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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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एक एक बूंद से बुझती है प्यास प्रियत्मा !!!
इस बून्द को बर्बाद न करें
कितनी गोद खाली रह जाती है
इस बून्द के लिए ।।
।। शुभ प्रभात ।।
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जैसे प्रेम में हृदय जलता है, ऐसा भक्ति में भी जलता है। फर्क है, जलन-जलन में भी फर्क है, सच निश्चित ही। प्रेम की जलन में तो एक तरह का ज्वर है। और भक्ति की जलन में एक तरह की शीतलता है--ठंडी आग! प्रेम की जलन में तो सिर्फ जलन ही जलन है। जैसे किसी ने तेजाब छिड़का हो घाव पर। भक्ति की जलन में जलन तो है, विरह है, पीड़ा है; लेकिन बड़ी शीतल, बड़ी शांतिदायी।
शायद इसी का नाम मुहब्बत है शेफ्ता
इक आग सी है सीने के अंदर लगी हुई।
प्रेम में भी आग लगती है, भक्ति में भी आग लगती है। लेकिन बड़ा फर्क है। प्रेम की आग सिर्फ जलाती है और भक्ति की आग जलाती ही नहीं, जगाती भी है। प्रेम की आग सुलाती है; भक्ति की आग उठाती है, जगाती है। प्रेम की आग में तुम शरीर ही रह जाते हो; भक्ति की आग में शरीर खो जाता है और चैतन्य मात्र शेष रह जाता है।
भक्ति का अर्थ है--
खोजता हूं उसे जिसने बनाया;
मिलना चाहता हूं उससे जिससे मैं आया;
स्रोत को खोजता हूं,
क्योंकि स्रोत में ही अंतिम नियति छिपी है;
आत्यंतिक को खोजता हूं
कि जिसे खोजने के बाद
फिर कोई और खोज न रह जाए
लेकिन ज्ञानी भी खोजता है और भक्त भी खोजता है। ज्ञानी की खोज ज्ञानी पर ही निर्भर होती है। भक्त कहता है
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#कामसूत्र की बातें
(1) पति और पत्नि को चाहिए कि जब किसी को सहवास की इच्छा हो तो अपने साथी को समय पूर्व सूचित करे ताकि वह इसके लिए स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रुप से तैयार कर सके.
(2) सहवास से पूर्व शोंच क्रियाओं से निवृत हो लेना तथा स्नान करना अति उत्तम है.स्नान न कर सको तो ब्रश करें हाथ पैर तथा मुंह धो लें और खुशबू लगा लें.
(3) सहवास के लिए उत्तम पहर रात का आखरी पहर है क्योंकि इस समय पेट भी खाली होता है तथा दिनभर की थकान से दोनों सहयोगी फ्रेश हो चुके होते है.परंतु अन्य समय पर यह अवश्य ध्यान दें कि पेट भरा न हो अतः सहवास से लगभग तीन चार घंटे पहले भोजन कर लें.
(4) संभोग का प्राकृतिक आसन तो यह है कि स्त्री सीधी लेटे तथा पुरुष ऊपर रहे.यह दोनों के लिए सुविधा जनक एवं लाभदायक है.परंतु आपसी सहमति से अन्य आसन भी प्रयोग किये जा सकते हैं.परंतु खड़े हो कर संभोग करने से शारीरिक क्षति होती है तथा स्त्री पुरुष के ऊपर रहे तो कभी कभी पुरुष स्पर्म पूरी तरह निकल नही पाता.जिसके कारण पुरुष जननांग में सूजन हो सकती है तथा बुखार हो सकता है.
(5) यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व अर्ध नग्न अवस्था में हो कर दोनों एक दूसरे के विशेष
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इस देश की औरतें ( घरेलू , कामकाजी, मजदूर , कामवाली बायियां, वेश्या, मजदूर और लड़कियों )ने अगर आपबीती लिखनी शुरू कर दी तो न जाने कितने ही सीना तान घूमने वाले संस्कार , ढोंगी , बाबा, सत्संगी,नेता,समाजसेवी आत्म हत्या कर लेंगे ।
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उसने जिस्म बेची अपना,गर हम शऱीफ होते तो बदन ढक सकते थे,न कि गांधी जी की फोटो छपी गुलाबी कागज उसके गुलाबी क्लोरिट्स पर कुर्बान करते ।
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"औरत" को गुलाब क्या दोगे ??
