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11 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 1745 - फोंटेनॉय की लड़ाई (दोरनिक): ऑस्ट्रियाई ने उत्तराधिकार के लिए युद्ध शुरू किया गया। 1749 - ब्रिटिश संसद ने समेकन अधिनियम स्वीकार किया, जिसने रॉयल नेवी को पुनर्गठित किया गया। 1751 - पेंसिल्वेनिया अस्पताल डॉ थॉमस बॉन्ड और बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा स्थापित किया गया। 1752 - अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पहली अग्नि बीमा पॉलिसी की शुरुआत हुई। 1772 - एम्स्टर्डम थिएटर आग से नष्ट हुआ, जिसमें 18 लोग मारे गए व अन्य कई लोग घायल हुए। 1784 – ब्रिटेन और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के बीच शांति संधि पर हस्ताक्षर। 1814 – प्लेटबर्ग की लड़ाई में अमेरिकन्स ने अंग्रेजों को हराया। 1833 – इंग्लैंड से क्यूबेक जा रहे जहाज लेडी-ऑफ-द-लेक के हिमखंड से टकराकर अटलांटिक सागर में डूबने से 215 लोगों की मौत हुई। 1857 – दिल्ली में सिपाही विद्रोह भड़का। 1871 - तिचबोर्ने मामले में पहला परीक्षण आम दलीलों का लंदन कोर्ट में शुरू हुआ। 1928 - अमेरिकी वाल्टर हेगेन ने इंग्लैंड में ओपन चैम्पियनशिप गोल्फ टूर्नामेंट जीता। 1940 - ग्रीबबेर्ग की लड़ाई केंद्रीय नीदरलैंड में शुरू हुई। 1949 - इजरायल संयुक्त राष्ट्र में अपने 59 वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ। 1951 – राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया। 1955 – इजरायल ने गाजा पर हमला किया। 1956 – गोल्ड कोस्ट (वर्तमान में घाना देश) को 6 मार्च, 1957 को ब्रिटेन के शासन से मुक्त करने की घोषणा की गई। 1960 – पहली गर्भनिरोधक गोली बाजार में उपलब्ध कराई गई। 1965 – बंगलादेश में चक्रवाती तूफान से 17 हजार लोगों की मौत। 1985 – इंग्लैंड के ब्रैडफोर्ड सिटी फुटबाल मैदान में आग लगने से 40 की मौत हुई और 150 घायल हुए। 1988 – फ्रांस ने परमाणु परीक्षण किया। 1995 - संयुक्त राष्ट्र महासभा के कक्ष में 24 दिन तक चले सम्मेलन की समाप्ति पर परमाणु अप्रसार संधि को अनिश्चित काल के लिए स्थायी बना दिया गया। 1998: भारत ने राजस्थान के पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण किये। 1998 – यूरोप की एकल मुद्रा यूरो का पहला सिक्का बना। 2000 – जनसंख्या घड़ी के मुताबिक भारत की जनसंख्या एक अरब पहुंची। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जन्मी 'आस्था' भारत का एक अरबवाँ बच्चा बना। 2001 - संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणाली को भारत का समर्थन, अमेरिकी संसद ने संयुक्त राष्ट्र की देय राशि रोकी। 2002 - बांग्लादेश में नौका दुर्घटना में 378 लोग मरे। 2005 - बगलिहार परियोजना पर भारत-पाक मतभेदों को निपटाने हेतु विश्व बैंक ने तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त किया। 2007 - इस्रायल ने हमास से जुड़ी रिफ़ॉर्म एवं चेंज पार्टी को गैर-क़ानूनी घोषित किया। 2008 - दक्षिणी वजीरिस्तान में नाटो सेना ने हमला किया। 2008 - न्यूयार्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विश्व का पहला जिनेटिकली माडिफ़ाइड मानव भ्रूण तैयार किया। 2010 - भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश एसएच कपाड़िया को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 38वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। वे इस पद पर 29 सितंबर 2012 तक रहेंगे। 2010 - भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक खंड़पीठ ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पंचायत और स्थानीय चुनाव में राज्य सरकार को आरक्षण देने का अधिकार है।  2011 – भारत और पाकिस्तान ने लाहौर और अमृतसर के बीच बस सेवा शुरू करने के लिए सहमति बनी। 2013 – तुर्की के रेहानली क्षेत्र में दो कार बम धमाके में 43 लोगों की मौत। इस पंचांग को सीधे प्राप्त करने के लिए एवं सभी तरह की लेटेस्ट विविध एवं शैक्षणिक खबरों के लिए "हरियाणा एजुकेशनल अपडेट" फेसबुक पेज ज्वाइन करें। 2019 - ईरान से युद्ध जैसे हालात, अमेरिका ने तैनात किए युद्धपोत और पैट्रियट मिसाइल। 11 मई को जन्मे व्यक्ति 1912 - सआदत हसन मंटो, कहानीकार और लेखक थे। मंटो फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। 1918 - मृणालिनी साराभाई - भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना थीं। 1950 - सदाशिव दत्तराय अमरापुरकर - एक भारतीय अभिनेता थे। 11 मई को हुए निधन 2002 - आबिदा सुल्तान, भोपाल सियासत की राजकुमारी एवं भारत की पहली महिला पायलट। 2019 - इंडियन टुबैको कंपनी लिमिटेड (आईटीसी) के पूर्व एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ वाईसी देवेश्वर का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन। 11 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस (भारत)।

