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DECREE & ORDER
The primary difference between decree and order is that the decree is given in a suit, which determines the substantive legal rights of the parties concerned, the order is given in the course of proceedings, and determines the procedural legal rights of the parties concerned.
A decree is the official proclamation of the adjudication by the judge explaining the rights of the parties concerned with respect to the suit.
An order is the official announcement of the decision taken by the court, defining the relationship of the parties, in the proceedings.
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CURFEW ORDER
Section 144 of CrPC confers powers to issue an order absolute at once in urgent cases of nuisance or apprehended danger. Specified classes of magistrates may make such orders when in their opinion there is sufficient ground for proceeding under the section and immediate prevention or speedy remedy is desirable. It requires the magistrate to issue the order in writing setting forth the material facts of the case and the order is to be served in the manner provided by section.
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INJUNCTION
An injunction is a legal and equitable remedy in the form of a special court order that compels a party to do or refrain from specific acts. A party that fails to comply with an injunction faces criminal or civil penalties, including possible monetary sanctions and even imprisonment.
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ANTICIPATORY BAIL
Under Indian criminal law, there is a provision for anticipatory bail under Section 438 of the Criminal Procedure Code. This provision allows a person to seek bail in anticipation of an arrest on accusation of having committed a non-bailable offence.
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Select the correct answer using the codes given below?
Question:-. With reference to the period of Indian freedom struggle, which of the following was/were recommended by the Nehru report ?
1. Complete Independence for India.
2. Joint electorates for reservation of seats for minorities.
3. Provision of fundamental rights for the people of India in the Constitution.
●स्थगन प्रस्ताव
स्थगन प्रस्ताव किसी लोक महत्व के मामले पर पेश किया जाता है । जब ये स्वीकार कर लिया जाता है तब लोक महत्व के कार्य के लिए सदन का नियमित कार्य रोक दिया जाता है ।इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों की स्वीकृति जरूरी है ।
●धन विधेयक
संसद में राजस्व एकत्र करने या अन्य प्रकार के धन के संबंधित विधेयक को धन विधेयक कहा जाता है । धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जाता है । धन विधेयक को पुन:विचार के लिए राष्ट्रपति लौटा नहीं सकता ।
●विनियोग विधेयक
विनियोग विधेयक में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय की पूर्ति के लिए धन तथा सरकार के खर्च के लिए अनुदान की मांग शामिल होती है । भारत में संचित निधि में से कोई भी धन विनियोग विधेयक के अधीन ही निकाला जा सकता है ।
●अविश्वास प्रस्ताव
यह प्रस्ताव लोकसभा या विधानसभा में विपक्षी दलों द्वारा लाया जाता है । दरअसल ये प्रस्ताव सत्तारूढ पार्टी या गठबंधन के बहुतमत की परीक्षा होती है...। अगर ये प्रस्ताव पारित हो जाता है तो मंत्रिपरिषद् को इस्तीफा देना पड़ता है । सरकार गिर जाती है ।
●अध्यादेश
जब संसद का अधिवेशन नहीं चल रहा हो और किसी विशेष उद्देश्य के लिए कानून की आवश्यकता हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है । इस अध्यादेश का प्रभाव संसद द्वारा निर्मित कानून जैसा ही होगा ।
