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13-06-2017 - THE INDIAN EXPRESS - SHASHI THAKUR
https://shashidthakur23.wordpress.com/
Download following from the link at the bottom:
a. Last 10 Months Indian Express Papers
b. Last 27 Months Hindu Papers
c. Last 10 Months JANSATTA Papers
d. Last 8 Months DAINIK JAGRAN Papers
Click below:
https://shashidthakur23.wordpress.com/
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13-06-2017 - THE HINDU - SHASHI THAKUR
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a. Last 27 Months Hindu Papers
b. Last 10 Months Indian Express Papers
c. Last 8 Months DAINIK JAGRAN Papers
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25 Revision Classes - Learning Space
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प्रारम्भिक परीक्षा के ठीक पहले और exam hall में ...
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प्रारम्भिक परीक्षा क्वालीफ़ाई करना कितना महत्वपूर्ण है, हम सब जानते ही हैं। आइए, समझें कि इस प्रीलिम्स परीक्षा के ठीक पहले की तनावपूर्ण घड़ी में कैसे सहज रहकर सफलता हासिल करें -
- सबसे पहले तो मन से यह ग़लतफ़हमी निकाल दें कि आप पहले पढ़ी हुई चीज़ें भूल गए हैं। निश्चिन्त रहें, परीक्षा भवन में आप सब कुछ पढ़ा हुआ रिकलेक्ट कर पाएँगे।
- विश्वास भरपूर रखें कि आपकी तैयारी अच्छी है तो सेलेक्शन की सम्भावनाएँ भी ज़्यादा हैं। वैसे भी लाखों अभ्यर्थियों में sincere या गम्भीर अभ्यर्थी काफ़ी कम ही होते हैं।
- 'निष्काम कर्मयोग' (Disinterested Action) का सिद्धांत ख़ास तौर पर प्रीलिम्स में बहुत सहारा देता है। परीक्षा को तनावमुक्त होकर देना हमारा काम है, उसके परिणाम की उधेड़बुन में लगे रहने का कोई औचित्य नहीं है। प्रीलिम्स में असफल हो जाने वाले ज़्यादातर अभ्यर्थी यह स्वीकार करते हैं कि हमने सवाल का उत्तर जानने के बावजूद जल्दबाज़ी, तनाव, स्ट्रेस या ऊहापोह में ग़लत विकल्प चुन लिया या फिर ग़लत गोला भर दिया।
- रिवीज़न ही करें, यह नया पढ़ने का समय नहीं है। हो सके तो, एक बार राजव्यस्वस्था, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और करेंट अफ़ेयर्स को दोबारा देख लें।
- निगेटिव मार्किंग से निपटने के लिए अभ्यास ज़रूरी है, लिहाज़ा टेस्ट पेपर हल करें और निगेटिव मार्किंग का गणित अच्छे से समझ कर अपनी एक सम्भावित रणनीति बना लें।
- पेपर एक और पेपर दो, दोनों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करें।
- इस बात का सिरदर्द बिलकुल न पालें कि आपको पढ़ी हुई बातें याद हैं या नहीं। आपने साल भर जो कुछ भी पढ़ा है, वह निश्चित रूप से आपके स्मृति पटल में सुरक्षित है और वह ज़रूरत पड़ने पर स्वतः याद आ जाएगा।
- परीक्षा चूँकि सुबह होती है अतः आख़िरी के दिनों में वक़्त पर सोने और सुबह वक़्त पर उठने की आदत डाल लाइन ताकि परीक्षा की सुबह तरोताज़ा उठें।
- किसी की देखादेखी अपनी नींद को नज़रअन्दाज़ न करें और रोज़ सात घंटे की नींद ज़रूर लें।
- हल्का और सुपाच्य भोजन लाइन, फल-सब्ज़ियाँ-सलाद का सेवन करें।
- सुबह या शाम के समय आधा घंटा हरियाली के बीच टहलें ज़रूर।
- अपने आराध्य पर और ख़ुद पर आस्था बनाए रखें।
- इधर-उधर की बातों या व्यर्थ के तनावों से बचें और नकारात्मकता से कोसों दूर रहें।
परीक्षा हॉल में ....
