ा,हम मौका देख भागे भागे आये हैं।
,,,,जिन छातियों और योनि को हम दोनों संभाल कर रखती रहीं,उन छातियों को उस पुरुष ने अपने हाथ से ज़ोर से दबाया,सहलाया, चूमा चाटा और मुंह में बारी बारी निप्पलों को रक्खा।उनकी हालत जरूर खराब हुई होगी क्योंकि मैं ब्रा उन छातियों को बड़े जतन से और ठीक ठाक बिना दबाव के रखती रही हू। ऐसे ही पैंटी बोली उस पुरुष ने अपना पैंन्टी उतारा और लंम्बा लंम्बा लिंग मैडम के हाथों में थमाया,फिर चुसबाया, और उसने योनि को चूमा चूसा और वो बड़ा सा धप से मैडम की योनि में डाल दिया। और धपाधप आगे पीछे करता रहा। बेचारी योनि जिसे बड़े लाड़ प्यार से रखती, उसे बहुत चोटें आयी होंगी। मैडम भी ये सब होते देखती रही। थोड़ा दुःख दर्द में थी पर खुश भी थी।
,,,पर हम दोनों ब्रा और पैंटी को दुख है जिनकी देखरेख हम करते रहे, हमारे साथ बुरा बर्ताव किया और हमें किनारे पर फैंक दिया गया।
,,,मैंने मैडम की ब्रा और पैंटी से पूछा कि ये सब तुम लोग पहली बार देख रहे हो।
,,, हां जी,ब्रा और पैंटी बोली,कल ही वो हमें बाजार से लायी थी और हम खुश थे हम उनके छातियों और योनि की बखूबी देखरेख कर रहे।
,,, तो सुनो मेरी बात, जो कहना चाह रहा कि जिस तरह तुम्हें मैडम की छातियां और योनि प्रिय हैं,उसी तरह मैडम को प्रिय हैं जो मैडम की छातियों और योनि का उपयोग और उपभोग करते। इसीलिए और कुछ जानने और समझने की जरूरत नहीं। ये तो अब तुम जब तब देखते रहोगे। तुम अपना काम करत रहो और जो होता है उसे देखते रहो। ये सब तो आगे भी होता रहेगा। और देखने क मिलता रहेगा।
,,,,और इस सब से मैडम खुश हैं तो हम सब खुश हैं।जाओ अपना अपना काम करो
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#कुंवारा_मन
शादी शुदा स्त्री अक्सर कर बैठती हैं इश्क़
मांग में सिंदूर होने के बावजूद
जुड़ जाती हैं किसी के अहसासों से
कह देती हैं उससे कुछ अनकही बातें
ऐसा नहीं की वो बदचलन हैं
या उनके चरित्र पर कोई दाग़ है
तो फिर क्या है जो वो खोजती हैं
सोचा कभी स्त्री क्या सोचती हैं
तन से वो हो जाती हैं शादीशुदा
पर मन कुंवारा ही रह जाता है
किसी ने मन को छुआ ही नहीं
कोई मन तक पहुँचा ही नहीं
बस वो रीती सी रह जाती हैं
और जब कोई मिलता है उसके जैसा
जो उसके मन को पढ़ने लगता है
तो वो खुली किताब बन जाती हैं
खोल देती हैं अपनी सारी गिरहें
और नतमस्तक हो जाती हैं सम्मुख
...
स्त्री देह से परे प्यार करती हैं
जहाँ वो बोल सकें खुद की बोली
जी सकें खुद के लिये दो पल
बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
हंस सकें एक बेख़ौफ़ सी हसीं
हाँ लोग इसे इश्क़ ही कहते हैं
पर स्त्री तो बस दूर करती हैं
अपने मन का कुंवारापन...!!
