Darshnik Vichar
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विद्रोह ही अध्यात्म की आधारशिला है । 💬 @Acharyaprashant https://twitter.com/aach_prashant
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सागर से भी गहरा है उपनिषद का एक एक वाक्य
भिद्यते ह्रदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्व संशयाः
क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन्दृष्टे परावरे
ह्रदय की सब गाँठें ( Emotional complexes ) टूट जाती है, मस्तिष्क के सब संशय छिन्न भिन्न हो जाते हैं, मनुष्य जिन नाना कर्मों में व्याकुलता से भागा फिरता है वे छूट जाते हैं जब उसका पर और अवर ओर छोर छोड़ दीख जाता है
हिरण्मये परे कोशे विरजं ब्रह्म निष्कलम्
तच्छुभ्रं ज्योतिषां ज्योतिस्तद्यदात्मविदो विदुः
हिरण्यमय कोष सोने का खजाना जो तुम्हें दीखता है इससे दूर एक आध्यात्मिक स्वर्ण का खजाना है दुनियाँ के खजाने का सिक्का मेला है, कलदार है, उस खजाने का सिक्का निर्मल है, निष्कल है, तुम इस सोने की चमक से चकाचौंध हो रहे हो उसे देखो जो शुभ्र है वह ज्योतियों की ज्योति है संसार में रमने वाले इन खजानों के गीत गाते हैं, आत्मा को जानने वाले उस खजाने को जानते हैं जिसकी चमक के बराबर दुनियाँ में कोई चमक ही नहीं
न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोअयमग्नि: तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ||
उसकी ज्योति के सम्मुख सूर्य की ज्योति क्षीण हो जाती है चंद्र, तारे, विद्युत वहां तेजोहीन हो जाते हैं ; इस आग का तो कहना ही क्या ? उसकी ज्योति के पीछे ही सब प्रकाशित होते हैं, उसके प्रकाश से ही यह सम्पूर्ण विश्व प्रकाशित हो रहा है
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कल लल्लनटाॅप पर मुफ्ती शमाइल साइंस और तर्क की बात करके इस्लाम को तार्किक समझाने का निरर्थक प्रयास कर रहा था अभी अभी वही मुफ्ती शमाइल की रील देखी जिसमें वो संगीत को हराम बता रहा है कह रहा है म्यूजिक तो सुनना ही नहीं है जो किसी भी इंस्ट्रूमेंट से निर्मित हो। ये विज्ञानवादी सोच है इनकी । वाह ...