13 वें कोप शिखर सम्‍मेलन का आयोजन इस वर्ष गांधीनगर गुजरात में किया गया। भारत 3 वर्ष के लिए इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। इस बार इस सम्‍मेलन की थीम है “प्रवासी प्रजातियां दुनिया को जोड़ती हैं और हम उनका अपने यहां स्‍वागत करते हैं”। प्रतीक चिन्‍ह में कोलम कला के माध्‍यम से भारत में आने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षियों जैसे आमूर फाल्‍कन, हम्‍पबैक व्‍हेल और समुद्री कछुओं के साथ प्रमुख को दर्शाया गया है।वन्‍य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत संकटापन्‍न प्रजाति में घोषित द ग्रेट इंडियन बस्‍टर्ड को सम्‍मेलन का शुभंकर बनाया गया है। सम्‍मेलन का प्रतीक चिन्‍ह दक्षिण भारत की पांरपरिक कला कोलम से प्रेरित है।आपको बता दें दक्षिण राज्यों में रंगोली को कोलम कहा जाता है। इस सम्मेलन में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में गांधीनगर घोषणा पत्र प्रस्तुत किया गया।इस सम्मलेन में स्टेट ऑफ इंडियाज़ बर्ड्स 2020 (State of India’s Birds- SoIB) नामक रिपोर्ट जारी की गई है। क्या है गांधी नगर घोषणा पत्र: सीएमएस ने पारिस्थितिकीय तंत्रों के आपसी संबंध को बनाए रखने और उन्हें बहाल करने की ज़रुरत पर विशेष बल दिया है खासकर प्रवासी प्रजातियों और उनके पर्यावास के प्रबंधन में। गांधीनगर घोषणापत्र जिस पर 130 देशों ने अपनी मुहर लगाई है । घोषणापत्र में प्रवासी जीव जंतुओं और पारिस्थितिकीय तंत्रों के आपसी रिश्तों को 2020 के बाद वैश्विक जैव विविधता मसौदे में शामिल करने और इसको वरीयता देने की भी बात कही गयी । एशियाई हाथी, तेंदुआ और हुकना या बंगाल फ्लोरिकन को सम्मेलन में परिशिष्ट 1 के अंतर्गत शामिल कर लिया गया । इन 3 प्रजातियों के अलावा 7 प्रजातियों को परिशिष्ट 2 के अंतर्गत शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं- जगुआर, यूरियाल, लिटिल बस्टर्ड, एंटीपोडियन अल्बाट्रॉस, ओशनिक व्हाइट-टिप शार्क, स्मूथ हैमरहेड शार्क और टोपे शार्क। इस सम्मेलन में पहली बार प्रवासी प्रजातियों के मौजूदा हालातों पर एक रिपोर्ट को जारी किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक़ सीएमएस संधि में शामिल ज़्यादातर प्रजातियों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है जिसके पीछे की वजहों को समझने की कोशिश इस रिपोर्ट में की गयी है । इसके अलावा प्रवासी जीव जंतुओं पर मौजूदा खतरों की पहचान और उसको दूर करने की भी बात इस रिपोर्ट में कही गयी है । एक सप्‍ताह के सम्‍मेलन में संधि के प्रथम परिशिष्‍ट में 10 और द्वितीय परिशिष्‍ट में 13 प्रजातियों को शामिल किया गया। प्रवासी प्रजातियों और उनके पर्यावास के संरक्षण के लिए प्रवासी प्रजाति संरक्षण संधि का दूत कार्यक्रम फिर से शुरू किया गया। भारतीय अभिनेता रणदीप हुड्डा को 2023 तक के लिए प्रवासी प्रजाति दूत मनोनीत किया गया। भारत में प्रवासी प्रजातियों एवं इसके संरक्षण के प्रयास भारत कई प्रजातियों के प्रवासी वन्‍य जीवों का प्राकृतिक आवास है। इन प्रजातियों में मुख्य रूप से बर्फीले प्रदेश वाले चीते, आमुर फाल्‍कन, बार हेडेड गीज, काले गर्दन वाला सारस, समुद्री कछुआ, डुगोंग्‍स और हम्‍पबैक व्‍हेल आदि का प्राकृतिक आवास है। भारत में वन्‍य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत प्रवासी जनजातियों का संरक्षण किया जाता है। इसके अलावा भारत ने प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में 1983 में बान कन्वेंशन पर भी हस्ताक्षर किए। भारत अब तक साइबेरियाई सारस के लिए 1998में, समुद्री कछुओं के लिए 2007 में, डुगोंग्‍स के लिए 2008 में और रेप्‍टर्स के संरक्षण के लिए 2016 में सीएमएस के साथ कानूनी रूप से अबाध्‍यकारी समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर कर चुका है। आपको बता दें भारतीय उप-महाद्वीप महत्वपूर्ण बर्ड फ्लाईवे, सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे (CAF) नेटवर्क का हिस्सा है। सेंट्रल एशियाई फ्लाईवे (CAF) नेटवर्क आर्कटिक और हिंद महासागर को कवर करता है। इस फ्लाईवे नेटवर्क में लगभग 279 प्रजातियां शामिल, एवं इसमें कई ऐसी प्रजातियां भी शामिल है जो अंतरराष्ट्रीय रूप से विलुप्त होने के कगार पर है।

