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Maths by Anjan - पढ़ना नहीं, सीखना है (Channel): BANK+SSC+CAT👤©

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जब घर के बड़े लोग न्याय छोड़कर केवल अपने “लोगों” का साथ देने लगते हैं, तब परिवार का संतुलन टूट जाता है और वह स्थिति महाभारत क
जब घर के बड़े लोग न्याय छोड़कर केवल अपने “लोगों” का साथ देने लगते हैं, तब परिवार का संतुलन टूट जाता है और वह स्थिति महाभारत के हस्तिनापुर जैसी बन जाती है—जहाँ रिश्ते तो बने रहते हैं, पर न्याय और धर्म खो जाता है। कैकेयी का पक्षपात: कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए राम को वनवास भेजने की माँग की। यह माँग न्यायसंगत नहीं थी, बल्कि अपने बेटे के पक्ष में पक्षपात था। परिणामस्वरूप परिवार में दरार आई और अयोध्या का संतुलन बिगड़ गया। धृतराष्ट्र का अंधा पक्षपात: धृतराष्ट्र ने बार-बार दुर्योधन का साथ दिया, चाहे वह अन्याय कर रहा हो। उन्होंने न्याय छोड़कर केवल अपने पुत्र का पक्ष लिया। यही पक्षपात हस्तिनापुर को युद्ध की आग में झोंकने का कारण बना। भीष्म और द्रोण की विवशता: भीष्म और द्रोण जानते थे कि दुर्योधन अन्याय कर रहा है, परंतु वे हस्तिनापुर के “राजा” का साथ देने को बाध्य रहे। न्याय की जगह उन्होंने “अपनों” का साथ दिया। परिणामस्वरूप धर्म का पतन हुआ और महाभारत का युद्ध हुआ। Website - https://mathsbyanjan.myinstamojo.com/ Insta - https://www.instagram.com/mathsbyanjan YT - https://youtube.com/@mathsbyanjan

रावण: जब विभीषण ने बार‑बार उसे समझाया कि श्रीराम से युद्ध करना विनाशकारी होगा, रावण ने अहंकारवश सत्य को स्वीकार नहीं किया। उस
रावण: जब विभीषण ने बार‑बार उसे समझाया कि श्रीराम से युद्ध करना विनाशकारी होगा, रावण ने अहंकारवश सत्य को स्वीकार नहीं किया। उसने विभीषण को अपमानित कर दरबार से निकाल दिया। परिणामस्वरूप वही विभीषण श्रीराम का सहयोगी बना और रावण का पतन निश्चित हुआ। कुबेर का परामर्श: रावण को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अधर्म और अत्याचार उसे विनाश की ओर ले जाएगा। लेकिन अहंकार ने उसे सत्य सुनने से रोक दिया। दुर्योधन: जब भीष्म, विदुर और धृतराष्ट्र ने उसे समझाया कि पांडवों से शत्रुता छोड़कर शांति स्थापित करो, दुर्योधन ने अहंकारवश सत्य को ठुकरा दिया। उसने कहा मैं पांडवों को सुई की नोक बराबर भूमि भी नहीं दूँगा। यही अहंकार महाभारत युद्ध का कारण बना। कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान: विदुर और अन्य ने चेताया कि यह अधर्म है, लेकिन दुर्योधन और दुःशासन ने अहंकार में सत्य को अनसुना कर दिया। परिणामस्वरूप पूरे वंश का विनाश हुआ। अहंकार व्यक्ति को सत्य सुनने से रोकता है, और जब सत्य की आवाज़ दब जाती है, तो निर्णय गलत हो जाते हैं। YouTube - https://youtube.com/@mathsbyanjan

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सफलता किसी की स्थायी संपत्ति नहीं होती, बल्कि यह रोज़ाना अनुशासन और प्रयास का किराया माँगती है। हनुमान जी का अनुशासन: जब समुद
सफलता किसी की स्थायी संपत्ति नहीं होती, बल्कि यह रोज़ाना अनुशासन और प्रयास का किराया माँगती है। हनुमान जी का अनुशासन: जब समुद्र पार करने का समय आया, तो हनुमान जी ने अपनी शक्ति को याद कर अनुशासनपूर्वक छलांग लगाई। उनकी सफलता केवल जन्मजात बल से नहीं, बल्कि निरंतर साधना और अनुशासन से थी। राम का वनवास: श्रीराम ने 14 वर्षों तक वनवास का अनुशासन निभाया। हर दिन का संयम और धर्मपालन ही अंततः उन्हें रावण पर विजय दिलाने में सहायक हुआ। अर्जुन का अभ्यास: अर्जुन ने निरंतर अनुशासन से धनुर्विद्या का अभ्यास किया। यही कारण था कि युद्धभूमि में वह सबसे श्रेष्ठ धनुर्धर बने। उनकी सफलता किसी एक दिन की नहीं, बल्कि रोज़ाना चुकाए गए "किराए" का परिणाम थी। पांडवों का वनवास: पांडवों ने 13 वर्षों तक वनवास और अज्ञातवास का अनुशासन निभाया। हर दिन का धैर्य और संयम ही उन्हें धर्मयुद्ध में विजय दिलाने वाला बना। सफलता कोई स्थायी ताज नहीं है; यह रोज़ाना अनुशासन, साधना और प्रयास से अर्जित होती है। सफलता प्रतिदिन अनुशासन और परिश्रम का "किराया" चुकाता है, अंततः सफलता का वास्तविक मालिक बनता है। YouTube - https://youtube.com/@mathsbyanjan

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