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ज़िद करते हो तुम बस हर बार अपनी ,
झुमके भी नहीं लाये....
जाओ मैं नहीं मानती ..
क्या ... तुम्हारे सिवा भी दुनिया है ?
कौन .. कहां ...
जाओ मैं नहीं जानती...
तारीख आज घर आयी है उसकी ज़िंदगी किसी और के साथ जुड़ने की ,
उसका नाम किसी अनजान के नाम के साथ...
जाओ मैं नहीं मानती...
जाओ मैं नहीं मानती... ❤️🩹
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Repost from 💓सुकूँन 🍁
Let us celebrate Unity in diversity and the ideals that shape our nation.
Happy Republic Day 🇮🇳
260126
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अपनी खुशहाली पर बेफ़िज़ूल गुरूर करोगे
मेरी दुआएँ रखेंगी खयाल तुम्हारा , ग़र तुम मुझे दूर करोगे ... 🌷
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एक दफ़ा जिसे छूने के लिए मैंने घण्टों समय बिताया था!
उसकी चाहत की कसक सिर्फ़ वही समझ पाया था!
मैंने तो बस एक दफ़ा पलटकर मुस्कुराया था!
मोह्हबत का हर फ़र्ज़ उसने निभाया था!
मैं समझी मैं एक अंजान हूँ उसके लिए,
मग़र वो तो मुझे छोड़ने मेरे शहर तलक आया था!
खुदगर्ज़ मैं न जाने किस ज़माने से डरती रही,
मरकर एक रोज,वो तिरंगे में लिपट कर आया था!
आज फ़िर उस इंतज़ार में बैठी हूँ,
शायद आ जाए वो भीगता हुआ,जैसे एक रोज़ आया था!
~ अभिमंद 🩵
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ग़ैर चांद की भी नज़रें नहीं पड़ने देती ,
तू ज़रा भी मिलता तो बहोत सम्भाल के रखती मैं ... ❤️
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किस्मत का लिखा उतरता है ज़मीं पर , खयालों का आसमां कहां जीतता है ,
बीत जाती हैं ज़िंदगियां वक्त के साथ , वही यादें लिये शहर कहां बीतता है ... 🌻🍂
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जिन्हें प्रेम मिला उन्होंने प्रेम में कविताऐं लिखी ,
जिन्हें नहीं मिला , उन्होंने कविताओं में प्रेम लिखा ... ❤️
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तिल के लड्डू , सर्द अहसास और पतंग का प्यार ,
मुबारक हो आपको उत्तरायण का त्यौंहार🪁🪁 🌞💐💐❤️
साल के पहले त्यौंहार की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
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तुम एक चिराग़ की खैरात दे रहे हो मुझे ,
मैं आफ़ताब से दामन छुड़ा के आयी हूं ... 😌
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मैं हर्फ़ हूँ पन्नो का और तू दास्ताँ किताबों की,
मैं क़ैदी तेरे ख्यालों का,तू हकीकत मेरे ख्वाबों की!
~✍
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अगली ज़िंदगी आऊंगी मैं तेरी मनपसंद बन कर ,
इस ज़िंदगी अब फिर मुझे पहाड़ ही बन जाने दे ... 😌
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मैं वो हूँ जो कहता था कि इश्क में क्या रखा है,
कुछ अरसे से एक हीर ने मुझे राँझा बना रखा है।
~❤️
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ना शामें है रंगीन सी , बग़ैर उसके तो मेरी सहर भी मजबूर है ,
ठंड लगना लाज़मी है मुझे , उसकी बाहें जो एक शहर दूर है...❤️
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तुझसे बिछड़ के तेरी वफ़ा के बग़ैर भी,
मैं सांस ले रहा हूं हवा के बग़ैर भी,
मैं जी गया जो तेरे बिना तो अजब है क्या,
ज़िन्दा हैं कितने लोग ख़ुदा के बग़ैर भी ।
~🤏
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