es
Feedback
साधनाओं से संजीवनी

साधनाओं से संजीवनी

Ir al canal en Telegram

यहां बताए जाने वाले उपाय मात्र आपकी जानकारी के लिए हैं कोई भी उपाय करने से पहले अपने गुरुजी या पण्डितजी की सलाह लेना अनिवार्य है।

Mostrar más
543
Suscriptores
+124 horas
+77 días
+5930 días
Archivo de publicaciones
*इस वर्ष भाई दूज कब मनाएं :* भाई दूज का त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में बहनें अपने भाईयों को टीका करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस वर्ष 2023 में भाई-दूज का पर्व 14 और 15 नवंबर यानि मंगलवार और बुधवार दोनों ही दिन मनाया जाएगा। *भाई को तिलक लगाने का शुभ समय:* 📖 पंचांग के अनुसार : https://t.me/sss963 14 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट तक भाई को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं, 15 नवंबर को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक भाई को टीका लगाने का शुभ समय है।

*भाईदूईज :* ➡️ *14 एवं 15 नवम्बर 2023 मंगलवार को भाईदूज है।* *भाईदूज के दिन भाई, बहन के घर का ही खाना खाए।* *ऐसा करने से भाई की आयुवृद्धि होती है।* *पहला कौर बहन के हाथ से खाए।* *स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन जो बहन के हाथ से भोजन करता है, वह धन एवं उत्तम सम्पदा को प्राप्त होता है।* *अगर बहन न हो तो मुँह बोली बहन या मौसी/मामा की पुत्री को बहन मान ले।* *अगर वह भी न हो तो किसी गाय अथवा नदी को ही बहन बना ले और उसके पास भोजन करे।* *कहने का आश्रय यह है कि यम द्वितीया को कभी भी अपने घर भोजन न करे।* *आज के दिन बहन अपने भाई की 3 बार आरती जरूर उतारे।* *आज के दिन बहन भाई को तथा भाई बहन को कोई न कोई उपहार जरूर दे।* *स्कंदपुराण के अनुसार विशेषतः वस्त्र तथा आभूषण।* *आज के दिन भाई बहन का यमुना जी में नहाना भी बहुत शुभ है।* *कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना जी में स्नान करने वाला पुरुष यमलोक का दर्शन नहीं करता।* *नारदपुराण के अनुसार* *ऊर्ज्जशुक्लद्वितीयायां यमो यमुनया पुरा।* *भोजितः स्वगृहे तेन द्वितीयैषा यमाह्वया।।* *पुष्टिप्रवर्द्धनं चात्र भगिन्या भोजनं गृहे।* *वस्त्रालंकारपूर्वं तु तस्मै देयमतः परम् ।।* *यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः। संभोजितो निजकरात्स्वसृसौहृदेन ।।* *तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्ति प्राप्नोति रत्नधनधान्यमनुत्तमं सः।।* *कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्वकाल में यमुनाजी ने यमराज को अपने घर भोजन कराया था, इसलिए यह ‘यम द्वितीया’ कहलाती है।* *इसमें बहन के घर भोजन करना पुष्टिवर्धक बताया गया है।* *अतः बहन को उस दिन वस्त्र और आभूषण देने चाहिए।* *उस तिथि को जो बहन के हाथ से इस लोक में भोजन करता है, वह सर्वोत्तम रत्न, धन और धान्य पाता है।* https://t.me/sss63 *भाईदूईज :* *यह पर्व भाई-बहेन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन बहेन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है। इस पर्व का महत्व इस प्रकार है :-* *धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन ही यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। तब यमराज ने प्रसन्न होकर उसे यह वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। सूर्य की पुत्री यमुना समस्त कष्टों का निवारण करने वाली देवी स्वरूपा है।* *उनके भाई मृत्यु के देवता यमराज हैं। यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और यमुना और यमराज की पूजा करने का बड़ा माहात्म्य माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती है।