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Sexual Meditation :
मेडिटेशन तो आप करते ही होंगे। यह मानसिक विकारों को दूर करने में मदद करता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि सेक्सुअल समस्याओं को दूर करने के लिए भी मेडिटेशन किया जाता है? जी हां, इसे सेक्सुअल मेडिटेशन नाम दिया गया है। इसका नियमित अभ्यास करने से आप और आपकी पार्टनर दोनों को ही सेक्सुअल सैटिस्फैक्शन मिलेगा। इससे आप एक-दूसरे से अच्छी तरह से जुड़ सकते हैं। सेक्सुअल मेडिटेशन करने से सेक्स (sexual meditation benefits) का आनंद भी अच्छी तरह से उठा सकते हैं। यदि आपने अब तक सेक्सुअल मेडिटेशन (Sexual meditation) नहीं किया तो जरूर करें और फिर देखें आपको कैसा महसूस होता है। जानें, सेक्सुअल मेडिटेशन कैसे किया जाता है...
शांत जगह बैठें
अपने बेडरूम की रोशनी धीमी कर दें। इलेक्ट्रॉनिक चीजों को हटा दें जैसे- फोन, टीवी और लैपटॉप। ये सारी चीजें आपके ध्यान को भटका सकती हैं। अपने रूम को नॉर्मल तापमान पर रखें, क्योंकि बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड दोनों आपके ध्यान को भटका सकती है।
आराम की मुद्रा में बैठ जाएं
ऐसी अवस्था में आ जाएं जो आपके और आपके साथी के लिए आरामदायक हो। चाहे आप अपने पैरों के बल बैठ जाएं या फिर कमल की मुद्रा में बैठें। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। मेडीटेशन करते समय आपको हल्के कपड़े पहनने चाहिए।आंखों को बंद करके सेक्सुअल मेडिटेशन करें जब आप मेडिटेशन (sexual meditation tips) करने के लिए तैयार होते हैं तो आप और आपके साथी की आंखें बंद होनी चाहिए। अपने शरीर और आपनी सांसों पर पूरा ध्यान दें। इधर-उधर की बातें सोचने की बजाय अपने वर्तमान के बारे में सोचें। आखें बंद करने के बाद सिर्फ उन बातों को ध्यान में रखें जो आपके और आपके साथी के लिए फायदेमंद हों।
सॉफ्ट गाने सुनें
अगर आपके कानों में तेज और ध्यान भ्रमित करने वाली आवाज गूंज रही है तो आपके लिए मेडिटेशन करना बहुत मुश्किल हो सकता है। ऐसे गाने या ध्वनि को सुनें जिससे आप अपना पूरा ध्यान मेडिटेशन पर लगा सकें। कोशिश करें की मेडिटेशन या सेक्स करते समय सॉफ्ट गाने सुनें।
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तानाविज्ञाय मुढात्मा कथम् रतिसुखम् लभेत !!
इस ज्ञान / ज्ञान के बिनाशिवाय रति सुख/स्त्रीसुख/संभोगसुख/चुदाईसुख कैसे मिलेगा!..
कामसूत्र ये बहुत बडा पूराना संस्कृत ग्रंथ हैं इसमे आपको किसी विषय मे जाणकारी के लिये मेसेज करे या कॉमेंट करे!! आपका वैवाहिक जीवन या जवानी के दिन / राते व्यर्थ न करे और कामजीवन का भरपूर और हमेशा आनंद ले!
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जीवनमें सुख पानेके लिये खुद को और अपने साथी को खुश करना आवश्यक हैं! संभोग व कामजीवन ये जवानी और व विवाहिक जीवन का अभिन्न अंग हैं! जिन्दगी के सफर मे साथी के साथ प्यार करना औंर उसे हर रात खुश करना ये खुद औंर उस साथी के लिये जरुरी है! उस के लिये कामसूत्र का अध्ययन औंर अचारन करना जरुरी है!
इसलीए मै संस्कृत सुभाषित भाषांतर करके समझाने का प्रयास कर रहा हू!
दांपत्यसुखसिद्धर्थ कामशास्त्रम् संभ्यासेत!
तदाभ्यासाद निर्वाच्यम् मदानंदंमश्नुटे!!