वो तो खुद बागवान हैं इस कायनात की l
इश्क करना है तो फूलों की तरह उसे सँवार कर रखो !
इश्क फूल क्यों प्रेम का उपहार दो ।
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प्रेम सम्भोग
💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕
शाम मे नशा, मन मे शरारत है
दिल मे तड़प, उमंगो मे हिमाकत है
होटो मे प्यास, आँखों मे इजाजत है
जिव्हा मे मदिरा, तन मे हरारत है
बदन मे तनाव, यौवन मे कसावट है
उरोजो मे उठान, योनी मे तरावट है
बारिश की बुँदे, जिस्मों को भिगावत है
भीगा वस्त्र, सुंदर रूप को दिखावत है
आँखों का तीर, गोरी को निहारत है
हाथों का जाल, वक्क्षो को छिपावत है
प्रेमी का हाथ, कूल्हों को सहलावत है
यौवन कलश, सीने मे छुपावत है
अधरों की मदिरा, पीने को सर झुकावत है
अधरों से अधरों का मिलन, सांसों को महकता है
जिव्हा स्पर्श, प्रेम मे वासना भर जाता है
पंख चीर मदिरा सागर, को मथ उफान उठाता है
मृदु अमृत, प्रेमी की प्यास बुझाता है
वस्त्र भार बन, तन से निकल जाता है
निवस्त्र यौवन, कामेन्द्रियाँ विचलित कर जाता है
चुचियों का गहरा घेरा, अधरों को ललचाता है
हो व्याकुल प्रेमी, बच्चा बन जाता है
स्तन पीता, चूचुकों को चुभलाता है
लिंग देख, योनी प्यारी, इठलाता है
अकड़-अकड़ के, योनी को रिझाता है
पा निमंत्रण, योनी मुस्कराती है
रह-रह के अपना, मधु बहाती है
होटो मे प्यास, जीभ मे तड़प भर जाती है
योनी रस को पीने, छत्ते मे घुस जाती है
दे-दे क
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प्रियत्मा !!
तेरी जुल्फों की काली घटाओ से टपकती बुँदे,
बदन पे गिर, नशे में भिगोये जा रही है
तेरी चंचल मृगनयनी आंखे,
मुझे नीले सागर में डुबोये जा रही है
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प्यास !!!
ले आयी है ... साकी... तेरे मैखाने में ,
डाल दे.. हुस्न की मय .. रूह के पैमाने में...!!!
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सेक्स और रोमांस बहुत किये और देखे भी पर बताना
क्या आप लोग #भगवान को #देखा है ?
अक्सर मित्र कहेंगे नहीं ! कुछ ये भी कहेंगे भगवान कौन है ?
मैं कहता हूँ मैं भगवान को देखा ही नही बल्कि मैं उनके साथ भी रहा हूँ ।
भगवान मतलब GOD
G - Generator - उतपन्न करने वाला - (ब्रह्मा)
O - Operator - पालन करने वाला - (विष्णु)
D - Destroyer - बुराइयों को नाश करने वाला - (शिव)
और ये तीनों शक्ति ध्यान से देखना आपके माँ पिता में है । तो अब कहो देखे हो न भगवान को ???