* *स्कंद पुराण में लिखा है कि इस दिन यमराज को प्रसन्न करने से पूजन करने वालों को मनोवांछित फल मिलता है। धन-धान्य, यश एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है।* *भाई की उम्र बढ़ानी है तो करें यमराज से प्रार्थना :* *सबसे पहले बहन-भाई दोनों मिलकर यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें तथा सबको अर्घ्य दें। बहन भाई की आयु-वृद्धि के लिए यम की प्रतिमा का पूजन करें। प्रार्थना करें कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी कर दें।* *इसके बाद बहन भाई को भोजन कराती है। भोजन के बाद भाई को तिलक लगाती है। इसके बाद भाई यथाशक्ति बहन को भेंट देता है। जिसमें स्वर्ण,आभूषण, वस्त्र आदि प्रमुखता से दिए जाते हैं। लोगों में ऐसा विश्वास भी प्रचलित है कि इस दिन बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी उम्र बढ़ती है और उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।* *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें  व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें*   *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*दिनांक - 14 नवम्बर 2023 :* *दिन - मंगलवार* *विक्रम संवत - 2080* *शक संवत -1945* *अयन - दक्षिणायन* *ऋतु - हेमंत ॠतु* *मास - कार्तिक* *पक्ष - शुक्ल* *तिथि - प्रतिपदा दोपहर 02:36 तक तत्पश्चात द्वितीया* *नक्षत्र - अनुराधा 15 नवम्बर रात्रि 03:24 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा* *योग - शोभन दोपहर 01:57 तक तत्पश्चात अतिगण्ड* *राहुकाल - शाम 03:10 से शाम 04:34 तक* *सूर्योदय-06:49* *सूर्यास्त- 17:56* *ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:09 से 06:00 तक* *निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:58 से 12:50 तक* *दिशाशूल - उत्तर दिशा में* *व्रत पर्व विवरण - गुजराती नूतन वर्ष वि.सं. २०८० प्रारम्भ, जैन वीर संवत २५५०, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), भाईदूज, यम-भरत द्वितीया* *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *नूतन वर्ष (गुजराती विक्रम संवत् 2080): 14 नवम्बर 2023* *कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा वर्ष का प्रथम दिन है (गुजराती विक्रम संवत् के अनुसार)। वर्ष के प्रथम दिन जो हर्ष-उल्लास से जियेगा उसका पूरा वर्ष हर्ष-उल्लास, आनंद में बीतेगा। दिन के प्रारम्भ में आनंदित-उल्लसित हों तो पूरा दिन अच्छा जायेगा। तो यह तुम्हारे स्वभाव में जो आनंद छुपा है उसको जगाने की बड़ी व्यापक व्यवस्था है।* *वर्ष के प्रथम दिन जीवन में उन्नति के लिए ६ बातें समझ लेनी चाहिए :* *(१) लक्ष का निश्चय, (२) मन में उत्साह (३) अपने पर और ईश्वर पर भरोसा, (४) अपने पर विश्वास और अपने साथियों पर विश्वास रखने की कला का विकास, (५) जीवन में धर्मपालन का फल क्या है ? जीवन में धर्म तो हो परंतु धर्म के फल की भी परीक्षा कर लेनी चाहिए (६) जीवन के प्रथम व अंतिम लक्ष्य को अभी से तय कर लो और उसी के अनुरुप आचरण करो।* *भाईदूज : 14 नवम्बर 2023 :* *भाईदूज भाई-बहन के निर्दोष, निष्काम भाव को बढ़ोतरी देनेवाला पर्व हैं। संयमनीपुरी के देवता यमराज अपनी बहन यमी से भोजन पाकर बड़े तृप्त हुए। बोले : "बहन। जो माँगना है वह माँग ले।"* *यमी : "भैया। द्वितीया को जो भी तुम्हारी यमपुरी में आयें उनको सद्गति मिल जाय।"* *यमराज बोले : "इससे व्यवस्था भंग हो जायेगी फिर भी बहन।* *समाज बहन-भाई का मधुर संबंध समझकर संयमी जीवन जीये।* *इसलिए मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि आज के दिन बहन के हाथ से जो भाई भोजन पायेंगे और बहन के शील व धर्म की रक्षा का संकल्प करेंगे तथा बहनें भाई की उन्नति का संकल्प करेंगी तो उन सभीकी सद्गति होगी।"