कामशास्त्रविहिनानां रति: पाशविक्रियं मता: !
तदभ्यासांन्न सौsख्यं स्यात केवलं दुःखमापणुयात!!
शब्दशः अर्थ
दांपत्यसुखसिद्धर्थ (दांपत्य सुख के लिये) कामशास्त्रम् (काम शास्त्र का) संभ्यासेत (स अभ्यास /साथ मे पढाइ करो )!
तदाभ्यासाद (वैसा अभ्यास करने से) निर्वाच्यम् (अनिर्वाच्य ) मदानंदं (मद/मदन का आनंद) मश्नुटे (मनुष्य को मिलता हैं ) !!
कामशास्त्रविहिनानां (काम शास्त्र बिना पढे) रति: ( रति/ प्रणय/ संभोग/ चुदाई पाशविक्रियं मता: ( पाशवी / पशु समान मानी जाती हैं) !
तदभ्यासांन्न (अन्यतः अभ्यास न होने से) सौsख्यं स्यात ( सुख के सिवाय) केवलं (फक्त) दुःखमापणुयात (दुःख ही मीलता हैं) !!
सिधा अर्थ
दांपत्य सुख / स्त्री पुरुष सुख पाने के लिये काम शास्त्रा का साथ मे अभ्यास / चुदाई की पढाई जरुरी है! वैसे करने से मनुष्य/ स्त्री को को रति/ प्रणय/ प्यार/ संभोग/ चुदाई का) अनिर्वाच्य / अति आनंद मिलता हैं!
काम शास्त्र की पढाई या शिक्षा बिना की गई रति/ प्यार/ प्रणय/ संभोग/ चुदाई यह प्राणी समान होती हैं औंर उसे सिर्फ दुःख ही मिलता हैं!
आपको यह बात कैसे लगी ये कॉमेंट बॉक्स मे जरुर बताये!
अब मैं कामसूत्र मे क्या क्या सिखाया जाता है औं र उस से क्या लाभ होता है ये बताऊंगा..
निचे दिये संस्कृत श्लोक मे ये बताया हैं... कृपया पढ कर समझने का प्रयास करे!!!
किं दांपत्य सुख लोके कानि तत्साधनानि च !
कुमारी परिनिता तू की दृषी सुखदा भवेत !!
के च विस्त्रमभणोपायास्तासा मिह सुखवहा: !!
प्रमदाना कथचापि , मद विद्रावण भवेतं!!
कथं नष्टअनुरागश्च प्रत्यानेयो मनीषीभि:!!
बंध्याय मृतवत्सायत्मजाप्ती: कथ म् भवेत!
सतीनां वानितानाश्र्च लक्षणानीह कानि च!
पुश्चलीनांतू नारिणा परिज्ञानं कथम भावेत!!
तासां विचेष्टितेभ्याश्च ह्यात्मानं रक्षयेतं कथम्!
कथम शरीरं सुरताया सितन्तू विलासिनाम !
नवयौवन कालीन सुरत क्षमता वज्रेत !!
प्रेक्षावभिदगर्भीषग्वरयों प्रत्यह सुपरिक्षिता !!
गर्भ संधारणोपाया के भवेयु सुखाप्रदा !!
इत्येव मादयो वश्यम् ज्ञातव्य विषयाश्च ये !!
तानाविज्ञाय मुढात्मा कथम् रतिसुखम् लभेत !!
किं दांपत्य सुख लोके कानि तत्साधनानि च !!
दांपत्य सुख/ स्त्री पुरुष सुख कैसा होता हैं और उसे निरंतर भोगने के लिये क्या क्या उपाय / साधनाए हैं!
कुमारी परिनिता तू की दृषी सुखदा भवेत !!
कैसी लडकी/ कुमारी से शादी क्रे जो तुम्ही अच्छा सूख देगी! कैसे पहाचाने!
के च विस्त्रमभणोपायास्तासा मिह सुखवहा: !!
शादी करके लाई हुई स्त्री का कैसे भरोसा दिला कर उसे मनचाहा सुख प्राप्त करे!