●प्रश्नकाल
जब संसद की कार्यवाही शुरू होती है...उसके शुरू के पहला घंटा सामान्यत: प्रश्नकाल कहलाता है ।
●शून्य काल
संसद के दोनों सदनों में प्रश्न काल के ठीक बाद के समय को शून्य काल कहा जाता है । शून्य काल का लोकसभा या राज्यसभा की प्रक्रिया तथा संचालन नियम में कोई उल्लेख नहीं है ।
●सदन का स्थगन
स्थगन द्वारा सदन के कामकाज को विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित कर दिया जाता है ।
●अनुपूरक प्रश्न
सदन में किसी सदस्य द्वारा अध्यक्ष की अनुमति से किसी विषय पर दिए गए जवाब का स्पष्टीकरण के लिए अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति प्रदान करता है ।
●विघटन
केवल लोकसभा का ही विघटन हो सकता है । इससे लोकसभा भंग हो जाती है ।
●तारांकित प्रश्न
जिन सवालों का जवाब सदस्य तुरंत सदन में चाहता है उसे तारांकित प्रश्न कहा जाता है ।
●अतारांकित प्रश्न
जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य लिखित में चाहता है, उन्हें अतारांकित प्रश्न कहा जाता है ।
●पदेन
पद धारण करने के कारण ।
●निर्वाचन मंडल
विशेष मतदान के मकसद से गठित निर्वाचकों का विशेष समूह । जैसे- राष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद या विधानसभाओं से निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल का गठन करते है ।
●न्यायिक समीक्षा
विधायिका का बनाया गया कानून संविधान के मुताबिक है या नहीं, इसकी न्यापालिका जांच करती है, इसे ही न्यायिक समीक्षा कहा जाता है ।
●प्रभुसत्ता संपन्न
जहां देश आंतरिक और बाह्य मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र हो और किसी बाह्य शक्ति पर निर्भर न हो ।
●निषेधाधिकार
मुख्य कार्यपालिका द्वारा सोच-विचार के बाद किसी विधायी अधिनियम पर अपनी अस्वीकृति । ऐसा करने से अधिनियम कानून का रुप नहीं ले पाता ।
●निंदा प्रस्ताव
सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने के लिए संसद के किसी भी सदन में निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है ।
●गुलेटिन
वह संसदीय प्रक्रिया जिसमें सभी मांगों को जो नियत तिथि तक नहीं निपटाई गई हो बिना चर्चा के ही मतदान के लिए रखा जाता है ।
●काकस (Caucus)
किसी राजनीतिक दल अथवा गुट के प्रमुख सदस्यों की बैठक को काकस कहते हैं । इन प्रमुख सदस्यों द्वारा तय की गई नीतियों से ही पूरा दल संचालित होता है ।
●सचेतक
राजनीतिक दल में अनुशासन बनाए रखने के लिए सचेतक की नियुक्ति हर दल द्वारा की जाती है ।
●धर्म निरपेक्ष
जहां धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता तथा सभी धर्मों को समान रूप से देखा जाता है ।
●लोकतंत्र
सरकार को सारी शक्तियां जनता से प्राप्त होती हैं । शासकों का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है । दूसरे रूप में कह सकते हैं कि लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए है ।
●समाजवाद
ऐसी व्यवस्था जिसमें उत्पादन और वितरण का स्वामित्व राज्य के नियंत्रण में रहता है ।
●गणराज्य
इसका मतलब यह है कि राज्य का अध्यक्ष एक निर्वाचित व्यक्ति है जो एक निश्चित अवधि के लिए पद ग्रहण करता है |
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Q.1) इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन [Electronic Voting Machine] का इस्तेमाल करने वाला पहला राज्य कौन था ?
- केरल (विधानसभा उपचुनाव, अप्रैल 1982 ई. में)
Q.2) इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन [Electronic Voting Machine] से पूरा चुनाव कराने वाला पहला राज्य कौन था ?
- गोवा [Goa]
Q.3) तारांकित प्रश्न [Starred Question] क्या है ?
- जिन सवालों को जवाब सदस्य तुरंत सदन में चाहता है उसे तारांकित प्रश्न [Starred Question] कहा जाता है।
Q.4) अतारांकित प्रश्न [Unstarred Question] क्या है ?
जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य लिखित में चाहता है, तो उन्हें अतारांकित प्रश्न [Unstarred Question] कहा जाता है
Q5) स्थगन प्रस्ताव [Adjournment Motion] होता है ?
