¡No caigas en manos de tramposos! Telemetrio encuentra y marca estos canales 👉 Si quieres ver la etiqueta, suscríbete 👈
काम संहिता🙏
Ir al canal en Telegram
सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
Mostrar más2 477
Suscriptores
Sin datos24 horas
+237 días
+3630 días
2 878
Visitas de la publicación
~ 53824 horas
Sin datos48 horas
116.19%
Tasa de compromiso
Sin datos
Mensajes por día
Archivo de publicaciones
2 477
मगर ये सब मैं आपसे होली के बाद कह रही हूं क्योंकि औरत के शरीर को त्यौहार के बहाने पब्लिक प्रॉपर्टी मानने का बजनेस यहां खत्म नहीं होता. अगले दिन अखबार में ख़बरें छपती हैं जो हमें बताती हैं कि होली देश के कई हिस्सों में किस तरह धूमधाम से मनाई गई. जैसे मॉनसून के आगमन पर छपती हैं. और लू के चलने पर छपती हैं. और हर बार मौसमों की मार जाने क्यों औरत का शरीर ही झेल रहा होता है.
2 477
प्रतीक्षा जी की लेखिनी
ब्लॉग: कॉन्डम में रंग भरकर मारने का त्यौहार शुरू होने वाला है और जब ख़त्म होगी, तब भीगी हुई लड़कियों की तस्वीरें देखें
2018 की होली से कुछ पहले दिल्ली में लेडी श्रीराम कॉलेज की दो लड़कियों ने एक शिकायत की. उनका कहना था कि उन्हें गुब्बारे फेंककर मारे गए और उन्हें गुब्बारे में वीर्य होने का शक था. ये आर्टिकल तभी लिखा गया था. बाद में फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट आई. रिपोर्ट में वीर्य नहीं पाया गया था. इस आर्टिकल से वो हिस्सा हटा दिया गया है.
स्त्रीत्व छिपा हुआ होता है–मानसिक, शारीरिक और सांस्कृतिक तौर पर. इसलिए औरतों को ‘टेढ़ापन’, ‘छोटापन’, ‘शीघ्रपतन’ या ‘निल शुक्राणु’ के हकीमों की जरूरत नहीं पड़ती. ज्यादा से ज्यादा कोई हकीम ‘बांझपन’ ठीक करने का दावा कर सकता है मगर वो औरत के सेक्स नहीं, मां बनने से जुड़ी समस्या होती है. शहर के ‘आउटर’ की दीवारें पौरुष के वादों से पुती होती हैं. क्योंकि पौरुष आ या जा सकता है. स्त्रीत्व रिसीविंग एंड पर होता है. वो बस होता है.
स्त्रियों के पास इस होली भी फेंकने के लिए कुछ नहीं था. वो कॉन्डम इस्तेमाल नहीं करतीं कि उनमें पानी भरकर मार दें. मगर वो जरूरी नहीं है. प्रैक्टिकल भी नहीं. जो डर जाता है वो बदला लेने के बारे में नहीं सोचता.
होली पर खाना बनाने वाली दीदी नहीं आईं. मैंने उनके आने की उम्मीद भी न की थी. त्यौहार का दिन जायज़ तौर पर छुट्टी का दिन होता है. होली के बाद उनसे पूछा कि त्यौहार कैसा रहा. उन्होंने कहा वो तो बंगाली हैं, होली का क्रेज नहीं है. छुट्टी तो बस इसलिए ली थी कि सड़क पर निकलना खतरनाक हो सकता था.
इस तरह स्त्रीत्व और स्त्री घर के अंदर दुबके रहे.
मैंने अपने घर और पड़ोस की औरतों को इतने उन्मुक्त रूप से हंसते, ठिठोली करते, गरियाते और नाचते कभी नहीं देखा जितना होली पर देखा है.
यूं भी नहीं है कि लड़कियां होली नहीं खेलती. भाई साहब, महिलाओं को एक दूसरे के ब्लाउज में हाथ डालकर रंग पोतते देख लें तो आप शरमा जाएं.
