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22 Sep 2026 PIB Updates
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🔆 स्वास्थ्य सेवा में नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा और उन्नत तकनीक पर आधारित वायरोलॉजी
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: आयुष मंत्रालय / विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
✅ कार्यक्रम: 11वां आयुर्वेद दिवस / 9वीं आणविक वायरोलॉजी बैठक (एमवीएम 2026)
✅ स्थान: नागपुर, महाराष्ट्र / नई दिल्ली
✅ उद्देश्य: आयुर्वेदिक प्रथाओं को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना और उन्नत तकनीक पर आधारित वायरोलॉजी को सार्वजनिक स्वास्थ्य समाधानों में परिवर्तित करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: आयुष मंत्रालय ने नागपुर में 11वें आयुर्वेद दिवस की घोषणा की, जबकि बीआरआईसी-एनआईआई ने नई दिल्ली में 9वीं आणविक वायरोलॉजी बैठक का आयोजन किया ताकि अनुसंधान को बायोई3 नीति के अनुरूप बनाया जा सके।
♻️ मुख्य बातें
🔹 11वां आयुर्वेद दिवस: यह नागपुर में आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय होगा: *“एक स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद”*। इसमें आयुष सेवा क्षेत्र पर पहली रिपोर्ट (आरआईएस द्वारा) और प्रमुख औषधीय पौधों पर सुरक्षा संबंधी जानकारी जारी की जाएगी।
🔹 गुणवत्ता और नवाचार: इस कार्यक्रम में सीसीआरएएस-एजीएनआई मूल्यांकन स्केल वेब पोर्टल और आयुष गुणवत्ता चिह्न प्रमाणन की शुरुआत की जाएगी, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को सख्त वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नैदानिक सत्यापन की ओर ले जाया जाएगा।
🔹 9वीं आणविक वायरोलॉजी बैठक: यह बीआरआईसी-एनआईआई द्वारा (आईसीजीईबी और आरसीबी के समर्थन से) नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक का ध्यान मौलिक वायरल जीव विज्ञान (इन्फ्लूएंजा, डेंगू, आरएसवी) को सक्रिय टीकों, उपचारों और निदान में परिवर्तित करने पर था।
🔹 बायोई3 नीति के साथ संरेखण: पैनलिस्टों ने जोर दिया कि राष्ट्रीय वायरोलॉजी क्षमताओं को प्रयोगशाला में किए गए अनुसंधान से लेकर स्केलेबल उत्पादों तक ले जाना चाहिए, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बायोई3 और 'विकसित भारत' ढांचे के साथ पूरी तरह से संरेखित हों।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ सीसीआरएएस-एजीएनआई: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ने आयुर्वेद ज्ञान नैपुण्य पहल (एजीएनआई) शुरू की है ताकि देश भर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा किए गए सफल चिकित्सीय अभ्यासों को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया जा सके और उनका सत्यापन किया जा सके।
🗿 मुख्य विचार
✅ सार्वजनिक स्वास्थ्य संप्रभुता के लिए दोहरे दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
✅ पारंपरिक चिकित्सा को कठोर नैदानिक मानकीकरण (आयुर्वेद दिवस पहल) के अधीन करके और साथ ही उन्नत तकनीक पर आधारित आणविक वायरोलॉजी को वाणिज्यिक उपचारों की दिशा में आगे बढ़ाकर, राज्य अपनी आबादी को पुरानी गैर-संचारी बीमारियों और उभरते वायरल महामारियों दोनों से सुरक्षित रखता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
🔹 कार्यक्रम: 11वां आयुर्वेद दिवस (नागपुर; विषय: एक स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद)।
🔹 पहल: सीसीआरएएस-एजीएनआई मूल्यांकन स्केल; आयुष सेवा क्षेत्र पर रिपोर्ट।
🔹 विज्ञान कार्यक्रम: 9वीं आणविक वायरोलॉजी बैठक (बीआरआईसी-एनआईआई, नई दिल्ली)।
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🔆 सामाजिक न्याय, स्वच्छता, गरिमा और बुनियादी ढांचा शासन
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय / सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
✅ परियोजना: नमस्ते योजना की प्रगति / एनएचएआई-एसएसएनएल समझौता ज्ञापन
✅ स्थान: पूरे भारत / गांधीनगर, गुजरात
