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बेचैन कर दे ये रात कैसी है, मन का क्या है ये तो भटका ही रहता है। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻

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तुम्हारे ख्यालों में जब से आने लगा हूं, वजह बेवजह अब मुस्कराने लगा हूं, -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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सुना है मैंने तुम अब शर्माने लगे हो, मेरा नाम सुनते ही मुस्कराने लगे हो। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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रात को गुजरने में देर कितनी लगती है, ये सवाल बस एक रात का तो नहीं लगता, एक रात जो सूर्यास्त के बाद से आरम्भ होना शुरू होती है, एक रात जो सूर्योदय से पहले तक चलती है, ये कुछ घंटे बस मात्र घंटे नहीं होते, सदियों के वक्त को समेटे हुए अपने आंचल में मानो, ये यादों को कुरेदती हुई , मन के अथाह भंडार से कहीं, कहीं दूर तलक जो छिपाए रहता है मन, उन बातों को, उन पलों को, ये रात उजागर करती है मन के उस हिस्से को, जो अक्सर हृदय को पीड़ा पहुंचाने में कसर नहीं छोड़ते, एक पल को ये रात रुलाती है, और दूसरे पल ही ये रात पागलों सा हँसाती है, ये रात सिर्फ दर्द को ही नहीं, खुशियों को भी समेट सामने ले आती है, जब हम पूरी तरह से इस दुनिया से परे, लोगो के व्यवहारों से परे, बस खुद में जिया करते थे, उन पलों को याद कराती है, ये रात जो है कभी अपनी तो कभी पराई सी लगती है, खुशियां और दर्द दोनों का मर्म एक साथ ला, ये पूरी रात हृदय को उलझाए रखती है, ये रात यूं ही नहीं गुजरती, अभी तो ये बस कुछ पलों की कहानी है, अर्धरात्रि के बाद जो बाहर सन्नाटा छाता है, मन उस बीच सबसे ज्यादा खुद को असहाय पाता है, कहने को शांति रहती है चारों तरफ आपके, पर उस वक्त जो विचार मन में अशांति करते है, वो रात ही साक्षी है बस उन चलते विचारों की, ये विचार कभी कभी तो मौत तक ले जाते है, रात के अंधेरे में मन में काले सन्नाटे पसरे नहीं पसारते है, आंखो की लालिमा को देख भी रात को तरस न आए, ऐसी ये रात अभी कैसे गुजर जाए, हर दुख हर दर्द , मन की हर पीड़ा, रात में घर कर जाती है, सुबह होने तक ये कहा मरहम बन पाती है, ये रात बस यूं ही चलती जाती है, बस यूं ही चलती जाती है, कभी न गुजर पाने वाली ये वही रात है, जिस रात में कभी मन अशांत नहीं होता था,। कभी चैन की नींद लेने बाद लगता था कि, ये रात इतनी जल्दी क्यों गुजर जाती है, काश ये रात थोड़ी और लंबी होती, और अब लगता है कि ये रात शायद मौत के बाद ही हो गुजरती, "ये रात बस यूं ही चलती जाएगी, चाहोगे जितना ये उतनी ही लंबी और लंबी होती जाएगी।।" -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻 #m_rwriter
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रात को गुजरने में देर कितनी लगती है, उतनी ही जितना आप में द्वेष क्रोध ईर्ष्या के भाव होंगे, रात की खूबसूरती इतनी है, की वो खुद रंग विहीन होकर भी, उजाले की तरफ ले जाने में आपकी मदद करती है, खुद को वो अंधेरे में कैद कर , आपको एक खूबसूरत सुबह में भेजती है, मन के उन विचारों पर वो जीत दिलाती है, आपको असमंजस की स्थिति से बाहर निकलने में सहयोग करती है, जिस पल आपकी मनोस्थित स्थिर अवस्था में जाती है, उसी पल ये रात समझो गुजर जाती है, जरूरी है रात के अंधेरे में खुद को भूल जाना, दिन भर की थकान द्वेष ईर्ष्या त्याग , इस रात को खुद को सौंप देना, रात ही है जो आपको आपसे मिलवाती है, ये रात हो सकता है अपने हर प्रयास में असफल होकर आपको निराश करती आ रही हो, लेकिन यकीन मानो ये रात ही आपके सभी प्रश्नों के उत्तर जानती है, और जिस दिन आपको ये उत्तर मिल गए , ये काली घनी अंधेरे वाली लंबी रात गुजर जाएगी, बस इतनी सी ही है ये रात ।। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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जीने की चाह पहले भी थी, पर अब तुम्हारे रूप में एक वजह मिल गई -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻 #love_life
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तुम कहो तो तुमको मै अपना बनाऊं, तुम मुस्कराओ तो मैं तुमको गले से लगाऊँ ❣️❤️ -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻 #love_life
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सनम तुम्हारे इश्क ने ऐसा हाल किया है, मच्छरों ने रातों को जीना बेहाल किया है -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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सीरत ने उसकी जब से छुआ है, तमाम सूरतें इस दिल ने नकारी है तबसे।। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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सीरत ने उसकी जब से छुआ है, तमाम सूरतें इस दिल ने नकारी है तबसे।। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻 #
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उनकी निगाहों में एक सुकून सा है, वो जब भी मेरी ओर प्यार से देखती है मैं भूल सा जाता हूं खुद को भी, उनकी खुली जुल्फों को देख, मैं उनसे उलझने की चाह करूँ, सुनो वो जब भी मेरे सामने से गुजरे, उनकी मुस्कराहट पे मै मर ही जाता हूं।। -लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻 #
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