प्रमदाना कथचापि , मद विद्रावण भवेतं!!
स्त्री का मद / खुजली / मांझ कैसे शांत किया जाये, इसके क्या उपाय हैं, उसे कैसे द्रवित किया जाये, कैसे गलाया जाये
कथं नष्टअनुरागश्च प्रत्यानेयो मनीषीभि:!!
रुठी हुईं स्त्री की कैसे मनाये, उसके कौन कौनसे उपाय है ये भी बताया गया है/ कथन किया है!
बंध्याय मृतवत्सायत्मजाप्ती: कथ म् भवेत!!
वंध्यत्व याने बच्चा ना हो या मृत होता है तो उन्होंने कैसे, कब औंर क्या क्या करना ये भी बताया हैं!
सतीनां वानितानाश्र्च लक्षणानीह कानि च!!
सती या पतिव्रता (वनिता) स्त्री चे लक्षणं क्या है ...
पुश्चलीनांतू नारिणा परिज्ञानं कथम भावेत!!
पुष्चली/ व्यभिचारीणी/ चालू स्त्री के लक्षणं कैसे पहचाने ये बताया गया है!
तासां विचेष्टितेभ्याश्च ह्यात्मानं रक्षयेतं कथम्!
ऐसी स्त्री की चेश्टा / तकलीफ से कैसे रक्षा करे ये भी कथन किया गया है!
कथम शरीरं सुरताया सितन्तू विलासिनाम !!
विलास/आनंद के लिये शरीर को सुरत/ संभोग/चुदाई के लिये कैसे बलवान करे!
नवयौवन कालीन सुरत क्षमता वज्रेत !!
नवयौवन/ जवानी समान सुरत/संभोग/चुदाई की क्षमता कैसे बढाये !
प्रेक्षावभिदगर्भीषग्वरयों प्रत्यह सुपरिक्षिता !!
सुविद्य / सुदृढ गर्भ न रहने के कारन प्रत्यक्ष कैसे पहचाने?
गर्भ संधारणोपाया के भवेयु सुखाप्रदा !!
गर्भ संधारण उपाय / गर्भ धारण के लिये सुख दायी उपाय कैसे करे.. बच्चा होने के लिये बिबी के साथ कैसे संभोग करे/ उसे कैसे चोदे !
इत्येव मादयो वश्यम् ज्ञातव्य विषयाश्च ये !!
इत्यादीप्रकार से स्त्री/मादी को वश मे करने के विषय का ज्ञान / ग्यान दिया हैं!
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#कुंवारा_मन
शादी शुदा स्त्री अक्सर कर बैठती हैं इश्क़
मांग में सिंदूर होने के बावजूद
जुड़ जाती हैं किसी के अहसासों से
कह देती हैं उससे कुछ अनकही बातें
ऐसा नहीं की वो बदचलन हैं
या उनके चरित्र पर कोई दाग़ है
तो फिर क्या है जो वो खोजती हैं
सोचा कभी स्त्री क्या सोचती हैं
तन से वो हो जाती हैं शादीशुदा
पर मन कुंवारा ही रह जाता है
किसी ने मन को छुआ ही नहीं
कोई मन तक पहुँचा ही नहीं
बस वो रीती सी रह जाती हैं
और जब कोई मिलता है उसके जैसा
जो उसके मन को पढ़ने लगता है
तो वो खुली किताब बन जाती हैं
खोल देती हैं अपनी सारी गिरहें
और नतमस्तक हो जाती हैं सम्मुख
...
स्त्री देह से परे प्यार करती हैं
जहाँ वो बोल सकें खुद की बोली
जी सकें खुद के लिये दो पल
बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
हंस सकें एक बेख़ौफ़ सी हसीं
हाँ लोग इसे इश्क़ ही कहते हैं
पर स्त्री तो बस दूर करती हैं
अपने मन का कुंवारापन...!!
