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जरा देखो तो ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है।
अगर इश्क हो तो कहना अब दिल यहाँ नही रहता।
थीम,,मुलाक़ात
दिन में मिल लेते कही रात जरूरी थी क्या
बे-नतीजा ये मुलाक़ात जरूरी थी क्या
मुझसे कहते तो मैं आँखो में बुला लेता तुम्हे
भीगने के लिए बरसात जरूरी थी क्या
दर्द के फूल भी खिलते हैं .. बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों .. कुछ रोज़ में भर जाते हैं....!!!
एक जुर्म हुआ है हम से, एक यार बना बैठे हैं..!
कुछ अपना उसको समझ कर,सब राज़ बता बैठे हैं..!
फिर उसकी प्यार की राह में, दिल ओर जान गवा बैठे हैं.
वो याद बहुत आते हैं जो हम को भुला बैठे हैं.🌹🥀🌹