✅ उद्देश्य: खतरनाक मैनुअल सफाई को खत्म करना और राजमार्ग विकास में नौकरशाही की बाधाओं को स्थायी रूप से समाप्त करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने नमस्ते योजना के तहत स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन की बड़ी संख्या की जानकारी दी, जबकि एनएचएआई ने गुजरात में बुनियादी ढांचे की मंजूरी को तेज करने के लिए एसएसएनएल के साथ साझेदारी की।
♻️ मुख्य बातें
🔹 नमस्ते योजना के तहत सत्यापन: इस योजना ने आधिकारिक तौर पर 90,186 सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों को सत्यापित किया है और 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2,51,756 कचरा बीनने वालों का डेटाबेस बनाया है, जिससे उन्हें औपचारिक सामाजिक सुरक्षा जाल में लाया गया है।
🔹 यांत्रिकीकरण और गरिमा: एनएसकेएफडीसी के माध्यम से कार्यान्वित इस योजना ने 87,000 से अधिक पीपीई किट वितरित किए हैं। "स्वच्छता उद्यमी योजना" के तहत, इसने 983 लाभार्थियों को 34.16 करोड़ रुपये की पूंजी सब्सिडी प्रदान की है, जिससे उन्हें यांत्रिक स्वच्छता वाहनों को खरीदने में मदद मिली है।
🔹 एनएचएआई-एसएसएनएल समझौता ज्ञापन (गुजरात): राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड (एसएसएनएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग, नहर और पाइपलाइन क्रॉसिंग की मंजूरी के लिए एक सरल और समयबद्ध प्रक्रिया बनाई जा सके।
🔹 शुल्क में छूट: इस समझौते में विभिन्न शुल्कों और करों में आपसी छूट शामिल है, जिससे परियोजना की कुल लागत सीधे कम होती है और प्रक्रियात्मक बाधाएं दूर होती हैं।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ नमस्ते योजना: *राष्ट्रीय यांत्रिकीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पहल*। यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता कार्य में शून्य मृत्यु दर सुनिश्चित करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी स्वच्छताकर्मी सीधे तौर पर मानव मल के संपर्क में न आए।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ समावेशी आर्थिक विकास श्रम की गरिमा और कुशल शासन के बिना संभव नहीं है।
✅ खतरनाक सफाई के यांत्रिकीकरण को भारी सब्सिडी देकर (नमस्ते) और साथ ही भौतिक बुनियादी ढांचे के लिए विभिन्न विभागों के बीच की बाधाओं को दूर करके (एनएचएआई समझौता ज्ञापन), राज्य मानव कल्याण और तेजी से पूंजी विस्तार के बीच की खाई को पाटता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 योजना: नमस्ते (सीवर श्रमिकों का सत्यापन, पीपीई का वितरण; एनएसकेएफडीसी के माध्यम से कार्यान्वित)।
🔹 परियोजना: स्वच्छता उद्यमी योजना (स्वच्छता यांत्रिकीकरण के लिए पूंजी सब्सिडी)।
🔹 बुनियादी ढांचा समझौता: एनएचएआई और एसएसएनएल समझौता ज्ञापन, जो गुजरात में मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए है।
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🔆 रक्षा कूटनीति और द्विपक्षीय वायुयान सहयोग
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय
✅ कार्यक्रम: एक्सरसाइज वीर गार्डियन 2026
✅ स्थान: जोधपुर, राजस्थान
✅ उद्देश्य: वायु युद्ध में बेहतर तालमेल स्थापित करना और जापान के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी को गहरा करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: भारतीय वायुसेना और जापान वायु आत्म-रक्षा बल ने जोधपुर में अपने संयुक्त वायु रक्षा अभ्यास 'वीर गार्डियन 2026' का समापन किया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 एक्स वीर गार्डियन 2026: यह 14 दिवसीय द्विपक्षीय वायु अभ्यास वायुसेना स्टेशन जोधपुर में संपन्न हुआ। इसमें उन्नत, निकट-दृश्य-सीमा वाले युद्ध और समन्वित, बहु-विमान मिशन शामिल थे।
🔹 तैनात विमान: भारतीय वायुसेना ने Su-30 MKI, राफेल और स्वदेशी LCA तेजस विमानों को तैनात किया, जबकि जापान वायु आत्म-रक्षा बल (JASDF) ने F-2A लड़ाकू विमानों के साथ भाग लिया।
🔹 रणनीतिक महत्व: उड़ान मिशनों के अलावा, इस अभ्यास में विषय-विशेषज्ञों के आदान-प्रदान (SMEE) और वायुयान सुरक्षा ब्रीफिंग को भी शामिल किया गया, जिससे दोनों वायुसेनाओं के बीच गहन सामरिक ज्ञान और तालमेल सुनिश्चित किया गया।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ अंतर-क्षमता: विभिन्न राष्ट्रीय सैन्य बलों की संयुक्त अभियानों को निर्बाध रूप से निष्पादित करने की क्षमता, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को एकतरफा आक्रामकता से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में वायुयान प्रभुत्व स्थापित करने के लिए विश्वसनीय गठजोड़ आवश्यक हैं।