* *गुरुओं की दिवाली अगर तुम मनाने लग जाओगे तो आनंद की झलकें पाते पाते उनकी कृपा से देर-सवेर तुम्हारा आनंद स्वभाव प्रकट हो ही जायेगा।* *नूतन वर्ष के प्रथम दिन उठायें पुण्यमय दर्शन का लाभ :* https://t.me/sss63 *नूतन वर्ष के प्रथम दिन मंगलमय चीजों का दर्शन करना भी शुभ माना गया है, पुण्य-प्रदायक माना गया है। परम पुण्यमय तो भगवान हैं और भगवान को पाये महापुरुष ही हैं। परंतु जिनको संत दर्शन नहीं मिल पाते उनके लिए दीपावली के दिन, नूतन वर्ष के दिन मंगलमय चीजों का दर्शन करना भी शुभ माना गया है, पुण्य-प्रदायक माना गया है।* *ब्रह्मवैवर्त पुराण (श्री कृष्ण जन्म खंड अध्याय : ७६) में आता है कि 'उत्तम ब्राह्मण, तीर्थ, वैष्णव, देव-प्रतिमा, सूर्यदेव, सती स्त्री, संन्यासी, यति, ब्रह्मचारी, गौ, अग्नि, गुरु, गजराज, सिंह, श्वेत अश्व, शुक, कोकिल, खंजरीट (खंजन), हंस, मोर, नीलकंठ, शंख पक्षी, बछड़े सहित गाय, पीपल वृक्ष, पति-पुत्र वाली नारी, तीर्थयात्री, दीपक, सुवर्ण, मणि, मोती, हीरा, माणिक्य, तुलसी, श्वेत पुष्प, फल, श्वेत धान्य, घी, दही, शहद, भरा हुआ घड़ा, लावा, दर्पण, जल, श्वेत पुष्पों की माला, गोरोचन, कपूर, चाँदी, तालाब, फूलों से भरी हुई वाटिका, शुक्ल पक्ष का चन्द्रमा, चंदन, कस्तूरी, कुंकुम, पताका, अक्षयवट (प्रयाग तथा गया स्थित वटवृक्ष), देववृक्ष (गूगल), देवालय, देवसंबंधी जलाशय, देवता के आश्रित भक्त, देववट, सुगंधित वायु, शंख, दुंदुभि, सीपी, मूँगा, स्फटिक मणि, कुश की जड, गंगाजी की मिट्टी, कुश, ताँबा, पुराण की पुस्तक, शुद्ध और बीजमंत्रसहित भगवान विष्णु का यंत्र, चिकनी दूब, रत्न, तपस्वी, सिद्ध मंत्र, समुद्र, कृष्णसार (काला) मृग, यज्ञ, महान उत्सव, गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूलि, गौशाला, गोखुर, पकी हुई खेती से भरा खेत, सुंदर (सदाचारी) पद्मिनी, सुंदर वेष, वस्त्र एवं दिव्य आभूषणों से विभूषित सौभाग्यवती स्त्री, क्षेमकरी, गंध, दूर्वा, चावल और अक्षत (अखंड चावल), सिद्धान्न (पकाया हुआ अन्न) और उत्तम अन्न- इन सबके दर्शन से पुण्यलाभ होता है।* *(ऋषि प्रसाद : अक्टूबर 2023)* *संत श्री आशारामजी बापू आश्रम* *भाईदूईज पर भाई बहन को इस तरह भोजन कराए तो भाई की होगी लंबी उम्र।*

*सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ॐकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी।* *पूज्य बापूजी - अमदावाद - 19th Oct. 2009* *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें  व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें*   *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*दिनांक - 12 नवम्बर 2023* *दिन - रविवार* *विक्रम संवत - 2080 (गुजरात - 2079)* *शक संवत -1945* *अयन - दक्षिणायन* *ऋतु - हेमंत ॠतु* *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आश्विन)* *पक्ष - कृष्ण* *तिथि - चतुर्दशी दोपहर 02:44 तक तत्पश्चात अमावस्या* *नक्षत्र - स्वाती 13 नवम्बर रात्रि 02:51 तक तत्पश्चात विशाखा* *योग - आयुष्मान शाम 04:25 तक तत्पश्चात सौभाग्य* *राहुकाल - शाम 04:34 से शाम 05:58 तक* *सूर्योदय-06:48* *सूर्यास्त- 17:56* *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* *व्रत पर्व विवरण - नरक चतुर्दशी (तैलाभ्यांगस्नान),दीपावली, दीपमालिका, महालक्ष्मी-शारदा-कुबेर पूजन,बही खाता पूजन।* *दिवाली पर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस तरह संकल्प करके जप करें : नूतन वर्ष और सोमवती अमावस्या पर इतना करे पूरा वर्ष अच्छा रहेगा*⤵ *दिवाली के दिन* 🎇 *दिवाली के दिन अपने घर के बाहर सरसों के तेल का दिया जला देना, इससे गृहलक्ष्मी बढ़ती है।