महिलाओं को होली खेलते देखना एक सुखद दृश्य होता है. मैंने अपने घर और पड़ोस की औरतों को इतने उन्मुक्त रूप से हंसते, ठिठोली करते, गरियाते और नाचते कभी नहीं देखा जितना होली पर देखा है. मगर हां, किसी को कॉन्डम में रंग भरकर मारते नहीं देखा.
लड़कियां जब होली के नाम पर होने वाले यौन शोषण का विरोध करती हैं, उनपर हिंदू त्यौहारों पर अटैक करने का आरोप लगा दिया जाता है. इन पढ़ी-लिखी, अंग्रेजी में किटपिटाने वाली लड़कियों का क्या है. ये हमारी सभ्यता नहीं समझतीं. ‘वामियों’ के झांसे में आकर हिंदू त्यौहारों को बुरा कहती हैं.
होली में होने वाला यौन शोषण ज्यादा डरावना लगता है कि क्योंकि ये लाइसेंस्ड होता है.
कितनी कमाल की बात है. जो लड़की (या लड़का), जिसे आप जानते नहीं, जो आपके साथ होली नहीं खेल रही, उसे आप गुब्बारे मारेंगे ही क्यों?
मारेंगे क्योंकि होली है. होली में बुरा नहीं मानना चाहिए. और अगर आप बुरा मानें तो इसे आपकी ही कमी बताई जाएगी क्योंकि आप उनका मज़ा खराब कर रहे होंगे. जबरन किसी अनजान के हाथों गुब्बारा खाकर अगर आपका मज़ा खराब होता है तो उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता.
होली का हर गीत प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चोली छूने या बाहें मरोड़ने का लाइसेंस देता आ रहा है.
होली में होने वाला यौन शोषण ज्यादा डरावना लगता है कि क्योंकि ये लाइसेंस्ड होता है. किसी पुरुष पर किसी दूसरे पुरुष या औरत का यौन शोषण न करने का मॉरल प्रेशर नहीं होता. इसलिए रोज सर झुकाकर गली से निकलने वाला लड़का भी उस दिन शेर की तरह शिकार पर निकल सकता है और कोई उसे जज नहीं करेगा.
12-13 साल के लड़के, जिनका कंठ भी शायाद न फूटा हो, खुद घरों की छतों के ऊपर से नीचे से चलकर जा रही लड़की के मुकाबले ताकतवर पाते हैं. बित्ते भर के ये लौंडे किसी लड़के पर रंग फेंकने की जुर्रत नहीं करते, मगर कॉलेज और स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों पर पिचकारी चलाने के पहले नहीं सोचते. उस दिन इनके मां और पापा इन्हें जी भर के मस्ती करने की छूट देते हैं. और यौन शोषण की शुरूआती ट्रेनिंग में उनका साथ देते हैं.
बैकग्राउंड में जो गीत बज रहे होते हैं वो भी कमाल के होते हैं. हम गीतों की चीरफाड़ किए बिना उन्हें हर होली पर बजाते हैं.
तेरी कलाई है, हाथों में आई है
मैंने मरोड़ा तो, लगती मलाई है
या फिर
जा रे जा, डोंट टच माय चोली
ये उदाहरण हैं. होली का हर गीत प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चोली छूने या बाहें मरोड़ने का लाइसेंस देता आ रहा है. आप मुझपर बिना बात गीतों में यौन शोषण खोजने का आरोप लगा सकते हैं मगर ठहरकर ये भी सोचें कि मज़े के लिए मोड़ी जा रही कलाई हर बार लड़की की ही क्यों होती है.
2 477
प्रियत्मा !
कुछ शहद घोल दो।
अपनी ओठों की
मेरे ओठ से
प्यार से बोल दो
मुहब्ब्त की चंद बोल
खिड़कियां खोल दो
प्यार की रोशनी के लिए।
जीत भी हार भी।
फूल भी खार भी।।
चाहिए प्यार भी जिंदगी के लिए।।
2 477
प्रियत्मा !