स्थगन प्रस्ताव [Adjournment Motion] किसी लोक महत्व [Public Interest] के मामले पर पेश किया जाता है जब ये स्वीकार [Accept] कर लिया जाता है तब लोक महत्व [Public Interest] के कार्य के लिये सदन का नियमित कार्य [Regular Work] रोक दिया जाता है। इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए [Proposal to Introduce] न्यूनतम 50 सदस्यों की स्वीकृति [Acceptance] जरूरी है।
Q.6) धन विधेयक [Money Bill] है क्या ?
संसद में राजस्व [Revenue] एकत्र करने या अन्य प्रकार के धन संबंधित विधेयक को धन विधेयक [Money Bill] कहा जाता है। धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जाता है। धन विधेयक [Money Bill] को पुनः विचार के लिये राष्ट्रपति लौटा नहीं सकता है।
Q.7) विनियोग विधेयक [Appropriation Bill] है, क्या ?
विनियोग विधेयक [Appropriation Bill] में भारत की संचित निधि [Consolidated Funds] पर भारित व्यय की पूर्ति के लिये धन तथा सरकार के खर्च के लिये अनुदान की मांग शामिल होती है। भारत में संचित निधि [Consolidated Funds] में से कोई भी धन विनियोग विधेयक [Appropriation Bill] के अधीन ही निकाला जा सकता है।
Q.8) प्रश्नकाल [Question Hour] होता है ?
जब संसद [Parliament] की कार्यवाही शुरू होती है उसके शुरू के पहला घण्टा सामान्यतः प्रश्नकाल [Question Hour] कहलाता है।
Q.9) शून्यकाल [Zero Hour] होता है ?
- संसद [Parliament] के दोनों सदनों में प्रश्नकाल [Question Hour] के ठीक बाद के समय को शून्यकाल [Zero Hour] कहा जाता है। शून्यकाल [Zero Hour] का लोकसभा या राज्यसभा की प्रक्रिया तथा संचालन नियम में कोई उल्लेख नहीं है।
Q.10) सदन का स्थगन [Adjournment of the House] होता है ?
- स्थगन द्वारा सदन के कामकाज को विनिर्दिष्ट समय [Specified Time] के लिये स्थगित कर दिया जाता है।
वारंट के साथ तलाशी और बिना वारंट के तलाशी में क्या अंतर होता है?
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दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ तथा 1 अप्रैल 1974 से लागू हुआ. ' CrPC ' दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम है.
जब कोई अपराध किया जाता है, तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है. एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है. CrPC में इन दोनों प्रकार की प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. दंड प्रक्रिया संहिता के द्वारा ही अपराधी को दंड दिया जाता है.
वारंट का सीधा मतलब होता है अधिकार पत्र जबकि सर्च वारंट का मतलब होता है “खोजने का अधिकार” अर्थात तलाशी वारंट.
तलाशी वारंट किसे कहते हैं?
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तलाशी वारंट जारी करने का अधिकार किसी मजिस्ट्रेट या जज या किसी अन्य योग्य अथॉरिटी को होता है. इस वारंट में पुलिस अधिकारियों को यह अधिकार दिया जाता है कि वे किसी स्थान जैसे वाहन, ऑफिस, मकान, गोदाम या किसी अन्य जगह के साथ-साथ किसी व्यक्ति विशेष की तलाशी भी ले सकते हैं और सम्बंधित लोगों से पूछताछ कर सकते हैं.
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में 2 तरह से तलाशी लेने के अधिकार दिए गये हैं,
1. तलाशी वारंट के साथ तलाशी
2. बिना वारंट के तलाशी
1. तलाशी वारंट के साथ तलाशी:
दण्ड प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 93,94,95 और 97 के अंतर्गत तलाशी वारंट जारी किया जाता है. इस प्रकार के तलाशी वारंट के अंतर्गत पुलिस या उसके अधिकारी आपके घर, दुकान या मकान पर आएंगे और आपको मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया वारंट दिखायेंगे कि किस आधार पर आपके घर की तलाशी ली जा रही है.