✅ भारत ने जटिल संयुक्त अभ्यासों (वीर गार्डियन) में स्वदेशी प्लेटफार्मों (LCA तेजस) को जापानी लड़ाकू संपत्तियों (F-2A) के साथ एकीकृत करके अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत किया है और क्षेत्रीय असमान खतरों को रोकने का प्रयास किया है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 सैन्य अभ्यास: एक्स वीर गार्डियन 2026 (भारत और जापान)।
🔹 स्थान: वायुसेना स्टेशन, जोधपुर।
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✨ Today's Hindi 22 sep 2026 PIB Current Affairs News
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🖼️Asian Games 2026 🇮🇳🥇
India’s women’s cricket team has won Gold at the 2026 Asian Games, defeating Sri Lanka by 147 runs in the T20 final at Korogi Sports Park, Nisshin. India scored 216/3, while Sri Lanka were bowled out for 69.
🇮🇳🥇 🏆 India’s first gold at Aichi-Nagoya 2026.
📚 UPSC/PCS Focus: Asian Games • Women in Sports • Sports Governance • Gender Equality • Soft Power
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21 Sep 2026 PIB Updates
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🔆 रणनीतिक रक्षा, संयुक्त राष्ट्र के जनादेश और समुद्री कूटनीति
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय
✅ अभियान: एक्स नोमैडिक एलिफेंट / एडीएमएम-प्लस जेसीए
✅ स्थान: पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) / सुबिक खाड़ी (फिलीपींस)
✅ उद्देश्य: पहाड़ी इलाकों में संयुक्त आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को बढ़ाना और दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास 'नोमैडिक एलिफेंट' पिथौरागढ़ में शुरू हुआ, जबकि आईएनएस सह्याद्री और कुलिश् फिलीपींस पहुंचे एडीएमएम-प्लस अभ्यासों में भाग लेने के लिए।
♻️ मुख्य बातें
🔹 एक्स नोमैडिक एलिफेंट 2026: भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों के बीच वार्षिक प्लाटून-स्तरीय संयुक्त सैन्य अभ्यास का 18वां संस्करण, पिथौरागढ़ में स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हुआ।
🔹 रणनीतिक ध्यान: यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत अर्ध-शहरी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद-रोधी अभियानों को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखता है। महत्वपूर्ण रूप से, 2026 के पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा और ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के सामरिक उपयोग पर उन्नत प्रशिक्षण शामिल है।
🔹 एडीएमएम-प्लस तैनाती: साथ ही, भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्री और कुलिश् सुबिक खाड़ी, फिलीपींस में पहुंचे, ताकि वे आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम)-प्लस संयुक्त कमांड गतिविधि (जेसीए) में भाग ले सकें, जिससे भारत की एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत होती है।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ एडीएमएम-प्लस: यह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए आसियान और इसके आठ संवाद भागीदारों (जिसमें भारत भी शामिल है) के लिए एक मंच है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ आधुनिक प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुमुखी प्रतिभा आवश्यक है।
✅ मंगोलिया के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभ्यासों (नोमैडिक एलिफेंट) में एंटी-ड्रोन युद्ध को एकीकृत करके और साथ ही दक्षिण चीन सागर के आसपास नौसैनिक बलों को तैनात करके (एडीएमएम-प्लस), भारत सक्रिय रूप से अपनी महाद्वीपीय और समुद्री रणनीतिक सीमाओं की रक्षा करता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 सैन्य अभ्यास: एक्स नोमैडिक एलिफेंट (भारत-मंगोलिया, 18वां संस्करण, पिथौरागढ़)।
🔹 नौसैनिक तैनाती: आईएनएस सह्याद्री और कुलिश् (एडीएमएम-प्लस जेसीए, फिलीपींस)।