शाम की सिंदूरी बेला में
तुम्हारा संवर कर आना
पलकें झुकी हुई शर्माना
और कंधे से आँचल का
सरकना मेरे रोम रोम को पुलकित कर दिया
उफ़्फ़फ़ प्रियत्मा
2 477
ब्रह्मचर्य क्या है ??
ब्रह्म नाम है , विराट परमात्मा का। ' चर्य ' अर्थ है , दिनचर्या। ब्रह्म + चर्य = ब्रह्म के समान दिनचर्या। ईश्वर की तरह सुंदर जीवन जीने का अभ्यास ।
बहुत से लोग कामवासना का विरोध, इसका अर्थ लगाते है , यह अर्थ बहुत संकुचित है । वंश परम्परा चलाने से अधिक काम-चिंतन आत्मघात है । आत्मघाती मत बनो। केवल वंश परम्परा चलाने के लिए, काम का सेवन करों।
गृहस्थ जीवन में रहना चाहते हो तो, वैदिक रीति से विवाह करों। धर्मपत्नी के साथ रहकर जीवन बिताओं। एक पत्नी व्रत का पालन करों, उस शाश्वत को खोजों, इस आश्रम में यही ब्रह्मचर्य है ।
2 477
अद्वितीय रूप है
कंचन,कोमल,कामिनी
कटिकृष, काया होय।
अष्ट गुणों की स्वामिनी
जान सका न कोय।।
2 477
प्रियत्मा कपल कामिनी सपना !
स्त्री ईश्वर की अद्वितीय, सुंदर और रहस्यमयी रचना है। कहते हैं कि स्त्री को समझना असंभव है। देवता तक स्त्री को समझ नहीं पाए हैं, तो मनुष्य की बिसात ही क्या? यही वजह है कि स्त्री के रहस्य हमेशा से पुरूष को आकर्षित करते आए हैं।
स्त्री को समझने, उसका मन पढ़ने, उसके भाव भंगिमा को जानने का दावा लोग करते आए हैं, पर स्त्री है कि हर दिन एक नया रूप सामने लाकर पुरूष को चमत्कृत करती आई है।
स्त्री की इसी स्वरूप के कारण स्त्री का आकर्षण सृष्टि के आदि से वर्तमान तक लगातार बना हुआ है। वैसे तो स्त्री को जानने, समझने के दावे पूर्णतः सही कभी भी नहीं हो पाए हैं, फिर भी प्राकृतिक आकर्षण और विवाह जैसे अवश्यंभावी संस्कार को सफल और संभव बनाने के लिए पुरूष के लिए स्त्री को जानने की ललक और आवश्यकता बनी रहती है।
इसी क्रम में मिली मुझे प्यारी ,कामिनी ,प्रियत्मा, कामुक्ता नस नस में भरी हुई कामिनी सपना ।
बॉडी स्ट्रक्चर रहस्यमयी पतली ,सुडौल , कामूक, नाजूक कली हैं ये हरेक मर्द की अभिलाषा होगी कि इस रति की आगोश में रम जाए ।
आवाज इतनी सुरुली की पुरुष के अंग अंग में हरकत ला दे नयन नशीली ओठ हो जैसे पुष्प की पंखुरी जिसे जानने और पाने की ललक जागृत कर दी है।
2 477
प्रियत्मा !