सर्च वारंट जारी करने के उद्येश्य क्या होते हैं;
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1. किसी दस्तावेज का वस्तु को प्राप्त करने या उपलब्ध करवाने के लिए
2. ऐसे किसी घर की तलाशी लेना जहाँ पर कोई चुरायी गयी संपत्ति रखी होने या किसी जाली दस्तावेज के रखे होने की संभावना हो.
3. किसी ऐसे पब्लिश डॉक्यूमेंट को प्राप्त करने के लिए जिसका सम्बन्ध किसी नकली पब्लिकेशन से हो या जो कि देश के विरुद्ध किसी साजिश से सम्बंधित हो
4. ऐसे व्यक्तियों को तलाशने के लिए जिनको कि गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाकर कर रखा गया हो.
सेक्शन 93 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला वारंट निम्न आधारों पर जारी किया जा सकता है;
a. जब न्यायालय को यह लगता है कि किसी व्यक्ति को सेक्शन 91 के तहत किसी डॉक्यूमेंट को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है और वह व्यक्ति ऐसा नहीं करता है तो न्यायालय उसके खिलाफ तलाशी वारंट जारी कर सकता है.
b. जिस मामले में कोर्ट के यह लगता है कि किसी इन्क्वारी या ट्रायल का उद्येश्य, सर्च के आधार पर सोल्व किया जा सकता है.
सेक्शन 94 के अंतर्गत तलाशी वारंट:
-------------------------
इस धारा के अंतर्गत जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी स्थान की तलाशी के लिए वारंट जारी सकते हैं यदि उनको लगता है कि;
a. ऐसी जगह पर चुरायी गयी संपत्ति पाई जा सकती है.
b. इस जगह पर ऐसे चीज छुपाई गयी है जिसका सम्बन्ध किसी कोर्ट में लंबित मामले से है
सेक्शन 95 के अंतर्गत तलाशी वारंट:
--------------------------
इसके अंतर्गत कुछ प्रकाशनों को जब्त करने के बारे में बताया गया है;
राज्य सरकार, मजिस्ट्रेट से यह अनुरोध कर सकती है कि वह निम्नलिखित मामलों से सम्बंधित सामग्री, डॉक्यूमेंट या पब्लिकेशन को जारी करने के लिए किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ वारंट जारी करे जिसका सम्बन्ध;
a. सेक्शन 124-A अर्थात देश देशद्रोह से हो. ऐसा कोई दस्तावेज जो देश के खिलाफ साजिश से जुड़ा हुआ हो.
b. सेक्शन 153 A, 153-B से हो अर्थात सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से जुड़ा हुआ हो.
c. सेक्शन 293 या सेक्शन 295-A से हो, अर्थात ऐसी बातें या सामग्री जो कि अश्लील श्रेणी में आतीं हैं और उनका पब्लिकेशन करना, लोगों में बाँटना गैर कानूनी है.
नोट: यहाँ पर सेक्शन 96 के बारे में भी बताना जरूरी है. यह सेक्शन कहता है कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी किताबों को, समाचार पत्रों, मैगज़ीन को बिना किसी ठोस सबूत या आधारहीन रूप से जब्त कर लिया गया है तो वह सीधे उच्च न्यायालय में इस कदम के खिलाफ अपील कर सकता है.
सेक्शन 97 के अंतर्गत वारंट:
---------------------
इस प्रकार का वारंट उस स्थिति में जारी किया जाता है जब कोई व्यक्ति या पुलिस किसी अन्य व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से बंदी बनाता है तो मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि बंदी बनाये गए व्यक्ति को प्राप्त करने के लिए कुछ संदिग्ध जगहों की तलाशी के लिए वांरट जारी किया जाये.
