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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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कल रात उसकी याद पूरी रात आती रही
में जागा रोता रहा और सारी दुनिया सोती रही
आसमान में बिजली पूरी रात होती रही
बस एक बारिश थी जो मेरे साथ रोती रही
और हम पसंद ही नहीं किसी को जीने से क्या मतलब 😞😭
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ना कभी मनाया उन्होंने
ना कभी सताया हमने
बस बाते करने की मिन्नत हम किया करते थे
अब जिंदा हो कर मरने का कदम उठाया हमने 😔😞😢
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शरीर में उमड़ती वासना अक्सर उम्र नहीं देखती बस संतुष्टि चाहती है तृप्त होना चाहती है।
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अभी अखबार में पढ़ा की एक व्यापारी को फेसबुक पर एक खूबसूरत लड़की की रिक्वेस्ट आई उसने रिक्वेस्ट ऐड कर लिया फिर वह लड़की उससे इनबॉक्स में आई और प्यार मोहब्बत का इजहार करने लगी ..फिर न्यूड चैट का ऑफर किया लड़की ने इस पूरे चैट को रिकॉर्ड कर लिया और व्यापारी से ब्लैकमेल करके टुकड़े टुकड़े में 20 लाख रुपए ऐंठ लिए
थककर व्यापारी ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाया फिर पुल्स जांच में पता चला कि यह नाइजीरिया के गैंग थे और उन्होंने कमीशन बेसिस पर इंडिया में कुछ लोगों को इस काम पर लगा रखा था
इन मूर्खों ने चाणक्य का वह नीति नहीं पढा है जब एक हूण सुंदरी चंद्रगुप्त को रिझाती है तब चाणक्य कहते हैं प्रकृति का सिद्धांत है नर हमेशा मादा को रिझाता है नर हमेशा मादा के सामने प्रणय निवेदन करता है और नर हमेशा मादा को पाने के लिए लालायित रहता है ...यदि कोई मादा इसका उल्टा करें यानी कोई मादा नर के पीछे पड़े तो समझ जाओ कोई बेहद गहरी साजिश है
आप एनिमल प्लेनेट चैनल देखिए कोई भी जानवर हो चाहे वह हवा में उड़ने वाले पक्षी हो समुंदर की अतल गहराइयों की मछलियां हो या जमीन पर रहने वाले शेर बाघ भालू चीता हो सभी जीवो में नर ही मादा के पीछे पड़ा रहता है सारा दिन नर एक दूसरे से मादाओं के लिए लड़ाई झगड़े करते हैं कभी कोई मादा नर को नहीं रिझाती
यहां तक कि हीट में आई हुई कुत्तिया भी कुत्ते के पीछे नहीं पड़ती बल्कि कुत्ता ही कुत्तिया के पीछे पड़ता है
बल्कि कुछ जानवरों और पक्षियों में तो मादा को रिझाने के लिए नर को दुनिया भर के पापड़ बेलने पड़ते हैं तरह-तरह के डांस करके रिझाने होते है.. बेहद खूबसूरत घोंसला बनाना पड़ता है तब जाकर कहीं मादा रीझती है
इसीलिए मित्रों यदि कोई मादा आपको सामने से रिझाये तब आप सतर्क हो जाना क्योंकि मादा का यह नैसर्गिक गुण नहीं है कि वह किसी नर को रिझाये
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यूं तो प्रेम पर बहुत कुछ लिखा हुआ है। लेकिन जब प्रेम वास्तविक रूप में धरातल पर उतरता है तों उसका रूप बिगड़ जाता है। लोग कहते है प्रेम में दुःख नहीं मिलता और अगर हम दुःख को महसूस कर रहे हैं तों हम प्रेम में नहीं है। प्रेम में मिलने वाला दुःख वही समझ सकता है जो प्रेम में हैं जिसने प्रेम को जीया है जिसका प्रेमी हमेशा के लिए उससे दूर जा चुका है। जो हर पल हर क्षण उसे याद करके उसको महसूस कर सकता है लेकिन उससे बात नहीं कर सकता। बाकी लोगों को तो सब कुछ झूठ और बकवास लगता है। प्रेमी से बिछड़ने का दुःख क्या होता है वो बस एक प्रेमिका ही महसूस कर सकतीं हैं बाक़ी लोग तो यही कहेंगे कि प्रेम में दुःख नहीं मिलता। कृष्ण से बिछड़ने का जो दुःख राधा ने महसूस किया उसे ना तों लिखा जा सकता है और ना ही कोई दूसरा महसूस कर सकता है। जबतक हम प्रेम में एक दूसरे के साथ होते हैं तबतक हम सोचते भी नहीं है कि अलग-अलग हो जाने पर अपने आप को कैसे संभालना है। जिसके बिना एक पल एक क्षण भी नहीं बीतता उसके बिना जब जिंदगी बितानी पड़ेगी तों क्या करेंगे कैसे जीयेंगे ? मैं भी अपनी प्रेमिका से अलग हुआ हूं वह सब कुछ मैंने भी भोगा हुआ है। आज जब सोचता हूं वो दिन तों मेरी रूह भी कांप जाती है कैसे कैसे करके मैं खुद को रोकता फोन ना करने से। जिससे भी मेरी बात होती बस एक ही सवाल पूछता कि उसे भी तो मेरी याद आती होगी उसे भी तो ऐसा ही दुःख होता होगा फिर वो फ़ोन क्यों नहीं कर रही है वो भी तों रो रही होगी मेरे बिना और मेरे इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं होता। वो सभी मुझे सिर्फ दिलासा देते कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा बस कुछ दिन की बात है। किसी का भी फोन आता तों ऐसा लगता कि जैसे उसका ही फोन आया होगा।एक एक घंटे करके एक एक दिन काटे और एक एक दिन करके महीने।तब में और अब में बस इतना ही बदलाव आया है कि पहले मैं घंटों इंतजार करता था उनके फोन का अब यह विश्वास हो गया है कि फोन नहीं आयेगा। ऐसे स्थिति में इंसान हमेशा हालात से समझौता कर लेता है और अपने आप को उसी के अनुसार ढाल लेता है।
विश में आपसे बेहद प्रेम करता हूं😘💋
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● i am new here in this group...😊☺️
मैं " पुरुष " हूँ...