कुछ शहद घोल दो।
अपनी ओठों की
मेरे ओठ से
प्यार से बोल दो
मुहब्ब्त की चंद बोल
खिड़कियां खोल दो
प्यार की रोशनी के लिए।
जीत भी हार भी।
फूल भी खार भी।।
चाहिए प्यार भी जिंदगी के लिए।।
2 477
#प्रेमिणी
प्रेमिणी श्रेणी की स्त्रियां अत्यंत सुंदर, गौर वर्ण, चंचल नेत्र, गुलाबी पतले होंठ, सुराही जैसी गर्दन और लंबे केश की मालकिन होती हैं। इनकी सुंदरता के दीवाने सैकड़ों होते हैं। जो केाई एक बार इन्हें देख ले वह भूल नहीं पाती। जितना आकर्षक इनका रूप होता है, उनका सौम्य इनका स्वभाव भी होता है। इनका आचरण शुद्ध होता है। परोपकार और प्रेम की भावना इनमें प्रबल होती है। ये अपने परिवार और पति-बच्चों के लिए समर्पित होती हैं। इन्हें भोग-विलास के समस्त साधन प्राप्त होते हैं। स्वर्ण विशेष प्रिय होता है।
#कृपिणी
ऐसी स्त्रियां कमजोर शरीर वाली, सांवली त्वचा वाली, कंजूस और निर्लज्ज होती हैं। अपनी गलत हरकतों की वजह से परिवार, समाज में बदनाम होती है। इन्हें अपनी संतान और पति से कोई मोह नहीं रहता। इस कारण इनका घर-परिवार अक्सर टूट भी जाता है। प्रत्येक पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करने की चेष्टा करती है और धन पाने के लिए किसी भी पुरुष के साथ हो लेती हैं। इनके दिमाग में अपराध का कीड़ा भी पनपता रहता है। भोग-विलास पाने के लिए ये अपराध की राह पकड़ लेती हैं।
#स्वर्गिणी
ऐसी स्त्री धर्मपरायण होती है। धार्मिक कार्यों में शामिल होना इन्हें पसंद होता है। इनका परिवार व्यवस्थित तरीके से चलता रहता है। न किसी चीज की अधिक लालसा होती है और न कुछ अधिक पाने का प्रयास करती हैं। जितना होता है उसी में खुश रहती हैं। इनका अपनी संतान से विशेष लगाव होता है। धन संचय करने का गुण इनमें होता है। इस प्रकार की स्त्रियां किसी बड़े ओहदे पर भी देखी गई हैं। रूप-रंग सामान्य किंतु आकर्षक होता है। परोपकार करने में आगे रहती हैं।
#बहुवंशिनी
इन स्त्रियों का रंग गेहुआ होता है और पूरी तरह से गृहस्थ धर्म को निभाने वाली होती हैं। ये कभी झूठ नहीं बोलती और दिल की साफ होती है। पति और परिवार इनके लिए सबसे उपर होते हैं। समाज में सम्मानित होती हैं तथा उच्च पदों पर आसीन होती है। हां, इनका स्वभाव थोड़ा गर्म होता है, लेकिन जल्दी ही मान भी जाती है। दूसरों की बुराई करने वाले और दूसरों पर दोषारोपण करने वालों से ये दूर रहना पसंद करती हैं। ये अनेक संपत्तियों की मालकिन होती है। प्रेम इनका विशेष गुण होता है।
#नोट:- उपरोक्त बाते शास्त्रानुसार लिखा हूँ । इन बातों पर हम किसी तरह के प्रश्नोत्तर नही कर पाएंगे।
2 477
#ग्रन्थों_के_अनुसार_स्त्री_की_शारीरिक_बनावट_और_उनका_स्वभाव
संसार की रचना के समय ब्रह्मा ने स्त्री और पुरुष दो प्राणी बनाए और उनसे मैथुनी सृष्टि का निर्माण हुआ। अनादिकाल से स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक रहे हैं और अनादिकाल तक रहेंगे। दोनों का एक-दूसरे के बिना कोई अस्तित्व नहीं है, लेकिन हम अक्सर पौराणिक कहानियां देखते-सुनते हैं कि उनमें कोई स्त्री बहुत बहादुर, साहसी रही तो कोई कोमलांगी, सुकुमारी, सुंदर और विभिन्न कार्यों में निपुण। किसी में तीव्र यौन उत्कंठा है तो कोई बिलकुल जीवन से निरापद नजर आती है।