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस: 2020 प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, भोजन और आवास की आवश्यकता को विश्व भर के लोगों को समझाने और जागरूक करने के लिए मई और अक्टूबर महीने के शुरू के दूसरे शनिवार को प्रति वर्ष विश्व प्रवासी पक्षी दिवस (World Migratory Bird Day-WMBD) मनाया जाता है। इस बार विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 9 मई को मनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व प्रवासी पक्षी दिवस की थीम “पक्षी हमारी दुनिया को जोड़ते हैं” (Birds Connect Our World) है। विश्व प्रवासी पक्षी दिवस को मनाने की शुरुआत 2006 में अफ्रीकन-यूरेशियन माइग्रेटरी वॉटरबर्ड्स (AEWA) और वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के कन्वेंशन के द्वारा समन्वित रूप से की गई। पक्षी और जीव जंतु क्यों करते हैं प्रवास? अधिकांश जंतु भोजन, आवास और प्रजनन के साथ-साथ मौसम में आए बदलाव के प्रति प्रवास करते हैं। इनमें कुछ का प्रवास कम दूरी का होता है लेकिन कुछ जीव जंतुओं 10000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर तक प्रवास करते हैं। जैसा दूसरे देश के पश्चिम भारत में आते हैं वैसे ही भारत के पश्चिमी दूसरे देश में जाते हैं। भारत के पक्षी भी 10000 किलोमीटर तक का सफर कर रूस के साइबेरिया तक जाते हैं। भारत का सुप्रसिद्ध पक्षी राजहंस भारत में सर्दियां गुजारता है और तिब्बत जाकर मानसरोवर झील के किनारे अंडा देता है। कौन से प्रवासी पक्षी भारत में आते हैं? भारत में आने वाले पक्षियों में साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, ब्लैक विंग्ट स्टिल्ट, कॉमन टील, कॉमन ग्रीनशैंक, नॉर्दर्न पिनटेल, रोजी पेलिकन, गडवाल, वूड सैंडपाइपर, स्पॉटेड सैंडपाइपर, यूरेसियन विजन, ब्लैक टेल्ड गॉडविट, स्पॉटेड रेडशैंक, स्टार्लिग, ब्लूथ्रोट, लांग बिल्ड पिपिट इत्यादि प्रमुख है।इन पक्षियों को हम सांभर झील, जिम कार्बेट, दिल्ली बायोडायवर्सिटी पार्क, भरतपुर,पुलिकट झील,चिल्का झील,कोलेरू झील इत्यादि में देखा जा सकता है। प्रवासी पक्षियों में सारस प्रजाति का साइबेरियन क्रेन पक्षी केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान सहित भारत के अनेक नदियों- झीलों में आते हैं । यूरेशिया से आने वाली बत्तख ‘यूरेशियन टील’ या कॉमन टील हर वर्ष सर्दियों में दक्षिण दिशा में यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में प्रवास करता है। एशियाई कोयल सिंगापुर से भारत के पुडुचेरी में आती है। केवल रात में ही उड़ान भरने वाले ग्रेटर फ्लैमिंगो पक्षी श्रीलंका और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास करता है। बत्तख प्रजाति का गढ़वाल पक्षी एशिया महाद्वीप में प्रवास करता है। ब्लैक टेल्ड गोडविट पक्षी साइबेरिया और यूरोप से मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास करता है। दुनिया में सबसे लम्बे प्रवास मने जाने वाले आर्कटिक टर्न अंटार्कटिका से आर्कटिक आकर प्रवास करता है। कांब डक प्रति वर्ष दक्षिण एशिया या मेडागासकर से भारत के हरियाणा में आता है। प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु संस्थाएं और कानून कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज(CMS) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के आलोक में प्रवासी प्रजातियों की संरक्षण के लिए एक कन्वेंशन के रूप में(सीएमएस) को लागू किया गया। 1979 में जर्मनी के बान में इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर होने के कारण इसे ‘बान कन्वेंशन’ के रूप में भी जाना जाता है। यह कन्वेंशन 1983 से शक्ति में आया। आपको बता दें भारत ने भी 1983 में इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किया। यह कन्वेंशन प्रवासी जीव-जंतु की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सभी हितधारकों को एक मंच पर लाता है। जिस रास्ते से प्रवासी जीव-जंतु गुजरते हैं एवं जिन स्थानों पर ये प्रवास करते हैं वहां पर उनके आवासों के संरक्षण हेतु यह कन्वेंशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी अधिकार प्रदान करता है। आपको बता दें सीएमएस प्रवासी जीव जंतुओं को आसन्न खतरे के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित करता है। परिशिष्ट I - लुप्तप्राय प्रवासी प्रजातियां-इसमें उन प्रजातियों के जीवो को शामिल किया जाता है जिन पर विलुप्त होने का खतरा हो। परिशिष्ट 2 - समझौतों के द्वारा संरक्षित प्रवासी प्रजातियां: इसमें उन प्रजातियों के जीवो को शामिल किया जाता है जिनके संरक्षण की स्थिति प्रतिकूल है एवं इनके संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता आवश्यक है। सीएमएस प्रवासी जातियों के संरक्षण हेतु को बैठक का आयोजन करता है। अब तक 13कोप शिखर का आयोजन किया जा चुका है। 13वें कोप शिखर का आयोजन भारत में किया गया। 13 वें कोप शिखर से संबंधित मुख्य तथ्य:

रसायन बनाने वाले संयंत्र कराएं सुरक्षा ऑडिट: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कोविड-19 लॉकडाउन के बीच तीन औद्योगिक दुर्घटनाओं के एक दिन बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि खतरनाक रसायनों का निर्माण करने वाले उद्योग काम शुरू करने से पहले अपना उचित सुरक्षा ऑडिट करा लें। बोर्ड ने राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा प्रदूषण नियंत्रण समितियों को अपने पत्र में निर्देश दिया कि इस तरह की सभी इकाइयां कोविड-19 लॉकडाउन के बाद ही काम शुरू करें। पृष्ठभूमि हाल में रसायन रिसाव और औद्योगिक हादसों के गंभीर मामले आए हैं। इसके मद्देनजर सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी इकाइयां काम शुरू करने से पहले उचित सुरक्षा ऑडिट कराएं। देश में गुरुवार को तीन औद्योगिक हादसे हुए। पहला हादसा विशाखापत्तनम में एलजी पॉलीमर संयंत्र में गैस के रिसाव से जुड़ा है जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और कम से कम एक हजार लोग बीमार हो गए। इसी तरह का हादसा छत्तीसगढ़ में एक पेपर मिल में हुआ जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से सात लोग बीमार पड़ गए। ये दोनों कारखाने लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। तीसरा हादसा तमिलनाडु में ताप विद्युत संयंत्र में हुआ जहां बॉयलर फटने से आठ लोग झुलस गए। इन हादसों के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का निर्देश काफी मायने रखता है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था। इसके अलावा, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए। यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक फील्ड संघटन का काम करता है तथा मंत्रालय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के बारे में तकनीकी सेवाएं भी प्रदान करता है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 में निर्धारित किए गए अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख कार्य हैं, (i) जल प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण तथा न्यूनीकरण द्वारा राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों और कुओं की स्वच्छता को बढ़ावा देना, और (ii) देश की वायु गुणवत्ता में सुधार करना तथा वायु प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और न्यूनीकरण करना।

चेचक उन्मूलन के 40 साल पूरे होने पर डाक टिकट जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र की पोस्टल एजेंसी ने दुनिया से चेचक के उन्मूलन के 40 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है। इस दौरान डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष भारतवंशी अधिकारी अतुल खरे का आभार व्यक्त किया। पृष्ठभूमि मई 1980 में 33वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने आधिकारिक रूप से घोषणा की थी, ‘दुनिया और उसके सारे लोग चेचक से लड़ाई जीत चुके हैं।’ डब्ल्यूएचओ के 10 साल तक चले वैश्विक प्रयासों के चलते चेचक का उन्मूलन हुआ था जिसमें दुनियाभर में हजारों स्वास्थ्य कर्मियों ने चेचक को समाप्त करने के लिए 50 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए। ‘जब 1967 में डब्ल्यूएचओ का चेचक उन्मूलन अभियान शुरु हुआ था तब देशों ने डाक टिकटों के माध्यम से जागरुकता लाने का प्रयास किया। क्या होता है चेचक रोग? चेचक के विशेष लक्षणों की शुरुआत वेरिओला मेजर वायरस के संपर्क में आने के लगभग दो हफ्ते बाद बुखार और सुस्ती के साथ शुरू होते थे। आमतौर पर सिरदर्द, गले का खराश, और उल्टियां भी होती थी। 2-3 दिनों के बाद, शरीर का तापमान गिरने लगता था और चेहरे और शरीर पर चकत्ते निकल जाते थे, और आगे चलकर धड़ में भी उभर आते थे। धीरे-धीरे, जख्म मुंह, गला और नाक के अंदर बनने लगते थे। द्रव-भरे हुए दाने बनते थे और फैलते थे, कुछ स्थितियों में कुछ दाने एक दूसरे से जुड़ जाते थे और त्वचा के बड़े हिस्से तक फैल जाते थे। रुग्णता के लगभग तीसरे हफ्ते में, पपड़ियां बननी शुरू हो जाती थीं त्वचा से अलग होने लगती थी। किसने बनाया चेचक का टीका? सन 1796 में एडवार्ड जेनर द्वारा इस बात की खोज किए जाने के बाद से ही लोगों ने टीके का प्रयोग शुरू कर दिया था, कि काउपॉक्स के फोड़ों से निकले पदार्थ के संपर्क में आने से लोगों को चेचक से सुरक्षा मिल सकती है। जेनर के काम से आखिरकार दुनिया भर में चेचक के टीके का निर्माण वाणिज्यीकीरण शुरू हुआ।

