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मन तुलसी का दास हैं,
वृन्दावन हो धाम,
साँस-साँस में राधा बसे,
रोम-रोम में श्याम.
देवो के देव, महादेव
आपसे हैं विनती,
मेरी भी हो, आपके ख़ास भगतो में गिनती.
बैरागी बने तो जग छूटे,
सन्यासी बने तो छूटे तन,
कान्हा (कृष्ण) से प्रेम हो जाये
तो छूटे आत्मा के सब बन्धन....
......mere kanhaji❤️😍🙏