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🔆 पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
✅ कार्यक्रम: डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन
✅ स्थान: जयपुर, राजस्थान
✅ उद्देश्य: प्रजातियों के संरक्षण पर एक साझा वैश्विक दिशा स्थापित करना और सामुदायिक-आधारित पारिस्थितिक मॉडलों को उजागर करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: पर्यावरण मंत्री ने जयपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसमें भारत के संरक्षण प्रजनन और पारंपरिक पवित्र वनों की सफलता पर जोर दिया गया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 संरक्षण में मील का पत्थर: पिछले दशक में, भारत के संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार लगभग 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गया है। बाघ अभयारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58 हो गई, हाथी अभयारण्यों की संख्या 30 से बढ़कर 33 हो गई, और रामसर आर्द्रभूमि स्थलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई, जो 24 से बढ़कर 101 हो गई।
🔹 प्रजातियों की पुनर्स्थापना: मंत्री ने राजस्थान में गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के सफल संरक्षण प्रजनन और ऐतिहासिक चीता पुनर्परिचय कार्यक्रम को वन्यजीव संरक्षण के सक्रिय प्रयासों के प्रमुख उदाहरण के रूप में उजागर किया।
🔹 सामुदायिक-आधारित मॉडल: राजस्थान में 'ओरन्स' (पवित्र वन) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। ये पारंपरिक, सामुदायिक-संरक्षित वन क्षेत्र भूमि क्षरण को कम करने और घास के मैदानों पर आधारित बड़े शाकाहारी जीवों का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन: यह एक प्रमुख वैश्विक सम्मेलन है जिसमें 100 से अधिक देश जैव विविधता के नुकसान को रोकने, सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने और स्थानीय सामुदायिक प्रथाओं को अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण लक्ष्यों के साथ एकीकृत करने के लिए रणनीतियों पर विचार करने के लिए एकत्रित होते हैं।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ प्रभावी पारिस्थितिक पुनर्स्थापना केवल सरकारी तंत्र पर ही निर्भर नहीं हो सकती; इसके लिए गहरी सांस्कृतिक एकीकरण की आवश्यकता होती है।
✅ भारत, वैश्विक स्तर पर जमीनी स्तर पर किए जा रहे संरक्षण प्रयासों (ओरन्स) को प्रदर्शित करके और अत्यधिक जटिल प्रजातियों की पुनर्स्थापना (जीआईबी प्रजनन) को लागू करके, यह साबित करता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान पर्यावरण संप्रभुता के पारस्परिक रूप से पूरक स्तंभ हैं।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 कार्यक्रम: डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन (जयपुर, राजस्थान)।
🔹 डेटा: रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई; बाघ अभयारण्यों की संख्या 58 हो गई।
🔹 अवधारणाएं: ओरन्स (राजस्थान में पवित्र वन); भूमि क्षरण तटस्थता।
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🔆 नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
✅ संस्था: सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI)
✅ उद्देश्य: बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाकर भारत को स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से ले जाना।
✅ एक वाक्य में: SECI ने अपनी 15वीं स्थापना वर्षगांठ मनाई, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 41 GW से अधिक तक बढ़ाने और बाजार में भारी निवेश को सक्षम करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 SECI के 15 वर्ष: नवीकरणीय ऊर्जा के लिए नोडल एजेंसी के रूप में, SECI ने तीसरे पक्ष के डेवलपर्स के माध्यम से 41 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता सफलतापूर्वक स्थापित की है।