इस प्रकार का वारंट, जिला जज, सब डिविजनल मेजिस्ट्र
CrPC - 3
21. The unlawful assembly can be ordered to disperse by ---------------------------
a) An Executive Magistrate
b) A Police Constable
c) M.P
d) CISF Inspector
Answer: A
22. A person who refuses to declare his name and address on asking can be arrested by a-----------------
a) Civil person
b) Police Officer
c) Magistrate
d) Judge
Answer: B
23. A Judicial Magistrate of the first class can award fine only up to -------------------------
a) Rs. 5,000 /-
b) Rs. 10,000 /-
c) Rs. 1,000 /-
d) Rs.100 /-
Answer: A
24. --------------- is a direction to attend Court
a) Warrant
b) FIR
c) Charge sheet
d) Summon
Answer: D
25. Executive Magistrate are appointed by -----------------------
a) State Govt.
b) High Court
c) Sessions Court
d) Supreme Court
Answer: A
26. The Procedure done by a Police Officer for collection of evidence is called------------------
a) Enquiry
b) Trial
c) Investigation
d) FIR
Answer: C
27. FIR may be used as--------------------under Section 32 of IEA
a) Confession
b) Admission
c) Dying declaration
d) Warrant
Answer: C
28. A Proclaimed offender arrested by a civil person should be handed over to---------------------
a) Police Officer
b) Member of Parliament
c) Magistrate
d) Municipality
Answer: A
29. Arrested person shall be informed of grounds of arrest and right to-----------------
a) Bail
b) Private Defence
c) Admit the offence
d) None of these
Answer: A
30. -------------- is authorized to issue orders under section 144 Cr.P.C.
a) Executive Magistrate
b) Police Officer
c) M LA
d) Superintendent of Police
Answer: A
✒What is the meaning of public international law?
Public international law refers to those laws, rules, and principles of general application that deal with the conduct of nation states and international organizations among themselves as well as the relationships between nation states and international organizations with natural and juridical persons.
✒What are the sources of public international law?
Sources of international law include treaties, international customs, general principles of law as recognized by civilized nations, the decisions of national and lower courts, and scholarly writings.
*"Temporary Injunction"* - *Few important judgments of the Supreme Court of India*
