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ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो :
Happy krishna janmashtami
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रक्षाबंधन सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनापन का बंधन है।
अक्सर देखा जाता है कि जिनके पास अधिक पैसा होता है, उनकी मान-सम्मान भी ज़्यादा की जाती है।
लेकिन सच्चा सम्मान इंसान की सोच, व्यवहार और उसके प्यार में होना चाहिए — न कि उसकी जेब में।
महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
जब श्रीकृष्ण को चोट लगी, द्रौपदी ने अपने आँचल का टुकड़ा फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया।
यह बंधन न सोने-चाँदी का था, न किसी वैभव का — यह शुद्ध प्रेम और भाव का प्रतीक था।
बाद में, उसी बंधन का ऋण चुकाते हुए श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की।
आज इस पावन पर्व पर हम यह संकल्प लें कि
हम अपने रिश्तों की क़ीमत पैसों से नहीं,
बल्कि अपने स्नेह, आदर और समय से तय करेंगे।
💐 रिश्तों में मूल्य हो, मूल्य में रिश्ता नहीं। 💐🙏
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*मार्कशीट और अन्य DOCUMENT आज से इंटर साइंस कॉलेज में मिलेगा*
*समय:–सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक*
*धन्यवाद*
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