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Ojha Sir - World History Class Notes.pdf

📚 सम-सामयिक घटना चक्र अतिरिक्तांक ✍GS प्वाइंटर-4 (पूर्वावलोकन सार) ✍सामान्य भूगोल (भारत का भूगोल) =======================

📚 सम-सामयिक घटना चक्र अतिरिक्तांक ✍GS प्वाइंटर-3 (पूर्वावलोकन सार) ✍ भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन =======================

📚 सम-सामयिक घटना चक्र अतिरिक्तांक ✍GS प्वाइंटर-2 (पूर्वावलोकन सार) ✍ आधुनिक भारत का इतिहास =======================

📚 सम-सामयिक घटना चक्र अतिरिक्तांक ✍GS प्वाइंटर-1 (पूर्वावलोकन सार) ✍ प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास =======================

OBJECTIVE COMPUTER UPKAR PUB HINDI @Aj_ebooks.pdf19.81 MB

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ओडिशा सरकार द्वारा COVID-19 से उत्पन्न समस्याओं से निपटने हेतु एक अध्यादेश लाया गया है। यह अध्यादेश निवेशकों और किसानों को अनुबंध कृषि (Contract Farming) की अनुमति देता है। प्रमुख बिंदु: उल्लेखनीय है कि ओडिशा सरकार द्वारा अनुबंध कृषि हेतु एक ‘कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एंड सर्विसेज़’ (Contract Farming and Services) समिति भी बनाई जाएगी। यह समिति सरकार को अनुबंध कृषि हेतु प्रचार करने और किसानों की दक्षता में सुधार लाने के लिये सुझाव देगी, साथ ही अनुबंध कृषि से संबंधित मुद्दों की समीक्षा भी करेगी। अध्यादेश का उद्देश्य किसानों और निवेशकों दोनों को पारस्परिक रूप से लाभ देना और कुशल अनुबंध कृषि प्रणाली विकसित करना है। निवेशकों द्वारा किसानों को दिया जाने वाला ऋण या अग्रिम धनराशि को उपज बेचकर चुकाया जा सकता है। इस अध्यादेश में भूमि अधिकार हस्तांतरण संबंधी प्रावधान प्रदत्त नहीं है। अनुबंध कृषि (Contract Farming): अनुबंध कृषि खरीदार और किसानों के मध्य हुआ एक ऐसा समझौता है, जिसमें इसके तहत किये जाने वाले कृषि उत्पादन की प्रमुख शर्तों को परिभाषित किया जाता है। इसमें कृषि उत्पादों और विपणन के लिये कुछ मानक स्थापित किये जाते हैं। इसके तहत किसान किसी विशेष कृषि उत्पाद की उपयुक्त मात्रा खरीदारों को देने के लिये सहमति व्यक्त करते हैं और खरीदार उस उत्पाद को खरीदने के लिये अपनी स्वीकृति देता है। अनुबंध कृषि के लाभ: यह छोटे स्तर के किसानों को प्रतिस्पर्द्धा बना देता है। इसमें आने वाली लागत को कम करने के लिये छोटे किसान तकनीकी, ऋण, विज्ञापन चैनलों और सूचना प्रणालियों की सहायता लेते हैं। इस प्रकार उनके उत्पाद के लिये उन्हें आसानी से बाज़ार मिल जाता है, जिससे बाज़ार में जाकर किये जाने वाले लेन-देन और अनावश्यक खर्च कम हो जाता है। अनुबंध कृषि से उपज की गुणवत्ता बनी रहती है। कृषि प्रसंस्करण स्तरों के मामले में यह कृषि उत्पाद की निरंतर आपूर्ति को सुनिश्चित करता है और इसकी लागत भी कम होती है। कृषि उत्पाद के लिये मूल्य का निर्धारण उत्पादक और फर्मों के मध्य वार्ता द्वारा किया जाता है। किसान नियमों और शर्तों के तहत निर्धारित मूल्यों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में प्रवेश करते हैं। अनुबंध कृषि की चुनौतियाँ: अनुबंध कृषि की आलोचना प्रायः यह कहकर की जाती है कि यह फर्मों और बड़े किसानों के पक्ष में होती है और छोटे किसानों की क्षमता को नज़रअंदाज़ कर देती है। इसके लिये किये गए समझौते प्रायः अनौपचारिक होते हैं, यहाँ तक कि लिखित अनुबंधों को भी अदालतों में लंबे समय तक खींचा जाता है। इसमें खरीदार एक होता है, जबकि विक्रेता अनेक। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में भागीदारी अपेक्षाकृत कम है, जो समावेशी विकास के सिद्धांत के प्रतिकूल है। अनुबंध कृषि में किसानों के समक्ष समय पर भुगतान की समस्या, कंपनियों और किसानों के बीच विवाद, किसानों का शोषण आदि जैसी चुनौतियाँ भी देखने को मिलती हैं। आगे की राह: अनुबंध कृषि भी उन कई उपायों में से एक है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, किंतु किसानों को उनकी पैदावार का न्यायसंगत मूल्य दिलाने व कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने हेतु सरकार को अनुबंध कृषि जैसे तरीकों का सधे हुए कदमों से प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है। सरकार को किसानों के शोषण को रोकने हेतु विशेषज्ञों की मदद से निरंतर ज़मीनी स्तर पर अध्ययन करते रहना चाहिये जिससे किसानों के हित में मौजूदा कानून को संशोधित किया जा सके। अनुबंध कृषि को बढ़ावा देने हेतु आयातित तकनीक या मशीनों पर अत्यधिक छूट देने का प्रावधान किया जाना चाहिये। किसानों और कंपनियों से विवाद की स्थिति में शीघ्रता से मामलों का निपटारा किया जाना चाहिये।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी (Indian Institute of Technology, Guwahati- IITG) के शोधकर्त्ताओं द्वारा विकसित ‘ट्रोजन हॉर्स’ (Trojan Horse) विधि अल्ज़ाइमर रोग संबंधी स्मृति ह्रास को रोकने में मददगार साबित हो सकती है। प्रमुख बिंदु: उल्लेखनीय है कि ‘ट्रोजन हॉर्स’ विधि (ट्रोजन पेप्टाइड्स का उपयोग) की मदद से मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक मॉलिक्यूल (Neurotoxic Molecules) के संचय को रोका जा सकता है। ट्रोजन पेप्टाइड्स (Trojan Peptides) का उपयोग एक कम वोल्टेज वाले विद्युत क्षेत्र के रूप में किया जाता है जो मस्तिष्क में ‘एमीलॉइड प्लेक्स’ (Amyloid Plaques) के एकत्रीकरण को रोकता है। मस्तिष्क में एमीलॉइड-बीटा पेप्टाइड्स (Amyloid-beta Peptides) के संचय के कारण अल्ज़ाइमर रोग होता है। शोधकर्त्ताओं के अनुसार, बाहरी विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग कर एमीलॉइड-बीटा पेप्टाइड्स के संचय को रोका जा सकता है जिसके कारण अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित होने की संभावना कम हो जाती है। एमीलॉइड-बीटा पेप्टाइड्स ‘एमीलॉइड प्लेक्स’ के ही समान होता है जो एक निश्चित अवधि के बाद धमनियों को अवरुद्ध कर रक्त की आपूर्ति को प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप एमीलॉइड-बीटा पेप्टाइड्स (Amyloid Beta Peptides) के संचय से अल्ज़ाइमर रोग होता है। इससे हृदय संबंधी रोग भी उत्पन्न होते हैं। कार्यप्रणाली: ट्रोजन पेप्टाइड शरीर में मौजूद पेप्टाइड की तरह ही होता है किंतु जब यह शरीर में मौजूद अन्य पेप्टाइड्स के साथ मिश्रित होता है, तो इसका कार्य एकत्रीकरण के विपरीत हो जाता है। ट्रोजन पेप्टाइड के इंजेक्शन के माध्यम से तंत्रिका कोशिकाओं के नष्ट होने की दर को 17-35% तक कम किया जा सकता है। इस विधि से अल्ज़ाइमर रोग को लगभग 10 वर्ष तक रोका जा सकता है। अल्ज़ाइमर रोग अल्ज़ाइमर रोग एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) है जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट करता है। इसके कारण रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति कमज़ोर हो जाती है उसे कुछ भी याद नहीं रहता है, उसकी निर्णय लेने की क्षमता घट जाती है, स्वभाव में लगातार परिवर्तन होता रहता है, आदि। प्रारंभ में ये लक्षण कम मात्रा में होते हैं लेकिन समय रहते इसका उपचार न कराया जाए तो यह गंभीर और असाध्य हो जाता है। 55-60 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया (dementia) का प्रमुख कारण है। डिमेंशिया रोग मानसिक रोगों का एक समूह होता है जिसमें व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता घट जाती हैं। यह रोग मस्तिष्क में एक विशेष प्रकार की टैंगल्स (Tangles) नामक प्रोटीन निर्माण के कारण होता है। उम्र बढ़ने के साथ साथ इसका खतरा और बढ़ जाता है लेकिन कभी-कभी दुर्लभ आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण इसके लक्षण 30 वर्ष की आयु के लोगो में भी देखने को मिल जाते है। अल्ज़ाइमर एक असाध्य रोग है क्योंकि इसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएँ मृत हो जाती हैं, जो पुनः जीवित नहीं हो सकती हैं। यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज़ के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्ज़ाइमर होने का खतरा दोगुना होता है। अल्ज़ाइमर रोग का इलाज भारत के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और चीन के बाद भारत इस रोग से सबसे ज्यादा पीड़ित है।