1. Rathnavathi v. Kavita Ganashamdas, (2015) 5 SCC 223
2. Ram Prakash Agarwal v. Gopi Krishan, (2013) 11 SCC 296
3. Lakshmi v. E. Jayaram, (2013) 9 SCC 311
4. Best Sellers Retail (India) (P) Ltd. v. Aditya Birla Nuvo Ltd., (2012) 6 SCC 792
5. Esha Ekta Appartments CHS Ltd. v. Municipal Corpn. of Mumbai, (2012) 4 SCC 689
6. Ranjit Kaur v. Major Harmohinder Singh, (2011) 15 SCC 95 : (2014) 2 SCC
7. Supreme Court Bar Assn. v. B.D. Kaushik, (2011) 13 SCC 774
8. Skyline Education Institute (India) (P) Ltd. v. S.L. Vaswani, (2010) 2 SCC 142
9. Home Care Retail Marts (P) Ltd. v. New Era Fabrics Ltd., (2009) 17 SCC 429
10. Zenit Mataplast (P) Ltd. v. State of Maharashtra, (2009) 10 SCC 388
11. Mandali Ranganna v. T. Ramachandra, (2008) 11 SCC 1
12. D. Dwarakanath Reddy v. Chaitanya Bharathi Educational Society, (2007) 6 SCC 130
13. M. Gurudas v.
Rasaranjan, (2006) 8 SCC 367
14. Seema Arshad Zaheer v. Municipal Corpn. of Greater Mumbai, (2006) 5 SCC 282
15. Rajasthan Housing Board v. Krishna Kumari, (2005) 13 SCC 151
16. Fargo Freight Ltd. v. Commodities Exchange Corpn., (2004) 7 SCC 203
17. State of Haryana v. State of Punjab, (2004) 12 SCC 673
18. Vareed Jacob v. Sosamma Geevarghese, (2004) 6 SCC 378,
19. Hardesh Ores (P) Ltd. v. Timblo Minerals (P) Ltd., (2004) 4 SCC 64
20. Haridas Exports v. All India Float Glass Manufacturers’ Assn., (2002) 6 SCC 600
21. Mahendra & Mahendra Paper Mills Ltd. v. Mahindra & Mahindra Ltd., (2002) 2 SCC 147
22. Anand Prasad Agarwalla v. Tarkeshwar Prasad, (2001) 5 SCC 568
23. Uniply Industries Ltd. v. Unicorn Plywood (P) Ltd., (2001) 5 SCC 95
24. A. Venkatasubbiah Naidu v. S. Chellappan, (2000) 7 SCC 695
25. S.M. Dyechem Ltd. v. Cadbury (India) Ltd., (2000) 5 SCC 573
26. Colgate Palmolive (India) Ltd. v. Hindustan Lever Ltd., (1999) 7 SCC 1
27. Sree Jain Swetambar Terapanthi Vid (S) v. Phundan Singh, (1999) 2 SCC 377
28. Whirlpool Corpn. v. Registrar of Trade Marks, (1998) 8 SCC 1
29. N.R. Dongre v. Whirlpool Corpn., (1996) 5 SCC 714
30. Gujarat Bottling Co. Ltd. v. Coca Cola Co., (1995) 5 SCC 545
31. Mahadeo Savlaram Shelke v. Pune Municipal Corpn.(1995) 3 SCC 33
32. Shiv Kumar Chadha v. Municipal Corpn. of Delhi, (1993) 3 SCC 161
33. Dalpat Kumar v. Prahlad Singh, (1992) 1 SCC 719
34. Cotton Corpn. of India Ltd. v. United Industrial Bank Ltd., (1983) 4 SCC 625 .....
संवेधानिक वाद
1- एकान्तता का अधिकार - --- मिस्टर एक्स बनाम हॉस्पिटल जेड , A.i.r.1999 sc495!
2- जीने के अधिकार में मरने का अधिकार नहीं है ---- श्री मति ज्ञान कौर बनाम पंजाब राज्य , (1996)2 sc 649
3-- चिकित्सा का अधिकार -- - परमानंद कटारा बनाम भारत संघ , a.i.r. 1989 sc 2039
4- - शिक्षा पाने का अधिकार --- उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य , (1993) 4 sc 645
5- मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार -- मेनका गांधी बनाम भारत संघ , a.i.r. 1978 sc 507
6- जीविकोपार्जन का अधिकार --- - ओलंगा ते लिस बनाम बाम्बे म्यूनिसिपल कारपोरेशन , a.i.r. 1986 s.c.180
7- लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का अधिकार ---- एम .सी .मेहता .बनाम यूनियन ऑफ इंडियन , 1988 s.c.471
8-- आहर पाने का अधिकार -- - पी.यू .सी .एन .बनाम भारत संघ , 2000 (5) s.c.30
9- प्रदूषण मुक्त जलवायु के उपयोग का अधिकार -- सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य , a.i.r. 1991 s.c.420
10- ध्वनि प्रदूषण रहित वातावरण में जीवन बिताने का अधिकार -- इन री ध्वनि प्रदूषण a.i.r. 2005 s.c. 3036
11- नि शुल्क विधिक सहायता का अधिकार - एम .एम .हस्काट बनाम महाराष्ट्र राज्य , a.i.r. 1978 s.c.1548
12- आश्रय का अधिकार --- चमेली सिंह बनाम उतर प्रदेश राज्य , 1996 s.c.549
