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The Aim Classes( Competitive Exams) Vyapam, MPPSC,SSC, Daily Quiz, current affairs,

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कालसी शिलालेख •मगध के मौर्यवंशी सम्राट अशोक ने अपनी 14 राजाज्ञाओं को 262 ईसा पूर्व शिलालेख लिखवाया है। यह वह समय था जब अशोक कलिंग युद्ध में विजयी हुए और उनका हिंसा से मोह भंग हो गया। जॉन फॉरेस्ट वर्ष 1860 में इसे उत्खन्न द्वारा प्राप्त किये थे। शिलालेख पर प्राकृत भाषा व ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है इसमें अहिंसा के साथ नैतिक, मानवीय सिद्धांतों, चिकित्सा व्यवस्था, कुएं खुदवाने, वृक्ष लगाने, धर्म प्रचार, माता-पिता व गुरू सम्मान समेत कई अच्छाइयों पर बल दिया गया है।

दरवाजा बंद अभियान 1.केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने 30 मई 2017 को देशभर के गांवों में शौचालयों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए दरवाजा बंद अभियान का शुभारंभ किया। 2.अभिनेता अमिताभ बच्चन के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन के तहत राष्ट्रीय स्तर पर शौचालय के प्रयोग हेतु अभियान प्रारंभ हुआ। विश्व बैंक द्वारा इस अभियान को समर्थन प्राप्त है और इसे देश भर में चलाया जाएगा। 3.इसका उद्देश्य उन लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना है जिनके घरों में शौचालय है फिर भी वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। 4.देश में 64% गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

इस ग्रुप में MPPSC Mains 2021 की परीक्षा देने वाले कितने लोग हैं या फिर वे जो भविष्य में मैंस देगें। सब कॉमेंट करके बताए अगर 10 से अधिक लोग होते हैं तो हम डेली मैंस आंसर राइटिंग करेगें। उनके लिए मैं रोज आपको कुछ प्रश्न उपलब्ध कराऊंगा और आप आंसर लिख कर भेजें। जिसके बाद हम एक दूसरे के आंसर और लिखने और आंसर फॉर्मेट को समझ पाएंगे। आगर आप लोग इसमें शामिल होते हैं तो यह काफी फायदेमंद हो सकता है। #mppscmains #mppscmains2021 #mppscmainsanswerwriting

UPSC द्वारा कराए गया आज का निबंध का पेपर । कोशिश करें इनमें जो भी आपको सही लगे लिख कर भेजें। डिस्कशन ग्रुप पर भेज सकते हैं आप
UPSC द्वारा कराए गया आज का निबंध का पेपर । कोशिश करें इनमें जो भी आपको सही लगे लिख कर भेजें। डिस्कशन ग्रुप पर भेज सकते हैं आप । #upscmains

आज यानी 16 सितंबर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस ( " विश्व ओज़ोन दिवस ") मनाया जाता है। 16 सितंबर 1987 के दिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए थे। इसलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में 16 सितंबर को विश्व ओज़ोन दिवस के रूप में घोषित किया। #mppscpre #mpsi #ssc #UPSC

भारत में 1952 में चीता को विलुप्त घोषित किया गया ।
भारत में 1952 में चीता को विलुप्त घोषित किया गया ।

दूरदर्शन स्थापना की स्थापना 15 सितंबर,1959 को हुई थी । आज दूरदर्शन का 63 वां स्थापना दिवस।
दूरदर्शन स्थापना की स्थापना 15 सितंबर,1959 को हुई थी । आज दूरदर्शन का 63 वां स्थापना दिवस।

उनको भी हिंदी दिवस कि शुभकामनाएं जो हिंदी दिवस को happy hindi day कह के विश कर रहे है 😁😁,... खैर हिंदी दिवस कि शुभकामनाएं दोस्तों ।।

हिंदी से संबंधित पूरी संवैधानिक जानकारी यहां पढें https://www.theaimclasses.com/2021/10/rajbhasha-se-sambandhit-pravdhan-or.html

14 सितंबर "हिंदी दिवस की शुभकामनाएं !"

https://youtu.be/bERBSM1i82s अद्वैत को हल्के फुल्के अंदाज में समझे 😄 और चैनल को सब्सक्राइब करें ।