* *दिवाली की रात प्रसन्नतापूर्वक सोना चाहिये।* *घर में थोड़ी खीर कटोरी या दॊने में डालकर और नारियल लेकर के घूमना और मन में "लक्ष्मी- नारायण" जप करना और घर के बाहर खीर ऐसी जगह रखना जहाँ किसी का पैर ना पड़े और गाय, कौए आदि खा जाएँ और नारियल अपने घर के मुख्य द्वार पर फोड़ देना और इसकी प्रसादी बाँटना। इससे घर में आनंद और सुख -शांति रहेगी।* *दिवाली के दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर नीम व अशोक (आसोपाल ) के पत्तों का तोरण लगा देना , इस पर से पसार होने वाले की रोग प्रतिकारक शक्ति बढेगी।* *दिवाली के दिन अगर घर के लोग गाय के गोबर के जलते हुए कंडे पर ५-५ आहुतियाँ डालते हैं, तो उस घर में सम्पदा व संवादिता की सम्भावना बढ़ जाती है। घी, गुड़, चन्दन चूरा, देशी कपूर, गूगल, चावल, जौ और तिल। ५-५ आहुति इन मंत्रों को पढ़कर डालें - स्थान देवताभ्यो नमः, ग्राम देवताभ्यो नमः, कुल देवताभ्यो नमः। फिर २-५ आहुतियाँ लक्ष्मीजी के लिए ये मंत्र बोलकर डालें -श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।* *पूज्य बापूजी - उरली कंचन -16th Oct 10* *दिवाली की रात मंत्र सिद्धि :** *दिवाली की रात भूलना नहीं जप, ध्यान, सुमिरन सफल होता है, इसलिये स्वास्थ्य का मंत्र जप लेना और संम्पति प्राप्तिवाले संम्पति का लक्ष्मी का मंत्र अथवा श्री हरि वाला मंत्र जप लेना और भगवत प्राप्ति वाले तो संकल्प करना –* *ॐकार मंत्र गायत्री छंद परमात्मा ऋषि।* *अंतर्यामी देवता, अंतर्यामी प्रीति अर्थे जपे विनियोगः।* *लंबा श्वास लो ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ..........* *-Pujya Bapuji Paithan Maharashtra 18 October 2010.* *परम पूज्य सद्गुरुदेव द्वारा गत वर्षों में दिवाली के समय बताई गयी कुछ बातें -* *पूजा के स्थान पर मोर-पंख रखने से लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है...* *दीपावली के दिन लौंग और इलाइची को जलाकर राख कर दें; उससे फिर गुरुदेव (की फोटो) को तिलक करें; लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है, बरकत होती है।* *दीपावली की संध्या को तुलसी जी के निकट दिया जलायें, लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने में मदद मिलती है। कार्तिक मास में तुलसीजी के आगे दिया जलाना पुण्य-दाई है, और प्रातः-काल के स्नान की भी बड़ी भारी महिमा है।* *दीपावली, जन्म-दिवस, और नूतन वर्ष के दिन, प्रयत्न-पूर्वक सत्संग सुनना चाहिए।* *दीपावली की रात का जप हज़ार गुना फलदाई होता है; ४ महा-रात्रियाँ हैं - दिवाली, शिवरात्रि, होली, जन्माष्टमी - यह सिद्ध रात्रियाँ हैं, इन रात्रियों का अधिक से अधिक जप करके लाभ लेना चाहिए।* *दीपावली के अगले दिन , नूतन वर्ष होता है ; उस दिन, सुबह उठ कर थोडी देर चुप बैठ जाएँ; फिर, अपने दोनों हाथों को देख कर यह प्रार्थना करें:* *कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर-मध्ये च सरस्वती।* *कर-मूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनं।।* *अर्थात -* *मेरे हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी जी का वास है, मेरे हाथों के मध्य भाग में सरस्वती जी हैं; मेरे हाथों के मूल में गोविन्द हैं, इस भाव से अपने दोनों हाथों के दर्शन करता हूँ...* *फिर, जो नथुना चलता हो, वही पैर धरती पर पहले रखें; दाँया चलता हो, तो ३ कदम आगे बढायें, दांए पैर से ही; बाँया चलता हो, तो ४ कदम आगे बढायें, बाँए पैर से ही;* *नूतन वर्ष का दिन जो व्यक्ति हर्ष और आनंद से बिताता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष और आनंद से जाता है।* https://t.me/sss963 *सोमवती अमावस्या पर विशेष मंत्र :* *13 नवम्बर 2023 सोमवार को सूर्योदय से दोपहर 02:56 तक सोमवती अमावस्या है।* *जिनको पैसो की कमजोरी है तो तुलसी माता को १०८ प्रदिक्षणा करें और श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना, तो गरीबी चली जायेगी।* *- Pujya Bapuji Hyderabad 5th July 2013* *ग़रीबी - दरिद्रता मिटाने के लिए :*

🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 https://t.me/sss963 🌷 *सोमवती अमावस्या पर विशेष मंत्र* 🌷 ➡️ *13 नवम्बर 2023 सोमवार को सूर्योदय से दोपहर 02:56 तक सोमवती अमावस्या है।* 💵 *जिनको पैसो की कमजोरी है तो तुलसी माता को १०८ प्रदिक्षणा करें | और श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना | तो गरीबी चली जायेगी |* 🙏🏻 *- Pujya Bapuji Hyderabad 5th July 2013* 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🌷 *ग़रीबी - दरिद्रता मिटाने के लिए* 🌷 🙏🏻 *सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ॐकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी |* *पूज्य बापूजी - अमदावाद - 19th Oct. 2009*

🌤️ *दिनांक - 12 नवम्बर 2023* 🌤️ *दिन - रविवार* 🌤️ *विक्रम संवत - 2080 (गुजरात - 2079)* 🌤️ *शक संवत -1945* 🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️ *ऋतु - हेमंत ॠतु* 🌤️ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार आश्विन)* 🌤️ *पक्ष - कृष्ण* 🌤️ *तिथि - चतुर्दशी दोपहर 02:44 तक तत्पश्चात अमावस्या* 🌤️ *नक्षत्र - स्वाती 13 नवम्बर रात्रि 02:51 तक तत्पश्चात विशाखा* 🌤️ *योग - आयुष्मान शाम 04:25 तक तत्पश्चात सौभाग्य* 🌤️ *राहुकाल - शाम 04:34 से शाम 05:58 तक* 🌞 *सूर्योदय-06:48* 🌤️ *सूर्यास्त- 17:56* 👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* 🚩 *व्रत पर्व विवरण - नरक चतुर्दशी (तैलाभ्यांग स्नान),दीपावली,दीपमालिका,महालक्ष्मी-शारदा-कुबेर पूजन,बही खाता पूजन* 💥 *विशेष - 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 👉🏻 *दिवाली पर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस तरह संकल्प करके जप करे | नूतन वर्ष और सोमवती अमावस्या पर इतना करे पूरा वर्ष अच्छा रहेगा*⤵️ https://youtu.be/ke5uCWWqTjc 🌷 *दिवाली के दिन* 🌷 🎇 *दिवाली के दिन अपने घर के बाहर सरसों के तेल का दिया जला देना, इससे गृहलक्ष्मी बढ़ती है ।* 🎇 *दिवाली की रात प्रसन्नतापूर्वक सोना चाहिये ।* 🍚 *थोड़ी खीर कटोरी में डाल के और नारियल लेकर के घूमना और मन में "लक्ष्मी- नारायण" जप करना और खीर ऐसी जगह रखना जहाँ किसी का पैर ना पड़े और गाये, कौए आदि खा जाएँ और नारियल अपने घर के मुख्य द्वार पर फोड़ देना और इसकी प्रसादी बाँटना । इससे घर में आनंद और सुख -शांति रहेगी ।* 🎇 *दिवाली के दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर नीम व अशोक (आसोपाल ) के पत्तों का तोरण लगा देना , इस पर से पसार होने वाले की रोग प्रतिकारक शक्ति बढेगी ।* 🎇 *दिवाली के दीन अगर घर के लोग गाय के गोबर के जलते हुए कंडे पर ५-५ आहुतियाँ डालते हैं, तो उस घर में सम्पदा व संवादिता की सम्भावना बढ़ जाती है । घी, गुड़, चन्दन चूरा, देशी कपूर, गूगल, चावल, जौ और तिल । ५-५ आहुति इन मंत्र को पढ़कर डालें - स्थान देवताभ्यो नमः, ग्राम देवताभ्यो नमः, कुल देवताभ्यो नमः । फिर २-५ आहुतियाँ लक्ष्मीजी के लिए ये मंत्र बोलकर डालें -श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा ।* 🙏🏻 *पूज्य बापूजी - उरली कंचन -16th Oct 10* 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🌷 *दिवाली की रात मंत्र सिद्धि* 🌷 🎇 *दिवाली की रात भूलना नहीं जप, ध्यान, सुमिरन सफल होता है, इसलिये स्वास्थ्य का मंत्र जप लेना और संम्पति प्राप्तिवाले संम्पति का लक्ष्मी का मंत्र अथवा श्री हरि वाला मंत्र जप लेना और भगवत प्राप्ति वाले तो संकल्प करना –* 🌷 *ॐकार मंत्र गायत्री छंद परमात्मा ऋषि |* *अंतर्यामी देवता, अंतर्यामी प्रीति अर्थे जपे विनियोग |* *लंबा श्वास लो ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ..........* 🙏🏻 *-Pujya Bapuji Paithan Maharashtra 18 October 2010.* 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🌷 *परम पूज्य सदगुरुदेव द्वारा गत वर्षों में दिवाली के समय बताई गयी कुछ बातें -* 🎇 *पूजा के स्थान पर मोर-पंख रखने से लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है...* 🎇 *दीपावली के दिन लौंग और इलाइची को जलाकर राख कर दें; उससे फिर गुरुदेव (की फोटो) को तिलक करें; लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है, बरकत होती है |* 🎇 *दीपावली की संध्या को तुलसी जी के निकट दिया जलायें, लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने में मदद मिलती है; कार्तिक मास में तुलसीजी के आगे दिया जलाना पुण्य-दाई है, और प्रातः-काल के स्नान की भी बड़ी भारी महिमा है |* 🎇 *दीपावली, जन्म-दिवस, और नूतन वर्ष के दिन, प्रयत्न-पूर्वक सत्संग सुनना चाहिए |* 🎇 *दीपावली की रात का जप हज़ार गुना फलदाई होता है; ४ महा-रात्रियाँ हैं - दिवाली, शिवरात्रि, होली, जन्माष्टमी - यह सिद्ध रात्रियाँ हैं, इन रात्रियों का अधिक से अधिक जप करके लाभ लेना चाहिए |* 🙏🏻 *दीपावली के अगले दिन , नूतन वर्ष होता है ; उस दिन, सुबह उठ कर थोडी देर चुप बैठ जाएँ; फिर, अपने दोनों हाथों को देख कर यह प्रार्थना करें:* 🌷 *कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर-मध्ये च सरस्वती,* *कर-मूले तू गोविन्दः, प्रभाते कर दर्शनं ||* ➡ *अर्थात -* *मेरे हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी जी का वास है, मेरे हाथों के मध्य भाग में सरस्वती जी हैं; मेरे हाथों के मूल में गोविन्द हैं, इस भाव से अपने दोनों हाथों के दर्शन करता हूँ...* 🙏🏻 *फिर, जो नथुना चलता हो, वही पैर धरती पर पहले रखें; दाँया चलता हो, तो ३ कदम आगे बढायें, दांए पैर से ही; बाँया चलता हो, तो ४ कदम आगे बढायें, बाँए पैर से ही;* 🙏🏻 *नूतन वर्ष का दिन जो व्यक्ति हर्ष और आनंद से बिताता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष और आनंद से जाता है |*

11 नवम्बर - नरक चतुर्दशी की रात्रि जप व जागरण के लिए विशेष लाभदायी है। मंत्रसिद्धि प्रदायक और मंत्र के प्रभाव को बढ़ानेवाली है। https://t.me/sss963 मंत्र को चैतन्यता प्रदान करनेवाली है। इस रात्रि को (विशेषकर शाम की संध्या के समय) यदि जप न किया जाय तो मंत्र मलीन हो जाता है और जप करते हैं तो मंत्र विशेष चैतन्यरूप हो जाता है। #SantShriAsharamjiBapu

*दमा के रोगियों के लिए :* *(१) लौंग, सोंठ, काली मिर्च व मिश्री का १ ग्राम समभाग चूर्ण व २ चुटकी सेंधा नमक थोड़े-से शहद में मिलाकर ३-४ बार चटायें।* https://t.me/sss981 *(२) उपरोक्त उपायों से कफ पिघल कर बाहर न आ रहा हो तो दो चम्मच मुलेठी (यष्टिमधु) चूर्ण व १ चम्मच सेंधव नमक लगभग एक लीटर गुनगुने पानी में मिलाकर पियें और उल्टी करें, उलटी न हो तो गले में उँगली डाल के उल्टी कर लें।* *(३) पुराने दमे में रात को सोते समय २ चम्मच सरसों का तेल गर्म पानी के साथ सेवन करें और हल्के गुनगुने सरसों के तेल में २ चुटकी सेंधव नमक मिलाकर १५-२० मिनट छाती पर मालिश करें ।* *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की सचोट साधना-विधियाँ :* 1⃣ *धनतेरस से आरंभ करें :* *सामग्रीः दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र, धूप अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र।