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तेरे जाने के बाद चादर की सिलवटे देखता हूं हर रात।
तेरे बदन की वो मादक खुशबु
इन फूलों में तो नही समा गई।
मुलायम तो बिस्तर भी नही जैसे तेरे गाल और बक्ष थे।
तेरी घनी झुलफो के नीचे वाली
वो शाम का नशा कुछ और था।
वो सुर्ख होठो पे लिया हर एक चुम्बन याद आता है अब।
तेरा हर रात मुझे आलिंगन करना।
वो गर्माहट कैसे भूल सकता हु मैं।
नितंबों पे तेरा वो कोमल सा स्पर्श से जैसे
रोम रोम खिल उठता हो।
झुल्फे भी अटखेलियां करती थी तेरी
जब हाथ फेरा करता था।
लबो का वो तेरा रस पीना भी याद है।
जैसे कोई भवरा फूलो का रसपान करता हो।
तेरे हाथो का स्पर्श जैसे रोमांच से भर देता था मन।
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महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की प्रथम यौन संहिता है जिसमें सेक्स की बारीकियों और हरेक पहलु को तथ्यों के साथ लिखा गया है।
फोरप्ले के दौरान "किस" यानी चुम्बन भी अहम् रॉल अदा करता है. कामसूत्र में लवमेकिंग को स्लो प्रोसेस बताया गया है यानि सेक्स के दौरान बिलकुल भी हड़बड़ी नहीं होनी चाहिए बल्कि धीरे-धीरे प्यार जताना एक महत्वपूर्ण बात है.किस करने का मतलब सिर्फ यह नहीं कि आप पार्टनर के साथ लिप लॉक करें.
फोरप्ले का मकसद दोनों पार्टनर की उत्तेजना को चरम तक पहुंचाना ताकि आप दोनों सेक्शुअल ऐक्ट को इंजॉय कर सकें. ऐसे में आप पार्टनर के होंठों के साथ-साथ गर्दन, कान के पीछे, चेस्ट पर या अन्य ऐसी संवेदनशील जगहों पर भी किस कर सकते हैं. पार्टनर को तब तक किस करते रहें जब तक उनकी सांसें प्रत्येक किस के साथ तेज न होने लगे.
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#स्त्रीं_में_कामोत्तेजना_वाले_अंग ....
शिश्निका (सर्वाधिक संवेदनशील), भगोष्ठ बाह्य एवं आंतरिक, जांघें, नाभि क्षेत्र, स्तन, निप्पल, गर्दन का पिछला भाग, होंठ एवं जीभ, कानों का निचला भाग, कांख, रीढ़, नितम्ब, घुटनों का पृष्ठ मुलायम भाग, पिंडलियां तथा तलवे । स्त्री के इन भागों में कामोत्तेजना अत्याधिक होती है ।
स्त्री के इन अंगों को कोमलता पूर्वक हाथों या जीभ से सहलाने से वह शीघ्र ही द्रवित होकर पुरुष से लिपटने लगती है । हाथों एवं उंगलियों द्वारा इन #अंगों को उत्तेजित करने के साथ ही यदि इन्हें चुम्बन आदि भी किया जाए तो नारी की कामाग्नि तेजी से भड़क उठती है एवं रति क्रीड़ा के आनन्द में अकल्पित वृद्धि होती है । कोई अनिवार्य नही है की स्त्री के सभी अंगों को होंठ अथवा जिव्हा से आन्दोलित किया जाए । यह दोनों की परस्पर सहमति एवं रुचि पर निर्भर करता है कि #प्रणय_क्रीड़ा के समय किन स्थानों पर होठ एवं जीभ का प्रयोग किया जाए ।
ऐसे करने का उद्देश्य यही होता है कि प्रत्येक #रति_क्रीड़ा में नर और नारी को रोमांचक आनन्द की उपलब्धि समान रूप से होनी चाहिए । नारी की चित्तवृत्ति सदा एक समान नहीं रहती है । किसी दिन यदि वह मानसिक
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इस स्थिति में हल्के से कान गर्दन और पीठ पर चुम्बन लीजिये फिर अनुभव और आनन्द की सीमा बताइये।
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रसभरी स्त्री के साथ सम्भोग में आपको ज्यादा समय लगता है ये देर से गर्म और देर तक सम्भोग करते हैं ।
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जरूरी नही स्त्री तुम्हे आवाज देकर बुलाये आनन्द की सागर में मोती चुनने । पलटकर नजरों से भी बोलती है।
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