🔹 बाजार पर प्रभाव: इसने विभिन्न DISCOMs के साथ 67 GW से अधिक बिजली खरीद समझौतों (PSAs) पर हस्ताक्षर किए हैं और लगभग ₹3.6 लाख करोड़ के कुल बाजार निवेश को सफलतापूर्वक सक्षम किया है, जिससे निजी पूंजी के लिए हरित ऊर्जा क्षेत्र का जोखिम काफी कम हुआ है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ जीवाश्म ईंधन से मुक्त ग्रिड में परिवर्तन के लिए एक मजबूत बाजार निर्माता की आवश्यकता होती है। SECI प्रभावी ढंग से खरीदार के जोखिमों को कम करता है, और संस्थागत गारंटी प्रदान करता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के लिए भारी मात्रा में निजी पूंजी (₹3.6 लाख करोड़) अनलॉक होती है, जिससे भारत के महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सकता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 संस्था: सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI - 15 वर्ष पूरे)।
🔹 डेटा: 41 GW से अधिक क्षमता स्थापित; ₹3.6 लाख करोड़ का निवेश सक्षम किया।
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🔆 सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोगी सुरक्षा और बायोविजिलेंस
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
✅ कार्यक्रम: भारत की 7वीं राष्ट्रीय फॉर्मुलरी (एनएफआई) / बायोविजिलेंस कार्यक्रम
✅ स्थान: नई दिल्ली
✅ उद्देश्य: तर्कसंगत चिकित्सा पर्चे सुनिश्चित करना और अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना।
✅ संक्षेप में: स्वास्थ्य मंत्रालय ने छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान भारत की 7वीं राष्ट्रीय फॉर्मुलरी और भारत के बायोविजिलेंस कार्यक्रम को आधिकारिक रूप से मंजूरी दी।
♻️ मुख्य बातें
🔹 भारत की 7वीं राष्ट्रीय फॉर्मुलरी (एनएफआई 2026): भारतीय फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) द्वारा प्रकाशित, यह स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दस्तावेज है, जो दवाओं के साक्ष्य-आधारित, तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देता है।
🔹 भारत का बायोविजिलेंस कार्यक्रम: रोगी सुरक्षा के एक महत्वपूर्ण विस्तार में, सरकार ने इस नए कार्यक्रम को मंजूरी दी। आईपीसी के नेतृत्व में, यह सख्ती से उन प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी और रोकथाम करेगा जो अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में उपयोग किए जाने वाले जैविक उत्पादों से जुड़ी होती हैं (जो दाताओं और प्राप्तकर्ताओं दोनों को प्रभावित करती हैं)।
🔹 डिजिटल सुधार: प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग को सुलभ बनाने के लिए एडीआर-पीवीपीआई 2.0 मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। भारत का मजबूत फार्माकोविजिलेंस ढांचा इसे विश्व स्तर पर डब्ल्यूएचओ रोगी सुरक्षा डेटाबेस में योगदान के मामले में 123वें स्थान से 8वें स्थान पर ले आया है।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ फार्माकोविजिलेंस बनाम बायोविजिलेंस: जबकि फार्माकोविजिलेंस (पीवीपीआई) सिंथेटिक फार्मास्युटिकल दवाओं के प्रति प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी करता है, बायोविजिलेंस विशेष रूप से जैविक सामग्रियों की सुरक्षा को ट्रैक करता है, जिसमें रक्त, ऊतक और अंग शामिल हैं जिनका उपयोग चिकित्सा प्रत्यारोपण में किया जाता है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ 'विश्व की फार्मेसी' की उपाधि बनाए रखने के लिए, घरेलू सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
✅ प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग को डिजिटल करके और प्रत्यारोपण के लिए बायोविजिलेंस कार्यक्रम की शुरुआत करके, राज्य अपने स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को व्यवस्थित चिकित्सा त्रुटियों से सुरक्षित करता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 कार्यक्रम: भारत की 7वीं राष्ट्रीय फॉर्मुलरी; भारत का बायोविजिलेंस कार्यक्रम।
🔹 रैंकिंग: डब्ल्यूएचओ रोगी सुरक्षा डेटाबेस में योगदान के मामले में भारत विश्व में 8वें स्थान पर है।
🔹 संस्था: भारतीय फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी)।
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✨ Today's Hindi 21 sep 2026 PIB Current Affairs News
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20 Sep 2026 PIB Updates