❇️सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ❇️ प्रश्न -: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए ? उत्तर -: 25 वर्ष प्रश्न -: भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौनसा है ? उत्तर -: गंगा डॉल्फिन प्रश्न -: प्रथम क्रिकेट विश्व कप जीतने वाला देश कौन सा है ? उत्तर -: वेस्टइंडीज प्रश्न -: राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन किस अनुच्छेद के आधार पर लगाया जाता है ? उत्तर -: अनुच्छेद 356 प्रश्न -: किस अनुच्छेद के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार माना गया है ? उत्तर -: अनुच्छेद 21 (A) प्रश्न -: चंद्रमा पर मानव को पहुंचाने वाले प्रथम अंतरिक्ष यान का नाम क्या था ? उत्तर -: अपोलो – 11 प्रश्न -: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF ) का मुख्यालय कहां स्थित है ? उत्तर -: वाशिंगटन डी. सी. प्रश्न -: रेबीज के टीके की खोज किसने की ? उत्तर -: लुई पाश्चर प्रश्न -: सुपीरियर झील कहाँ पर स्थित है ? उत्तर -: संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा प्रश्न -: भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है ? उत्तर -: समुद्रगुप्त

इस विषय में कितना भी लिख लिया जाए ना सवाल खतम हो सकते हैं न जवाब मिलेगा । एक चीज सीखी जा सकती है कि हम इस विराट, विशाल, अनंत ब्रह्मांड के इस हल्के से ग्रह के छोटे से देश के कुछ वर्ग किलोमीटर में पूरा जीवन निकल देने वाले जीव हैं और हम समझते हैं अनंत ब्रह्मांड में हमारा अस्तित्व है ? हम सिर्फ भ्रमों में जी रहे हैं । शायद ! लेकिन मैं चाहता हूं, मेरे जीवन में ही पता लगे की कौन है ? इस सबके पीछे ? और क्यों बनाया है ये सब ? ईश्वर तो नहीं हो सकता ?