* *विधिः साधक अपने सामने गुरुदेव व लक्ष्मीजी के फोटो रखे तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र (रक्त कंद) बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दे। उस पर केसर से सतिया बना ले तथा कुमकुम से तिलक कर दे। बाद में स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की 7 मालाएँ करे। तीन दिन तक ऐसा करना योग्य है। इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है। मंत्र जप पूरा होने के पश्चात् लाल वस्त्र में शंख को बाँधकर घर में रख दें। कहते हैं – जब तक वह शंख घर में रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी।* *मंत्रः ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम् गृहे स्थिरो ह्रीं ॐ नमः।* https://t.me/sss963 2⃣ *दीपावली से आरंभ करें :* *दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रकार की साधनाएँ करते हैं। हम यहाँ अपने पाठकों को लक्ष्मी प्राप्ति की साधना का एक अत्यन्त सरल व मात्र त्रिदिवसीय उपाय बता रहे हैं।* *दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात् भाईदूज तक एक स्वच्छ कमरे में धूप, दीप व अगरबत्ती जलाकर शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केसर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला नित्य प्रातःकाल निम्न मंत्र की दो-दो मालाएँ जपें।* *मंत्र :* *ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद् महे। अष्टलक्ष्मी च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।* 🔥 *दीपावली लक्ष्मीजी का जन्मदिवस है। समुद्र मन्थन के दौरान वे क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं। अतः घर में लक्ष्मीजी के वास, दरिद्रता के विनाश और आजीविका के उचित निर्वाह हेतु यह साधना करने वाले पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।* *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें  व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें*   *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

११. जब जाप समाप्त हो जाये तो आसन से उठने के पहले आसन के नीचे थोडा जल डालें और इस जल को मस्तक तथा दोनों नेत्रों पर अवश्य लगायें। ऐसा करने से आपके जप का फल आपके पास ही रहता है।हरि 🕉 *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*साधकों के लिए छोटी पर आवश्यक बातें :* साधकों ये बाते छोटी छोटी तो अवश्य हैं, परन्तु आपको यदि इन बातों का ज्ञान नहीं है तो आपको साधना में असफलता का मुह देखना पड़ सकता है, अतः इन्हे अवश्य याद रखें. १. जिस आसन पर आप अनुष्ठान, पूजा या साधना करते हैं उसे कभी पैर से नहीं सरकाना चाहिए। कुछ लोगों की आदत होती है कि आसन पर बैठने के पहले खड़े खड़े ही आसन को पैर से सरका कर अपने बैठने के लिए व्यवस्थित करते हैं. ऐसा करने से आसन दोष लगता है और उस आसन पर की जाने वाली साधनाएं सफल नहीं होती है. अतः आसन को केवल हाथों से ही बिछायें. २. अपनी जप माला को कभी खुटी या कील पर न टांगें। इससे माला कि सिद्धि समाप्त हो जाती है. जप के पश्चात् या तो माला को किसी डिब्बी में रखें,गौ मुखी में रखे या किसी वस्त्र आदि में भी लपेट कर रखी जा सकती है. जिस माला पर आप जाप कर रहे हैं उस पर किसी अन्य कि दृष्टि या स्पर्श न हो इसलिए उसे साधना के बाद वस्त्र में लपेट कर रखे. इससे वो दोष मुक्त रहेगी। साथ ही कुछ लोगों की आदत होती है कि जिस माला से जप करते हैं उसे ही दिन भर गले में धारण करके भी रहते है. जब तक किसी साधना में धारण करने का आदेश न हो. जप माला को कभी धारण ना करे. ३. साधना के मध्य जम्हाई आना, छिक