13- सार्वजिक स्थानों पर धूम्रपान का निषेध - मुरली एस .देवडा बनाम भारत संघ , a.i.r. 2002 sc 4
14- - बलात्कार से पीड़ित महिला का अंतरिम प्रतिकर पाने का अधिकार - - बोधीसत्वं गौतम बनाम शुभ्रा चक्रवती , 1996 sc 490
15--- हथकड़ी लगाने के विरुद्ध संरक्षण - प्रेम शंकर बनाम दिल्ली प्रशासन , a.i.r.1980 sc 898
16- श्रमजीवी महिलाओ का यौन उत्पीड़न से संरक्षण - विशाखा बनाम राजस्थान राज्य , - air 1997 sc 3011
17- अवमानीय व्यवहार के विरुद्ध संरक्षण - किशोर सिंह बनाम राजस्थान राज्य , air 1981 sc 625
18- पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु के विरुद्ध संरक्षण - - नीलबति बेहरा बनाम उड़ीसा राज्य (1993)2 sc सी 746
19- अवैध गिरफ्तारी तथा पुलिस अभिरक्षा में अमानवीय व्यवहार से संरक्षण - - जोगिंदर सिंह बनाम उतर प्रदेश राज्य , 1994 scc 746
20-पैतृकता निर्धारण के लियें रक्त परीक्षण न करने का अधिकार - - निगमार बनाम चीकैय्या , air 2000 कर्नाटक 50
Suit for declaration of title and possession based on title.....
Limitation to file suit is *12* years under Article *65* and not three years under Article *58* of the Limitation Act, 1963. Where the relief sought is only that of declaration, limitation of three years applies.
*SOPANRAO vs SYED MEHMOOD*
*(2019) 7 SCC 76.*
DELEGATUS NON POTEST DELEGARE
(A delegate cannot further delegate)
This maxim communicates that a delegated authority cannot be further delegated. It is also expressed otherwise - vicarious non habet vicarium, i.e., one agent cannot lawfully appoint another to perform the duties of his agency.
This maxim relates to principle and his agent. The relation between the two is based on contracts.
Join us @LAW_Notes_Llb_NotesWhat is a leading question law?
leading question. a questionasked of a witness by an attorney during a trial or a deposition (questioning under oath outside of court), suggesting an answer or putting words in the mouth of the witness. Such a question is often objected to, usually with the simple objection: "leading."
Join us @lawforcivilservices
How long is life imprisonment in India?
The Supreme Court has clarified in its decision in 2012 that life imprisonment or life imprisonment means jail for life and nothing more than that. Life imprisonment means prison for an entire lifetime. In fact, the sentence of life imprisonment is not 14 years. There are misconceptions about this in India.
प्रश्न - श्री वीरेंद्र कुमार को किसने 17वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलायी?
(a) राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद
(b) प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
(c) मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई
(d) लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन
उत्तरः a
________________
क्या होता है प्रोटेम स्पीकर?
________________
◆प्रोटेम शब्द लैटिन भाषा के शब्द प्रो टैम्पोर का संक्षिप्त रूप है।
◆इसका अर्थ होता है- 'कुछ समय के लिए'।
◆**नियुक्ति**- राष्ट्रपति करता है और इसकी नियुक्ति आमतौर पर तब तक के लिए होती है जब तक लोकसभा या विधानसभा अपना स्थायी विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) नहीं चुन लेती।
◆प्रोटेम स्पीकर नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलवाता है और शपथ ग्रहण का पूरा कार्यक्रम इन्हीं की देखरेख में होता है। सदन में जब तक सांसद शपथ नहीं ले लेते, तब तक उनको सदन का हिस्सा नहीं माना जाता। सबसे पहले सांसद को शपथ दिलाई जाती है। जब सांसदों की शपथ हो जाती है तो उसके बाद यह सभी लोकसभा स्पीकर का चुनाव करते हैं। संसदीय परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से किसी एक को प्रोटेम स्पीकर के लिए चुनते हैं।
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