मैं भी घुटता हूँ , पिसता हूँ
टूटता हूँ , बिखरता हूँ
भीतर ही भीतर
रो नही पाता
कह नही पाता
पत्थर हो चुका
तरस जाता हूँ पिघलने को
क्योंकि मैं पुरुष हूँ..
.
मैं भी सताया जाता हूँ
जला दिया जाता हूँ
उस दहेज की आग में
जो कभी मांगा ही नही था
स्वाह कर दिया जाता हैं
मेरे उस मान-सम्मान का
तिनका - तिनका
कमाया था जिसे मैंने
मगर आह नही भर सकता
क्योकि मैं पुरुष हूँ..
.
मैं भी देता हूँ आहुति
विवाह की अग्नि में
अपने रिश्तों की
हमेशा धकेल दिया जाता हूं
रिश्तों का वजन बांध कर
जिम्मेदारियों के उस कुँए में
जिसे भरा नही जा सकता
मेरे अंत तक कभी
कभी अपना दर्द बता नही सकता
किसी भी तरह जता नही सकता
बहुत मजबूत होने का
ठप्पा लगाए जीता हूँ
क्योंकि मैं पुरुष हूँ..
.
हॉ.. मेरा भी होता है बलात्कार
उठा दिए जाते है
मुझ पर कई हाथ
बिना वजह जाने
बिना बात की तह नापे
लगा दिया जाता है
सलाखों के पीछे
कई धाराओं में
क्योंकि मैं पुरुष हूँ..
.
सुना है जब मन भरता है
तब आंखों से बहता है
मर्द होकर रोता है
मर्द को दर्द कब होता है
टूट जाता है तब मन से
आंखों का वो रिश्ता
तब हर कोई कहता है..
तो सुनो ...
सही गलत को
हर स्त्री स्वेत स्वर्ण नही होती
न ही हर पुरुष स्याह कालिख
मुझे सही गलत कहने वालों
पहले मेरी हालात नही जांचते ...
क्योंकि...
मैं "पुरुष" हूँ....?
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कल्पनाओं_में_प्रेम
यथार्थ के प्रेम से कई गुना
बेहतर है कल्पनाओं का प्रेम
यथार्थ का प्रेम बंधा होता है
नियम और सीमाओं से
और जब ये नियम आड़े आते हैं
तो प्रेम घुट घुट कर जीता है
और अंततः दम तोड देता है
इसलिए प्रेम सदैव
कल्पनाओं में ही बेहतर होता है।
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प्रश्न - काम इतना निंदनीय क्यों है
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काम निंदनीय नही है बल्कि काम की सहज उपलब्धि न होने के कारण काम निंदनीय बन गया
वास्तव में तो काम सर्वप्रिय है
इसकी निंदा बिलकुल ऐसा ही है जैसे भोजन आम दिनो में निंदनीय नही होता
लेकिन जब व्रत , उपवास , रोज़ा आदि रखा जाता है उन दिनो भोजन और भोजन की शुद्धि को लेकर बहुत बातें होती है जिसके कारण उन दिनो में भोजन भी निंदा का कारण बन जाता है
वैसे ही सेक्स को दुर्लभ बनाये जाने के कारण सेक्स की निंदा है
अगर वास्तव में कोई सेक्स की निंदा करता है तो जान जाना वो सेक्स को जी नही पा रहा
मैने अपने पूरे जीवन काल में सेक्स की निंदा नही की बस तब ज़रूर इसको ग़लत बोला जब इसको जीने वाला ही
इसको लेकर भयभीत हो
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#स्त्री_और_प्रेम ......