सऊदी अरब से हटेगी पैट्रियट मिसाइलें चर्चा में क्यों? ईरान के खिलाफ सऊदी अरब के साथ खड़े होने का दावा कर रहे अमेरिका ने रियाद को झटका दिया है। अमेरिका ने फैसला किया है कि वह सऊदी अरब में तैनात ऐंटी-मिसाइल सिस्टम पैट्रियट को हटाएगा। इन्हें पिछले साल तैनात किए गया था जब सऊदी ने आरोप लगाया था कि ईरान की ओर से उसके तेल के ठिकानों पर हमला किया गया। हालांकि, अमेरिका ने दावा किया है कि यह मिसाइलों को हटाया जाना एक नियमित प्रक्रिया है और वह अभी भी सऊदी के साथ खड़ा है। पृष्ठभूमि न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले महीने एक फोन कॉल पर ट्रंप ने सलमान को चेतावनी दी थी कि अगर सऊदी ने तेल का उत्पादन कम नहीं किया तो अमेरिका अपनी फोर्स हटाने पर मजबूर हो जाएगा। कोरोना वायरस महामारी की वजह से तेल की खपत कम हो चुका है और ग्लोबल इकॉनमी पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसे देखते हुए ट्रंप ने सलमान ने कहा था कि सऊदी को तेल का आउटपुट कम करना होगा। हालांकि, इसके बाद उत्पादन कम करने का ऐलान कर दिया गया था। क्यों की गयी थी तैनाती सितंबर 2019 में सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले की जिम्मेदारी यमन के एक गुट ने ली थी लेकिन सऊदी ने ईरान के ऊपर आरोप लगाया था। इस पर ईरान ने विदेशों ताकतकों को जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका से इलाका छोड़ देने को कहा। इसके बाद अमेरिका ने अपनी पैट्रियट मिसाइलों और दूसरे डिफेंस सिस्टम वहां तैनात किए थे।

चिनाब नदी में जलप्रवाह घट जाने का पाकिस्तान का दावा चर्चा में क्यों? पाकिस्तान ने कहा है कि चिनाब नदी में जल प्रवाह बहुत घट गया है जबकि भारत ने उसके इस दावे को ‘आधारहीन प्रलाप’ बताया है। सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी आयोग के भारतीय आयुक्त प्रदीप कुमार सक्सेना को को भेजे पत्र में उनके पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने कहा है कि भारत से पाकिस्तान में जाने वाली चिनाब नदी में मराला हेडवर्क्स से जलप्रवाह 31,853 क्यूसेक से अप्रत्याशित रूप से घट कर 18,700 क्यूसेक रह गया है। उन्होंने सक्सेना से इस स्थिति पर गौर करने और चीजों से उन्हें अवगत कराने को भी कहा है। भारत का रुख सक्सेना ने इस दावे को पाकिस्तान का ‘एक और आधारहीन प्रलाप’ करार दिया और कहा कि मामले का परीक्षण किया गया है। सक्सेना ने ‘‘ भारत में चिनाब और तवी नदियों पर क्रमश: आखिरी आकलन एवं निकास स्थलों --अखनूर और सिधरा में संबंधित अवधि में पानी का निकास एक जैसा पाया गया है और कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आया।’’ उन्होंने कहा कि यह बात पाकिस्तान को बता दी गयी है और उसे मामले का परीक्षण कराने की सलाह दी गयी है। सिंधु जल संधि सिंधु जल समझौते, 1960 के तहत स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया था। तीन पूर्वी नदियां-- रावी, ब्यास और सतलुज पूरी तरह से भारत को आवंटित की गयी हैं। पश्चिमी नदियां-- सिंधु, चिनाब और झेलम पाकिस्तान को आवंटित की गयी हैं तथा भारत को कृषि, नौवहन, घरेलू उपयोग और निर्धारित मापदंड के तहत पनबिजली परियोजनाएं विकसित करने का कुछ अधिकार दिया गया है। समझौते के मामलों में दोनों देशों के सिंधु आयुक्त अपने-अपने देशों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करते हैं।दोनों देशों के सिंधु आयुक्त संधि के मामलों में अपनी अपनी सरकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संधि के तहत हर साल कम से कम एक बार दोनों आयुक्तों की बैठक होती है जो एक बार पाकिस्तान में तो एक बार भारत में होती है। मार्च में दोनों देशों के सिंधु आयुक्तों की बैठक स्थगित कर दी गयी क्योंकि भारत ने कोरोना वायरस महामारी एवं लोकडाउन के चलते उसे टालने का प्रस्ताव दिया था।

भारतीय रेलवे ने 10 मई, 2020 तक देश भर में चलाई हैं 366 ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें यात्रियों को दिया जा रहा है मुफ्त भोजन और पानी यात्रियों को भेजने वाले राज्‍य और यात्रियों का आगमन स्‍वीकार करने वाले राज्‍य दोनों से ही सहमति मिलने के बाद ही रेलवे द्वारा चलाई जा रही हैं स्‍पेशल ट्रेनें सामाजिक दूरी बनाए रखने के मानदंड का किया जा रहा है पालन इनमें से प्रत्येक ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन से लगभग 1200 यात्री करते हैं सफर विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और अन्य व्यक्तियों की आवाजाही विशेष रेलगाड़ियों से सुनिश्चित करने के संबंध में गृह मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त होने के बाद भारतीय रेलवे ने ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया था। 