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तुम मर्दो के एक दुख सुनोगी तो बदले में वो तुम्हारे दस दुख सुन लेंगे... लेकिन सिर्फ अपने दुख सुनाने के लिए उन्हें सुन लेना बेईमानी होगी...उनका एक दुख सुनकर सिर्फ महसूस करो कि किसी का दुख सुनने के लिए कितने सब्र और भावनाओं की जरूरत होती है...फिर शायद तुम्हारी सोच भी बदल जाये कि मर्दो में सहनशक्ति नहीं होती...
😔
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अश्लीलता या यूँ कहें की वासना
ये एक मनोभाव है ... शायद एक कलुषित मनोभाव समझा जाता है इसे ... लेकिन मेरा मानना है हर बुरी चीज बुरी नही होती हर अच्छी चीज अच्छी नही होती
एक मित्र ने मेरी पोस्ट देखी जिसमें तस्वीरो को लेकर सवाल उठाए... के वो तस्वीरें जो मेरी पोस्ट पर होती हैं ... अश्लीलता समेटे होती हैं
किसी तस्वीर से संबन्धित वासना और अश्लीलता की बात आती है तो मेरा मानना है
यह भाव दृश्य से अधिक दृष्टि पर निर्भर करता है ... दृष्टा पर निर्भर करता है ..
स्त्री का शरीर अश्लीलता का वासना का पर्याय कैसे हो सकता है ... नारी प्रेम और वात्सल्य की अभीव्यक्ति है .. ना की वासना की
पुरुष माता के गर्भ से लेकर किसी ना किसी रूप में नारी के ऋण तले दबा ही रहता है .... क्योंकि इस जीवन में नारी उसे किसी भी रूप में मिले
माँ, बहन, प्रेमिका, पत्नी या दोस्त ... हर रूप मे अपना स्नेह लुटाती है हर रूप में उसे सम्भालती आई है ... उसके स्वभाव में ही प्रेम और ममता है .. वासना और अश्लीलता से उसका दूर दूर तक कोई नाता नही ... फिर उसकी किसी तस्वीर में इनका स्थान कहाँ से
रही बात लोगों की तो इन लोगों में पुरुष और स्त्री दोनो आते हैं... लोगो को यहाँ कौन खुश रख पाया है ... भगवान राम और माँ सीता पर ऊँगली उठाने वाले लोग किसी स्त्री की तस्वीर को, आपको या हमको बख्श देंगे ऐसा हम कैसे सोच सकते हैं
यहाँ तो छः महीने की बच्ची और साठ वर्ष की वृद्ध स्त्री में भी अश्लीलता नजर आ जाती है ... तभी तो पाश्विक वृत्ति के घृणित लोग उनसे दुष्कर्म करते हुए भी लज्जा का अनुभव नही करते ....
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सेक्स तो आमोद-प्रमोद पूर्ण होना चाहिए। न कि गंभीर मामला जैसा कि अतीत में बना दिया गया। यह तो एक नाटक की तरह होना चाहिए, एक खेल कि तरह: मात्र दो लोग एक दूसरे की शारीरिक ऊर्जा के साथ खेल रहे है। यदि वे दोनों खुश है, तो इसमें किसी दूसरे की दखल अंदाजी नहीं होनी चाहिए। वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे। वे बस एक दूसरे की ऊर्जा का आनंद ले रहे है। यह ऊर्जाओं का एक साथ नृत्य है। इसमें समाज का कुछ लेना देना नहीं है। जब तक कि कोई एक दूसरे के जीवन में नुकसान न दें। अपने को थोपे, लादे, हिंसात्मक न हो, किसी के जीवन को नुकसान न पहुँचाए, तब ही समाज को बीच में आना चाहिए। अन्यथा कोई समस्या नहीं है; इसका किसी तरह से लेना देना नहीं होना चाहिए।