आज भी देखा जाए तो पुरुषों की मूल प्रकृति आमतौर पर लगभग समान ही होती है, लेकिन स्त्रियों के अनेक रूप सामने आते हैं। शायद इसीलिए स्त्रियों के स्वभाव, गुण, धर्म, प्रकृति पर अनेक काव्य रचे गए। कई लेखकों ने अपने-अपने अनुभवों के आधार पर स्त्रियों को व्यक्त करने का प्रयास किया।
कुछ पौराणिक ग्रंथों की बात करें तो उनमें शरीर लक्षण विज्ञान, हस्तरेखा शास्त्र, रमल शास्त्र आदि अनेक ग्रंथों में स्त्रियों के अनेक प्रकार बताए गए हैं। अपने गुण के अनुरूप ही वह स्त्री व्यवहार करती है और उसी के अनुरूप उसका एक नाम रखा गया है।
#हस्तिनी
ये वे स्त्रियां होती हैं जो पुरुष के मनोनुकूल होती है। इनका शरीर थोड़ा स्थूल होता है, लेकिन इनमें भोग की इच्छा प्रबल होती है। इस प्रकार की स्त्रियों का स्वभाव आलसी होता है और इनमें लज्जा, धर्म जैसे गुण कम ही पाए जाते हैं। इनके कपोल, नाक, कान तथा गर्दन मोटे होते हैं। आंखें छोटी, होंठ मोटे होते हैं चाल हाथी के समान होती है। इनकी प्रकृति लड़ने की होती है। छोटी-छोटी बातों पर लोगों से झगड़ बैठती हैं। अक्सर देखा गया है कि इस प्रकार की स्त्री विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त रहती है।
#पद्मिनी
ऐसी स्त्रियों के मन में दूसरों के लिए दया और प्रेम की भावना सदैव रहती है। इनके प्रत्येक व्यक्ति आकर्षित हो जाता है। हंस के समान चाल चाली ये स्त्री माता-पिता तथा सास-ससुर की सेवा करती हैं। इनके शरीर से कमल के समान सुगंध फैलती रहती है। इनके नाक, कान तथा होंठ छोटे होते हैं। ऐसी स्त्री सौभाग्यवती, पतिव्रता तथा कम संतान उत्पन्न करने वाली होती है। धन संग्रह करने में इनके समान दूसरी कोई नहीं हो सकती। अनेक ऐश्वर्य और सुख भोगने वाली होती है पद्मिनी प्रकार की स्त्रियां।
#शंखिनी
आमतौर पर इस श्रेणी की स्त्रियां लंबी होती हैं तथा इनके चलते समय पृथ्वी पर धम्म-धम्म की आवाज आती है। ये अपने कूल्हे हिला-हिलाकर चलती है। इनकी आंखें टेढ़ी और शरीर बेडौल होता है। इनमें क्रोध की अधिकता होती है। अपनी मर्जी चलाने वाली और किसी अन्य की बात नहीं सुनती है। इस प्रकार की स्त्री कामुक भी पाई जाती है। यहां तक कि मादक प्रदार्थों, धूम्रपान, व्यसन की आदत इन्हें होती है। अपने बुरे आचरण की वजह से समाज और परिवार में तिरस्कार का सामना करना पड़ता है।
#चित्रणी
ऐसी स्त्रियों को श्रंगार करने का बेहद शौक होता है। ज्यादा परिश्रम और घर-गृहस्थी के कार्य करना इन्हें पसंद नहीं होता, लेकिन होती बुद्धिमान है। इनका मस्तिष्क गोल, चेहरा गौर वर्ण तथा नेत्रों में चमक होती हैं। अपनी आंखों की अदाओं से हर किसी को मोहित कर लेती हैं। मोर के समान इनका स्वर होता है। गायक, नृत्यांगना, चित्रकार भी इसी श्रेणी की महिलाएं देखी गई हैं। चित्रणी प्रकृति की स्त्रियां अपने पति को पूरी तरह संतुष्ट करने में सक्षम होती हैं और उनका पूरा ध्यान रखती है।
#आतुरा