10 मई 2020 (1500 बजे) तक देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 366 ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलाई गई हैं, जिनमें से 287 ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंच भी चुकी हैं, जबकि 79 ट्रेनें फि‍लहाल अपने-अपने गंतव्यों की ओर तेज गति से अग्रसर हैं। इन 287 ट्रेनों का परिचालन विभिन्न राज्यों में पहुंचने पर समाप्त हुआ, जैसे कि आंध्र प्रदेश (1 ट्रेन), बिहार (87 ट्रेनें), हिमाचल प्रदेश (1 ट्रेन), झारखंड (16 ट्रेनें), मध्य प्रदेश (24 ट्रेनें), महाराष्ट्र (3 ट्रेनें), ओडिशा (20 ट्रेनें), राजस्थान (4 ट्रेनें), तेलंगाना (2 ट्रेनें), उत्तर प्रदेश (127 ट्रेनें), पश्चिम बंगाल (2 ट्रेनें)। इन ट्रेनों ने प्रवासियों को कई शहरों तक पहुंचाया है जिनमें तिरुचिरापल्ली, टिटलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, इत्‍यादि शामिल हैं। इन ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों से अधिकतम लगभग 1200 यात्री ही ‘सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम’ का बाकायदा पालन करते हुए सफर कर सकते हैं। इसी तरह ट्रेन में चढ़ने से पहले यात्रियों की समुचित स्‍क्रीनिंग या जांच सुनिश्चित की जाती है। एक और खास बात यह भी है कि इन ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों से सफर के दौरान यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी दिया जाता है।

सीपीएसयू एनटीपीसी ने अपने तीन पावर स्टेशनों पर 100प्रतिशत पीएलएफ अर्जित किया महारत्न कंपनी ने लॉकडाउन के बावजूद असाधारण प्रचालनगत दक्षता प्रदर्शित की विद्युत मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय पीएसयू और भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने 9 मई, 2020 को अपने तीन पावर स्टेशनों-मध्य प्रदेश में एनटीपीसी विंध्याचल (4760 मेगावाट), ओडिशा में एनटीपीसी तलचर कनिहा (3000 मेगावाट) और छत्तीसगढ़ में एनटीपीसी सिपत (2980 मेगावाट) में 100 प्रतिशत पीएलएफ अर्जित किया और इस प्रकार कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन के बावजूद असाधारण प्रचालनगत दक्षता और ईष्टतम क्षमता उपयोग प्रदर्शित की। इसी के साथ साथ हिमाचल प्रदेश में एनटीपीसी कोल्डम वित वर्ष 20-21 के लिए देश में सबसे अच्छे पनबिजली स्टेशनों में से एक के रूप में उभरी है। इससे पूर्व, 13 अप्रैल, 2020 को देश के सबसे बड़े बिजली स्टेशन एनटीपीसी विंध्याचल ने 100 प्रतिशत से अधिक पीएलएफ अर्जित किया था। बिजली उत्पादन से आगे, एनटीपीसी कोविड-19 स्थिति के बीच राशन एवं चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के जरिये निर्बल वर्गों और प्रवासी मजदूरों के लिए सामाजिक कल्याण गतिविधियों में समृद्ध योगदान दे रही है। एनटीपीसी देश भर में अपने सभी प्रतिष्ठानों और बिजली स्टेशनों में सोशल डिस्टैंसिंग बनाये रखने के द्वारा कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन कर रही है। एनटीपीसी समूह की कुल 62110 मेगावाट संस्थापित क्षमता के साथ, एनटीपीसी के पास 25 सयुक्त उपक्रम (जेवी) बिजली केंद्रों के साथ-साथ 24 कोयला, 7 कंबाइंड साइकिल गैस/लिक्विडईंधन, 1 हाईड्रो, 13 नवीकरणीयों से निर्मित्त 70 बिजली स्टेशन हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के जरिए अर्थव्‍यवस्‍था में नए प्राण फूंकने पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए मनाया जाएगा राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस यह कॉन्‍फ्रेंस वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, सरकारी अधिकारियों, राजनयिकों, डब्‍ल्‍यूएचओ के अधिका‍रियों और राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय उद्योग, अनुसंधान संस्‍थाओं और अकादमिक संस्‍थाओं की गणमान्‍य हस्तियों को एक मंच पर लाएगी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैधानिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से 11मई 2020 को राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक उच्‍च स्‍तरीय डिजिटल कॉन्‍फ्रेंस ‘रिबूटिंग द इकॉ‍नोमी थ्रू साइंड एंड टैक्‍नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन्‍स- रीस्टार्ट’ का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धनइस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर सम्‍बोधन करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान सदस्‍य विज्ञान,नीति आयोग डॉ. वी. के. सारस्वत; प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार प्रो. के. विजयराघवन; डब्‍ल्‍यूएचओ में मुख्‍य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन; डीएसटी