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12 अगस्त
cgPSC I Q छत्तीसगढ़ व भारत करेंट
छत्तीसगढ़ के महापुरुषों को मिला NCERT पुस्तक में स्थान
मुकुटधर पांडेय जीवनी - 8 वीं में शामिल
माधवराव सप्रे का पाठ - 8 वीं कक्षा शामिल
गंगाराम मगरमच्छ कहानी - बावा मोहतरा (बेमेतरा) कक्षा - 10वीं में शामिल
विकासशील (मुख्यसचिव - 13 वाँ)
कुपोषण - एनीमिया से लड़ने अभियान
आयोजन - cg सभी जिलों में
सहयोग - यूनिसेफ
उद्देश्य -
बच्चों को कुपोषण व एनीमिया से बचाना
बच्चों के पोषण स्वास्थ्य, साफ पानी और स्वच्छता मजबूत करना
बच्चों में माइक्रोन्यूट्रीएंट्स, फोलेट, विटामिन B12 व जिंक उपलब्धता सुनिश्चित करना
वर्तमान नवम्बर 2025तक राज्य में कुपोषण दर
13.61%, 2.37 लाख बच्चे कुपोषित
जिला -
सुकमा - 32.54%
मोहला - 28.43%
वसुंधरा सम्मान
राजेश गनोदवाले
राष्ट्रीय
लाइफटाइम लिबर्टेरियन अवार्ड
प्प्राप्तकर्ता - गुरचरण दास
पुस्तक - India Grows at Night
प्रदानकर्ता - लिबर्टी इंटरनेशनल
EOD अभ्यास
संस्करण - 8
स्थान - कोच्चि (केरल)
शामिल - भारतीय व अमेरिकी नौसेना
काकोरी ट्रेन एक्शन 101 वर्षगांठ
9 अगस्त 1925 सरकारी खजाना लूटा
16 वीं शेर जनगणना
भारत में एशियाई शेरों की आबादी में वृद्धि
2015 - 523 से बढ़कर 2023 में 891
वृद्धि % = 70.1%
ED निदेशक
राहुल नवीन
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस
12 अगस्त
थीम - Different Context, Common Aspiration
हॉकी वर्ल्ड कप
आयोजन - 15 से 25 अगस्त
टीम - 16 पुरुष , 16 महिला
मेजबानी - नीदरलैंड, बेल्जियम (संयुक्त)
हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन
स्वर्ण पदक - 1975 (कप्तान अजीत पाल, उप कप्तान गोविंदा)
रजत पदक - 1973
कांस्य पदक - 1971
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस - 10 अगस्त
NCERT को मानित विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।
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हरेली पर्व : छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, कृषि और प्रकृति का उत्सव
भूमिका
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व है। यह मुख्यतः कृषि, हरियाली, पशुधन और प्रकृति से जुड़ा पर्व है। सावन अमावस्या के आसपास मनाया जाने वाला यह त्योहार किसान जीवन और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति की विशिष्ट पहचान है।
प्रमुख रस्में एवं परंपराएँ
1. कृषि उपकरणों की पूजा
हरेली के दिन किसान अपने हल, कुदाल, फावड़ा, बैलगाड़ी तथा अन्य कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। इसका उद्देश्य कृषि और कृषि-उपकरणों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
2. पशुधन की पूजा एवं देखभाल
किसान अपने गाय-बैल और अन्य पशुओं को स्नान कराते हैं तथा उन्हें विशेष आहार देते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
3. नीम की टहनी लगाने की परंपरा
घरों के मुख्य द्वार पर नीम की टहनियाँ लगाने की परंपरा है। लोकमान्यता में नीम को स्वास्थ्य एवं रोग-निवारण से जोड़ा जाता है।
4. घर एवं कृषि परिसर की शुद्धि
घर-आँगन और कृषि से जुड़े स्थानों की साफ-सफाई की जाती है। कई क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से नीम की पत्तियों और अन्य स्थानीय वनस्पतियों का प्रयोग किया जाता है।
5. गेड़ी चढ़ने की परंपरा
हरेली का सबसे आकर्षक लोकाचार गेड़ी है। बच्चे और युवा बाँस की बनी गेड़ी पर चढ़कर खेलते हैं। यह छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक-संस्कृति और सामुदायिक आनंद का प्रतीक है।
6. पारंपरिक खेल एवं लोकगीत
इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न पारंपरिक खेल, लोकगीत और सामूहिक मनोरंजन आयोजित होते हैं। इससे स्थानीय लोकपरंपराओं का संरक्षण होता है।
7. पकवान एवं प्रसाद
घरों में स्थानीय परंपरा के अनुसार विभिन्न पारंपरिक व्यंजन और पकवान बनाए जाते हैं तथा परिवार और समुदाय के साथ पर्व मनाया जाता है।
8. कृषि की समृद्धि की कामना
हरेली के माध्यम से किसान अच्छी वर्षा, अच्छी फसल, पशुधन की स्वस्थता और कृषि-समृद्धि की कामना करते हैं। इस प्रकार यह पर्व कृषि चक्र से गहराई से जुड़ा हुआ है।
सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व
हरेली केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह मनुष्य, कृषि, पशुधन और प्रकृति के बीच संबंध को दर्शाता है। हरियाली के प्रति सम्मान और कृषि संसाधनों के महत्व का संदेश आज के समय में भी प्रासंगिक है। सामूहिक रूप से पर्व मनाने से ग्रामीण सामाजिक एकता और लोक-संस्कृति को भी मजबूती मिलती है।
*निष्कर्ष**
हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि-प्रधान जीवनशैली और लोकसंस्कृति का जीवंत प्रतीक है। हल की पूजा से लेकर पशुधन की देखभाल, नीम की टहनी और गेड़ी जैसे लोकाचार तक, इसकी प्रत्येक परंपरा प्रकृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हुई है। इसलिए हरेली को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण, लोकपरंपरा और सामुदायिक एकता के उत्सव के रूप में देखा जाना चाहिए।
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"हारने का डर और जीतने की उम्मीद... इन दोनों के बीच जो एक टेंशन वाला वक़्त होता है ना, कमाल का होता है!"