इस तरह की स्त्रियां हमेशा जल्दबाजी में ही रहती हैं। प्रत्येक कार्य को जल्दी से जल्दी पूरा करने का इनमें जुनून होता है। इस चक्कर में कई बार इनके काम बिगड़ भी जाते हैं। ये होती तो साधारण रूप-रंग वाली हैं लेकिन पति से बहुत प्रेम करती हैं। यदि इनके मन की कोई बात पूरी न हो तो पति से लड़ाई भी कर लेती हैं। इन्हें नए-नए मित्र बनाने की आदत होती है। इनके ज्यादातर मित्र स्त्री ही होते हैं। धन संचय करने में कमजोर होती है। अपने मित्रों पर अधिक खर्च कर बैठती हैं।
#डाकिनी
इस प्रकार की स्त्रियां मीठी-मीठी बातें करके अपना काम निकालना खूब अच्छी तरह जानती है। लोगों को धोखा देना इनकी प्रकृति में होता है। ये उपर से प्रत्येक व्यक्ति से बहुत निकटता और अपनापन दिखाती हैं लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें धन ऐंठने की योजना बनाती रहती हैं। यहां तक कि पति को भी धोखा देने में संकोच नहीं करती। धन की विशेष लालसा होती है और धन पाने के लिए ये अपराध तक कर बैठती हैं। देखने में सुंदर, वाणी में मधुरता इनका सबसे बड़ा गुण होता है।
2 477
प्रियत्मा ! औरतों की चाहत और इच्छाएं हमेशा से ही चर्चा का मुद्दा रही हैं. औरतों का नेचर मर्दों के समझ से थोड़ा परे है। कुछ पल ऐसे होते हैं जिनमें महिलाओं के अंदर सेक्स की भावना ज्यादा जागृत होती है।
1. मासिक धर्म के बाद :-
जब महिलाओं को मासिक धर्म होता है तो उसके करीब दो हफ्ते के बाद महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है। यह समय महिलाओं के मां बनने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। यह समय मां बनने के साथ-साथ सेक्स करने के लिए भी सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस दौरान लड़कियां संबंध बनाने के लिए बहुत आतुर होती हैं।
2. अश्लील फिल्में देखने के बाद :-
गूगल के अनुसार ये बात तो साबित हो ही चुकी है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पोर्न फिल्में देखती हैं, लेकिन ये फिल्में देखने के बाद महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा यकायक जागृत हो जाती है। अंतरंग पलों को स्क्रीन में देखने के बाद महिलाओं में यौन उत्तेजना का विकास होता है जिस वजह से वो खुद को अपने साथी को सौंप देती हैं। इसी तरह पुरुष में भी।
3. भावना में:-
महिला है तो जलन की भावना स्वाभाविक है। अपने पार्टनर को अपने वश में करने के लिए महिलाएं संबंध बनाती हैं और उन्हें हर संभव तरीके से खुश रखने की कोशिश करती हैं। ताकि उनका पार्टनर उन्हें छोड़कर कहीं न जाए।
4. अल्कोहल लेने के बाद :-
अक्सर महिलाएं अल्कोहल लेने के बाद बहक जाती हैं और वो संबंध बना लेती है। शराब पीने के बाद उनकी सेक्स के प्रति उत्तेजना बढ़ जाती है और वो संबंध बनाने के लिए राजी हो जाती हैं। अल्कोहल लेने के बाद महिलाएं संकोच छोड़ सेक्स को इंज्वाय करती हैं।
2 477
प्रिय प्रियत्मा !
यूँ ना देखा करो.....
इन नशीली आँखों से
इतना तो #मयखानों में भी वो नशा नहीं
जो नशा तेरी इन कातिल #निगाहों में है..
2 477
ऐ प्रियत्मा !
सुनो न !