सचिव डॉ आशुतोष शर्मा और कुछ अन्‍य के विशेष संबोधन भी होंगे और इसमें और टीडीबी, डीएसटी और सीआईआई के अन्य अधिकारी भाग लेंगे। जैव प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव डॉ. रेणु स्‍वरूप, सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडेऔर भारत में इटली के राजदूत महामहिम श्री विन्सेन्ज़ो डी लुका विभिन्न सत्रों में विशेष भाषण देंगे। कोविड-19 संकटकाल में, महामारी के खिलाफ जंग में प्रौद्योगिकी सबसे आगे रही है। जहां एक ओर दुनिया अपने आपको नई व्‍यवस्‍था में ढाल रही है, वहींदुनिया भर में प्रमुख व्‍यापारिक हस्तियां प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए पुनर्विचार कर रही हैं और नई कार्यनीतियां तैयार कर रही हैं जो लचीलापन लाने में मददगार हों और वे संकट से मजबूत होकर उभरें। इस बात को ध्यान में रखते हुएकि अर्थव्यवस्था में नए प्राण फूंकने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करना समय की आवश्यकता है, टीडीबी इसी दिशा में प्रौद्योगिकीय समाधानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मना रहा है। इन प्रौद्योगिकियों में चिकित्सा प्रौद्योगिकियां, उन्नत प्रौद्योगिकियां और विनिर्माण शामिल होंगे जो भारत को कोविड-19 के बाद के समय के लिए तैयार करेंगे। यह कॉन्‍फ्रेंस वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, सरकारी अधिकारियों, राजनयिकों, डब्‍ल्‍यूएचओ के अधिका‍रियों और राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय उद्योग, अनुसंधान संस्‍थाओं और अकादमिक संस्‍थाओं की गणमान्‍य हस्तियों को एक मंच पर लाएगी, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा संकट में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई गई भूमिका पर अपने ज्ञान को साझा करेंगे और ऐसे समाधान तलाशेंगे जो न केवल वर्तमान महामारी को दूर करेंगे बल्कि आगे आने वाली चुनौतियों का सामना करने में भी हमारी मदद करेंगे। कॉन्‍फ्रेंस में 'औषधियों और चिकित्सा प्रौद्योगिकियां'; ‘उन्नत सामग्री- प्रौद्योगिकी के नए क्षितिज’, ‘टिकाऊ भविष्य और वैश्विक नवाचार के लिए उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां’ और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व के लिए प्रौद्योगिकी गठबंधन विषय पर तकनीकी सत्र होंगे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से, टीडीबीदेश में नवाचारों और तकनीकी उत्कृष्टता की उपलब्धियों का जश्‍न मनाने के लिए हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भी है, क्योंकि 11 मई 1998 को ही भारत ने पोखरण में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षणों को अंजाम देकर बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की थी। इसके अलावा, इसी दिन बैंगलोर में पहले स्वदेशी विमान "हंसा-3" ने परीक्षण उड़ान भरी थी; और इसी दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण प्रक्षेपण भी किया था। इस दिन को 1999 सेराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाना वैज्ञानिक जांच, प्रौद्योगिकीय रचनात्मकता और नवाचारों भारत की जद्दोजहद तथा राष्ट्रीय सामाजिक-आर्थिक लाभ और वैश्विक उपस्थिति में इन घटनाक्रमों के एकीकरण का प्रतीक है। डिजिटल कॉन्फ्रेंस के अलावा, उन कंपनियों के साथ एक आभासी प्रदर्शनी की योजना बनाई गई है जिनकी प्रौद्योगिकियां टीडीबीद्वारा समर्थित हैं। विभिन्न संगठनों और कंपनियों द्वाराडिजिटल बी2बी लाउंज के माध्यम से प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को प्रदर्शन किया जाएगा। दुनिया भर के लोग कॉन्फ्रेंस के स्टॉल्‍स को देख सकते हैं।

डीआरडीओ लैब नेइलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कागजों और करेंसी नोटों को कीटाणुमुक्तकरने के लिए स्वचालित यूवी सिस्टम विकसित किया रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रमुख प्रयोगशाला, रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई), हैदराबाद ने एक स्वचालित व संपर्करहित यूवीसी सेनेटाइजेशन कैबिनेट विकसित किया है, जिसे डिफेन्स रिसर्च अल्ट्रावायोलेट सेनेटाइज़र (डीआरयूवीएस) नाम दिया गया है। इसे मोबाइल फोन, आईपैड, लैपटॉप, करेंसी नोट, चेक, चालान, पासबुक, कागज, लिफाफे आदि को कीटाणुमुक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। डीआरयूवीएसकैबिनेट का संपर्करहित संचालन किया जा रहा है जो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सेंसर स्विच तथा दराज को खोलने और बंद करने की सुविधा-इसके संचालन को स्वचालित और संपर्क रहित बनाती है। कैबिनेट के अंदर रखी गई वस्तुओं