सेक्स के बारे में भविष्य में पूरा अलग ही नजरिया होगा। यह अधिक खेल पूर्ण, आनंद पूर्ण, अधिक मित्रतापूर्ण, अधिक सहज होगा। अतीत की तरह गंभीर बात नहीं। इसने लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया है। बेवजह सरदर्द बन गया था। इसने बिना किसी कारण—ईर्ष्या, अधिकार, मलकियत, किचकिच, झगड़ा, मारपीट, भर्त्सना पैदा की।
सेक्स साधारण बात है, जैविक घटना मात्र। इसे इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। इसका इ तना ही महत्व है कि ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन किया जा सके। यह अधिक से अधिक आध्यात्मिक हो सकता है। और अधिक आध्यात्मिक बनाने के लिए इसे कम से कम गंभीर मसला बनाना होगा।
सेक्स से संबंधित नैतिकता के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित मत होओ, यह पूरी तरह से समाप्त हो जाने वाला है। भविष्य में सेक्स के बारे में पूरी तरह से नया ही दृष्टिकोण होगा। और एक बार सेक्स का नैतिकता से इतना गहरा संबंध समाप्त हो जायेगा। तो नैतिकता का संबंध दूसरी अन्य बातों से हो जायेगा जिनका अधिक महत्व है।
सत्य, ईमानदारी, प्रामाणिकता, पूर्णता, करूण, सेवा, ध्यान, असल में इन बातों का नैतिकता से संबंध होना चाहिए। क्योंकि ये बातें है जो तुम्हारे जीवन को रूपांतरित करती है। ये बातें है जो तुम्हें अस्तित्व के करीब लाती है।
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रमज़ान (बाप और बेटी की सुहागरात का पर्व है।)
#रमजान नहीं मोहम्मद की अपनी बेटी से सुहागरात की सालगिरह# *मोहम्मद ने अपनी चाँद सी बेटी आइशा से निकाह किया था तब 30 दिनों तक आइशा मोहम्मद के साथ सोने को राजी नहीं हुई!*
मैंने बहुत से मुसलमानों से पूछा कि तुम लोग ईद आदि क्यों मनाते हो?
एक ने मुझसे कहा पहले तुम बताओ, तुम दिवाली क्यों मनाते हो? *जवाब हमारा-*
दीपावली को श्रीराम लंका जीत कर आये थे उस खुशी में मनाते है,
शिवरात्री को शिवजी पार्वती जी का विवाह हुआ इसलिए मनाते है,
गणेश चतुर्थी को गणपति जी का प्रागट्य हुआ इसलिए मनाते हैं,
रक्षाबंधन पर द्रोपदी जी ने कृष्ण भगवान को राखी बांधी थी इसलिए मनाते हैं,
जन्माष्टमी को कृष्ण भगवान का प्रागट्य हुआ इसलिए मनाते हैं,
होली को होलिका जल गई और भक्त पहलाद नहीं जले इसलिए मनाते हैं,
*पर तुम मुसलमान रमजान, ईद क्यों मनाते हो?*
तुम्हारा तो कोई अल्लाह खुदा कभी घर नहीं आया, कोई युद्ध नहीं जीता तो किस खुशी में मनाते हो?