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-प्रीलिम्स में होने वाली एक आम ग़लती यह है कि हम सवाल को ध्यान से या सावधानी से नहीं पढ़ते। मसलन अगर किसी बहुविकल्पीय प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-कौन से विकल्प सही 'नहीं'हैं? और जल्दबाज़ी या लापरवाही में हमने 'नहीं' शब्द पर ध्यान नहीं दिया तो पूरी तरह आने वाला प्रश्न भी ग़लत हो जाएगा। अतः हर सवाल को धैर्यपूर्वक पढ़ें।
- प्रीलिम्स का पेपर इंग्लिश और हिंदी दो भाषाओं में आता है। मेरी व्यक्तिगत सलाह है कि यदि आपको कोई शब्द या वाक्य एक भाषा में समझ नहीं आ पा रहा है तो दूसरी भाषा में उसका अनुवाद देख लें। कभी-कभी उससे भी कुछ क्लू मिल जाता है।
- पेपर के पहले पन्ने पर दिए गए दिशानिर्देशों को ज़रूर पढ़ें। आपको उत्तर-पत्रक पर काले रंग के बॉल पेन से गोले (bubbles) भरने होते हैं। निर्देशानुसार सही तरीक़े से गोले भरें।
-पेपर को देखकर ही आपको अंदाज़ा होता है कि इस साल पेपर कैसा आया है। कुछ अभ्यर्थी कठिन पेपर देखकर बुरी तरह घबरा जाते हैं। मैं उन्हें याद दिलाना चाहूँगा कि पेपर आसान हो या कठिन, सभी अभ्यर्थियों के लिए एक जैसा ही है। अतः घबराए बग़ैर आसन्न परिस्थितियों में ही अपना बेस्ट प्रदर्शन करें।
- कुछ अभ्यर्थी इतने ज़्यादा उतावले और व्यग्र होते हैं कि पहला पेपर देने के बाद दूसरा पेपर शुरू होने के पहले फ़र्स्ट पेपर के विकल्पों की जाँच करने लगते हैं। यह सरासर ग़लत है। आप पहला पेपर कुछ घंटों के लिए उसे भूल जाएँ। ख़ुद को थोड़ा रीलैक्स करें और तरोताज़ा होकर सेकिंड पेपर देने पहुँचें।
- दोनों पेपर देने के तुरंत बाद उत्तर कुंजियाँ (answer key) न ढूँढें। यदि आपको सही उत्तर जानने ही हैं, तो आराम से दो-तीन दिन बाद किसी अच्छी 'आन्सर की' से मिलान करें। ध्यान रहे, कि कोई भी 'आन्सर की' शत प्रतिशत सही नहीं है। कट ऑफ़ कितना जाएगा, इन अटकलों में उलझे बग़ैर अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा की तैयारी में जी-जान से जुट जाएँ।
(बेस्ट्सेलर किताब 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' -लेखक- निशान्त जैन IAS से साभार)
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आई. ए. एस प्रिलिम्स 2017 सामान्य अध्य्यन प्रश्नोत्तरी ( 15 क्विज) [ 15 * 10 =150 सवाल ]
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Nirman Ias (Facebook)
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#The_EconomicTimes का Editorial
=>क्यों परमाणु तकनीक और ईंधन के मामले में अब भारत को विदेशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए
सन्दर्भ - भारत में दुनिया का करीब एक चौथाई थोरियम भंडार मौजूद है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उसके आत्मनिर्भर होने की कुंजी है.
परमाणु बिजली उत्पादन के मोर्चे पर भारत में काफी काम हो रहा है. लेकिन अब समय आ चुका है जब इस दिशा में भी स्वदेशी तकनीक और संसाधनों को बढ़ावा दिया जाए. पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस यात्रा पर थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की यूनिट पांच और छह के निर्माण के लिए समझौता हो गया है. इनमें से प्रत्येक यूनिट से 1000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा. इनकी कुल लागत 50 हजार करोड़ रुपये के लगभग आएगी और रूस इसमें से आधी रकम कर्ज के रूप में उपलब्ध कराएगा. समझौते के मुताबिक परमाणु ईंधन की आपूर्ति भी रूस की जिम्मेदारी है.
इसमें कोई बुराई नहीं है कि भारत घरेलू स्तर पर परमाणु बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए विदेशी विशेषज्ञता का फायदा उठाए. लेकिन इसके साथ यह भी समझना होगा कि स्वदेशी तकनीक और ईंधन देश के लिए काफी किफायती साबित हो सकते हैं. ऐसी ही और भी वजहें हैं जिनके लिए हमें थोरियम आधारित न्यूक्लियर प्लांट विकसित और स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने चाहिए. यहां ध्यान देने वाली बात है कि इन न्यूक्लियर प्लांट्स में अपेक्षाकृत कम परमाणु कचरा पैदा होता है. वहीं दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि भारत में दुनिया का तकरीबन एक चौथाई थोरियम भंडार मौजूद है.
इस रेडियोएक्टिव तत्व के साथ सबसे बुनियादी समस्या यह है कि इसका नाभिकीय विखंडन अपने आप नहीं हो सकता. यानी कि यह अपने आप से तैयार परमाणु ईंधन नहीं होता. इसमें विखंडन की प्रक्रिया शुरू करने और इसे यूरेनियम-233 में तब्दील करने के लिए शुरुआती स्तर पर एक दूसरे रेडियोएक्टिव पदार्थ प्लूटोनियम की जरूरत है.
2008 के भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते के बाद भारत को यूरेनियम आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यह काफी महंगा ईंधन है. इस समय भारत की परमाणु बिजली क्षमता 6700 मेगावॉट की है और इसके लिए हर साल कई हजार टन यूरेनियम आयात करना पड़ता है. भारत आने वाले दिनों में 700 मेगावॉट उत्पादन के 10 और न्यूक्लियर प्लांट बनाने जा रहा है. इनके लिए और यूरेनियम की जरूरत पड़ेगी. इसी अनुपात में इनके रखरखाव की लागत भी काफी ज्यादा होगी.
बेशक हम इस समय सौर ऊर्जा से सस्ती बिजली बना रहे हैं लेकिन हमें फिर भी परमाणु ऊर्जा की जरूरत होगी है. और इसीलिए अब जरूरत है कि हम देसी ईंधन (थोरियम) और देसी तकनीक का विकास करें. इस दिशा में भारत सरकार एडवान्स्ड हेवी वॉटर रिएक्टर की परियोजना काफी पहले शुरू कर चुकी है. इस तरह के रिएक्टर में ईंधन के रूप में 80 प्रतिशत थोरियम और सिर्फ 20 प्रतिशत यूरेनियम का इस्तेमाल होता है. अब बस जरूरत है कि इस तरह के रिएक्टरों के निर्माण और स्थापना पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाए.
#IAS #UPSC #MPPSC #RPSC #CGPSC #UPPSC
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12-06-2017 - THE INDIAN EXPRESS - SHASHI THAKUR
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