परयूवीसीका सभी तरफ से असर (360 डिग्री एक्सपोजर) होताहै। कीटाणुमुक्तकरने की प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद सिस्टम स्लीप मोड में चला जाता है इसलिए संचालन करनेवाले को उपकरण के पास इंतजार करने या खड़े होने की आवश्यकता नहीं होती है। डीआरयूवीएसकैबिनेट आरसीआई ने एक स्वचालित यूवीसीकरेंसी नोट सैनिटाइजिंग उपकरण भी विकसित किया है, जिसे नोट्सक्लीन नाम दिया गया है। डीआरयूवीएस का उपयोग करके नोटों के बंडलों को कीटाणुमुक्त किया जा सकता है, हालांकि इसका उपयोग करते हुए प्रत्येक करेंसी नोट को कीटाणुमुक्त करने की इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। इसके समाधान के लिए, एक सैनिटाइजिंग तकनीक विकसित की गई है, जिसके तहतउपकरण के इनपुट स्लॉट मेंनोटों के बंडल को खुले रखनाहै। उपकरणएक-एक करके नोटों को लेता है और उन्हें पूर्ण रूप से कीटाणुमुक्त करने के लिए यूवीसीलैंप की एक श्रृंखला से होकर ले जाता है।

ऑपरेशन समुद्र सेतु आईएनएस मगर भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए माले पहुंचा भारतीय नौसेना के ऑपरेशन समुद्र सेतु का दूसरा पोत आईएनएस मगर मालदीव में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने तथा उन्‍हें सहज और सुरक्षित रूप से भारत वापस लाने के लिए 10 मई 2020 को सुबह माले बंदरगाह पहुंच गया। आईएनएस मगर एक एलएसटी(एल) है, जिसे लैंडिंग ऑपरेशनों के लिए डिजाइन किया गया है। मालदीव रवाना होने से पहले इस पोत ने कोच्चि बंदरगाह में अपने बेस पर नागरिकों को सुविधाजनक रूप से रखने के लिए सभी तरह की आवश्‍यक लॉजिस्टिक, मेडिकल और प्रशासनिक तैयारियां की थीं। यह पोत सामाजिक दूरी के नियमों सहित कोविड-19 से संबंधित सभी सावधानियों का पालन सुनिश्चित करते हुए लगभग 200 नागरिकों को निकालेगा। वापस लाए जा रहे नागरिकों को रखने के लिए पोत के बिल्‍कुल अलग खंड में भोजन और वॉशरूम्‍स जैसी आवश्‍यक सुविधाओं की व्‍यवस्‍था की गई है तथा महिलाओं, बच्‍चों और वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए अलग मैस निर्धारित की गई है। डाइनिंग हाल, बाथरूम्‍स आदि जैसी आम जगहों पर लोगों की भीड़ जमा न हो, इसके लिए लोगों को समूहों में बांटा गया है। साथ-साथ, मालदीव से लोगों को निकालने वाला प्रथम पोत आईएनएस जलाश्‍व 698 भारतीय नागरिकों को लेकर आज सुबह कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया।

कोविड-19 के कारण आ रही विषम चुनौतियों के बावजूद एनएफएल ने अप्रैल माह में उर्वरकों की बिक्री में 71प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि दर्ज की कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान अति विषम परिस्थितियों के बावजूद रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रम नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल)ने अप्रैल 2020 में उर्वरकों की बिक्री में 71 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की। अप्रैल महीने में कंपनी ने 3.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की बिक्री की जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में कपंनी ने 2.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की बिक्री की थी।कंपनी ने लॉकडाउन की वजह से लॉजिस्टिक सेवाओं के बाधित हो जाने के बीच भी किसानों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। एनएफएलके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री मनोज मिश्रा ने अप्रैल में बिक्री में सबसे अधिक वृद्धि हासिल करने के लिए कंपनी की विपणन टीम के प्रयासों की सराहना की है। एनएफएल पंजाब में नांगल और बठिंडा,हरियाणा में पानीपत और मध्यप्रदेश के विजयपुर में स्थितसंयंत्र में यूरिया का उत्पादन करती है। कंपनी की 35.68 लाख टन मिट्रिक टन यूरिया की उत्पादन क्षमता है।सभी तरह के उत्पादों को मिलाकर कंपनी ने 2019-20 के दौरान लगातार पांचवी बार 57 लाख मिट्रिक टन की रिकार्ड बिक्री दर्ज की है। कठिन समय में संयंत्रों की अधिकत उत्पादन क्षमता बनाए रखना देश के कृषक समुदाय के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में एक बड़ी सफलता की कहानी है। कोविड-19 से निबटने के सरकार के प्रयासों में पूरा योगदान देने के लिए एनएफएल के कर्मचारियों ने अपने एक दिन के वेतन के कुल 88 लाख रुपए पीएम केयर्स फंड में दान दिए हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी ने कार्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत अपनी तरफ से भी 1.52 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में दिए हैं।

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