" ब्रह्मांड - सृजनकर्ता ; मनुष्य के अस्तित्व पर एक विचार " यह तस्वीर आपके सामने दिखाई दे रही बकाई बेहद खूबसूरत और रंगीन सी आकृति देखने में ऐसे लगता है जैसे आकाश में कोई धुआं है जो तारों को छिपाने की कोशिश कर रहा है । यदि आपकी थोड़ी भी रुचि ब्रह्मांड के रहस्यों में होगी तो आप इस संरचना को जानते होंगे एस्ट्रोनॉमी की भाषा में इसे 'नेबुला' कहते हैं और जैसा कि वैज्ञानिक बताते हैं नेबुला यानी कि तारों सितारों की फैक्ट्री ; हां,बिलकुल वैसे ही जैसे कि हमारे यहां बिस्किट या फिर नमकीन की फैक्ट्री होती है बस फर्क इतना है यहां आदमी काम नहीं करते यहां काम करता गुरुत्वाकर्षण विज्ञान के अनुसार । और यहां बनते हमारे सूर्य के जैसे अनंत ऊर्जा समेटे हुए तारे है न ? ये कमाल की फैक्ट्री । आगे बात करने से पहले नेबूला की सरल परिभाषा जाने तो यह धूल, धुएं,कंकड़ - पत्थरों के बदल होते है जहां तारे अपनी प्रारंभिक यानी की जीवन की शुरुआती अवस्था में होते हैं। तस्वीर में दिखाई दे रहा नेबुला जेम्स वेब टेलीस्कोप ने देखा है जिसको "टारेंटयुला नेबुला" नाम दिया गया है अब अगर इसके आकार पर ध्यान दे तो आपको अपने मोबाइल की स्क्रीन पर दिखने बाली छोटी छवि अपने आप में इतनी विशालता समेटे हुए है, जिसकी कल्पना करना अच्छे- अच्छे गणितज्ञों को सकते में डालने के लिए काफी है कल्पनाओं से परे इस नेबुला की त्रिज्या 931 प्रकाश वर्ष है और एक प्रकाश वर्ष लगभग उतना होता जितने में प्रकाश की गति से 1 साल तक चला जाए और प्रकाश की गति होती है लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड मतलब की प्रकाश जब अपनी गति से 1862 सालों तक चलेगा तब वह इस नेबुला के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचेगा । इससे आप इसकी विराटता का अनुभव कर पा रहे होंगे और ऐसे नेबुला ब्रह्मांड में अरबों को संख्या में है और इसकी तुलना गैलेक्सी से संभव ही नहीं है क्योंकि उसके आकार का तो गणित भी नहीं लगाया जा सकता एक गैलेक्सी में ही सैकड़ों नेबुला होते हैं। अब सोचने कि बात यह है की आप ब्रह्मांड के विकराल स्वरूप का अंदाजा लगा सकते हैं और उससे धरती की तुलना की जाए तो हम किसी घर के रोशन दान से आती हुई धूप में उड़ते हुए धूल के उस कण के बराबर भी जगह नहीं रखते है ब्रह्मांड में । सवाल है ; यह सब किसने बनाया है ? कौन इसका रचियता है ? क्या है ? इस सबको बनने के पीछे का उद्देश्य है ? क्या काम है ब्रह्मांड के इन सब पिंडों का ? और सबसे बड़ी बात की क्या इंसान जीव- जंतु सिर्फ पृथ्वी ग्रह पर ही है? क्या ऐसा नहीं हो सकता की हम जो नहीं जानते ,कि हो सकता है जिस ब्रह्मांड को हमारा विज्ञान जान पाया हो उसके पीछे भी कोई और ही अज्ञात दुनिया हो ? हो सकता है हम किसी प्राणी के पेट में हो ? और इस जैसे अनेक प्राणी हो जो रहते हो विचरते हो कहीं ? हो सकता है हम किसी पदार्थ के अणु - परमाणु के संरचना का हिस्सा हो और इस तरह के अनेक पदार्थ हो जिनके सबके अपने ब्रह्मांड हो ? या फिर हो सकता है अब तक ज्ञात सारा मैटर सिर्फ एक आंधी का हिस्सा हो जिसमें गैलेक्सी, तारे ,ग्रह और अन्य सारे पिंड उड़ कर कहीं जा रहे हो ? या फिर हो सकता है हम किसी दुनिया के समुद्री हिस्से में जहां पानी के रूप में डार्क मैटर हो ( ब्रह्मांड की दृश्य संरचनों से इतर जो अदृश्य है ! ) और हम हमारे समुर्दों में घुले हुए किसी नमक के कण की तरह उसका हिस्सा हो ? या फिर ये भी हो सकता है ये ब्रह्मांड कुछ है ही नहीं यहां कहीं जमीन होगी उधर विशाल सरचनाओं वाले प्राणी रहते होगे और हम उस जमीन के उस हिस्से में हो जहां वो लोग आते - जाते न हो ? कई विज्ञान,दर्शन इत्यादि सिर्फ इसी तरह के काल्पनिक सिद्धातों पर आधारित है ? हो सकता है किसी दिन मेरे ऊपर उठाए सवाल का जवाब मिले और तब हमें पता चले हम तो किसी और दुनिया के समुद्री हिस्से का भाग हैं और उस दुनिया वाले न मरते है न पैदा होते हैं वो बस है इसी तरह जैसे हमारा सूर्य है ये ब्रह्मांड की अन्य संरचनाएं हैं जिनके न तो सृजनकर्ता का पता न ये पता है ये किसकी कृति है और क्यों है ये सब ? वास्तविकता ये है कि हमें या आज तक धरती पर पैदा हुए किसी भी आदमी को खुद नहीं पता है कि पृथ्वी पर हम क्यों आते हैं और क्यों मर जाते हैं ? और मर के कहां जाते हैं ? तो इन ब्रह्मांड के रहस्यों का पता लगाना तो असंभव ही है ? और जब हमें या वैज्ञानिक को या समाज को किसी बात का जवाब नहीं मिलता तो हम कह देते है ईश्वर कि इच्छा है या कोई प्राकृतिक शक्ति है जो संचालित कर रही है सब हम कुछ नहीं कर सकते इसमें और न इसका जवाब दिया जा सकता है ?

इन्द्रधनुषीय क्रांति का संबंध इनमें से किन के साथ है ?
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