जुल्फे हटा लें इन
गोरे गालों से
इन गुलाबी लरजते ओठों से
इन मादक भरी जवानी से
आलिंगन में लेकर तुम्हें
अपनी ओठों के चुम्बन से
गिला कर दूं तेरी यौवन को
उफ्फ्फ्फ
2 477
प्रियत्मा तुझे #जी भर के #देखा था...👩🚒🌿
#उसी का #पैग़ाम आया है... !!
तेरी #मासूम #निग़ाहों और
#अधर के काले #तिल पर
#कत्ल़ का #इल्ज़ाम आया है.... !!
2 477
महिलाओं में ऑर्गेज्म प्राप्त करने के लिए क्लिटोरिस के साथ प्ले करना चाहिए। महिलाओं के क्लिटोरिस में करीब 8000 नर्व एंडिंग होती हैं, जो कि क्लाइमेक्स को प्राप्त करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, जी-स्पॉट रबिंग भी ऑर्गेज्म पानी में मददगार है।
2 477
शर्म ओ हया जो बिक गई मंडियों में
जिस्म की आग उठी जब भीतर तक
कितनी कालिख लगी आज इश्क पर
देख ना पाये हम इश्क ऐ मंजर तक
कोई शिकन ना देखी इन चेहरों पर
चले हो कारवां लेकर जैसे लश्कर तक
हम तो हुवे मुफ्त बदनाम कविता में
लिख ना पाये उनके हुस्न और यौवन तक
2 477
हम तो आपकी सुंदर शरीर
नीरज नयन
संगमरमरी बाहें
लरजते ओंठ
लतिका-सा रूप को
अपने नयनो में बसाएं हैं
सुप्रभात🙏
2 477
#प्यार_की_अहमियत
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
हमेशा प्यार की कद्र उसके खोने के बाद ही होती है। पास होने पर हम उसकी अहमियत नहीं समझते है। अगर आपका पार्टनर आपको छोड़ कर चला गया है तो इस बात के लिए आपको जिंदगी भर दुखी होने की जरुरत नहीं है। बल्कि आपको अपने ब्रेकअप से कुछ अच्छा सीखना चाहिए। क्योकि जो भी होता है सब अच्छे के लिए ही होता है। दुखी होने की बजाए आपको अपने ब्रेकअप से कुछ सीख लेनी चाहिए।
ब्रेकअप के बाद समझ आती है ये बातें:
#खुद को मजबूत करना: ब्रेकअप के बाद खुद को समझाने की कोशिश करें। क्योंकि ये आपकी लाइफ है और कोई भी आपको कुछ सिखाने नहीं आएगा। ब्रेकअप से परेशान होकर रोने से आप सिर्फ दुखी होंगे।
#कद्र करना: अक्सर ब्रेकअप होने पर आप अपनी गलतियां निकालने लगते है। जरुरी नहीं है कि सारी गलती आपकी हो। ऐसे में गलती न होने पर भी आप अपने पार्टनर से मांफी मांगने लग जाते है। किसी ओर के लिए खुद की कद्र न करना ठीक नहीं है।
#परख करना: ब्रेकअप होने के बाद दोबारा किसी से प्यार करने पर आप कई बार सोचतें है। एक ब्रेकअप के बाद आप लोगों को बारीकी से समझने लगते है। इसके बाद किसी के साथ रिश्ता शरु करने से पहले अच्छी तरह से उन्हें परखते है।
#लाइफ पर ध्यान देना: जब तक आप किसी के साथ रिलेशन में होते है तब तक आप अपने बारे में कुछ भी नहीं सेचती। रिलेशन के चक्कर में आप अपनी जिंदगी के गोल्स को मिस कर देते है।
#परिवार का ख्याल: कुछ लोग अपने प्यार के चक्कर में अपने दोस्तों और प्यार को भूल जाते है। ब्रेकअप के बाद आपको इस मौके पर गवाना नहीं चाहिए बल्कि आपको अपने पेरेंट्स के साथ टाइम बिताना चाहिए।
Contenido disponible para usuarios mayores de 18 años
Al iniciar sesión en el servicio, confirmas que tienes 18 años o más.