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🔆 रक्षा कूटनीति और वायुयान प्रदर्शन
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय
✅ कार्यक्रम: एक्स स्लिनेक्स-26 / स्कात प्रदर्शन (सेवा संकल्प अभियान)
✅ स्थान: विशाखापत्तनम / मेरठ
✅ उद्देश्य: भारतीय महासागर क्षेत्र को सुरक्षित करना और नागरिक युवाओं को रक्षा बलों की ओर प्रेरित करना।
✅ संक्षिप्त विवरण: भारतीय नौसेना ने श्रीलंका के साथ स्लिनेक्स की 13वीं संस्करण की शुरुआत की, जबकि भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने मेरठ में अपना ऐतिहासिक पहला वायुयान प्रदर्शन किया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 स्लिनेक्स-26: द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास का 13वां संस्करण विशाखापत्तनम में शुरू हुआ। भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्ध पोत आईएनएस कवरत्ती और फ्लीट टैंकर आईएनएस ज्योति द्वारा किया जा रहा है।
🔹 महासागर दृष्टिकोण: यह अभ्यास समुद्री अंतर-क्षमता, क्रॉस-डेक यात्राओं और सामरिक समुद्री अभ्यासों पर विशेष जोर देता है। यह सीधे तौर पर भारत के 'महासागर' ढांचे के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारतीय महासागर क्षेत्र में सुरक्षित और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
🔹 स्कात मेरठ में: भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम (स्कात) ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत मेरठ में अपना प्रदर्शन किया। टीम ने स्वदेशी हॉक एमके 132 विमानों के साथ सटीक युद्धाभ्यास किए, जिसका उद्देश्य नागरिक-सैन्य संबंधों को बढ़ावा देना और युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ महासागर: इसका अर्थ है 'क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति,' जो भारतीय नौसेना का भारतीय महासागर क्षेत्र के लिए रणनीतिक कूटनीतिक पहल ढांचा है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ संप्रभु निवारण के लिए क्षेत्रीय समुद्री गठबंधनों और व्यापक घरेलू जनसमर्थन दोनों की आवश्यकता होती है।
✅ महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों (स्लिनेक्स) का संचालन करके और व्यापक सार्वजनिक वायुयान प्रदर्शनों (स्कात) का आयोजन करके, सशस्त्र बल बाहरी रूप से अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, जबकि आंतरिक रूप से अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 सैन्य अभ्यास: एक्स स्लिनेक्स-26 (भारत-श्रीलंका, विशाखापत्तनम)।
🔹 नौसैनिक संपत्ति: आईएनएस कवरत्ती (स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्ध पोत)।
🔹 उपकरण: हॉक एमके 132 (स्कात द्वारा उड़ाए जाने वाले विमान)।
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🔆 जलवायु लचीलापन, जल प्रबंधन और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: जल शक्ति मंत्रालय / कोयला मंत्रालय / एमओएचयूए
✅ पहल: 9वीं भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह / सीआईएल प्रौद्योगिकी विविधीकरण
✅ स्थान: नई दिल्ली / पूरे भारत में
✅ उद्देश्य: जलवायु-लचीले जल नीतियों को संस्थागत बनाना और स्वच्छ कोयला गैसीकरण की ओर बढ़ना।
✅ एक पंक्ति में: सरकार ने 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) की घोषणा की, जबकि कोल इंडिया ने अपनी भूमिगत कोयला गैसीकरण और विविधीकरण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू): जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित, जिसका मुख्य विषय 'जलवायु लचीला जल प्रबंधन' था। इसका उद्देश्य वैश्विक संवादों को सैद्धांतिक चर्चाओं से व्यावहारिक, वित्त-समर्थित जल बुनियादी ढांचा समाधानों की ओर ले जाना है।
🔹 जलवायु गतिशीलता सम्मेलन का समापन: एनजीटी द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' के समापन सत्र में, वैश्विक पारिस्थितिक न्याय पर एक अंतःविषयक सहमति स्थापित की गई।
🔹 कोल इंडिया का उन्नत प्रौद्योगिकी में बदलाव: सीआईएल पारंपरिक खनन से आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण खनिजों, थर्मल पावर और नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से विविधता ला रहा है। कोयले को रसायनों में बदलने (जैसे, तालचर उर्वरक जो यूरिया का उत्पादन करता है) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