*किसी मुस्लिम ने मुझे आजतक इसका जवाब नहीं दिया।*
पर आज एक मुस्लिम जो हिन्दू बन गया है, उसने मुझे बताया कि ईद रमजान क्यों मनाते है उसने कहा कि सब मुल्ले गधे हैं,
*मोहम्मद ने अपनी चाँद सी बेटी आइशा से निकाह किया था*
तब 30 दिनों तक आइशा मोहम्मद के साथ सोने को राजी नहीं हुई,
*आइशा को सूरज ढलने के बाद एक ही टाइम खाना दिया जाता था।*
30 दिनों के बाद फिर आइशा भूख प्यास से बेहाल होने के नाते हारकर *दूज के दिन राजी हो गई, तो मोहम्मद ने अपनी बेटी आइशा के साथ पहली सुहागरात मनाई थी।* तब से मुल्ले आइशा के लिए 30 दिन तक शाम को ही खाना खाने लगे उसे रमजान कहने लगे; चाँद जैसी आइशा के हां कहने से दूज के चाँद को देखकर मोहम्मद की याद में ईद मनाने लगे है, और उसके एक दिन पहले की बाप के साथ बेटी पर सुहागरात वाली रात की याद में *"शब्बे बारात"* मनाते हैं, इस तरह रमजान और ईद मनाई जाने लगी अब आप इसे ईद नहीं मोहम्मद की खुद की बेटी के साथ मनाई सुहागरात की सालगिरह भी कह सकते हो। यह है सच्चाई रमजान की।
आगे भी भेजें ताकि सभी जान सकें यह सच्चाई।
*🚩🚩🚩 धर्म सिर्फ एक ही है सनातन धर्म बाकी तो पाखंड है🚩🚩🚩 जय श्री राम🚩🚩🚩..*
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रमज़ान (बाप और बेटी की सुहागरात का पर्व है।)
#रमजान नहीं मोहम्मद की अपनी बेटी से सुहागरात की सालगिरह# *मोहम्मद ने अपनी चाँद सी बेटी आइशा से निकाह किया था तब 30 दिनों तक आइशा मोहम्मद के साथ सोने को राजी नहीं हुई!*
मैंने बहुत से मुसलमानों से पूछा कि तुम लोग ईद आदि क्यों मनाते हो?
एक ने मुझसे कहा पहले तुम बताओ, तुम दिवाली क्यों मनाते हो? *जवाब हमारा-*
दीपावली को श्रीराम लंका जीत कर आये थे उस खुशी में मनाते है,
शिवरात्री को शिवजी पार्वती जी का विवाह हुआ इसलिए मनाते है,
गणेश चतुर्थी को गणपति जी का प्रागट्य हुआ इसलिए मनाते हैं,
रक्षाबंधन पर द्रोपदी जी ने कृष्ण भगवान को राखी बांधी थी इसलिए मनाते हैं,
जन्माष्टमी को कृष्ण भगवान का प्रागट्य हुआ इसलिए मनाते हैं,
होली को होलिका जल गई और भक्त पहलाद नहीं जले इसलिए मनाते हैं,
*पर तुम मुसलमान रमजान, ईद क्यों मनाते हो?*
तुम्हारा तो कोई अल्लाह खुदा कभी घर नहीं आया, कोई युद्ध नहीं जीता तो किस खुशी में मनाते हो?
*किसी मुस्लिम ने मुझे आजतक इसका जवाब नहीं दिया।*
पर आज एक मुस्लिम जो हिन्दू बन गया है, उसने मुझे बताया कि ईद रमजान क्यों मनाते है उसने कहा कि सब मुल्ले गधे हैं,
*मोहम्मद ने अपनी चाँद सी बेटी आइशा से निकाह किया था*
तब 30 दिनों तक आइशा मोहम्मद के साथ सोने को राजी नहीं हुई,
*आइशा को सूरज ढलने के बाद एक ही टाइम खाना दिया जाता था।*
30 दिनों के बाद फिर आइशा भूख प्यास से बेहाल होने के नाते हारकर *दूज के दिन राजी हो गई, तो मोहम्मद ने अपनी बेटी आइशा के साथ पहली सुहागरात मनाई थी।* तब से मुल्ले आइशा के लिए 30 दिन तक शाम को ही खाना खाने लगे उसे रमजान कहने लगे; चाँद जैसी आइशा के हां कहने से दूज के चाँद को देखकर मोहम्मद की याद में ईद मनाने लगे है, और उसके एक दिन पहले की बाप के साथ बेटी पर सुहागरात वाली रात की याद में *"शब्बे बारात"* मनाते हैं, इस तरह रमजान और ईद मनाई जाने लगी अब आप इसे ईद नहीं मोहम्मद की खुद की बेटी के साथ मनाई सुहागरात की सालगिरह भी कह सकते हो। यह है सच्चाई रमजान की।
आगे भी भेजें ताकि सभी जान सकें यह सच्चाई।
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