आना, गैस के कारन वायु दोष होना,इन सभी से दोष लगता है और जाप का पुण्य क्षीण होता है. इस दोष से मुक्ति हेतु आप जप करते समय किसी ताम्र पात्र में थोडा जल तथा कुछ तुलसी पत्र डालकर रखें. जब भी आपको जम्हाई या छीक आये या वायु प्रवाह कि समस्या हो,तो इसके तुरंत बाद पात्र में रखे जल को मस्तक तथा दोनों नेत्रों से लगायें इससे ये दोष समाप्त ओ जाता है. साथ ही साधकों को नित्य सूर्य दर्शन कर साधना में उत्पन्न हुए दोषों की निवृति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।इससे भी दोष समाप्त हो जाते हैं. साथ ही यदि साधना काल में हल्का भोजन लिया जाये तो इस प्रकार की समस्या कम ही उत्पन्न होती है. ४. ज्यादातर देखा जाता है कि कुछ लोग बैठे बैठे बिना कारण पैर हिलाते रहते हैं. या एक पैर के पंजे से दूसरे पैर के पंजे या पैर को आपस में अकारण रगड़ते रहते हैं. ऐसा करने से साधकों को सदा बचना चाहिए। क्योंकि जप के समय आपकी ऊर्जा मूलाधार से सहस्त्रार की और बढ़ती है. परन्तु सतत पैर हिलाने या आपस में रगड़ने से वो ऊर्जा मूलाधार पर पुनः गिरने लगती है. क्योंकि आप देह के निचले हिस्से में मर्दन कर रहे है और ऊर्जा का सिद्धांत है कि जहां अधिक ध्यान दिया जाये ऊर्जा वहाँ जाकर स्थिर हो जाती है. इसलिए ही तो कहा जाता है कि जप करते समय आज्ञा चक्र या मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाना चाहिए। अतः अपने इस दोष को सुधारे। ५. साधना काल में अकारण क्रोध करने से बचें,साथ ही यथा सम्भव मौन धारण करें. और क्रोध में अधिक ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने से बचें. इससे संचित ऊर्जा का नाश होता है और सफलता शंका के घेरे में आ जाती है. https://t.me/sss963 ६. साधक जितना भोजन खा सकते है उतना ही थाली में लें. यदि आपकी आदत अन्न जूठा फेंकने की है तो इस आदत में सुधार करें. क्योंकि अन्नपूर्णा शक्ति तत्त्व है, अन्न जूठा फेंकने वालों से शक्ति तत्त्व सदा रुष्ट रहता है. और शक्ति तत्त्व की जिसके जीवन में कमी हो जाये वो साधना में सफल हो ही नहीं सकता है. क्योंकि शक्ति ही सफलता का आधार है. ७. हाथ पैर की हड्डियों को बार बार चटकाने से बचें। ऐसा करने वाले व्यक्ति अधिक मात्रा में जाप नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उनकी अंगुलियां माला के भार को अधिक समय तक सहन करने में सक्षम नहीं होती हैं. और थोड़े जाप के बाद ही अंगुलियों में दर्द आरम्भ हो जाता है. साथ ही पुराणों के अनुसार बार बार हड्डियों को चटकाने वाला रोगी तथा दरिद्री होता है. अतः ऐसा करने से हमेशा ही बचें. ८. मल त्याग करते समय बोलने से बचें,आज के समय में लोग मल त्याग करते समय भी बोलते हैं,गाने गुन गुनाते हैं,गुटखा खाते हैं या मोबाईल से बाते करते हैं. यदि आपकी आदत ऐसी है तो ये सब करने से बचें। क्योंकि ऐसा करने से जिव्हा संस्कार समाप्त हो जाता है. और ऐसी जिव्हा से जपे गए मंत्र कभी सफल नहीं होते हैं. आयुर्वेद तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ऐसा करना ठीक नहीं है, अतः ऐसा ना करें. ९. यदि आप कोई ऐसी साधना कर रहे हैं,जिसमें त्राटक करने का नियम है तो आप नित्य बादाम के तेल की मालिश अपने सर में करें. और नाक के दोनों नथुनो में एक एक बूंद बादाम का तेल डालें। इससे सर में गर्मी उत्पन्न नहीं होगी और नेत्रों पर पड़े अतिरक्त भार की थकान भी समाप्त हो जायेगी। साथ ही आंवला या त्रिफला चूर्ण का सेवन भी नित्य करेंगे तो सोने पर सुहागा। १०. जप करते समय अपने गुप्तांगो को स्पर्श करने से बचें. साथ ही माला को नाभि से नीचे न ले जाएं व भूमि से स्पर्श न होने दें. यदि आप ऐसा करते हैं तो जाप की तथा माला की ऊर्जा भूमि में समा जाती है.