🔹 भूमिगत कोयला गैसीकरण (यूसीजी): सीआईएल, कास्ता वेस्ट ब्लॉक (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में एक महत्वपूर्ण यूसीजी पायलट परियोजना को आगे बढ़ा रहा है, जिसका उद्देश्य गहरे, अप्रचलित कोयले को सीधे सिंथेसिस गैस (सिंकेस) में परिवर्तित करना है।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ भूमिगत कोयला गैसीकरण (यूसीजी): एक इन-सीटू गैसीकरण प्रक्रिया है जो भूमिगत गहरे कोयला भंडारों को पारंपरिक खनन के बिना एक दहनशील गैस (सिंकेस) में परिवर्तित करती है, जिससे सतह पर पर्यावरणीय प्रभाव काफी कम होता है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ जलवायु अनुकूलन औद्योगिक विकास को नहीं रोक सकता; इसे नवाचार करना चाहिए।
✅ वैश्विक जल लचीलापन रणनीतियों (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) को सक्रिय रूप से बढ़ावा देकर और साथ ही उन्नत स्वच्छ-कोयला प्रौद्योगिकियों (यूसीजी) को तैनात करके, जो फंसे हुए ऊर्जा को स्वच्छ रूप से निकालने में मदद करती हैं, राज्य पारिस्थितिक आवश्यकताओं और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 कार्यक्रम: 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू)।
🔹 प्रौद्योगिकी: भूमिगत कोयला गैसीकरण (कास्ता वेस्ट ब्लॉक, ईसीएल में यूसीजी पायलट)।
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🔆 वस्त्र, रेशम उत्पादन और एमएसएमई सशक्तिकरण
🌟 सारांश
✅ मंत्रालय: वस्त्र मंत्रालय
✅ पहल: केंद्रीय रेशम बोर्ड की 77वीं स्थापना दिवस
✅ स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक
✅ उद्देश्य: रेशम उत्पादन में पूर्ण वैश्विक प्रभुत्व स्थापित करना और ग्रामीण बुनकरों की आय को संरचनात्मक रूप से बढ़ाना।
✅ एक पंक्ति में: वस्त्र मंत्रालय ने केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस पर 2028-29 तक भारत को दुनिया का नंबर 1 रेशम उत्पादक बनाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया।
♻️ मुख्य बातें
🔹 अभूतपूर्व विकास लक्ष्य: भारत का रेशम उत्पादन 26,000 मीट्रिक टन (2014 में) से बढ़कर आज 42,000 मीट्रिक टन हो गया है। सरकार ने 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन का एक ठोस लक्ष्य निर्धारित किया है और 2028-29 तक भारत को वैश्विक स्तर पर नंबर 1 बनाने का लक्ष्य रखा है।
🔹 तकनीकी नवाचार: इस रणनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके कोकून उत्पादन चक्रों और Mulberry की पैदावार को अनुकूलित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों की वार्षिक आय को 10-12 लाख रुपये तक बढ़ाना है।
🔹 प्रतियोगी प्रोत्साहन: मंत्रालय ने रेशम किसानों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए जिला और राष्ट्रीय स्तर पर "सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान" पुरस्कारों की स्थापना करने का आह्वान किया।
🔍 पृष्ठभूमि
✅ केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी): यह वस्त्र मंत्रालय के तहत 1948 में स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जिसे रेशम उद्योग और रेशम उत्पादन के समग्र विकास का कार्य सौंपा गया है। कर्नाटक भारत के कुल रेशम उत्पादन में निर्विवाद रूप से अग्रणी है।
🗿 मुख्य बिंदु
✅ वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए तेजी से विस्तार और उन्नत तकनीक का उपयोग आवश्यक है।
✅ चीन के रेशम उत्पादन में गिरावट के साथ, भारत उच्च घनत्व वाली कृषि पद्धतियों (एआई/जीआईएस) और संस्थागत प्रोत्साहनों का उपयोग करके वैश्विक वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला को स्थायी रूप से हासिल करने और ग्रामीण गरीबी को खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।
🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
🔹 डेटा: 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन का लक्ष्य; 2028-29 तक वैश्विक स्तर पर नंबर 1 बनने का लक्ष्य।
🔹 संस्था: केंद्रीय रेशम बोर्ड (मुख्यालय: बेंगलुरु)।
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