स्त्री में प्रेम की तीव्रता कदापि नही होती (perhaps)जबकि पुरुष सिर्फ़ प्रेम की तीव्रता से ही संचालित होता है।
स्त्री बिना प्रेम के भी पुरुष के साथ असानी से रह जाती है जबकि पुरुष बिना प्रेम के नही रह सकता.. विद्रोही हो जाता है।
पुरुष सहज निर्लिप्त होता है जबकि स्त्री के प्रेम में अनेकों लिप्ततांए होती है। शायद यही वजह है कि पुरुष प्रेम में #प्रणोत्सर्ग तक कर देता है.. मगर स्त्री सामान्यतः नहीं।
कई वर्षों तक प्रेम में बने रहने और फिर ब्रेकअप होने के बाद ये अनुभव हुआ है मुझे की लगता है कि प्रेम मात्र पुरुष का विषय है।
इन्डोर्फिन हार्मोन के अनलिमिटेड सीक्रेशन से मस्तिष्क एक खुमारी व दीवानगी का शिकार हो जाता है एवं चेतन मस्तिष्क की गतिविधियां सीक्रेशन इम्पैक्ट को फोलो करने लगती है। ‘सेंसेस आफ एबसेंस व गेट इट एचीव ‘ का भाव इतना तीव्र हो जाता है कि पुरुष आत्महत्या अथवा हत्या जैसे कदम उठा लेता है।
अधिक संवेदना तो शायद नहीं पर हाँ..अधिक मजबूती के साथ स्त्री तसल्ली से जिंदा रहती है।
तभी वो पति व प्रेम में से किसी एक को चुनना हो तो पति को चुनती है...प्रेम को नहीं..।
ना प्रेम होने के बावजूद भी पति को शारीरिक संसर्ग के लिए आमंत्रण भी देती है व संतानोत्पति भी करती है। वह केवल #तात्कालिक_सुविधा देखती है ,बस ! ....प्रेम को पाने के लिए मरने - मारने तक नहीं जाती क्योंकि प्रेम एक आवेग के साथ बहता है । स्त्री मात्र सुविधाजनक वर्तमान में जीना पसंद करती है ।
स्त्री का प्रेम अंगीठी की आँच सा सीमित होता है जबकि पुरुष का प्रेम दावानल सा होता है .. सबकुछ स्वाहा करने सा ....।
क्या स्त्रियों में यह आवेग संभव है ?
पता नहीं ! शायद नहीं !!
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अमेरिका की कामयाबी का राज़:
वो काम को दिमाग मे और पेनिस को योनि में रखते हैं।
हमारे यहाँ 🙈योनि को दिमाग में और काम को पेनिस पर रखते हैं।
😂😂😝🙊🙊😝😂😂☝️
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बदल जाती है,
ज़िन्दगी की सच्चाई ऊस वक़्त,
जब कोई तुम्हारा, तुम्हारे सामने तुम्हारा नहीं होता..!
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ईश्वर की वो रचना जो पुरुष की वासना के वेग को समाप्त कर सत्कर्म पर ले जाने वाली प्रकृति की सम्मानीय रचना है स्त्री।
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स्त्री_शरीर में प्रथम आकर्षण का केंद्र यह विशाल स्तन का आकार होता है योनि कदापि नहीं।
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*संभोग (Sex)*
एक पतिपत्नी एक तबेले में जाते है।
वहां एक भैंसा एक भैंस के साथ संभोग कर रहा होता है।
यह देखकर पत्नी वहां के मैनेजर से पूछती है, " यह भैंसा, दिन में कितनी बार संभोग कर सकता है?"
मैनेजर:- "दिन में छ: बार"
तब पत्नी अपने पति की ओर देखकर कहती है, *"देखा !!!"* 😏
अब बौखलाया पति भी कार्य भारवाहक से पूछता है, "आप का तात्पर्य यह है कि
यह भैंसा, दिन में एक ही भैंस से 6 बार संभोग करता है ?"
कार्यभारवाहक, "नही नही साहब, हर बार अलग अलग भैंस होती है."
तब पति मंद मंद मुस्कान के साथ पत्नी से कहता है, *"देखा !!"*😋
😝😝😝🙈🙈🙈😂😂😂😬😬🤣
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दो विपरीत लिंगी
दोस्ती हो या प्रेम
हमेशा कसौटी पर ही
खड़ा पाया जाता है
क्यूँ समझ नहीं आ पाता है
दोस्ती का जज्बा नेमत खुदा की
जिसको नवाज़ा है होगा कोई बाशिंदा
जहान से अलग खुदा के नज़दीक
यूँ ही तो खुदा को उस पर नहीं प्यार आया है
मगर विपरीत लिंगी दोस्ती
पर ही क्यूँ आक्षेप लगाया है
क्यूँ नहीं किसी को समझ आया है
हर दोस्ती की बुनियाद सैक्स नहीं होती
इमारत इतनी कमजोर नहीं होती
महज़ शारीरिक आकर्षण
और स्त्री पुरुष का संग ही क्यूँ ये दर्शाता है
यहाँ तो सिर्फ़ इनका शारीरिक नाता है
देह से इतर भी सम्बन्ध होते हैं
जो प्रेम से भी गहरे होते हैं
फिर चाहे हो कृष्ण
सखी तो एक ही बन पाई थी
पांचाली ने भी तो दोस्ती कृष्ण संग निभाई थी
पर वहाँ प्रेम दिव्यता पा गया था
दोस्ती की रस्में निभा गया था
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