KALPVRIKSHA TUTORIALS,BILASPUR (कल्पवृक्ष ट्यूटोरियल्स)
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#अक्षय_तृतीया अर्थात #अक्ती
👉🏻 अक्षय तृतीया पर होता है पुतला-पुतली का विवाह
👉🏻 बैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया मनाते हैं।
👉🏻अक्षय तृतीया अर्थात अक्ती के दिन बच्चे अपने मिट्टी से बने गुड्डे- गुड़ियों अर्थात पुतरा-पुतरी का ब्याह रचाते हैं।
👉🏻कल जिन बच्चों को ब्याह कर जीवन में प्रवेश करना है, वे परंपरा को इसी तरह आत्मसात करते हैं। बच्चे, बुजुर्ग बनकर पूरी तन्मयता के साथ अपनी मिट्टी से बने बच्चों का ब्याह रचाते हैं।
👉🏻इसी तरह वे बड़े हो जाते है और अपनी शादी के दिन बचपन की यादों को संजोए हुए अक्ती के दिन मंडप में बैठते है। अक्ती के दिन महामुहूर्त होता है। बिना पोथी-पतरा देखे इस दिन शादियां होती हैं।
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👉🏻पुतरा-पुतरी (पुतला-पुतली) के विवाह की परंपरा निभाते हुए लोग बाद में अपने नाबालिग बच्चों के भी विवाह काराने लगे, हालांकि अब धीरे-धीरे इस पर विराम लगाने का प्रयास चल रहा है.
👉🏻छत्तीसगढ़ में प्राचीन काल से अक्षय तृतीया के दिन मिट्टी के पुतरा-पुतरी का विवाह कराने की परंपरा है. पुतरा-पुतरी (पुतला-पुतली) के विवाह की परंपरा निभाते हुए लोग बाद में अपने नाबालिग बच्चों के भी विवाह काराने लगे, हालांकि अब धीरे-धीरे इस पर विराम लगाने का प्रयास चल रहा है.
👉🏻छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में रचे-बसे पुतरा-पुतरी के विवाह का विशेष महत्व है. लेकिन बदलते समय और दौर के हिसाब से अब ये आधुनिकता की परिभाषा में गुड्डे-गुड़ियों की शादी के नाम से मशहूर हो गया है, तो जाहिर की समय के साथ इसमें आधुनिकता का समावेश भी होना लाजिमी है.
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👉🏻अब बाजार में स्टेज में साथ बैठे पुतरा-पुतरी की मूर्तियों से भी बाजार भरा पड़ा है. बूढ़ेश्वर मंदिर के सामने पुतरा-पुतरी बेचने वाले मोहन चक्रधारी और सतीश चक्रधारी ने आधुनिक परिवेश में मूर्तियों के हो रहे निर्माण पर कहा कि अक्षय तृतीया पर गुड्डे-गुड़ियों का निर्माण मांग के अनुरूप किया जा रहा है. इसके साथ ही परंपरागत मूर्तियां भी बाजार में उपलब्ध हैं.
👉🏻चक्रधारी ने बताया कि वह इस पुश्तैनी कारोबार से जुड़े हैं. परंपरागत रूप से बनने वाले पुतरा-पुतरी में बांस और मिट्टी का इस्तेमाल होता है. वहीं अभी बन रहे पुतरा-पुतरी की आकर्षक सजावट बच्चों के साथ ही बड़ों को भी बरबस आकर्षित कर रही है.
👉🏻उन्होंने बताया कि परंपरागत पुतरा-पुतरी 30 से 40 रुपये जोड़ी की दर से बिक रहे हैं, लेकिन स्टेज शो के साथ आधुनिक रूप ले चुकीं दूल्हा-दुल्हन की मूर्तियां 60 से 120 रुपये तक में उपलब्ध हैं.
👉🏻चक्रधारी ने बताया कि पुतरा-पुतरी में परंपरागत परिधान से हटकर शूट-बूट और घाघरा-चोली में सजे गुड्डे-गुड़ियों की मांग भी काफी है. राजधानी रायपुर में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मूर्तिकार अक्षय तृतीया पर मूर्तियां बेचने आए हैं. इनमें मुख्यत: आरंग, महासमुंद, भाठागांव आदि शामिल हैं.
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👉🏻इनके साथ ही पुतरा-पुतरी के विवाह में उपयोग आने वाली चुकिया, कलशी, मौर, आल्ता आदि भी राजधानी में खासी मांग है. राजधानी में मूर्तियों की बिक्री पर व्यापारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जैसे-जैसे त्यौहार नजदीक आते हैं, वैसे-वैसे ग्राहकी भी बढ़ती है.
👉🏻गौरतलब है कि अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीदारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं. वहीं इसी दिन छोटे बच्चे भी गुड्डे-गुड़ियों का विवाह कर खुशियां बटोरते हैं.
#शुभकामनाएं_एवं_बधाइयाँ ।
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