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11 अगस्त छत्तीसगढ़ एवं राष्ट्रीय करेंट
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बस्तर दशहरा
75 दिनों तक
सेंध लेक
अवस्थित - रायपुर
बाण सागर तालाब (पुरातन शिव मंदिर)
अवस्थित - जगदलपुर
राजवंश - छिंदकनागवंश
ढोकरा शिल्पकला (घड़वा कला / बेल मेटल आर्ट)
यह पीतल और कांसे (मिश्रित धातु) की ढलाई की एक अत्यंत प्राचीन व पारंपरिक कला
तकनीक: इसमें लॉस्ट वैक्स (Lost-Wax)
केंद्र: कोंडागांव (इसे छत्तीसगढ़ की 'शिल्प नगरी' कहा जाता है) तथा बस्तर जिला। इसे बस्तर ढोकरा (Bastar Dhokra) के नाम से GI टैग प्राप्त है।
संबंधित शिल्पकार
जयदेव बघेल (कोंडागांव) – ढोकरा शिल्प के सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय कलाकार।
माणिक घड़वा – बस्तर के प्रतिष्ठित पारंपरिक कलाकार।
राजेंद्र घड़वा – राष्ट्रीय स्तर के शिल्पकार।
सरगुजा राजपरिवार के सदस्य विश्वेश्वर शरण सिंहदेव ने सरगुजा में 40 एकड़ में तैयार किया इंटीग्रेटेड खेती का शानदार मॉडल
जैविक खेती :
रासायनिक खाद और कीटनाशक छोड़कर सिर्फ देसी/जैविक खाद और कंपोस्ट से खेती करना।
एकीकृत खेती (Integrated Farming):
खेती के साथ-साथ गाय-भैंस पालना, मछली पालन या बागवानी करना। इसमें एक काम का कचरा (जैसे गोबर) दूसरे काम में खाद या इनपुट की तरह इस्तेमाल होता है।
जीआई टैग (GI Tag):
यह एक खास सरकारी पहचान (अधिकार) है, जो किसी इलाके की मशहूर और खास वस्तु को मिलती है।
इसका कानून 1999 में बना था और इसका मेन ऑफिस चेन्नई में है।
छत्तीसगढ़ के 6 (GI Tag) उत्पाद
जीराफूल (सुगंधित चावल)
नगरी दुबराज (सुगंधित चावल)
बस्तर आयरन क्राफ्ट (लोहे की पिटवा कला)
बस्तर ढोकरा (कांस्य/पीतल घड़वा शिल्प)
बस्तर ढोकरा लोगो (उसका सरकारी चिन्ह)
चंपा सिल्क साड़ी (कोसा/रेशम के कपड़े)
राष्ट्रीय करेंट
केरल राज्य का नाम परिवर्तन
प्रस्तावित नया नाम: केरलम
अनुच्छेद: अनुच्छेद-3 (यह अनुच्छेद संसद को नए राज्यों के गठन, नाम बदलने या सीमा परिवर्तन का अधिकार देता है)।
देश की सबसे ऊंची वन्यजीव सफारी
विशेषता: सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित भारत की पहली वन्यजीव सफारी।
स्थान: लद्दाख 🏔️
एम. एस. स्वामीनाथन पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार
विजेता (संयुक्त रूप से):
पी. पेचियम्माल
गोविन्दम्माल
अनिल मेनन -
उपलब्धि: अंतरिक्ष में 'स्पेस वॉक' करने वाले तीसरे भारतीय मूल के व्यक्ति बने।
इनसे पहले स्पेस वॉक करने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति:
सुनीता विलियम्स
राजा चारी
कोरिया मास्टर्स सुपर 300
विजेता: अस्मिता चालिहा
संबंधित खेल: बैडमिंटन
